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जब शाहरुख की इस फिल्म की रिलीज़ से पहले डॉन ने फोन कर करण जौहर को जान से मारने की धमकी दी

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यश चोपड़ा के बड़े बेटे आदित्य चोपड़ा अपने करियर की पहली फिल्म बना रहे थे. फिल्म थी ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, जो किसी इंट्रोडक्शन की मोहताज़ नहीं है, इसलिए आगे बढ़ते हैं. इस फिल्म पर आदित्य के साथ करण जौहर बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर और एक्टर काम कर रहे थे. फिल्म की शूटिंग के दौरान आदित्य ने करण को आइडिया दिया कि उन्हें अपनी फिल्म डायरेक्ट करनी चाहिए. करण जौहर के पिता यश जौहर प्रोड्यूसर थे. उनकी हालत मार्केट में कुछ ठीक नहीं थी. उनकी आखिरी हिट फिल्म 1980 में आई ‘दोस्ताना’ थी. अगले 18 सालों में उन्होंने सफलता का मुंह तक नहीं देखा था. सिनेमा फील्ड के नफा-नुकसान से वो अच्छी तरह वाकिफ थे. इसीलिए उन्होंने अपने बेटे करण को फिल्मों से दूर ही रखने का मन बनाया था. लेकिन आदित्य चोपड़ा की सलाह के बाद ‘दिलवाले दुल्हनिया…’ में काम कर रहे शाहरुख ने भी करण को पुश करते हुए कहा कि उनकी फिल्म में वो काम करेंगे.

करण ने तय कर लिया कि अब वो अपनी खुद की फिल्म डायरेक्ट करेंगे. ये प्लान लेकर वो अपने पापा के पास गए. यश ने करण को समझाया लेकिन जब वो नहीं मानें, तो पापा उनकी डेब्यू फिल्म पर पैसा लगाने को तैयार हो गए. फिल्म का नाम रखा गया ‘कुछ कुछ होता है’. फिल्म बनकर तैयार हुई और 16 अक्टूबर, 1998 को दीवाली के मौके पर रिलीज़ हुई. भयानक ब्लॉकबस्टर और ट्रेंड सेटर साबित हुई. लेकिन ये सब करण और उनका परिवार नहीं देख पाया क्योंकि उन्हें पुलिस ने देश के बाहर भेज दिया था. हम सीधे इस किस्से पर नहीं पहुंच सकते क्योंकि फिल्म की मेकिंग के दौरान कई बातें हुईं, जिसके चलते करण और उनकी फैमिली को इस दिक्कत से गुज़रना पड़ा. हमें उन दिक्कतों से गुज़रना नहीं लेकिन फिल्ममेकिंग के उस सफर को पूरा करना होगा, जिसके बाद बॉलीवुड के अनसुटेबल बॉय की कहानी यहां तक पहुंची.

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1) फिल्म की सबसे बुनियादी चीज़ होती है कहानी. जो करण जौहर के पास बिलकुल टूटी-फूटी अवस्था में थी. लेकिन शाहरुख ने करण से वादा किया था, इसलिए वो उनके नैरेशन से निराश होने के बावजूद इस फिल्म में करने को तैयार हो गए. जिस कहानी को शाहरुख अटर नॉनसेंस बताते हैं, उसे सुनकर काजोल के आंसू ही नहीं रुक रहे थे. मतलब लीड कास्ट फाइनल हो गया था. अब बारी थी टीना के किरदार की. ये कैरेक्टर करण ने ट्विंकल खन्ना को दिमाग में रखकर लिखा था. उस किरदार का नाम टीना इसीलिए था क्योंकि इंडस्ट्री में ट्विंकल को इसी नाम से जाना जाता था. लेकिन इस रोल को करने के लिए ट्विंकल खन्ना समेत इंडस्ट्री की सभी लीडिंग लेडीज़ ने मना कर दिया. तब आदित्य चोपड़ा और शाहरुख खान की सलाह पर नई-नई आई रानी मुखर्जी को फिल्म के लिए साइन कर लिया गया. रानी तब सिर्फ एक फिल्म पुरानी थीं (राजा की आएगी बारात) और उनकी उम्र 19 साल थी. लेकिन कास्टिंग का मसला यहीं फाइनल नहीं होता.

