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पहाड़ों के इन छह अद्भुत टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से आपने कितने देखे हैं?

कोरोना लॉकडाउन के चलते आप घर में बंद हैं, तो क्या हुआ? ख़्वाबों में घूमने की मनाही थोड़े ना है. चलिए, आपको ले चलें पहाड़ों में. पांच खूबसूरत जगह, जो एक्टर-लेखक मानव कौल ने बताई हैं, ‘लल्लनटॉप’ सौरभ द्विवेदी से बातें करते हुए.

1. गुलिस्तां (जम्मू-कश्मीर)

श्रीनगर से 53 किलोमीटर दूर है बारामूला शहर. वहां से 17 किमी दूर है गुलिस्तां गांव. यहां तक सड़क के रास्ते आना ही संभव है.

Story1. Gulistan Landscape And Kahva
कश्मीर की वादियां; कहवा चाय

आने का सबसे अच्छा समय फरवरी. जब बागों में बहार आती है. फूल खिलते हैं. बसंती हवा गाती है.

सुंदर नज़ारे तो आने के लिए सबसे अच्छी वजह है ही. आप जानते हैं कि कश्मीर को ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है. मानव ने एक और खासियत बताई. यहां के लोगों की सादगी. आपको केसर-बादाम वाली कहवा चाय पिलाएंगे. मेहमान-नवाज़ी में आपके लिए बिछ जाएंगे. बातें करते हुए मुस्कुराएंगे.

मानव कौल वहां घूमने गए थे. वे कश्मीरी पंडित हैं, इसलिए बातों में एक नाज़ुक बात उठ गई. फिर राजनीति और आतंकवाद पर बात हुई. मामले कंट्रोवर्शियल थे. लेकिन कहवा में कड़वाहट नहीं आई. कुछ सर्द आहें निकलीं. लेकिन बातों में गर्मजोशी बनी रही. मानव को समझ में आया कि ये भी हमारे जैसे लोग हैं. इनकी भी वहीं कुछ आम जरूरतें हैं. ये भी चाहते हैं कि इनकी बात सुनी जाए.

2. स्पीति और सांगला घाटी (हिमाचल प्रदेश)

हवाई जहाज़ से शिमला पहुंचिए. फिर नारकंडा आकर एक दिन रुकिए. यहां की हवा को अपने अंदर भरने दें. बहुत हल्का महसूस करेंगे.

Story2. Spiti Nako Lake Copy
नाको झील, स्पीती घाटी

अगले दिन पहुंचिए कल्पा. शाम को मोनास्ट्री से सुनाई देगा ‘ओम मणिपद्मे हुम्’ का मंत्र. उस संगीत की तरंगें आपके शरीर में कंपन भर देंगी. आपका नाचने का मन करेगा. आप नाचिए, बिना शरमाए. कोई नहीं देख रहा. देख भी ले, तो क्या. फिर जब थक जाएं, तो निहारिए किन्नौर कैलाश की पर्वत श्रंखला को. बर्फ़ कैसे चमक रही सांझ की रोशनी में. घाटी से अब एक बादल उठने लगा है. देखते रहिए, जब तक वह पहाड़ों को ढक न ले. यही आपका मेडिटेशन वाला मोमेंट है. इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद अब आप थुकपा खाइए. चाहें तो पी सकते हैं. ये सूप वाले नूडल्स होते हैं.

कल्पा से आप स्पीति घाटी के ट्रैक पर निकलिए. पहले कल्पा से नाको आइए. झील किनारे बैठकर खुद से कुछ बातें करें. फिर नाको से तबो जाइए. कल्पा में तो फिर भी रेस्त्रां हैं, होटल हैं. जहां हॉट चॉकलेट भी मिल सकती है. लेकिन मानव कहते हैं कि स्पीति आकर आप जैसे हज़ारों साल पीछे चले जाएंगे. हरेक कृत्रिम चीज़ से दूर. प्रकृति के आंचल में. पहाड़ों के बीच. तारों भरे आसमां के नीचे. अपना मेंटल डीटॉक्स कर लीजिए इस स्पीति घाटी सभ्यता में.

Story2. Chitkul
छितकुल गांव, सांगला घाटी

वापस कल्पा आइए. कल्पा से पहुंच जाएं छितकुल. भारत-चीन बॉर्डर की तरफ यह आखिरी गांव है. यहां बसपा नदी के साथ सुर मिलाकर गाइए. कुछ देर बच्चे बन जाइए. पहाड़ों से उतरते हुए नदी पर एक पुल मिलेगा. दूसरी तरफ जाकर दिखेंगे टेरेस वाले खेत. फिर एक जंगल से गुज़रते हुए पहुंचेंगे एक ग्लेशियर के पास. देखते क्या हैं, ऊपर चढ़ जाइए. फिर स्केटबोर्ड पर बैठकर फिसलते हुए नीचे आइए. डर लगे तो ज़ोर से चिल्लाइए. कोई लोकल टूर गाइड मददगार साबित होगा.

यहां आने का सबसे अच्छा समय है सितम्बर.

3. सोनापानी (उत्तरांचल)

देहरादून से यह 347 किमी दूर है. हिमाचल, पंजाब या जम्मू-कश्मीर से आ रहे हैं, तो देहरादून वाला रास्ता लीजिए. वर्ना काठगोदाम की तरफ से जाइए. काठगोदाम इस लाइन पर आखिरी रेलवे स्टेशन है. वहां से 72 किमी दूर है सोनापानी गांव. अल्मोड़ा और मुक्तेश्वर का नाम तो सुना होगा. वहां से ज़्यादा दूर नहीं है.

