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इंडिया और श्रीलंका में हुए वो कौन से मैच हैं जहां स्पॉट फिक्सिंग का दावा किया जा रहा है?

कतर के न्यूज चैनल अल ज़जीरा ने कहा कि उन्होंने 18 महीने तक क्रिकेट में सट्टेबाजी के बाजार और फिक्सिंग के घने जाल पर गहरी पड़ताल की है. इसके बाद तैयार की है एक डॉक्यूमेंट्री जिसे 26 मई को टेलीकास्ट किया गया है. Cricket’s match fixers नाम से 53 मिनट 59 सेकंड लंबी इस डॉक्यूमेंट्री को देख क्रिकेट की दुनिया हिल गई है. इसे देखकर लगता है कि क्रिकेट में हर मैच फिक्स है. अल जज़ीरा के खोजी पत्रकार डेविड हैरिसन ने ये कमाल का काम किया है. खुद को एक ब्रिटिश बिजनेसमैन बताया और मुंबई से लेकर दुबई और रांची से लेकर श्रीलंका तक खुफिया कैमरे से क्रिकेट में फिक्सिंग के नेटवर्क को रिकॉर्ड कर लिया है.

इसमें चार टेस्ट मैचों में स्पॉट फिक्सिंग का दावा किया गया है. हैरानी की बात ये कि जो भी प्रिडिक्शन फिक्सरों ने की थीं, ठीक वैसा ही रिजल्ट इन मैचों में आया. सबसे पहले डेविड ने फिक्सर अनिल से कहा कि उनके पास कई ऐसे लोग हैं जो क्रिकेट के इस धंधे में पैसा लगाना चाहते हैं, इस पर अनिल मुनव्वर ने आगे के प्लैन बताए. पूरी डॉक्यूमेंट्री में इन चार मैचों में फिक्सिंग का दावा किया गया है. आइए देखते हैं कौन से हैं ये मैच-

#1. इंडिया बनाम श्रीलंका, गॉल टेस्ट (26-29 जुलाई 2017)

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श्रीलंकाई कप्तान रंगना हेरथ और पीछे दिख रहा है इंडिया का 600 रनों का स्कोर.

ये सीरीज का पहला टेस्ट था. श्रीलंका के गॉल स्टेडियम में. यहां पूर्व रणजी खिलाड़ी और अब फिक्सर रॉबिन मोरिस की इतनी तगड़ी सेटिंग है कि पिच क्यूरेटर होटल रूम में पूरी प्लानिंग बताता है. क्यूरेटर थरंगा इंडिका बताता है कि पिच बल्लेबाजों को मदद करेगी. क्योंकि पिछले मैच में ट्रैक पर रोलर फेरने के बाद पानी डाला गया था. जिससे पिच और हार्ड हो गई. भारतीय कप्तान विराट कोहली ने उस मैच में टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया और टीम ने 600 पार का स्कोर बनाया. पहले से ही इस बात की जानकारी रखने वाला कि पिच बल्लेबाजों को मदद करेगी, फिक्सर मोरिस इसी पर सट्टा लगा चुका था कि पहले बैटिंग करने वाली टीम बड़ा स्कोर बनाएगी. यही हुआ और मोरिस ने तगड़ा पैसा बनाया.

#2. इंडिया बनाम इंग्लैंड, चेन्नई टेस्ट (16-20 दिसंबर, 2016)

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चेन्नई टेस्ट में नवीन मुनव्वर की एक एक भविष्यवाणी सही साबित होती दिखी है.