2) ‘कुछ कुछ होता है’ में एक एक्सटेंडेड कैमियो यानी गेस्ट रोल था, जिसके लिए करण कोई बड़ा स्टार चाहते थे. उनकी इस चाहत को सैफ अली खान, चंद्रचूड़ सिंह और अजय देवगन जैसे स्टार्स ने ठुकरा दिया. एक दिन करण चंकी पांडे के घर हो रही पार्टी में पहुंचे. वहां उनकी मुलाकात सलमान खान की बहन अलविरा से हुई. उन्होंने अलविरा से अपना दुखड़ा कह सुनाया. यश जौहर की फिल्में भले ही नहीं चल पा रही थीं लेकिन उनकी इमेज इंडस्ट्री में एक भले मानुष की थी. अलविरा ने ये सारी बात सलमान को बताई. सलमान उसी पार्टी में एक कोने में खड़े थे. करण सलमान से भी मिले और कास्टिंग वाली बात बताई. उनकी इस बात को सुनकर सलमान ने कहा-

”No hero will want to do this role. There’s only one idiot in the industry who’ll do it, and that’s me. You know, my sister says you’re a nice guy and i like your father. ”

'कुछ कुछ होता है' के क्लाइमैक्स में शाहरुख खान, काजोल और सलमान खान.
‘कुछ कुछ होता है’ के क्लाइमैक्स वाले सीन में शाहरुख खान, काजोल और सलमान खान.

3) सलमान ने दरियदिली दिखाते हुए करण की समस्या का समाधान तो कर दिया लेकिन उनके पास समय की भारी कमी थी. उन दिनों वो ‘हम दिल दे चुके सनम’ और ‘चोरी-चोरी चुपके चुपके’ की शूटिंग कर रहे थे. अगर आप ध्यान देंगे, तो ‘साजन जी घर आए’ गाने में सलमान के बहुत सारे बैक शॉट्स हैं. यानी इस गाने के कई हिस्सों में सिर्फ उनकी पीठ नज़र आ रही है. असल में वो सलमान थे ही नहीं. फराह खान ने अपने एक मीडिया इंटरैक्शन में बताया कि सलमान के पास टाइम नहीं था इसलिए वो कुछ ही समय के लिए करण की फिल्म के सेट पर आ पाते थे. लेकिन फराह को रिची नाम के एक लड़के के बारे में पता था, जो पीछे से बिलकुल सलमान की तरह दिखता था. और बातचीत भी उसी ढ़ंग से करता था. सलमान के बैक शॉट्स इसी लड़के पर फिल्माए गए और सामने के लिए तो सलमान थे ही. ‘साजन जी घर आए’ गाना आप नीचे देख सकते हैं:

4) तमाम दिक्कतों से जूझने के बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हुई. लेकिन करण जौहर ने जो पहला सीन शूट किया, वो फिल्म में जगह नहीं बना पाया. वजह ये सीन बहुत बुरे तरीके से डायरेक्ट किया गया था. इस सीन में शाहरुख का किरदार एक डेंटिस्ट के यहां दांत से जुड़ी किसी बीमारी के इलाज के लिए जाता है. इस सीन को शूट करने के बाद करण ने उसे शाहरुख को दिखाया. लेकिन शाहरुख को दिखाते समय ही करण को लग गया कि ये सीन काफी बुरा है और उन्होंने शाहरुख को भी ये बात बता दी. इस पर शाहरुख ने सिर्फ इतना कहा ‘मुझे इस बात की खुशी है कि तुम्हें पता है कि ये सीन खराब है. जब तक तुम्हें ये बातें पता है मुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं.’ फाइनली करण ने उस सीन को फिल्म से हटा दिया. ढूंढ़ने पर वो सीन हमें फिल्म के कई और डिलीटेड सीन्स के साथ मिल गया, उसे आप नीचे देख सकते हैं:

5) इन बड़े स्टार्स के साथ फिल्म में दो छोटे बच्चे भी अहम किरदारों में थे. शाहरुख-रानी की बेटी अंजली का रोल सना सईद और अंजली के दोस्त क्यूट से सरदार का रोल परज़ान दस्तूर कर रहे थे. बच्चों से काम करवाना कोई आसान काम नहीं, ये करण को इस फिल्म की शूटिंग के दौरान समझ में आ गया. सना अपनी लाइनें फटाक से याद कर लेतीं और कैमरे पर कॉन्फिडेंट भी दिखती थीं. लेकिन उनके साथ समस्या ये थी कि वो रोने वाले सीन्स में ग्लीसरीन नहीं लगाती थीं. करण जौहर उन्हें वाकई में डांट-डपटकर रुलाते और फिर उनके इमोशनल सीन्स शूट करते. दूसरी ओर परजान के साथ ये सारी समस्याएं नहीं थीं क्योंकि उनका रोल एक चुप रहने वाले बच्चे का था, जो पूरी फिल्म में अपने साथ ही व्यस्त रहता था. कभी तारे गिनता, और बाकी समय प्यारे-प्यारे एक्सप्रेशंस देता रहता. परजान के किरदार को सिर्फ एक सीन में बोलना था, जहां काजोल का किरदार शिमला से कैंप छोड़कर जा रहा होता है. इसी आइकॉनिक सीन में परजान का किरदार पहली दफा मुंह खोलता है और कहता है ‘तुस्सी जा रहे हो. तुस्सी ना जाओ!’ ये सीन तो कायदे शूट हो गया लेकिन जब डबिंग की बारी तो परजान का कोई पता-ठिकाना ही नहीं था. फिल्म के इस सीन की डबिंग कैवल्य छेड़ा नाम के एक दूसरे चाइल्ड आर्टिस्ट ने की. कैवल्य को आपने सब टीवी के शो ‘बालवीर’ में देखा होगा.

6) ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के चार्टबस्टर म्यूज़िक को देखते हुए करण जौहर ने ‘कुछ कुछ होता है’ के लिए भी जतिन-ललित की जोड़ी को ही चुना. फिल्म के लिए टाइटल ट्रैक की धुन और शुरुआती लाइन करण जौहर को एक्टर जुगल हंसराज ने दी. जुगल ने करण को फोनकर बताया कि नहाते समय उनके दिमाग में एक लाइन आई है ‘तुम पास आए’. ये लाइन जुगल ने एक धुन के साथ सुनाई. करण जौहर ने उन्हें टालने वाले लहज़े में कहा अच्छा ठीक है डिनर पर मिलकर बात करते हैं. जतिन-ललित को भी वो लाइन और धुन ठीक लगी. तब तक फिल्म के गानों के बोल लिखने के लिए जावेद अख्तर ऑनबोर्ड आ चुके थे. और उनसे कहा गया कि इसी लाइन के इर्ग-गिर्द उन्हें फिल्म का टाइटल ट्रैक लिखना है. जावेद साहब को फिल्म का ये नाम ठीक नहीं लग रहा था क्योंकि टाइटल ट्रैक का वजन फिल्म के नाम की वजह से कम हो रहा था. उन्होंने गुस्से में कहा- ‘अब तो मेरा दिल जागे न सोता है, क्या करूं हाय कुछ कुछ होता है’, ये चाहिए तुम लोगों को! सबको ये लाइन पसंद आ गई और फिल्म का ये गाना लिखने के बाद जावेद साहब ने फिल्म छोड़ दी.

इसके बाद समीर अंजान को फिल्म से बतौर लिरिसिस्ट जोड़ा गया. समीर ने ‘कोई मिल गया’ गाने में एक लाइन लिखी ‘मैं तो हिल गया’. ये लाइन करण जौहर को अजीब लग रही थी. लेकिन समीर ने करण को बताया कि ये लाइन उन्होंने वर्ल्ड फेमस रॉकस्टार एल्विस प्रेस्ली के गाने ‘आय एम ऑल शूक अप’ से प्रेरित होकर लिखी है. इस गाने से एल्विस का कनेक्शन जानकर करण जौहर को भी ये गाना कूल लगने लगा. फिल्म की रिलीज़ के बाद उसे खूब पसंद भी किया गया. ‘कोई मिल गया’ तो आपने कई बार सुना होगा, आज एल्विस का वो गाना सुनिए:

7) करण जौहर ने ‘कुछ कुछ होता है’ की शूटिंग खत्म करने के बाद और एडिटिंग शुरू होने से पहले आदित्य चोपड़ा और अपने मम्मी-पापा को ये फिल्म दिखाई. यश जौहर फिल्म देखने के बाद खूब रोए. यश अपने बेटे की पहली फिल्म को रिलीज़ करने से पहले फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों को दिखाना चाहते थे. माने फिल्म का प्रीमियर रखना चाहते थे. शुक्रवार (16 अक्टूबर) को फिल्म रिलीज़ होनी थी. सोमवार (12 अक्टूबर) को करण की मौसी उनके घर आई हुई थीं. जब मौसी जाने लगीं, तो करण उन्हें घर से बाहर तक छोड़ने गए. घर में उनकी मां हीरू जौहर के अलावा कोई नहीं था. इतने में फोन की घंटी बजती है. फोन उठाते ही सामने से आवाज़ आती है-

‘तुम्हारे बेटे ने लाल रंग की टी-शर्ट पहनी है न! हम उसे देख रहे हैं. अगर तुम लोगों ने ये फिल्म शुक्रवार को रिलीज़ की, तो हम उसे गोली मार देंगे.’

