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PM मोदी की तारीफ करने वाले 'द डेली गार्डियन' की खुली पोल, लोगों ने स्टाफ पर मीम्स बना दिए

ब्रिटेन का एक अखबार है. नाम है द गार्डियन (The Guardian). लिबरल मूल्यों की पत्रकारिता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. हाल ही में अखबार ने एक संपादकीय प्रकाशित किया था. भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जो तबाही हुई, उसके लिए इस संपादकीय में पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया.

अखबार में लिखा गया कि कोरोना से निपटने में भारत की विफलता का कारण पीएम मोदी का अति आत्मविश्वास है. यह भी लिखा कि इसी अति आत्मविश्वास के कारण मोदी ने एक्सपर्ट्स की चेतावनी को नजरंदाज करते हुए, मार्च की शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी के अंत की घोषणा कर दी और कहा कि भारत अब महामारी से पहले वाली स्थिति में लौट सकता है.

ब्रिटिश अखबार ने चुनावी रैलियों में बिना मास्क के शामिल हुए पीएम मोदी की आलोचना करते हुए लिखा था कि इससे जनता को संदेश गया कि भारत में कोरोना खत्म हो चुका है और इस वजह से जनता ने लापरवाही बरती. साथ ही यह भी कहा कि भारत सरकार के पास दूसरी लहर से निपटने के लिए एक साल का समय था. बावजूद इसके तैयारी नहीं की गई और आज परिस्थितियां भयावह हैं.

दूसरे विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी साधा निशाना

द गार्डियन के इस संपादकीय के साथ दूसरे विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा. कुछ मीडिया संस्थानों ने श्मशान घाटों, कब्रिस्तानों और अस्पतालों में लोगों के अंतिम संस्कार और उनके तड़प-तड़पकर मरने की ना केवल ग्राउंड रिपोर्टिंग की, बल्कि ड्रोन्स से फोटो भी निकालीं. भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया में इस तरह की व्यापक रिपोर्टिंग ना होने की वजह से सभी लोगों का ध्यान इन विदेशी मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स पर चला गया. दूसरे देशों ने भी भारत की परिस्थितियों पर चिंता जताई. मदद करने की बात कही. स्वाभाविक रूप से मोदी सरकार पर दबाव बढ़ता चला गया.

भारत में कोरोना वायरस वायरस महामारी की दूसरी लहर पर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द गार्जियन द्वारा प्रकाशित संपादकीय. (फोटो: द गार्जियन की वेबसाइट)
भारत में कोरोना वायरस वायरस महामारी की दूसरी लहर पर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द गार्डियन द्वारा प्रकाशित संपादकीय. (फोटो: द गार्डियन की वेबसाइट)

इस बीच सरकार की तरफ से घोषित और अघोषित तौर पर इन मीडिया संस्थानों को डिसक्रेडिट करने की मुहिम चलाई गई. कहा गया कि विदेशी मीडिया संस्थान भारत के खिलाफ एजेंडा चलाते हैं. श्मशानों से चिताओं की फोटो भेजने वाले गिद्ध हैं. जबकि फोटो इसलिए भेजी जा रही थीं क्योंकि सरकारों पर कोविड-19 से मौतों का आंकड़ा छिपाने के आरोप लग रहे थे. मसलन, अगर किसी श्मशान घाट में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए 100 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, तो सरकारी आंकड़ों में केवल 4 या 5 कोविड मौतें दर्ज हो रही थीं.

इन तमाम प्रयासों के बाद भी विदेशी मीडिया संस्थानों पर फर्क नहीं पड़ा. उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग चालू रखी और ग्राउंड लेवल पर हकीकत दिखाते रहे.

‘द डेली गार्डियन’ क्या बला है?

इसके बाद अचानक से ‘द डेली गार्डियन (The Daily Guardian)’ नाम की एक वेबसाइट प्रकट हुई. इसमें एक आर्टिकल लिखा गया. लिखा गया कि भारत में कोरोना संकट के इस समय में प्रधानमंत्री मोदी बहुत काम कर रहे हैं, इसलिए लोग विपक्ष के भ्रमजाल में ना फंसे. इस आर्टिकल को बीजेपी के लोगों और मोदी सरकार से जुड़े मंत्रियों ने जमकर शेयर किया. यह जताने की कोशिश हुई कि विदेशी मीडिया दरअसल पीएम मोदी की तारीफ कर रहा है.

