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आगरा गैंगरेप कहलाए जा रहे मामले की सच्चाई बड़ी घिनौनी है

23 अक्टूबर को आगरा में एक घटना हुई. घटना ऐसी, जिसके कई-कई वर्जन उपलब्ध हैं. पिछले हफ्ते भर से मामला फेसबुक-ट्विटर पर भयंकर गरमा चुका है. सोशल मीडिया की मानें तो उत्तर प्रदेश की तमाम सरकारी मशीनरी ‘मुस्लिम’ आरोपियों को बचाने के लिए कमर कस कर खड़ी हुई है.

किसी भी रेप की घटना में दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. इसमें कोई दोराय नहीं. हम, आप, हर संवेदनशील शख्स इंसाफ होते देखना चाहता है. पर जब किसी की ट्रेजेडी कुछ ख़ास लोगों के लिए नफरतें फैलाने का ज़रिया बनने लगे तो चिंता होना लाज़मी है.

आइए पहले ये जानते हैं कि सोशल मीडिया में क्या फैला हुआ है.

सोशल मीडिया पर लड़की के परिवार वालों की तस्वीरें, वीडियोज़ खूब घूम रहे हैं. कई पेज पर इन्हें तीखी टिप्पणियों के साथ परोसा जा रहा है, जहां से हज़ारों लोग इसे शेयर कर रहे हैं. ऐसी तमाम जगहों पर एक सा ही सुर है. एक ही वर्जन है.

“आगरा में मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़की का गैंगरेप कर दिया है. पुलिस-प्रशासन मामले को दबा रहे हैं. लड़की के घरवाले परेशान हैं. अगर सच्चे हिंदू हो तो इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करो.”

शब्द थोड़े-बहुत इधर-उधर हो सकते हैं, लेकिन भाव यही है सबका. कुछेक नमूने आप भी देख लीजिए.

ऐसी बहुत सी पोस्ट्स फेसबुक पर घूम रही हैं.
ऐसी बहुत सी पोस्ट्स फेसबुक पर घूम रही हैं.

मामले का पूरा-पूरा साम्प्रदायिकरण हो रहा है.

इस पोस्ट के मुताबिक़ हर मुसलमान लव जेहादी है.
इस पोस्ट के मुताबिक़ हर मुसलमान लव जेहादी है.

ये स्क्रीनशॉट ही क्यों, फेसबुक पर ‘आगरा रेप’ लिखकर सर्च कर लीजिए. तस्वीर साफ़ हो जाएगी.

हुआ क्या था?

हमने आज तक से जुड़े हुए स्थानीय पत्रकार अरविंद शर्मा से बात की. वो शुरू से ही इस मामले पर नज़र रखे हुए हैं. जो उन्होंने बताया वो कुछ यूं है:
23 अक्टूबर को लड़की अपनी मर्ज़ी से लड़के के साथ गई थी. लड़का मुस्लिम है. घर से लड़की कॉलेज की यूनिफॉर्म पहनकर निकली थी. घर से कोई दस किलोमीटर दूर जाकर उसने ड्रेस चेंज की. दोनों, लड़के की स्कूटी पर सवार होकर धौलपुर में किसी मज़ार पर गए थे. आगरा ग्वालियर हाईवे पर जो टोल टैक्स है, वहां की CCTV फुटेज में भी देखा गया कि लड़की मर्ज़ी से स्कूटी पर पीछे बैठी हुई है.

ये टोल टैक्स का CCTV फुटेज है.
ये टोल टैक्स का CCTV फुटेज है.

जब वो लोग वापस लौट रहे थे तो स्कूटी लड़की चलाने लगी. नातजुर्बेकार होने की वजह से स्कूटी एक डिवाइडर से टकरा गई. दोनों घायल हो गए. वहां मौजूद लोगों ने उन्हें एक एम्बुलेंस में डालकर हॉस्पिटल पहुंचाया. मौके पर पहुंची पुलिस को जब पता लगा कि ये आगरा के रहने वाले हैं तो उन्होंने उन्हें आगरा भेज दिया. धौलपुर जिले के मुनिया थाने में एक्सीडेंट स्थल से उठाई गई स्कूटी ले जाई गई थी.

पत्रकार अरविंद शर्मा ने ये भी बताया कि मेडिकल परीक्षण में रेप की पुष्टि नहीं हुई है.

आगे क्या हुआ?

जब लड़की के परिवार वालों को मामला पता चला तो उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की का गैंगरेप हुआ है. उनका कहना है कि 23 तारीख को दोपहर 3.30 के करीब उनके पास किसी पप्पू उस्मान का फोन आया. उसने बताया कि लड़की का एक्सीडेंट हुआ है और वो एस. एन. मेडिकल कॉलेज में दाखिल है. जब परिवार हॉस्पिटल पहुंचा तो लड़की को शॉक की हालत में पाया. उसकी आंखें सूज रही थी, बाहों पर नाखूनों के निशान थे. वो बार-बार कह रही थी कि ‘छोड़ दो, मुझे जाने दो’. उस वक़्त वो किसी लड़के के कपड़े पहने हुई थी. लड़का भी अगले बेड पर मौजूद था और उसके जिस्म पर सिर्फ अंडरगारमेंट्स थे. हालांकि मेल टुडे की पत्रकार चयनिका निगम इस बात का खंडन करती हैं. मेल टुडे ने एक ऐसी तस्वीर देखी है जिसमें वो लड़का अपने उन्हीं कपड़ों में अगले बेड पर पड़ा हुआ है, जो CCTV फुटेज में उसने पहने हुए थे.

पुलिस क्या कहती है?

