Submit your post

Follow Us

मोदी करेंगे सेल्फी आसन, केजरीवाल का रॉकेटासन और राहुल करेंगे कुर्तासन

3.80 K
शेयर्स

योग दिवस अच्छी चीज है, उतनी ही जितना अच्छा योग. आदमी हेल्दी रहता है योग कर के. योग में होते हैं आसन. सोचिए कि योग पॉलिटिकल हो जाए, वैसे आपके सोचने से पहले से हो पड़ा है. आसन भी पॉलिटिकल हो जाएंगे, होंगे तो कैसे होंगे? पढ़ने वाली बात ये है.

1. सेल्फी आसन

ModiSelfie-e1431693156496

सेल्फी आसन कहीं भी किया जा सकता है. कार में, बस में, छज्जे पर, प्लेन में, मतदान केंद्र के बाहर, जनाजे में. इसे हंसते-बोलते-चलते हुए भी किया जा सकता है. सेल्फी आसन एकाग्रता बढ़ाता है. आप सिर्फ एक अपने तक सीमित रह जाते हैं. इस आसन को करने वाला अपना सारा ध्यान एक अंगूठे के जरिए लम्बे-चौड़े, हिलते-डुलते फोन के एक गोल बिन्दु पर केंद्रित करता है.

2. सुप्तासन

Source- Reuters
Source- Reuters

ये दो लेवल पर किया जाने वाला आसन है. पहला आप चुनाव जीतने के बाद करते हैं. इस क्रम में पहला काम अपने ही घोषणापात्र को गोरसी की आग में धरकर फूंक देना होता है. दूसरा चुनाव हारने के बाद होता है. ये आसन ठीक उसी वक़्त शुरू होता है जैसे ही आप ‘हम हार के कारणों की समीक्षा करेंगे’ कहते हैं.

3. ना-नुकुरासन

watchdog_16387_145795342438_650x425_031416045538

आकर्षण के केंद्र में लाने वाला ये आसन किसी भी बात पर किया जा सकता है. इसकी विशेषता है कि ये सामने वाले का मुंह देखकर किया जाता है. इस आसन के करने से वजन घटता और भाव बढ़ता है. अनिवार्य ये है कि बार-बार किया जाए, और फायदा तभी है जब कोई विवाद भड़काए.

4. गठबंधनासन

janata-parivar_650_040115044152

यह आसन स्वस्थ लोगों के लिए है. ये खुद में सम्पूर्ण ‘योग’ है. लिटरली. ये आसन बहुत कुछ बिगड़ चुकने के बाद भी किया जाता है. चूंकि ये विशुद्ध योग है. इसलिए इसमें जुड़ना अपरिहार्य है फिर भले वो साइकिल में लालटेन ही क्यों न जुड़ें.

5. निंदासन

Source- PTI
Source- PTI

ये आसन भी सिर्फ मुंह खोलकर किया जाता है. लेकिन बहुत थोड़ा. आमतौर पर ये किसी बड़ी घटना के बाद किया जाता है. ये ठीक वैसा ही है जैसे बड़े हादसे में हाथ-पैर तुड़ाकर आप प्लास्टर वाले हाथ की अंगुलियां डुलाते हैं.

6. चमचासन

pahlaj-nihalani-story0-647_060816070116

ये आसन किसी बड़े के पीछे-पीछे होकर ही किया जाता है. ये आसन शरीर को हल्का करता है, स्वभाव में हल्कापन लाता है और चमचे के स्तर को ऊपर ले जाता है. इस आसन में निखट्टूपन अनिवार्य है, साथ ही शरीर को ऐसी स्थिति में ले जाना होता है, जहां से आप अपने बड़के नेता का नाम आसानी से डुबा सकें. वैसे देश में अचानक से ट्रंप के चमचे बढ़े हैं, वैश्विक स्तर पर योग फेमस करने को ट्रंप चाहें तो खुद भी चमचासन कर सकते हैं.

7. विरोध आसन

kejriwal5_650_012114051248

सबसे आसान आसन है. इसे ना-नुकुर आसन की मुद्रा में बैठ कर किया जाता है. अमूमन ये अपोजीशन के लोग करते नजर आते हैं. पर कई बार सत्तापक्ष के लोग भी इसकी मुद्राएं दोहराते नजर आते हैं. विरोध आसन के दो प्रचलित रूप हैं. सदन में किया जाने वाला बहिर्गमन. और सड़क पर धरना प्रदर्शन. जिस तरह कई आसन करके कैलोरी बर्न होती है इस आसन से जनता के पैसे बर्न होते हैं. और जैसे उड़ते इल्जाम केजरीवाल पर लगे हैं वो चाहें तो रॉकेटआसन भी कर लें.

