Submit your post

Follow Us

फ़िल्म 'आधार' का टीज़रः मुक्काबाज़ वाले हीरो की ये फिल्म हर कोई देखने वाला है

106
शेयर्स

‘मुक्काबाज़’ वाले विनीत सिंह की आगे फिल्में तो बहुत सी आ रही हैं, लेकिन उनमें से एक खास है. नाम है ‘आधार’. नाम पकड़कर आप ठीक जगह पहुंचे हैं. ये फिल्म सरकार की आधार कार्ड स्कीम के ऊपर बात करेगी. बात तो इसकी पिछले काफी समय से हो रही थी, लेकिन फिल्म फेस्टिवल्स में प्रीमियर की खबर के बीच फिलहाल खासी चर्चा में है. इस बात की खुशी में मेकर्स ने फिल्म का पहला पोस्टर और ऑफिशियल टीज़र भी रिलीज हो चुका है.

फिल्म का टीज़र नीचे देख सकते हैं:

अब अपने पास फिल्म के बारे में बात करने लायक ढ़ेर सारी बातें हैं. जैसे इस पोस्टर और टीजर में क्या है? फिल्म की कहानी क्या है? हिंदी फिल्मों में इंट्रेस्ट न होने के बावजूद नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर ने ये फिल्म क्यों बनाई? उन्हें इस फिल्म का आइडिया कहां से आया? और ये फिल्म फेस्टिवल्स तक कैसे पहुंची?

1) फिल्म के पोस्टर में विनीत एक लाइन से लगीं आधार कार्ड्स के भार से दबे हुए मालूम दे रहे हैं. कंधे में बस्ता लटकाए हैरान-परेशान. जैसे कुछ सुलझ जाने का इंतज़ार कर रहे हों. और उनके पांव के नीचे है आधार कार्ड का लोगो. पोस्टर से तो फिल्म की कहानी कुछ पता नहीं लग रही. लेकिन बेसिक प्लॉट के बारे में मेकर्स कई बार बात कर चुके हैं. ये फिल्म है झारखंड के एक गांव में रहने वाले आदमी फरसुआ की. ये कोई आम आदमी नहीं है, जब आधार कार्ड बनना शुरू हुआ था, तब ये गांव का पहला आदमी है, जिसने इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था. लेकिन आधार कार्ड बनवाने में उसके पसीने छूट गए हैं. तिस पर सरकारी सिस्टम के काम-काज के बारे में जो खुलासे हो रहे है, सो अलग. इस सोशल सटायर फिल्म को ड्रामेडी कहकर प्रमोट किया जा रहा है. मतलब कोई ऐसा ड्रामा से भरी हुई कहानी, जिसमें हास्य का भी पुट हो.

फिल्म का पहला पोस्टर.
फिल्म का पहला पोस्टर.

2) इस फिल्म को डायरेक्ट किया है बंगाली फिल्मों के क्रिटकली अक्लेम्ड फिल्ममेकर सुमन घोष ने. इंट्रेस्टिंग बात ये कि सुमन फिल्ममेकर के साथ-साथ फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी में इकॉनमिक्स के प्रफेसर भी हैं. 2006 में डेब्यू करने के बाद से अब तक नौ फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं. ‘आधार’ से दहाई का आंकड़ा छूने जा रहे हैं. सुमन की पहली फिल्म ‘पोडोखेप’ को दो नेशनल अवॉर्ड्स मिले थे. वो अपने बांग्ला करियर से खुश थे. लेकिन उनके पास कई कहानियां ऐसी थीं, जो बंगाल में फिट नहीं होती, इसलिए उन्हें कोई खरीदना भी नहीं चाहता था. इसी में से एक आइडिया वो भी था, जिस पर ‘आधार’ बेस्ड है. इस फिल्म की कहानी ही झारखंड में घटती है. इसलिए वो इस फिल्म से हिंदी सिनेमा में अपना डेब्यू करने जा रहे हैं.

फिल्म 'आधार' के एक सीन में विनीत कुमार. विनीत आने वाले दिनों में 'सांड की आंख' और गुंजन सक्सेना बायोपिक 'कारगिल' में नज़र आने वाले हैं.
फिल्म ‘आधार’ के एक सीन में विनीत कुमार. विनीत आने वाले दिनों में ‘सांड की आंख’ और गुंजन सक्सेना बायोपिक ‘कारगिल’ में नज़र आने वाले हैं.

3) द टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में सुमन बताते हैं कि उन्हें इस फिल्म का आइडिया 2011 में न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आया था. उन्होंने फटाक से इस कहानी को शॉर्ट में लिखा और बुसान फिल्म फेस्टिवल के को-प्रोड्यूसर्स को भेज दी. बुसान  के इस सेग्मेंट के लिए दुनियाभर से कई कहानियां आती हैं, जिनमें से 20 को शॉर्टलिस्ट कर उसे फिल्म के रूप में डेवलप किया जाता है. एक हॉलीवुड स्टूडियो को सुमन की कहानी पसंद आ गई. लेकिन जिन प्रोड्यूसर्स को ये फिल्म पसंद आई थी, वो इस कहानी के राइट्स खरीदना चाहते थे. उसमें ये क्लॉज़ कहीं नहीं था कि इस कहानी पर बनने वाली फिल्म सुमन खुद डायरेक्ट करेंगे. इसलिए उन्होंने इंटरनेशनल का झोल छोड़ा और ‘मसान’ और ‘न्यूटन’ जैसी फिल्में प्रोड्यूस कर चुके मनीष मूंदड़ा से बात की. और फाइनली ये फिल्म मनीष के ही प्रोडक्शन में बनी.

