Submit your post

Follow Us

ऑनलाइन कहां देखें ये 8 धांसू फिल्में जिनमें लोग कहीं न कहीं लॉक हो जाते हैं

हम लॉकडाउन की वजह से लॉक हैं. आप भी हैं. कहीं बंद होने की फीलिंग क्या होती है अभी से बेहतर कब समझा जा सकेगा. और इसी टाइम में ये फ़िल्में देखेंगे तो बहुत रिलेट कर पाएंगे.

ये मेरी ओर से कुछ ऐसी मूवीज़ की रेकमेंडेशन है जिनमें मुख्य कैरेक्टर कहीं न कहीं बंद है, कैद है, फंसा हुआ है, घिरा हुआ है.

मुझे लगता है ये सभी फिल्में काफी ग्रिपिंग हैं और आपको बांधकर रखेंगी. शुरू करते हैं…

Meri Movie List Lallantop Movie Series Books Recommendation Series Copy
यहां क्लिक कीजिए और दूसरे टेस्ट की लिस्ट्स देखिए.

1. पैसेंजर्स (2016)

प्लॉट: एक कंपनी का ‘स्लीपर शिप’ एवेलॉन निकला हुआ है. दूसरे ग्रह पर जाने के लिए. सभी पैसेंजर्स हाइबरनेशन में हैं. यानि कई साल के लिए सोए हुए हैं. कुछ तकनीकी समस्या के कारण ‘जिम’ पहले ही जाग जाता है. दूसरे ग्रह पर पहुंचने से 90 साल पहले. अकेलेपन से बचने के लिए वह ‘औरोरा’ को भी जगा देता है.

डायरेक्टर: मॉर्टन टिलडम.

साइंस फिक्शन में रोमांटिक एंगल इस फिल्म की खासियत है.

कहां देखेंगे – नेटफ्लिक्स पर

2. कास्ट अवे (2000)

प्लॉट: फिल्म का प्रोटागोनिस्ट है चक. डिलीवरी सर्विस कंपनी फ़ेडेक्स के लिए काम करता है. मलेशिया जा रहा होता है कि प्लेन क्रैश होकर प्रशांत महासागर में गिर जाता है. उसे होश आता है एक आइलैंड पर. जहां कोई नहीं है. उसे जीने के लिए आदिमानव की तरह जीवन शुरू करना होगा. उसकी मदद के लिए केवल कुछ फ़ेडेक्स के पैकेज हैं.

डायरेक्टर: रॉबर्ट ज़ेमेकिस. जिन्होंने ‘फॉरेस्ट गंप’ भी बनाई थी.

इस फिल्म में टॉम हैंक्स की एक्टिंग बहुत ही अल्टीमेट है. देखते हुए आप इमोशनल हुए बिना नहीं रह सकते.

कहां देखेंगे – नेटफ्लिक्स पर.

3. कौन (1999)

प्लॉट: बाहर बारिश हो रही है. शहर में एक साइकोपाथ किलर घूम रहा है. और लड़की घर में अकेली है. दरवाज़े पर खट-खट होती है. कौन है?

डायरेक्टर: रामगोपाल वर्मा. यह उनकी बेहतरीन फिल्मों में से एक है.

सस्पेंस और हॉरर ऐसा है कि इसे देखते हुए अपनी जगह से हिल नहीं पाएंगे. मनोज बाजपेयी, सुशांत सिंह और उर्मिला मातोंडकर की ताबड़तोड़ एक्टिंग है.

कहां देखेंगे – यूट्यूब पर यहां.

4. 127 ऑवर्स (2010)

प्लॉट: 127 घंटे, यानि 5 दिन से ज़्यादा. एक लड़का दो चट्टानों के बीच अकेला फंसा हुआ. ज़िंदा रहने के लिए आखिरी लड़ाई लड़ता हुआ.

डायरेक्टर: डैनी बॉयल. जिन्होंने स्लमडॉग मिलियनेयर बनाई थी. 

फिल्म बहुत ही मोटिवेशनल है. इसके म्यूज़िक के लिए ए.आर. रहमान ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुए थे.

कहां देखेंगे – यूट्यूब पर यहां. 120 रुपए में. 

5. दिस इज़ नॉट ए फिल्म (2011)

प्लॉट: अपने घर में क़ैद जफ़र पनाही कैमरा उठाकर शूट करते हैं. उनकी ज़िंदगी का एक दिन. शहर में बिगड़ते हुए हालात. कोई घर में फंसा हुआ है, और कोई बाहर.

डायरेक्टर: ईरान के फिल्ममेकर जफ़र पनाही. उन्होंने फ़िल्म बनाई थी ‘ऑफसाइड’. सवाल किया कि लड़कियों को फुटबाल मैच देखने की परमिशन क्यों ना हो? अगली फिल्म ‘क्रिमसन गोल्ड’ में गरीबों के हक की बात कर दी. ईरान की मुस्लिम राइट-विंग सरकार को यह रास नहीं आया. और उन्हें उनके घर में बंद कर दिया 6 साल के लिए. ऊपर से 20 साल का बैन फिल्म बनाने पर. घर में बंद होने पर उनकी छटपटाहट दिखती है इस फिल्म में. जिसके टाइटल में कहा गया है. कि यह एक फिल्म नहीं है.

