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वो फिल्म जिसमें काजोल का मर्डर कर, आशुतोष राणा ने फिल्मफेयर जीत लिया

ये उन दिनों की बात है, जब बॉलीवुड में ‘बैंडिट क्वीन’ तो थी लेकिन ‘क्वीन’ के नाम पर ज़िक्र बस ब्यूटी क्वींस का होता था. ऐसे माहौल में तनुजा चंद्रा नाम की एक फिल्ममेकर डायरेक्शन में अपना डेब्यू करती हैं. तनुजा चंद्रा, मशहूर फिल्म राइटर कामना चंद्रा (प्रेम रोग, चांदनी) की बेटी, ऑथर विक्रम चंद्रा (सेक्रेड गेम्स) और फिल्म जर्नलिस्ट अनुपमा चोपड़ा की बहन हैं. तनुजा विदेश से फिल्ममेकिंग पढ़कर आईं और कमोबेश प्रोग्रेसिव माने वाले भट्ट कैंप के साथ काम करने लगीं. ‘तमन्ना’ और ‘ज़ख्म’ जैसी फिल्में को-राइट करने के बाद 1998 में उन्होंने ‘दुश्मन’ नाम की फिल्म डायरेक्ट की. हालांकि तब तक ‘अर्थ’, ‘मिर्च मसाला’ और ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्में आ चुकी थीं लेकिन ‘दुश्मन’ अपने एरा की गेम चेंजिंग फिल्म मानी गई. क्यों- क्योंकि पुरुष शासित समाज और इंडस्ट्री में एक महिला को केंद्र में रखकर एक्शन-मसाला फिल्म बनाई गई थी.

29 मई, 1998 को ‘दुश्मन’ रिलीज़ हुई और खूब सफल रही. हालांकि इस वुमन सेंट्रिक फिल्म की रिलीज़ के 22 साल बाद भी इसे विलन ‘पोस्टमैन गोकुल पंडित’ के लिए याद किया जाता है. जहां तक काजोल का सवाल है, तो जितने लोगों ने ‘दुश्मन’ नहीं देखी, उससे कहीं ज़्यादा लोगों को ‘गुप्त’ का स्पॉयलर पता होगा कि काजोल किलर थीं. कॉनट्रास्ट नज़र आ रहा है, अगर नहीं आ रहा, तो बत्ती मत जला लीजिएगा. आयरनी भी नज़र आ जाएगी. खैर, अब इतनी बात हो गई है, तो फिल्म से जुड़े कुछ किस्से भी जान लेते हैं.

फिल्म 'दुश्मन' के पोस्टर पर फिल्म के लीडिंग एक्टर्स. संजय दत्त, काजोल और आशुतोष राणा.
फिल्म ‘दुश्मन’ के पोस्टर पर फिल्म के लीडिंग एक्टर्स. संजय दत्त, काजोल और आशुतोष राणा.

1) ‘बाज़ीगर’ की मेकिंग के दौरान काजोल और शाहरुख खान बात कर रहे थे. शाहरुख, काजोल को समझा रहे थे कि उन्हें अपनी एक्टिंग पर काम करने की ज़रूरत है. जबकि काजोल को ये लगता था कि वो कमाल की एक्ट्रेस हैं. शाहरुख ने उन्हें गुरु ज्ञान देते हुए कहा ‘You need to burn out as an actor’. काजोल को लगा शाहरुख आए दिन बकवास करते रहते हैं, इसलिए उनकी इन बातों पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है. जब वो अपनी एक अन्य फिल्म ‘उधार की ज़िंदगी’ शूट कर रही थीं, तो उन्हें महसूस हुआ कि मानसिक रूप से परेशान करने वाली और भारी-भरकम फिल्में करने की उन्हें कोई ज़रूरत नहीं है. ठीक इसी समय तनुजा ने उन्हें ‘दुश्मन’ ऑफर की. काजोल ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि वो अभी हल्की-फुल्की फिल्में करना चाहती हैं. उन्होंने तनुजा से कहा- ‘मैं तीन गानों और तीन सीन्स वाली फिल्में करना चाहती हूं. इसलिए मैंने ‘हचलच’ और ‘गुंडाराज’ जैसी फिल्में साइन कर ली हैं.

फिल्म 'बाज़ीगर' के एक सीन में काजोल और शाहरुख खान. इस फिल्म को मशहूर डायरेक्टर डुओ अब्बास-मुस्तन ने डायरेक्ट किया था.
फिल्म ‘बाज़ीगर’ के एक सीन में काजोल और शाहरुख खान. इस फिल्म को मशहूर डायरेक्टर डुओ अब्बास-मुस्तन ने डायरेक्ट किया था.

2) थोड़े ही समय के बाद काजोल को ये रियलाइज़ हुआ कि हल्की फिल्में करने से काम नहीं चलेगा. तनुजा ने उन्हें फिर से ‘दुश्मन’ ऑफर की. फिल्म में एक रेप सीन था, जिसके बारे में काजोल को ये लगता था कि उस भाव को परदे पर उतार पाना उनके बस की बात नहीं. साथ ही वो किसी एक्टर के साथ ये सीन करने में कंफर्टेबल भी नहीं थीं. उनकी इस आपत्ति के बाद डायरेक्टर तनुजा चंद्रा और प्रोड्यूसर पूजा भट्ट ने उन्हें समझाया कि वो लोग फिल्म में इस सीन के लिए बॉडी डबल का इस्तेमाल कर लेंगी. उन्हें बस उनका एक क्लोज़ अप चाहिए. इसके बाद काजोल ने फिल्म में काम करने की हामी भरी. फिल्म में काजोल ने सोनिया और नैना नाम की बहनों का डबल रोल किया था. गोकुल पंडित नाम का एक गुंडा सोनिया का रेप करके उसका मर्डर कर देता है. अपना वादा पूरा करते हुए मेकर्स ने फिल्म में काजोल का सिर्फ क्लोज़ अप शॉट इस्तेमाल किया और बाकी सीन को किसी और एक्टर के साथ फिल्माया गया. अगर फिल्म देखकर आप ये बता दें, तो इनाम आपका.