<span style="color: #999999;"><em>'आधार' के साउंड डिज़ाइनर रेसुल पुकुट्टी (सबसे बाएं) और म्यूज़िक डायरेक्टर शांतनू मोइत्रा (सबसे दाएं) के साथ डायरेक्टर सुमन घोष. सुमन अपनी फिल्मों में लोकल एलीमेंट्स डालने और डिटेलिंग के लिए जाने जाते हैं. 'आधार' की शूटिंग से पहले उन्होंने झारखंड में तीन-चार महीने गुज़ारे ताकि वहां की आबो-हवा से परिचित हो पाएं.</em></span>
‘आधार’ के साउंड डिज़ाइनर रेसुल पुकुट्टी (सबसे बाएं) और म्यूज़िक डायरेक्टर शांतनू मोइत्रा (सबसे दाएं) के साथ डायरेक्टर सुमन घोष. सुमन अपनी फिल्मों में लोकल एलीमेंट्स डालने और डिटेलिंग के लिए जाने जाते हैं. ‘आधार’ की शूटिंग से पहले उन्होंने झारखंड में तीन-चार महीने गुज़ारे ताकि वहां की आबो-हवा से परिचित हो पाएं.

4) फिल्म की स्क्रिप्ट पर मनीष और सुमन के साथ अमितोष नागपाल ने भी काम किया है. अमितोष एक्टर के अलावा राइटर भी हैं. इन्होंने ‘दबंग’, ‘आरक्षण’ और ‘बेशरम’ जैसी फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया है. ‘ओए लक्की लक्की ओए’ में गाने लिख चुके हैं. भयानक तरीके से सफल रही इरफान खान की फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ के डायलॉग्स इन्होंने ही लिखे थे. अब फिल्म ‘आधार’ में डायलॉग्स की जिम्मेदारी भी इन्हीं की है. अब बात एक्टिंग की. फिल्म में एक से बढ़कर एक दिग्गज काम कर रहे हैं. विनीत के अलावा ‘आधार’ में रघुबीर यादव (सलाम बॉम्बे, लगान), सौरभ शुक्ला (सत्या, बरफी), संजय मिश्रा (आंखों देखी, ऑल द बेस्ट) जैसे एक्टर्स ने भी काम किया है. सौरभ और विनीत की एक साथ ये दूसरी फिल्म है. दोनों इससे पहले सुधीर मिश्रा डायरेक्टेड ‘दासदेव’ में भी काम कर चुके हैं.

फिल्म के डायलॉग राइटर अमितोष नागपाल. और 'आधार' में उनकी लिखी लाइनें बोलने वाले दिग्गज एक्टर्स रघुबीर यादव और संजय मिश्रा.
फिल्म के डायलॉग राइटर अमितोष नागपाल. और ‘आधार’ में उनकी लिखी लाइनें बोलने वाले दिग्गज एक्टर्स रघुबीर यादव और संजय मिश्रा.

5) 4 सितंबर को ‘आधार’ के मेकर्स ने अनाउंस किया कि उनकी फिल्म को प्रतिष्ठित बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के लिए चुना गया है. हर साल साउथ कोरिया में आयोजित होने वाले बुसान को एशिया के सबसे पॉपुलर फिल्म फेस्ट्स में गिना जाता है. इस फिल्म फेस्टिवल का 24वां संस्करण 03 अक्टूबर को शुरू होकर 12 अक्टूबर, 2019 तक चलेगा. इसमें 85 देशों से आई 303 फिल्में दिखाई जाएंगी. ‘आधार’ को इस फेस्टिवल के ‘अ विंडो ऑन एशियन सिनेमा’ सेक्शन में दिखाया जाएगा. ‘आधार’ बुसान में दिखाई जाने वाली इकलौती इंडियन फिल्म नहीं होगी. ‘लिपस्टिक इन माय बुर्का’ फेम अलंकृता श्रीवास्तव की ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ को भी इस फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया है.


वीडियो देखें: नुसरत जहां TMC सांसद बनने और शादी करने के बाद फ़िल्मों में लौट रही हैं

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

फिल्म रिव्यू: छिछोरे

उम्मीद से ज़्यादा उम्मीद पर खरी उतरने वाली फिल्म.

ट्रेलर रिव्यू झलकीः बाल मजदूरी पर बनी ये फिल्म समय निकालकर देखनी ही चाहिए

शहर लाकर मजदूरी में धकेले गए भाई को ढूंढ़ती बच्ची की कहानी.

जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

क्या उनका स्कूल बच सका?

फिल्म रिव्यू: साहो

सह सको तो सहो.

संजय दत्त की अगली फिल्म, जो उन्हें सुपरस्टार वाला खोया रुतबा वापस दिला सकती है

'प्रस्थानम' ट्रेलर फिल्म के सफल होने वाली बात पर जोरदार मुहर लगा रही है.

सेक्रेड गेम्स 2: रिव्यू

त्रिवेदी के बाद अब 'साल का सवाल', क्या अगला सीज़न भी आएगा?

फिल्म रिव्यू: बाटला हाउस

असल घटना से प्रेरित होते हुए भी असलियत के बहुत करीब नहीं है. लेकिन बहुत फर्जी होने की शिकायत भी इस फिल्म से नहीं की जा सकती.

फिल्म रिव्यू: मिशन मंगल

फील गुड कराने वाली फिल्म.

दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: 'बाबा'

दीपक ने इस फिल्म में अपनी एक्टिंग का एवरेस्ट छू लिया है.

फिल्म रिव्यू: जबरिया जोड़ी

ये फिल्म कंफ्यूज़ावस्था में रहती है कि इसे सोशल मैसेज देना है कि लव स्टोरी दिखानी है.