‘दी लल्लनटॉप’ ने शाहगंज, आगरा थाने के इंस्पेक्टर विनय मिश्रा से बात की. उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि लड़की अपनी मर्ज़ी से लड़के के साथ गई थी. वापसी में खुद स्कूटी चलाते वक़्त एक्सीडेंट कर बैठी. लड़की के घरवालों द्वारा लिखित में नामजद रिपोर्ट करने पर उन्होंने धारा 366 में लड़के के खिलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया है और उसे जेल भेज दिया है. विनय मिश्रा ने भी बताया कि रेप की पुष्टि नहीं हुई है. लड़की की हालत में सुधार हो रहा है और जल्दी ही वो बयान देने लायक हो जाएगी. उसी आधार पर आगे की कारवाई होगी.

क्या ऑनर किलिंग का मामला हो सकता है ये?

इसी बीच एक और एंगल भी सामने आ रहा है. मेल टुडे के मुताबिक़ दो नर्सों ने लड़की के सेमी-कोमा में जाने से पहले उससे बात की थी. नर्सें बताती है कि उस वक़्त लड़की अपना नाम और उम्र सही से बता पा रही थी. उसने बताया कि लड़की के अंकल ने उन्हें लड़के के साथ पकड़ा था. उन्होंने उसे बुरी तरह पीटा. ये लड़की के परिवार वालों के उस बयान से मैच नहीं करता जिसमें वो कहते हैं कि लड़की किसी को पहचान नहीं पा रही.

मेल टुडे के नुमाइंदों ने एक्सीडेंट वाली जगह पर विजिट की. वहां चाय का खोखा लगाने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लड़की बहुत तेज़ रफ़्तार से स्कूटी चला रही थी. उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो डिवाइडर से टकरा गई. दिन के 12.31 पर पीसीआर कॉल होने का रिकॉर्ड मौजूद है. कांस्टेबल उमेश कुमार और हरी ओम घटनास्थल पर कॉल के 12 मिनट बाद ही पहुंच गए थे. उन्होंने पाया कि लोगों ने घायलों को हॉस्पिटल भिजवा दिया था.

डॉक्टर्स क्या बोलते हैं?

मेडिकल परीक्षण में रेप की पुष्टि नहीं हुई है. एस. एन. मेडिकल कॉलेज और रेनबो हॉस्पिटल में लड़की की जांच कर चुके दो डॉक्टरों ने कन्फर्म किया कि लड़की के प्राइवेट पार्ट्स पर सेक्सुअल असॉल्ट के निशान या ज़ख्म नहीं पाए गए हैं.

हॉस्पिटल के बेड पर पीड़िता.
हॉस्पिटल के बेड पर पीड़िता.

क्या किसी दंगे की पटकथा लिखी जा रही है?

सोशल मीडिया पर इस मामले ने जैसा रुख अख्तियार किया है, उससे किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कुछ नहीं तो दो समुदायों के बीच पहले से मौजूद खाई को और चौड़ा तो कर ही दे रहे हैं लोग. विक्टिम अपनी कौम की हो और आरोपी दूसरी कौम का, बस इतना काफी है कुछ लोगों को ज़हर की खेती करने के लिए. जिस केस पर इतनी ज़्यादा मात्रा में संशय के बादल मंडरा रहे हो, उसे एक ही एंगल से पूरी बेशर्मी से परोस देना निहायत ही वाहियात काम है. लोग हैं कि खुल्ला फतवा दिए दे रहे हैं कि गैंगरेप हुआ है. मुस्लिमों ने किया है. अरे जिस केस में रेप ही साबित नहीं हो रहा वहां गैंगरेप कहां से आ गया भाई? क्या डॉक्टर्स, क्या पुलिस, क्या प्रशासन सब इनकार कर रहे हैं रेप से. क्या इतनी ज़हरीली हो गई है इस देश की फिज़ा कि जहां किसी गैर-धर्मीय शख्स का ज़िक्र आया, आपने उसे अपराधी मान लिया. उसके बहाने उसकी पूरी कौम को दुश्मन मान लिया.

अगर रेप हुआ होता तो भी बात इस पर होनी चाहिए कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले. लेकिन उसे सांप्रदायिक एंगल देना मामले को छिछला बना देता है. किसी के साथ रेप होना ही अपने आप में जघन्य अपराध है. उसे हिंदू-मुसलमान बना कर आप लड़की के साथ हुई घटना को बहुत हल्का कर देंगे. किसी भी क्राइम का साम्प्रदायिकरण करना घिनौनी बात है, बशर्ते क्राइम की वजह ही सांप्रदायिक न हो. बिना वजह ऐसा करने से आरोपियों के साथ-साथ एक पूरी कौम निशाने पर आ जाती है. मुल्क का माहौल बिगड़ता है. 

ऐसे तमाम लोग घृणित मानसिकता के परिचायक हैं जिनको हर चीज़ में धर्म दिखता है.

इसके अलावा एक चीज़ ऐसी है जिसकी वजह से कुछ फेसबुकियों को तो जेल में होना चाहिए. ये लोग एक तरफ तो लिख रहे हैं कि लड़की का रेप हुआ है, दूसरी तरफ उसकी तस्वीरें, उसके वीडियो बिना उसकी शक्ल छिपाए पोस्ट कर रहे हैं. क्या इन्हें पता नहीं ऐसे केस में पीड़िता का नाम तक गुप्त रखा जाता है? तस्वीरें तो बहुत बाद की बात है. ऐसे तमाम लोगों को तो कम से कम अरेस्ट कर ही लिया जाए जो किसी समुदाय विशेष से अपनी नफरत के चलते मूर्खता की चोटी पर जा बैठे हैं. कम से कम पीड़िता का बयान तो आने देते. खुद ही कोर्ट बन के फैसला सुना दिया है.

वाकई इस बार नफरती चिंटुओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी है दंगा करवाने में.


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