बहुत ही पर्सनल फिल्म है. साथ ही बहुत पोलिटिकल भी.

कहां देखेंगे – डिज़नी हॉटस्टार पर.

6. द शाइनिंग (1980)

प्लॉट: एक लेखक को एकांत चाहिए अपनी किताब लिखने के लिए. अपनी पत्नी और बेटे को लेकर एक होटल में चला जाता है. होटल बिल्कुल खाली है. वह खालीपन उसके दिमाग पर असर करने लगता है. और उसके बेटे ने रहस्यमयी दोस्त बना लिए हैं.

डायरेक्टर: स्टैनली कुब्रिक.

फेमस राइटर स्टीफन किंग की किताब पर बेस्ड है. लीड रोल में हैं जैक निकलसन. हॉरर फिल्म है, लेकिन बहुत आर्टिस्टिक भी. जो एक रेयर कॉम्बिनेशन है.

कहां देखेंगे – नेटफ्लिक्स पर.

7. लाइफ ऑफ़ पाई (2012)

प्लॉट: एक चिड़ियाघर का मालिक अपना घर शिफ्ट कर रहा है. समुद्र के रास्ते. तूफ़ान आता है, और सब ख़त्म कर देता है. एक लड़का बच जाता है. वह समुद्र के बीच नाव पर फंसा हुआ है. उसके साथ एक बाघ भी है.

डायरेक्टर: एंग ली. उन्होंने इस फिल्म के लिए ‘बेस्ट डायरेक्टर’ का ऑस्कर जीता.

फिल्म यान मार्टल के बुकर प्राइज़ जीतने वाले नॉवल पर बनी है. देखने में विज़ुअली स्टनिंग है. सोचने में फिलोसॉफिकल, और महसूस करने में स्पिरिचुअल है.

कहां देखेंगे – डिज़्नी हॉटस्टार और यूट्यूब पर.

8. बरिड (2010)  

प्लॉट: पॉल को जब होश आता है. तो अंधेरे में कुछ नहीं दिखता. वह उठ नहीं पा रहा. याद करने की कोशिश करता है. ओह, कुछ आतंकियों से उसकी टक्कर हुई थी. उसके सिर पर पत्थर लगा था. तभी फ़ोन बजता है. कहा जाता है कि रात नौ बजे तक पांच मिलियन डॉलर का इंतज़ाम कर दो. वर्ना वहीं छोड़ दिए जाओगे. कहां? ज़मीन के अंदर ताबूत में. पॉल के पास केवल उसका मोबाइल फ़ोन और एक लाइटर है. क्या वह बच पाएगा?

डायरेक्टर: रोड्रिगो कोर्तेस.

कहां देखेंगे – हुलु पर.


वीडियो देखें –  वो 8 जबरदस्त कॉमेडी फिल्म जिन्हें आप घर पर ऑनलाइन देख सकते हैं 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

शी- नेटफ्लिक्स वेब सीरीज़ रिव्यू

किसी महिला को संबोधित करने के लिए जिस सर्वनाम का इस्तेमाल किया जाता है, उसी के ऊपर इस सीरीज़ का नाम रखा गया है 'शी'.

असुर: वेब सीरीज़ रिव्यू

वो गुमनाम-सी वेब सीरीज़, जो अब इंडिया की सबसे बेहतरीन वेब सीरीज़ कही जा रही है.

फिल्म रिव्यू- अंग्रेज़ी मीडियम

ये फिल्म आपको ठठाकर हंसने का भी मौका देती है मुस्कुराते रहने का भी.

गिल्टी: मूवी रिव्यू (नेटफ्लिक्स)

#MeToo पर करण जौहर की इस डेयरिंग की तारीफ़ करनी पड़ेगी.

कामयाब: मूवी रिव्यू

एक्टिंग करने की एक्टिंग करना, बड़ा ही टफ जॉब है बॉस!

फिल्म रिव्यू- बागी 3

इस फिल्म को देख चुकने के बाद आने वाले भाव को निराशा जैसा शब्द भी खुद में नहीं समेट सकता.

देवी: शॉर्ट मूवी रिव्यू (यू ट्यूब)

एक ऐसा सस्पेंस जो जब खुलता है तो न सिर्फ आपके रोंगटे खड़े कर देता है, बल्कि आपको परेशान भी छोड़ जाता है.

ये बैले: मूवी रिव्यू (नेटफ्लिक्स)

'ये धार्मिक दंगे भाड़ में जाएं. सब जगह ऐसा ही है. इज़राइल में भी. एक मात्र एस्केप है- डांस.'

फिल्म रिव्यू- थप्पड़

'थप्पड़' का मकसद आपको थप्पड़ मारना नहीं, इस कॉन्सेप्ट में भरोसा दिलाना, याद करवाना है कि 'इट्स जस्ट अ स्लैप. पर नहीं मार सकता है'.

फिल्म रिव्यू: शुभ मंगल ज़्यादा सावधान

ये एक गे लव स्टोरी है, जो बनाई इस मक़सद से गई है कि इसे सिर्फ लव स्टोरी कहा जाए.