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दिवंगत मां के रेप की धमकी मिलने पर 'आर्टिकल 15' के डायरेक्टर ने इमोशनल बात कह डाली

डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की ‘मुल्क’ के बाद अगली फिल्म आ रही है- ‘आर्टिकल 15’. आयुष्मान खुराना स्टारर इस फिल्म का कुछ ही दिन पहले ट्रेलर आया. देखने में ग्रिपिंग और इंटेंस लगा. मगर इसी में एक बात पकड़कर बवाल कर दिया गया. कैसा बवाल? वही जैसे ‘पद्मावत’ के साथ हुआ था. उसी टाइप का. जैसे ‘पद्मावत’ की रिलीज़ के दौरान किया गया था, वैसे ही इस बार ‘आर्टिकल 15’ के साथ भी होने लगा है. फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की बात कह रहे हैं.

#लेकिन क्यों?

कुछ संगठनों का मानना है कि ये फिल्म ब्राह्मणों को गलत तरीके से दिखा रही है. दरअसल ये मामला उठा ‘आर्टिकल 15’ के ट्रेलर के एक सीन से. इस सीन में आरोपियों को ‘महंत जी के आश्रम के लड़के’ कहा गया है. महंत जी यानी उच्च कुल के ब्राह्मण. इस बात से ब्राह्मण कम्युनिटी की भावनाएं आहत हो गई हैं. जबकि असल घटना में वो आरोपी यादव समुदाय से थे. इस ट्रेलर का वो हिस्सा आप नीचे देख सकते हैं:

फिल्म का विरोध करने वाले हिंदू संगठन परशुराम सेना के एक लीडर का कहना है-

अगर ठाकुर ‘पद्मावत’ की रिलीज़ टलवा सकते हैं, तो इस फिल्म में अपने सम्मान के लिए ब्राह्मण क्यों नहीं लड़ सकते?

इसके कुछ ही समय बाद परशुराम सेना को करणी सेना का भी सपोर्ट मिल गया. करणी सेना भी ‘आर्टिकल 15’ को ब्राह्मण विरोधी बताते हुए उसकी रिलीज़ रुकवाने के मुहिम में परशुराम सेना के साथ है. बेसिकली जो करणी सेना ने ‘पद्मावत’ की रिलीज़ रुकवाने के लिए किया था, माने विरोध प्रदर्शन, अब ‘आर्टिकल 15’ के साथ दोहराने की कोशिश की जा रही है. यही सब देखते हुए अब फिल्म के डायरेक्टर ने इस फिल्म को ‘ब्राह्मण विरोधी’ मानने वाले लोगों के नाम फेसबुक पर ख़त लिखा है और संवाद करने की कोशिश की है. यही अगर भंसाली ‘पद्मावत’ के समय कर लेते तो इतना बवाल न हुआ होता. बाकी हम क्या बताएं, खुद ही पढ़ लीजिए. जैसे ये लेटर अनुभव सिन्हा ने लिखा है बिलकुल वैसा ज्यों का त्यों हमने आपके लिए यहां पेस्ट कर  दिया है.

