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'डेली गार्डियन' के बाद सरकार को डिफेंड करने आई 'ऑस्ट्रेलिया टुडे' के बारे में क्या पता चला?

द डेली गार्डियन. एक न्यूज़ वेबसाइट. वेबसाइट पर एक संपादकीय छपा. हेडिंग थी, ‘प्रधानमंत्री मोदी बहुत मेहनत कर रहे हैं, विपक्ष के झूठ में न फंसे’. बीजेपी से जुड़े कई बड़े नामों ने इस संपादकीय को शेयर किया. बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय भी उन में शामिल थे. लेकिन शेयर करने के कुछ घंटों बाद ही ये लीडर्स ट्रोल होने लगे. कोई कह रहा था काहें की वेबसाइट, लिंक ही नहीं खुल रहा. तो कोई ब्रिटिश अखबार ‘द गार्डियन’ के नाम से मिलती-जुलती इस वेबसाइट का यूपी कनेक्शन निकाल लाया.

खैर, पिछले दिनों भारत की कोरोना आपदा और सरकार के लचर नियंत्रण पर इंटरनेशनल मीडिया में बहुत कुछ छपा. ‘द गार्डियन’ ने अपने संपादकीय में सीधे-सीधे नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताया था. लिखा कि कोरोना महामारी बढ़ने के बावजूद भी वो रैलियां करते रहे. मोदी सरकार की आलोचना करते हुए ऐसा ही कुछ ऑस्ट्रेलियन अखबार ‘द ऑस्ट्रेलियन’ ने भी लिखा. हेडिंग थी, ‘मोदी जनता को प्रलय की ओर लेकर जा रहे हैं’. भारतीय दूतावास ने इस आर्टिकल को निराधार बताकर इसके एडिटर के नाम लंबी-चौड़ी चिठ्टी भी लिखी थी. खैर, इस सब के दौरान एक और न्यूज़ आर्टिकल सोशल मीडिया पर शेयर किया जाने लगा. न्यूज़ संस्था का नाम है ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’. यहां मोदी सरकार की आलोचना या प्रशंसा नहीं की गई. बल्कि गिद्ध पत्रकारों से सावधान होने को कहा गया. आर्टिकल की हेडिंग थी, ‘कोरोना के साथ इंडिया गिद्ध पत्रकारों से भी लड़ रहा है, जो महामारी से ज्यादा डर फैला रहे हैं’. आगे लिखा कि ‘ये पत्रकार जख्मों पर नमक रगड़ने का काम कर रहे हैं. कोरोना से जुड़ी मौतों के मामलों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रहे हैं. ऐसा कर के इंडिया को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बदनाम कर रहे हैं.’

सोशल मीडिया पर इसे ऑस्ट्रेलियन मीडिया की तरफ से लिखे संपादकीय की तरह शेयर किया जाने लगा. लेकिन इस बात को नकारा एक ऑस्ट्रेलियन पत्रकार ने. ऑस्ट्रेलियन मीडिया पब्लिकेशन ABC नेटवर्क के संवाददाता जेम्स ओटेन ने ट्वीट कर लिखा,

ये कोई असली ऑस्ट्रेलियन न्यूज़ पब्लिकेशन नहीं है. लेकिन ये व्हाट्सऐप पर बहुत घूम रही है.

दूसरी ओर ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ को लेकर ट्विटर पर और भी बातें उड़ने लगी. लोग कहने लगे कि ये किसी जितार्थ के नाम पर रजिस्टर्ड है. हमनें भी पता लगाने की कोशिश की. Whois.com पर वेबसाइट से जुड़ी जानकारी निकाली. और पाया कि वेबसाइट का डोमेन जितार्थ जय भारद्वाज के नाम पर रजिस्टर्ड है. कौन हैं ये? वेबसाइट के अबाउट अस सेक्शन में इनका नाम एडिटर-इन-चीफ के तौर पर दिखाता है. थोड़ा खोजने पर इनकी ट्विटर प्रोफाइल तक भी पहुंचे. जिसके मुताबिक ये कई न्यूज़ संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. और मेलबर्न और मेरठ में रहते हैं. यानी कि शायद NRI हैं.

Australia Today Registratiion Details
‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ के रजिस्ट्रेशन डिटेल जो बताते हैं कि वेबसाइट जितार्थ के नाम पर रजिस्टर्ड है. फोटो – whois.com

‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की बात करें तो इसका ट्विटर अकाउंट जनवरी, 2021 में ही बनाया गया है. जेम्स ने इस वेबसाइट को फर्जी ऑस्ट्रेलियन न्यूज़ पब्लिकेशन बताया था. ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की तरफ से भी जवाब आया. लिखा,

तुम्हें अपना उपनिवेशी चश्मा उतारने की जरूरत है जेम्स. ऑस्ट्रेलिया तुम्हारी सोच से ज्यादा विविध है. ABC न्यूज़, प्लीज़ अपने पत्रकारों को सिखाइए कि दूसरे मीडिया आउटलेट्स की इज़्ज़त करें.

 

हमनें भी theaustraliatoday.com.au पर छपे संपादकीय को पढ़ा. तसल्ली से. स्क्रॉल करते-करते एंड पार्ट तक पहुंचे. असली कैच तो यहां था. ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ अपने जिस मत को डिफेंड कर रहा था. दरअसल, वो उनका था ही नहीं. संपादकीय के अंत में लिखा था,

ये संपादकीय सबसे पहले www.trunicle.com पर पब्लिश हुआ था. हमनें उनकी परमिशन लेकर इसे फिर से पब्लिश किया है.

‘ट्रूनिकल’  पर हूबहू इसी हेडिंग के साथ ये संपादकीय छपा हुआ था. बस यहां गिद्ध पत्रकारों को लेफ्ट की तरफ झुकाव वाला कहा गया. ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ पर पड़ताल पूरी करने के बाद अब बारी थी ‘ट्रूनिकल’ की. वेबसाइट का रेजिस्ट्रेशन चेक किया. और पाया कि इसे अमेरिका के एरिज़ोना से रजिस्टर किया गया है. वेबसाइट का अबाउट अस सेक्शन बताता है कि ये खुद को प्रो राष्ट्रवादी न्यूज़ संस्था मानते हैं. इसी के जरिए पता चला कि जुलाई, 2020 में शुरू की गई इस वेबसाइट को अमेरिका में बसे कुछ NRI चला रहे हैं. ‘ट्रूनिकल’ पर ये संपादकीय लिखा है मनीषा इनामदार ने. सोशल मीडिया पर उन्हें खोजने की कोशिश भी की. लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया.


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