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भारत के लिए खेले इन क्रिकेटर्स के पास कौन सी डिग्री है?

जब मैं छोटा था, तब मुझे क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था. मैं क्रिकेटर ही बनना चाहता था, लेकिन पिताजी की राय अलग थी. उनका मानना था कि पढ़ाई पहले की जानी चाहिए. पढ़ाई के बिना कुछ नहीं होता. ऐसी चर्चाओं के दौरान मैं अक्सर सचिन तेंडुलकर का नाम उछाल देता था कि वो भी तो हाई स्कूल फेल हैं. लेकिन इससे कभी कोई फायदा नहीं हुआ. पिताजी ‘स्टडी फर्स्ट’ पर टिके रहे और हम क्रिकेट से दूर होते गए.

उस वक्त पता ही नहीं था कि पढ़ाई के साथ भी क्रिकेट चल सकता है. पता होता, तो शायद कहानी कुछ और होती है. अभी की कहानी ये है कि हम क्रिकेटर नहीं बन पाए, पत्रकार बन गए. क़िस्से-कहानियां लिखते हैं. इन्हीं क़िस्सों में आज बात उन क्रिकेटर्स की, जिन्हें पता था कि पढ़ाई के साथ क्रिकेट चल सकता है. टीम इंडिया के लिए खेल चुके ऐसे क्रिकेटर्स, जो इंजीनियर भी थे.

# रविचंद्रन अश्विन

रविचंद्रन अश्विन. इंडियन क्रिकेट के बेस्ट ऑफ-स्पिनर्स में से एक. अपनी गेंदों से बल्लेबाजों को छकाने वाले अश्विन भी एक इंजीनियर हैं. 33 साल के अश्विन ने चेन्नई के SSN कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी में बीटेक की डिग्री ले रखी है. अश्विन ने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद कुछ वक्त तक एक फर्म में काम भी किया था. इस दौरान उन्होंने क्रिकेट जारी रखा और आज उनके नाम 365 टेस्ट विकेट हैं.

अश्विन के बारे में एक मज़ेदार बात ये भी है कि वह शुरुआत में ओपनिंग बल्लेबाज थे. बाद में खराब फॉर्म के चलते इंडिया अंडर-17 टीम में उन्हें रोहित शर्मा ने रिप्लेस किया था. शुरुआत में फास्ट बोलिंग करने वाले अश्विन ने अपनी पढ़ाई के बारे में कहा था,

‘जहां तक मेरी इंजीनियरिंग डिग्री का सवाल है, अंडर-17 क्रिकेट खेलने के बाद मेरे माता-पिता ने मुझे इंजीनियरिंग की तरफ मोड़ा था.’

# अनिल कुंबले

जंबो. टेस्ट और वनडे, दोनों में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बोलर. कुंबले ने टेस्ट में 619, जबकि वनडे में 337 विकेट लिए हैं. भारत के बाकी सारे गेंदबाज इस मामले में उनसे पीछे हैं. अपनी तेज रफ्तार लेग स्पिन से नाम कमाने से पहले कुंबल ने बेंगलुरु के राष्ट्रीय विद्यालय, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजिनियरिंग में B.E. की डिग्री हासिल की थी. पढ़ाई के महत्व के बारे में कुंबले ने एक बार कहा था,

‘यह अच्छे और बुरे में बैलेंस बनाने में मदद करता है. क्रिकेट में आप सफलता की गारंटी नहीं ले सकते, इसलिए पढ़ाई आपको इससे पार पाने की क्षमता देती है.’

# जवागल श्रीनाथ

भारतीय क्रिकेट टीम अपने स्पिनर्स के लिए मशहूर रही है. शुरुआत से लेकर अब तक टीम में कम से कम एक कमाल का स्पिनर जरूर रहा है. कई बार तो दो, तीन, चार स्पिनर भी एकसाथ खेले हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत में पेस बोलर नहीं हुए. कई पेस बोलर ऐसे हुए हैं, जिन्होंने कमाल किया है. इन पेस बोलर्स की कोई भी लिस्ट जवागल श्रीनाथ के ज़िक्र के बिना पूरी नहीं हो सकती.