'दुश्मन' काजोल के करियर की पहली डबल रोल वाली फिल्म थी. इसमें उन्होंने सोनिया और नैना नाम की बहनों का रोल किया था.
‘दुश्मन’ काजोल के करियर की पहली डबल रोल वाली फिल्म थी. इसमें उन्होंने सोनिया और नैना नाम की बहनों का रोल किया था.

3) संजय दत्त अपने करियर में पहली बार अंधे आदमी का रोल कर रहे थे. कहा जाता है ये किरदार पहले शाहरुख और आमिर खान को ऑफर किया गया था. उनके मना करने के बाद ये रोल पहुंचा संजू बाबा के पास. उन्होंने हां कर दी. सिर्फ इसलिए क्योंकि वो अल पचीनो के बहुब्बड़े वाले फैन थे. उनकी मक़बूल फिल्म ‘सेंट ऑफ अ वुमन’ बीसियों बार देख रखी थी. ‘सेंट ऑफ अ वुमन’ में पचीनो का किरदार एक रिटायर्ड और चिड़चिड़े आर्मी ऑफिसर का था. साथ ही वो किरदार अंधा भी था. ‘दुश्मन’ में संजय ने भी देख न सकने वाले आर्मी ऑफिसर का रोल किया था. फिल्म में एक फाइट (बॉक्सिंग) सीन था, जिसमें संजय का विरोधी हाथ में घंटी बांधकर बॉक्सिंग रिंग में उतरता है ताकि संजय के किरदार को उससे लड़ने में दिक्कत न हो. इस सीन की बड़ी चर्चा हुई. ज़्यादातर नेगेटिव सेंस में. फिल्म की रिलीज़ के बाद संजय दत्त ने डायरेक्टर तनुजा चंद्रा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उनके किरदार के बारे में मिसलीड किया गया. उन्हें ये बताया ही नहीं गया कि वो फिल्म के लीड कैरेक्टर नहीं हैं. ये तनुजा की नहीं खुद संजय की गलती थी. क्योंकि जो बात उन्हें फिल्म की रिलीज़ के बाद समझ आई, शाहरुख-आमिर स्क्रिप्ट सुनकर ही समझ गए थे.

फिल्म 'दुश्मन' की डायरेक्टर तनुजा चंद्रा के साथ संजय दत्त.
फिल्म ‘दुश्मन’ की डायरेक्टर तनुजा चंद्रा के साथ संजय दत्त.

4) कहा जाता है कि ‘दुश्मन’ आशुतोष राणा के करियर की पहली फिल्म थी. इसे थोड़ा रिफ्रेज़ करते हैं. यूं तो ‘दुश्मन’ आशुतोष राणा के करियर की तीसरी फिल्म थी लेकिन फिल्म के नेगेटिव लीड और कैरेक्टर की लंबाई के लिहाज़ से ये उनकी पहली बड़ी फिल्म थी. आशुतोष अपने गुरुजी के कहने पर एनएसडी (National School Of Drama) गए. 1994 में वहां से ग्रैजुएट (पासआउट) होने के बाद वो मुंबई पहुंचे. पहुंचते ही उन्हें महेश भट्ट के टीवी शो ‘स्वाभिमान’ में काम मिल गया. इस सीरियल में उनका किरदार त्यागी हिट हो गया. अब आशुतोष भट्ट साहब के शागिर्द हो चुके थे. भट्ट साहब ने कहा ‘तमन्ना’ कर लो. तीन सीन का रोल होने के बावजूद आशुतोष ने कर लिया. इसके बाद आई ‘गुलाम’. इसमें आशुतोष को एक सीन का रोल ऑफर हुआ. फिल्म दर फिल्म किरदार की लंबाई तो बढ़नी चाहिए, यहां इक्के-दुक्के सीन्स ऑफर हो रहे थे. लेकिन भट्ट साहब के कहने पर आशुतोष ने ‘गुलाम’ भी कर ली. कमाल ये हुआ कि ‘गुलाम’ के उस एक सीन को ही देखकर डायरेक्टर तनुजा चंद्रा ने आशुतोष को ‘गोकुल पंडित’ जैसा खूंखार और साइकोटिक कैरेक्टर के लिए चुना. तनुजा ने ही अपनी अगली फिल्म ‘संघर्ष’ में आशुतोष को लज्जा शंकर पांडे का किरदार भी दिया. इन दोनों ही फिल्मों के लिए आशुतोष राणा को उनके करियर के दो बैक टु बैक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (इन नेगेटिव रोल) मिले. फिल्म से आशुतोष का एक सीन आप यहां देख सकते हैं:


वीडियो देखें: बॉलीवुड किस्से- जब मां की मौत के बाद शाहरुख सुबह 4 बजे प्रोड्यूसर से मिलने पहुंच गए

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