ये डॉन अबु सलेम की आवाज़ थी. किसी डॉन के मुंह से अपने बेटे के लिए ऐसी बात सुनकर कोई भी मां घबरा जाएगी. फटाक से पुलिस को इंफॉर्म किया गया. पुलिस ने कहा आप लोगों को डरने की ज़रूरत नहीं है. आप तय समय पर प्रीमियर भी करिए और फिल्म भी रिलीज़ करिए, बाकी हम देख लेंगे. करण जौहर का सपना था कि उनकी फिल्म के प्रीमियर पर शम्मी कपूर आएं और वो उनकी अगवानी करते हुए थिएटर में ले जाएं. लेकिन जान से मारने की धमकी के बाद करण की सेफ्टी के लिए थिएटर के ही एक छोटे से कमरे में उन्हें बंद कर दिया गया था. इतने में शाहरुख खान को करण की इस ख्वाहिश के बारे में पता चला. वो गए और कमरे से करण को खींचकर ले आए. शाहरुख ने कहा- ”मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं, देखता हूं तुम्हें कौन गोली मारता है.” इसके बाद वो हीरू जौहर के पास पहुंचे और कहा-

”कुछ नहीं होगा. मैं पठान हूं. न मुझे कुछ होगा और न मैं आपके बेटे को कुछ होने दूंगा. करण मेरे भाई जैसा है.”

ये सब हो ही रहा था कि शम्मी कपूर अपनी मर्सीडिज़ से उतरे. करण ने उन्हें गाड़ी से उतारकर लिबर्टी थिएटर में ले गए जहां उनकी फिल्म का प्रीमियर हो रहा था. लेकिन इसके फौरन बाद उन्हें उसी कमरे में सिक्योरिटी गार्ड्स के साथ लॉक कर दिया गया. जैसे ही प्रीमियर का झोल खत्म हुआ पुलिस ने कहा कि करण को अपने परिवार समेत देश छोड़कर कहीं बाहर चले जाना चाहिए. इसके बाद करण अपने पैरेंट्स के साथ लंदन चले गए. अगले दिन फिल्म रिलीज़ हुई लेकिन करण को कुछ पता नहीं चल पा रहा था. सोमवार को (रिलीज़ के तीन दिन बाद) उन्हें आदित्य चोपड़ा का फोन आया, जिन्होंने करण को बताया कि उनकी फिल्म हिट- सुपरहिट नहीं ब्लॉकबस्टर हो गई है. ये किस्सा करण ने अपनी ऑटोबायोग्रफी ‘एन अनसुटेबल बॉय’ में बताया था.

फिल्म 'कुछ कुछ होत है' की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान के साथ फिल्म के डायरेक्टर करण जौहर.
फिल्म ‘कुछ कुछ होत है’ की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान के साथ फिल्म के डायरेक्टर करण जौहर.

8) 1998 में ‘कुछ कुछ होता है’ को साल की सबसे एंटरटेनिंग फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला. साथ ही इस फिल्म ने फिल्मफेयर में कुल 8 अवॉर्ड्स जीते. इसमें बेस्ट एक्टर (शाहरुख खान), बेस्ट एक्ट्रेस (काजोल), बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (सलमान खान) और बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस (रानी मुखर्जी) का अवॉर्ड शामिल है. चारो बड़े अवॉर्ड जीतने वाली ‘कुछ कुछ होता है’, देव आनंद की 1965 में आई ‘गाइड’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के बाद तीसरी फिल्म थी. बाद में ‘देवदास’ (2002) और ‘ब्लैक’ (2005) ने ये उपलब्धि हासिल की. फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड लेते शाहरुख खान का वीडियो आप नीचे देख सकते हैं:

बीतते समय के साथ इस फिल्म की पॉपुलैरिटी में तो कोई कमी नहीं आई लेकिन इसकी आलोचना में भारी इजाफा हुआ. इसे अपने दौर की बड़ी मिसोजिनिस्टिक फिल्मों में गिना गया. दिखने में काफी कूल ये फिल्म असल में बचकानी, इल्लॉजिकल और हल्की मानी गई. बाद में करण जौहर ने इन बातों से सहमत होते हुए कहा- ” ‘कुछ कुछ होता है’ एक बेवकूफाना फिल्म थी, जिसे आज देखते वक्त मुझे लगता है कि ये फिल्म मैंने क्यों लिखी (बनाई).” यहां हम जनता की ओर से शाहरुख की उस लाइन को दोबारा कोट कर सकते हैं-

”जब तक तुम्हें ये बात पता है, हमें चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं.”


 

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