देश के सभी ब्राह्मण संगठनो को मेरा नमस्कार। साथ ही करणी सेना को भी। साथ ही मैं इस पत्र के माध्यम से आप के उन सभी सदस्यों को क्षमा भी करता हूँ जिन्होंने असहमति और विरोध की मर्यादाओं का उल्लंघन किया। मेरी हत्या या मेरी बहनों और मेरी दिवंगत माँ के बलात्कार की धमकियों से संवाद नहीं हो सकता। मेरा विश्वास है कि आप में से अधिकतर लोग इस प्रकार के विरोध का समर्थन नहीं करेंगे। ये भविष्य में भी नहीं होना चाहिए। हम एक समाज हैं और हेमें एक दूसरे का सम्मान रखना चाहिए। मेरी आगामी फ़िल्म भी इसी संदर्भ में ही है।
सबसे पहले मैं आपको ये समझा दूँ कि किसी भी फ़िल्म का ट्रेलर उसकी पूरी कहानी नहीं कह पाता। सम्भव नहीं है। फ़िल्म के बहुत से टुकड़ों को जोड़ के एक आकर्षक कहानी बताने का प्रयास होता है। भविष्य में भी किसी ट्रेलर से पूरी फ़िल्म को न आँकें। कोई भी फ़िल्म किसी भी समाज का निरादर करने का प्रयास करेगी ऐसी सम्भावना कम है। बहुत कम। ये बात मैं अपने तमाम फ़िल्मकार साथियों की तरफ़ से भी कह रहा हूँ। उनसे पूछे बिना पर मैं उन सबको तीस सालों से जानता हूँ। ऐसा बहुत मुश्किल है। आप के अनुमान पर आधारित विरोध से न सिर्फ़ आपका समय नष्ट होता है बल्कि हमारा भी। आपका समय समाज कल्याण में व्यय होना चाहिए जैसा कि होता भी होगा मेरा पूरा विश्वास है।
अब फ़िल्म “article १५” की बात करते हैं। मेरा विश्वास करें फ़िल्म में ब्राह्मण समाज का कोई निरादर नहीं किया गया है। आप को जान कर हर्ष होगा कि फ़िल्म के बनाए जाने में मेरे कई ब्राह्मण साथी भी हैं, कई कलाकार भी। कोई कारण नहीं है कि ब्राह्मणों का निरादर किया जाय। वैसे मेरी पत्नी भी ब्राह्मण हैं सो मेरे पुत्र के अस्तित्व में भी ब्राह्मण समाते हैं और।
चलिए शायद मेरी बात का विश्वास न भी हो रहा हो तो कुछ यूँ करते हैं। सोमवार से फ़िल्म हमारे पत्रकार साथियों को मुंबई और दिल्ली में दिखाई गयी है। कई विवेचनाएँ भी internet पर उपलब्ध हैं। मैं अपने उन सभी पत्रकार मित्रों को आमंत्रित करता हूँ कि इस पत्र के उत्तर में वो आप सभी को आश्वस्त करें कि फ़िल्म में ब्राह्मण समाज का निरादर नहीं किया गया है। न ही राजपूत समाज का, सो मेरे करणी सेना के सभी साथी भी आश्वस्त रहें। आप लोगों का समय बेहद मूल्यवान है और उसे आप उसी तरह राष्ट्र निर्माण में लगाते रहें जैसे सदैव लगाते रहे हैं। राष्ट्र को आपकी आवश्यकता है।
ट्रेलर के कारण कोई भ्रम अगर फैला हो तो मैं करबद्ध क्षमा याचना करता हूँ और आप सब से अनुरोध करता हूँ कि फ़िल्म अवश्य देखें। यह फ़िल्म उसी राष्ट्र के सम्बंध में है जिसके निर्माण में आप सभी तन मन धन से लगे हुए हैं।
आप में से अधिकतर का कनिष्ठ और कुछ का ज्येष्ठ भ्राता,
अनुभव सिन्हा
निर्माता, सह लेखक, निर्देशक
ARTICLE15

ऊपर पढ़े इस लेटर का लिंक ये रहा-


वैसे तो पूरा लेटर ही देश की निराशाजनक दशा दिखा रहा है लेकिन इस लेटर की एक बात तो मुझे निजी तौर पर भी बहुत निराश करती है. ये वाली- ‘मेरी हत्या या मेरी बहनों और मेरी दिवंगत मां के बलात्कार की धमकियों से संवाद नहीं हो सकता.

जब बात एक फिल्म की हो रही है. उसके किसी हिस्से का विरोध किया जा रहा है. ये समझ में आता है. मगर इस बीच उस फिल्म के मेकर के परिवार पर जाकर, उनके बारे बुरा भला कहना, रेप जैसे क्राइम की धमिकियां देना सिवाए एक बीमार सोच के और कुछ नहीं दिखाता. बहरहाल, बात ये है कि आप अगर किसी चीज़ की मुखालफत कर रहे हैं. ठीक है! मगर कैसे कर रहे हैं, दिक्कत उस बात से है. किसी की निजी जिंदगी या परिवार पर बातें ले जाना सरासर गलत है.


Video- Article 15 : Movie Review | Ayushmann Kurrana | Anubhav Sinha

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