Story3. Sonapani
सोनापानी गांव

यहां जंगल के अंदर एक रिज़ॉर्ट है. वहां जाकर रुकिए. जो किताब एक लंबे समय से आपके ज़ेहन में है, उसे कागज़ पर उतारिए. मानव ने तो यहां अपना एक कहानी संग्रह लिख डाला था. यहां मार्च और सितम्बर में फिल्म फेस्टिवल होता है. फिल्में देखने बहुत फिलॉसफर टाइप लोग आते हैं. फिल्में देखकर चर्चा का आनंद लीजिए. सिनेमा, समाज, इतिहास, राजनीति, अर्थशास्त्र. कोई भी टॉपिक चलेगा. किताबें पढ़ना, कविता लिखना, संगीत सुनना, फिल्में देखना, चर्चा करना. यानी पूरा इंटेलेक्चुअल टाइप माहौल.

उसके अलावा अप्रैल में एक फ़ूड फेस्टिवल होता है. सितम्बर में म्यूज़िक फेस्टिवल.

4. चैल (हिमाचल प्रदेश)

शिमला से केवल 45 किमी दूर है. सड़क के रास्ते यहां आ सकते हैं.

Story4. Chail Copy
चैल हिल स्टेशन (सोर्स – विवेक सिंह फोटोग्राफी)

शिमला के मुक़ाबले बहुत कम भीड़ है. इसलिए ज़्यादा शांति है. हरा भरा हिल स्टेशन, जहां हर तरफ देवदार के पेड़ हैं. कभी बादल घिर आते हैं. कभी सरसराती हवाएं कान में कुछ कह जाती हैं. बर्शते उनकी कोड लैंगवेज आप समझ पाएं.

यहां ट्रेकिंग कर सकते है. पैदल न चला जाए, तो घोड़े पर घूम सकते हैं. ‘काली का टिब्बा’ नाम का मंदिर है. जहां से शिवालिक श्रृंखला का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलेगा. एक जगह है साधुपुल. वहां नदी के पानी में पैर डुबोकर चाय पीजिए. चैल में दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड भी है. जंगली जानवर देखने हों, तो चैल सैंक्चुअरी चले जाइए. उन्हें देखिए पिंजरे के बजाए उनके प्राकृतिक हैबिटैट में.

मई-जून का महीना यहां घूमने के लिए अच्छा है.

5. चौकौरी (उत्तरांचल)

देहरादून से दूरी है 370 किमी. देहरादून ऊपर वाले गढ़वाल डिवीज़न में है. चौकोरी कुमाऊं डिवीज़न में पड़ता है. काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 190 किमी दूर है. डिस्ट्रिक्ट लगता है पिथौरागढ़.

Story5. Chaukori Copy
चौकोरी गांव

पहाड़ों और जंगलों के बीच छुपा हुआ यह छोटा सा गांव. ‘इन द मिडिल ऑफ़ नोवेयर’. क़रीबन 250 फैमिली यहां रहती हैं. एक सुंदर सी कॉटेज आपको मिल जाएगी. शहरों में सूरज निकलता है. एक दैनिक कर्मचारी की तरह. लेकिन चौकोरी में सूरज उगता है. सतरंगी छटा के सात घोड़ों वाले रथ पर. हिमालय की पहाड़ियों को सुनहरा रंगते हुए.

मानव के मन की मानें, तो यहां बारिश के मौसम में आइए. सौरभ कहते हैं कि सर्दियों में पहाड़ों का चक्कर लगाइए, ताकि सर्दियों में भी पहाड़ों को बेगाना महसूस न हो.

6. पारो (भूटान)

यह सुझाव सौरभ दे रहे हैं. ‘पारो’ शहर है भारत से बाहर भूटान देश में. राजधानी थिम्फू से 50 किमी दूर है. सीधे ‘पारो’ के लिए उड़ान भरिए. पारो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरिए या भूटान में फुंतशोलिंग से एंटर कर सकते हैं. और फिर सड़क के रास्ते ‘पारो’ पहुंच सकते हैं.

Story6. Paro Tigers Nest Copy
टाइगर्स नेस्ट मोनास्ट्री, भूटान

भूटान की एक आइकॉनिक तस्वीर आपने देखी होगी. पहाड़ों के बीच एक मोनास्ट्री की. उसका नाम है ‘टाइगर्स नेस्ट’. वहां की चढ़ाई यहीं पारो से शुरू होती है. खाने-पीने के लिए बीच में केवल एक दुकान मिलेगी. उसके अलावा कोई दुकानें नहीं, ढाबे नहीं, सड़क नहीं. केवल प्राकृतिक सुंदरता वाला कच्चा रास्ता. साथ ही यह आपकी फिटनेस का अच्छा इम्तिहान होगा.

पारो शहर उनके लिए बहुत अच्छा है, जिन्हें पहाड़ों की ऊंचाई से बेचैनी होती है. यहां आप नीचे घाटी में होंगे. और आपके चारों तरफ पहाड़. भूटान की संस्कृति का अनुभव कीजिए. यहां का आर्किटेक्चर, खाना, पहनावा, संगीत, लोकल मार्किट. रिनपुंग ज़ोंग का किला देख सकते हैं.

Story.6. Paro Hotel Copy
पारो नदी

शहर के बीच से बहती है पारो नदी. चमकता हुआ निर्मल पानी. जिसमें आप कयाक या राफ्ट चलाने का थ्रिल महसूस कर सकते हैं.

शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है. फिर भी अगर कभी-कभार पीते हैं, तो कुछ ख़ास है आपके लिए. आड़ू से बनी हुई लोकल वाइन. स्वर्ग के देवता भी शायद इसी शुद्ध, प्राकृतिक मदिरा का रसपान करते होंगे.


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