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भारत के लिए खेले बेस्ट पेसर्स में से एक हैं Javagal Srinath (ट्विटर/ICC से साभार)

क्रिकेटर और फिर मैच रेफरी बनने के अपने सफर से पहले श्रीनाथ एक इंजीनियर बने थे. उन्होंने मैसूर के श्री जयचमराजेंद्र कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंस्ट्रूमेंटेशन टेक्नॉलजी में B.E. की डिग्री की थी. अपने साथी कुंबले की तरह श्रीनाथ भी शिक्षा को बेहद जरूरी बताते हैं. श्रीनाथ के मुताबिक,

‘शायद आपको लग सकता है कि क्रिकेट और पढ़ाई को एकसाथ रखना मुश्किल काम है. लेकिन मेरे, अनिल कुंबले और कृष्णामाचारी श्रीकांत के अनुभवों को देखते हुए यह इतना मुश्किल भी नहीं लगता.’

# कृष्णामाचारी श्रीकांत

धमाकेदार बल्लेबाजी और फिर कॉमेंट्री के लिए मशहूर हुए श्रीकांत भी एक इंजीनियर हैं. सुनील गावस्कर के ओपनिंग पार्टनर रहे श्रीकांत ने चेन्नई के गुंडी स्थित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.E. की डिग्री हासिल की थी.

कॉलेज के दौर में क्रिकेट खेलने वाले श्रीकांत ने अपने फाइनल ईयर में आकर तय किया था कि वह क्रिकेटर ही बनेंगे.

# श्रीनिवास वेंकटराघवन

नई पीढ़ी के ज्यादातर लोगों ने वेंकटराघवन को अंपायरिंग करते हुए देखा है. लेकिन अंपायरिंग से पहले वह टीम इंडिया के रेगुलर मेंबर थे. वेंकटराघवन ने 70 के दशक में भारतीय टीम के लिए कमाल का खेल दिखाया था. चंद्रशेखर, बेदी और प्रसन्ना की चौकड़ी का अहम हिस्सा रहे वेंकटराघवन ने 57 टेस्ट मैचों में 156 विकेट लिए थे. बाद में वह ICC अंपायरों के एलीट पैनल का हिस्सा भी रहे.

वेंकटराघवन ने चेन्नई के गुंडी स्थित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की थी.

# इरापल्ली प्रसन्ना

70 के दशक में भारतीय बोलिंग मुख्य रूप से चार बोलर्स पर निर्भर थी. चंद्रशेखर, वेंकटराघवन, बेदी और प्रसन्ना. भारतीय क्रिकेट में इस स्पिन चौकड़ी का स्थान बहुत खास है. इस चौकड़ी का अहम हिस्सा रहे प्रसन्ना ने मैसूर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग से डिग्री ली थी.

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भारत के लिए खेले बेस्ट स्पिनर्स में से एक हैं Prasanna (ट्विटर से साभार)

प्रसन्ना ने इस बारे में कहा था,

‘मेरी डिग्री ने बायोमकैनिक्स और एयरोडायनमिक्स समझने में मेरी काफी मदद की. इंजीनियरिंग का एनालिटिक्स वाला हिस्सा बेहतर एनालिसिस करने में आपकी मदद करता है.’

# शिखा पांडेय

शिखा पांडेय. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सीनियर पेसर. शिखा ने साल 2014 में टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था. उसके बाद से ही वह टीम की लीड पेसर हैं. शिखा ने क्रिकेटर बनने से पहले गोवा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से डिग्री ली थी.

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क्रिकेटर बनने से पहले इंजीनियर और एयरफोर्स ऑफिसर बन चुकी थीं Shikha Pandey (ट्विटर से साभार)

इसके बाद उनके पास कई मल्टीनेशनल कंपनियों के ऑफर थे, लेकिन उन्होंने इंडियन एयरफोर्स में जाना चुना. एयरफोर्स में सेलेक्ट होने के बाद शिखा ने इंडियन टीम के लिए डेब्यू किया. इस तरह से वह मेरिट पर एयरफोर्स ऑफिसर बनने के बाद क्रिकेटर बनने वाली पहली भारतीय हैं.


ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं से पहले ही सौरव गांगुली ने स्टीव स्मिथ को कप्तान बना दिया था

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