इस आर्टिकल के आने के बाद लोगों को शक हुआ. उन्हें शक हुआ कि जिस गार्डियन अखबार ने कोरोना को लेकर मोदी सरकार की इतनी तीखी आलोचना की, आखिर उसमें तारीफ वाला आर्टिकल कैसे छप सकता है? लोगों ने अपने स्तर पर खोजबीन की, तो पता चला कि ‘द डेली गार्डियन’ का प्रतिष्ठित ‘गार्डियन’ अखबार से कोई लेना देना नहीं है.  बाद में हमारे साथी यमन ने इस वेबसाइट पर पीएम मोदी की तारीफ में छपा वो आर्टिकल भी पढ़ा. जहां से पता चला कि दरअसल यह आर्टिकल एक संपादकीय है और लिखने वाले कोई और नहीं बल्कि बीजेपी मीडिया रिलेशंस के कन्वेनर सुदेश वर्मा हैं. सुदेश वर्मा टीवी डिबेट में पार्टी प्रवक्ता की भूमिका भी निभाते हैं. उन्होंने ‘नरेंद्र मोदी: द गेम चेंजर’ नाम की किताब भी लिखी है. ICANN (Internet Corporation for Assigned Names and Numbers) के मुताबिक ‘thedailyguardian.com’ डोमेन का रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश का है. ये डोमेन आईटीवी नेटवर्क के नाम से रजिस्टर्ड है और इसका मेलिंग अड्रेस भी यूपी दिया है.

इस समय तक लोगों के सामने ‘द डेली गार्डियन’ की पोल खुल गई थी. पता चल गया था कि जिस बीजेपी की तरफ से विदेशी मीडिया में पीएम मोदी की तारीफ के नाम पर भ्रम फैलाने की कोशिश हुई. इसके बाद तो फिर ट्विटर पर मीम्स और जोक्स की बाढ़ आ गई.

अनंत सिंह पॉलिटिकल एडिटर बनाए गए

सबसे पहले रोफेल गांधी 2.0 नाम के ट्विटर हैंडल से एक तस्वीर डाली गई. गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म से एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फोटो. जिसमें वो चिलम के कश लगा रहे हैं. तस्वीर का कैप्शन लिखा गया- ‘द डेली गार्डियन के एडिटर इन चीफ अपने सूत्रों के साथ.’

इसके बाद मनोज तिवारी पैरोडी अकाउंट से सोनी चैनल पर आने वाले शो सीआईडी में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की भूमिका अदा करने वाले एक्टर की फोटो डाली गई और लिखा गया कि ये द डेली गार्डियन के कोरोना एक्सपर्ट हैं.


किसी ने द डेली गार्डियन को दिया गया शेन वार्न का काल्पनिक इंटरव्यू छाप डाला. शेन वार्न के हवाले से लिखा गया-

“स्कूल के दिनों में मोदी जी मेरे घर पर फोन किया करते थे. एग्जाम की तैयारी करवाते थे. एक बार मैं बुरी तरह से फेल हो गया. गुस्से में मैंने गेंद फेंकी. वो गेंद 90 डिग्री पर स्पिन हुई. तब मुझे अपने टैलेंट के बारे में पता चला और मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया. मैं मोदी जी का सदैव आभारी रहूंगा.”

गजेन चौधरी नाम के यूजर ने इन भाई साहब को द डेली गार्डियन का फैक्ट चेकर बताया

Fact Checker
Fact Checker

बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को द डेली गार्डियन का चीफ स्पोर्ट्स रिपोर्टर बताया गया. आकाश विजयवर्गीय ने इंदौर नगर निगम के एक कर्मचारी को बल्ले से पीटा था.