दिसंबर 2016. चेन्नई में इंडिया-इंग्लैंड के बीच सीरीज का पांचवा टेस्ट. मैच पर सट्टा लगाने की बात हुई. इंग्लैंड के कुछ खिलाड़ियों को फिक्स करने की बात कही. कुछ एडवांस भी दिया गया और फिक्सरों की तरफ से भरोसा भी दिलाया कि सुबह टॉस के बाद तय होगा कि कौन से सेशन पर दांव लगाना है. मुंबई में डी-कंपनी के लिए काम करने वाला मैच फिक्सर अनिल मुनव्वर कहता है,” जो स्क्रिप्ट मैंने दी है, वो ही होगी”. इंग्लैंड की बैटिंग चल रही थी और जिस सेशन पर सट्टा लगा उसका आखिरी ओवर मंदा रहेगा, ये भविष्यवाणी अनिल ने की थी और कहा था कि 2 से ज्यादा रन नहीं पड़ेंगे. अनिल ने फोन करके कह दिया था कि लास्ट ओवर मंदा जाएगा, जितना माल हो सके उठा लो. हुआ भी यही. उस ओवर में कोई रन नहीं पड़ा था.

बाद में अनिल बताता है कि इंग्लैंड के तीन खिलाड़ी उसके आदेश पर काम कर रहे थे. इनके नाम इस रिकॉर्डिंग में नहीं बताए गए. अल जज़ीरा ने दावा किया कि वो तीनों के नाम आईसीसी को दे चुका है. साथ ही जब अल जज़ीरा ने इन खिलाड़ियों से स्टिंग पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने इसे सिरे नकार दिया.

डॉक्युमेंट्री में दावा किया गया है कि डी-कंपनी मैच फिक्सिंग को वैसे ही चलाती है जैसे कोई दूसरा धंधा. अनिल यहां बताता है कि ऊपर के लेवल पर सब मैनेज कर लेते हैं. टॉप टीमों में फिक्सिंग का रेट अनिल मुनव्वर 2-6 करोड़ का बताता है. सीधे प्लेयर से नहीं संपर्क करते हैं. टीम ऑफिशियल या अंदर का कोई बंदा जो मिडिलमैन का काम करता है, उसी से डील किया जाता है. वही आगे पैसा पहुंचाता है.

#3. श्रीलंका बनाम ऑस्ट्रेलिया, गॉल टेस्ट (4-6 अगस्त 2016)

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श्रीलंका के गॉल स्टेडियम में मैच 2.5 दिन में ही निपट गया था.

एक और मैच श्रीलंका के गॉल स्टेडियम में. ऊपर से यानी क्रिकेट बोर्ड से बैटिंग पिच बनाने का आदेश था. यहां भी वहीं क्यूरेटर थरंगा पिच को फिक्सरों के मुताबिक बनाने के लिए तैयार दिखता है. वो कहता है अगर स्पिन को मदद कराने वाली पिच बनानी हो तो रोलर कम फेरना होता है. इससे पिच 5 दिन नहीं चल पाती है और स्पिन को मदद करती है. श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच 4-6 अगस्त 2016 के बीच यही हुआ. 2.5 दिन में ही मैच खत्म हो गया था. श्रीलंका की स्पिन के आगे ऑस्ट्रेलिया धराशाई हो गया था. ऊपर से पिच बहुत सख्त लग रही थी. मगर पहले ही दिन से गेंद टर्न होने लगी थी. उस वक्त ये आरोप लगने लगे कि पिच से छेड़छाड़ हुई है. मगर आईसीसी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. ये क्रिकेट इतिहास का सबसे छोटा टेस्ट मैच था जिसमें 2.5 दिन में ही रिजल्ट आ गया. क्यूरेटर से सेटिंग के चलते मोरिस ने इस पर दांव लगाया था कि मैच बेहद जल्दी खत्म होगा. यही हुआ और तगड़ा पैसा कमाकर वो वापिस इंडिया आ गया.

#4. इंडिया बनाम ऑस्ट्रेलिया, रांची टेस्ट (16-20 मार्च 2017)

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रांची टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के दो खिलाड़ियों का नाम डॉक्यूमेंट्री में लिया गया है. फोटो में दिख रहे इस ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी की तस्वीर प्रतीकात्मक रूप में लगाई गई है.