8. बकरासन

prachi_s_144420552389_650x425_100715013909

मूलत: ये हिन्दी के बक शब्द से बना है. इसे करने के लिए सबसे पहले मुंह को माइक के पास ले जाइए. होंठों को फैलाइए जीभ को चलाइए और कुछ भी कह दीजिए. उल्टे-सीधे बयानों के जरिए किया जाने वाला ये आसन पिछले कुछ सालों में खूब प्रचलित हुआ है. इसके फायदे भी तत्काल नजर आते हैं, सस्ती लोकप्रियता जुटाने के लिए ये सबसे कारगर आसन है. ये आसन अक्सर दो लोगों की मदद से किया जाता है. ANI का कैलकुलेटर सामने वीडियो लेने के लिए हो तो ये आसन और सुभीते से होता है.

9. वोटर नमस्कार

priyanka_647_062615073132

ये पांच साल में एक बार किया जाता है. इसके फायदे पांच साल तक नजर आते हैं. ये आसन नहीं कई आसनों का मेल है, जिसमें हाथ जोड़ना, हाथ हिलाना, झुकना, बे-बात भावुक हो जाना, पैरों पर लोट जाना तक शामिल है. एक बार ये आसन अच्छे से कर लिए जाएं फिर वोटर्स को दूर से नमस्कार किया जा सकता है. ये आसन परिवारीजनों की मदद से भी किया जा सकता है. इस आसन को करने के लिए यूनिफॉर्म निर्धारित होती है, कुर्ते और साड़ी सबसे ज्यादा प्रचलित और सुविधाजनक माने जाते हैं. भारतीय जलवायु के लिहाज से.

10. भक्तासन

trump-mos-3_051116072119

मूलत: ये अंधभक्तों और अंधविरोधियों के द्वारा किया जाने वाला आसन है. आंख बंद कीजिए. सांस के साथ लॉजिक को भी छोड़ दीजिए. ढेर सा कलुष अंदर भरिए. दुनियादारी को चूल्हे में झोंक कर जपना शुरू कीजिए. क्या जपना है आप जानते हैं. ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’, ‘तुमको सब बुराई केजरीवाल में ही दिखती हैं’, ‘प्रियंका दीदी को वापस लाओ’, ‘चौरासी में कहां थे?’, ‘साठ साल के गड्ढे भर रहे हैं’, ‘देशद्रोही’, ‘तो पाकिस्तान चले जाओ…’


ये भी पढ़ें

क्या खासियत है उस संस्था की, जिसके मुखिया प्रधानमंत्री मोदी के मेंटर थे

पेड़ खुरच बड़ा दिल बनाने की परंपरा का सूत्रपात मिथुन दा ने किया

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

बाला: मूवी रिव्यू

'आज खुशी का दिन है आया बिल्कुल लल्लनटॉप. सोडा, पानी, नींबू के साथ क्या पिएंगे आप?'

फिल्म रिव्यू: सैटेलाइट शंकर

ये फिल्म एक एक्सपेरिटमेंट टाइप कोशिश है, जो सफलता और असफलता के बीच सिर्फ कोशिश बनकर रह जाती है.

अपने डबल स्टैंडर्ड पर एक बार फिर ट्रोल हो गई हैं प्रियंका चोपड़ा

लोग उन्हें उनकी पुरानी बातें याद दिला रहे हैं.

उजड़ा चमन : मूवी रिव्यू

रिव्यू पढ़कर जानिए ‘मास्टरपीस’ और ‘औसत’ के बीच का क्या अंतर होता है.

फिल्म रिव्यू: टर्मिनेटर - डार्क फेट

नया कुछ नहीं लेकिन एक्शन से पैसे वसूल हो जाएंगे.

इस एक्टर ने फिल्म देखने गई फैमिली को सिनेमाघर में हैरस किया, वो भी गलत वजह से

इतनी बद्तमीजी करने के बावजूद ये लोग थिएटर में 'भारत माता की जय' का जयकारा लगा रहे थे.

हाउसफुल 4 : मूवी रिव्यू

दिवाली की छुट्टियां. एक हिट हो चुकी फ़्रेन्चाइज़ की चौथी क़िस्त. अक्षय कुमार जैसा सुपर स्टार और कॉमेडी नाम की विधा.

फिल्म रिव्यू: मेड इन चाइना

तीन घंटे से कुछ छोटी फिल्म सेक्स और समाज से जुड़ी हर बड़ी और ज़रूरी बात आप तक पहुंचा देना चाहती है. लेकिन चाहने और होने में फर्क होता है.

सांड की आंख: मूवी रिव्यू

मूवी को देखकर लगता है कि मेकअप वाली गड़बड़ी जानबूझकर की गई है.

कबीर सिंह के तमिल रीमेक का ट्रेलर देखकर सीख लीजिए कि कॉपी कैसे की जाती है

तेलुगू से हिंदी, हिंदी से तमिल एक ही डिश बिना एक्स्ट्रा तड़के के परोसी जा रही.