Sport Editor
Sport Editor

बलात्कार और हत्या के दोषी राम रहीम की खाना बनाते हुए एक फोटो डाली गई. राम रहीम को द डेली गार्डियन का कुकिंग पेज एडिटर बताया गया

Cooking Page Editor
Cooking Page Editor

शोले फिल्म के सांभा को राष्ट्रीय आपदा और महामारी का विशेष संवाददाता बताया गया-

Saanbha
Saanbha

औरतों के पहनावे पर अपमानजनक टिप्पणी कर चुके उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत को द डेली गार्डियन का फैशन जर्नलिस्ट घोषित किया गया-

Fashion Editor
Fashion Editor

शाहीन बाग में गोली चलाने वाले कपिल गुर्जर को चीफ क्राइम रिपोर्टर-

Chief Crime Reporter
Chief Crime Reporter

और अनंत सिंह को बनाया गया द डेली गार्डियन का पॉलिटिकल एडिटर-

Anant Singh
Anant Singh

अमित शाह की एक फोटो खींचते हुई फोटो डाली गई. लिखा गया कि ये द डेली गार्डियन के मुख्य फोटोग्राफर हैं.

Amit Shah
Amit Shah

अक्षय कुमार को द डेली गार्डियन का आंतरिक मामलों पर विशेष संवाददाता घोषित किया गया-

Akshay Kumar
Akshay Kumar

इन भाई साहब को चीफ हेल्थ रिपोर्टर की भूमिका दी गई-

किसी ने मोदी जी की तारीफ के लिए कुछ और विदेशी मीडिया संस्थान खोलने के लिए नाम सुझाए. जैसे- द न्यू यॉर्कर टाइम्स, द वॉल स्त्री जर्नल, द वाशिंगटन पोस्ट ऑफिस, डेली मेल और पान हब.

विदेशी मीडिया ने क्या लिखा था?

ये तो थे मीम्स और जोक्स. अब बात विदेशी मीडिया की कवरेज की भी कर लेते हैं, जो भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के संबंध में की गई. 25 अप्रैल को न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर भारत की राजधानी दिल्ली की तस्वीर लगाई थी. यह तस्वीर दिल्ली के सीमापुरी इलाके के श्मशान की थी. इसमें जलती चिताएं थीं और वो लोग थे, जो किसी अपने का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान में जगह ढूंढ रहे थे. अखबार ने हेडलाइन लगाई थी- भारत में कोविड 19 के बढ़ते कहर के बीच मौतों के आंकड़ों में बेइमानी. इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के अखबार द ऑस्ट्रेलियन में लिखा गया कि मोदी की वजह से भारत कयामत की स्थिति में पहुंच गया है. अख़बार ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘भीड़ से प्यार करनेवाला’ बताया. ये भी लिखा कि घमंड, उग्र-राष्ट्रवाद और अफ़सरों की अक्षमता ने मिलकर भारत में असाधारण स्तर का संकट खड़ा कर दिया है.

भारत में कोरोना त्रासदी पर न्यू यॉर्क टाइम्स की कवरेज. (फोटो: ट्विटर)
भारत में कोरोना त्रासदी पर न्यू यॉर्क टाइम्स की कवरेज. (फोटो: ट्विटर)

इसी तरह टाइम मैगजीन ने लिखा कि पीएम मोदी के नेतृत्व की विफलता ने भारत में कोरोना संकट को गहरा कर दिया. गल्फ न्यूज ने लिखा- भारत सांसों के लिए संघर्ष कर रहा है. वाशिंगट पोस्ट और बीबीसी ने भी इस संकट के लिए मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की. ऑस्ट्रेलियाई अख़बार ‘फ़ाइनेंशियल रिव्यू’ में धराशायी हो चुके हाथी पर सवार पीएम मोदी का कार्टून भी सुर्खियों में रहा है. कार्टून में हाथी की सूंड़ पर भारत का नक़्शा दिखाया गया है और उसके ऊपर पर मोदी माइक लेकर बैठे हैं. कार्टून का टाइटल दिया गया- निर्बल हाथी पर सवार मौत…?

हाल फिलहाल में CNN और अल जजीरा की ग्राउंड रिपोर्ट्स भी चर्चा में आई हैं. इन रिपोर्ट्स में दिखाया गया है कि किस तरह से इस अभूतपूर्व संकट के सामने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है और यह सब भारत सरकार की लापरवाही की वजह से हुआ है.


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