इधर इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच रांची में 16-20 मार्च 2017 को टेस्ट मैच हो रहा था. यहां 10 ओवर के सेशन के लिए मैच फिक्स किया गया. यहां भी सेशन के अखिरी ओवर के मंदा रहने की प्रिडिक्शन थी. यहां पूरे सेशन खूब रन पड़े और आखिरी आोवर में एक भी रन नहीं पड़ा. बाद में अनिल ने बताया कि इसमें दो ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर्स फिक्सिंग में शामिल थे जिनके नाम अल जज़ीरा ने पब्लिक नहीं किए हैं. चैनल ने ये कहा है कि हमने ऑस्ट्रेलिया के इन दोनों प्लेयरों से संपर्क करने की कोशिश की मगर दोनों ने इन आरोपों पर कुछ नहीं कहा है.

# 5 खास फिक्सिंग के लिए क्रिकेट लीग

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रिकॉर्डिंग में अपना फिक्सिंग प्लान शेयर करते हुए गौरव राजकुमार और रॉबिन मोरिस.

इस डॉक्यूमेंट्री में सबसे चौंकाने वाला सच इसके आखिरी पड़ाव में सामने आता है. डेविड अब तक इन सब फिक्सरों का विश्वास जीत चुका था. यहां दुबई में बैठे हुए फिक्सर गौरव राजकुमार और मोरिस कहते हैं कि दुबई क्रिकेट में पैसा कमाने का गढ़ है. यहां एक मामूली सी टी-20 लीग मैच में हजारों की भीड़ देख यहां के प्राइम मिनिस्टर भी हैरान हो जाते हैं. यहां गौरव ने 4 टीमों वाली एक लीग का प्लान बताया जिसे वो एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड से पहले ही डिस्कस कर चुका है. बस आईसीसी के हिसाब से अरेंजमेंट करने बाकी हैं. उस में चारों टीमों के सभी खिलाड़ी गौरव की लिस्ट के हिसाब से होंगे. यहां वो कहता है कि इन चारों टीमों में कुछ ही प्लेयर्स को पता होगा कि ये इवेंट सिर्फ फिक्सिंग के लिए है. 10 मैच होंगे. बाकियों को एक फीस मामूली मिलेगी मगर हर टीम में जो खिलाड़ी इस प्लैन में शामिल होंगे उन्हें अपनी फीस से 40 गुणा ज्यादा पैसा दिया जाएगा ताकि वो मुंह न खोलें.

वो डॉक्यूमेंट्री यहां देखें:

वहां मोरिस और हसन ने दुबई में उस लीग को सफल बनाने के बाद इसे हॉन्ग कॉन्ग, जिम्वाव्बे और फिर श्रीलंका में करने का प्लैन बताया. यहां हसन से जब पूछा गया कि क्या वो भी इस लीग में खेल सकता है, तो जवाब मिला हां. यहां एक बात और सामने आई कि हसन यूएई की नेशनल टीम में खेले हैं जिसे वो खुद फिक्स करते रहे हैं. दोनों ने यहां कहा कि यूएई की पूरी टीम उनके हाथ में है. हर खिलाड़ी को 17 लाख रुपए दिया जाता है.

अल जज़ीरा के इस खुलासे के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी हिल गया है. ICC ने कहा है कि वो चैनल से रॉ फुटेज ले कर जांच करेगा. फिक्सरों ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के प्लेयर्स को फिक्स करने की बात कही है. इन देशों के क्रिकेट बोर्ड कह रहे हैं कि अगर सबूत दें तो ही एक्शन लेंगे. आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट से उम्मीद है कि वो इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाए हर मैच की जांच करे और करप्ट प्लेयर्स को सामने लाए. नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब हमें ये लगने लगेगा कि हर मैच फिक्स है और क्रिकेट देखना बंद कर दें.


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