Submit your post

Follow Us

वो 6 कमाल की क्रिकेट सीरीज़ और डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में जो आपको ऑनलाइन ज़रूर देखनी चाहिए

लॉकडाउन ने जाने कितनी चाहतों पर ताला लगा रखा है! हम जैसे इंसानों का एक हिस्सा क्रिकेट के इर्द-गिर्द उमड़ता-घुमड़ता रहता है. हमने झुलसाती दुपहरी में रबर की गेंद और फट्टे पर सर्वस्व न्यौछावर किया है. दुकानों के बाहर घंटों खड़े होकर रोमांच जिया है. कमेंट्री की साफ़ आवाज़ के लिए रेडियो के साथ पेंडुलम हुए हैं. इस इश्क़ के लोगों के अपने-अपने किस्से हैं. इस दौर में पुरानी शो-रील ताज़ा होकर घूमती है. जिसे आंखों के ओसारे में हमेशा के लिए बिठाकर रख लेने का मन होता है.

क्या आपको भी जोर से क्रिकेट आया है! कुछ ठहरा हुआ लग रहा है? घबराईए मत. डटे रहिए, जैसे कि एक मंझा हुआ बल्लेबाज सबसे मुश्किल दौर में साधो सी शांति लिए अड़ा रहता है. 

Movie Recommendation Series The Lallantop Meri Movie List
यहां क्लिक कीजिए और दूसरों का टेस्ट भी देखिए.

साथ में क्रिकेट की ये 06 दमदार सीरीज़ और डॉक्यूमेंट्री देख डालिए. ताकि जब कोलाहल लौटे, आप और मज़बूत होकर बाहर निकलें.

1. अ बैट एंड बॉल वॉर – 1999

प्लॉट – 1998 में भारत और पाकिस्तान ने अपने-अपने इलाक़े में परमाणु परीक्षण कर लिया था. दोनों देशों में तनाव चरम पर था. इतना कि ये सीरीज़ खत्म होने के तीन महीने बाद ही कारगिल की लड़ाई होती है. जनवरी, 1999 में पाकिस्तान की टीम भारत के दौरे पर आती है. वसीम अकरम की कप्तानी में. इस पाकिस्तानी टीम को फॉलो करती है एक प्रोडक्शन टीम. ड्रेसिंग रूम के अंदर तक.

इधर शिवसेना अड़ी हुई थी कि ये सीरीज़ होने नहीं देंगे. फ़रवरी में दिल्ली में दूसरा टेस्ट होना था. 8 जनवरी को फ़िरोज़शाह कोटला की पिच खोद दी गई. पुलिस ने शिवसेना के चार कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया. ये चैप्टर खत्म हुआ तो स्टेडियम में सांप छोड़ने की धमकी मिली. तब पुलिस ने दिल्ली टेस्ट के लिए सपेरों की एक टीम को हायर किया, जो पूरे मैच के दौरान मैदान में सांप ढूंढते थे.

चेपॉक में दर्शकों का खड़े होकर पाकिस्तान के लिए तालियां बजाना हो या कुंबले के पारी में दस विकेट, 1999 की भारत-पाकिस्तान टेस्ट सीरीज़ कई मायनों में यादगार थी. राजनीतिक दुश्मनी के बीच किस तरह से क्रिकेट दिलों के तार जोड़ रहा था, इसकी बानगी आपको मिल जाएगी.

ये क्रिकेट पर बनी वो डॉक्यूमेंट्री है, जिसमें संगीत नुसरत फ़तेह अली ख़ान ने दिया है.

डायरेक्टर टोनी डेविस

कहां देख सकते हैं – यूट्यूब.

2. फ़ायर इन बेबीलोन – 2010

प्लॉट 70 और 80 के दशक की वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम की कहानी है. 1974 में क्लाइव लॉयड टीम के कप्तान बनते हैं. अलग-अलग प्रायद्वीपों से आए नौजवान मिलकर वेस्टइंडीज क्रिकेट बनाते हैं. इनको एक सांचे में ढालने का काम लॉयड ने बखूबी किया. 1975 में पहला वर्ल्ड कप जीते. लेकिन साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया के साथ टेस्ट सीरीज़ में 5-1 की हार मिली. डेनिस लिली और जेफ़ थॉमसन की बाउंसर गेंदों का जवाब वेस्टइंडीज के पास नहीं था.

इस हार के बाद कप्तान ने कहा – ‘ये दोबारा नहीं होगा.’

क्लाइव लॉयड ने तरक़ीब निकाली. अपने हथियार तेज करने पर जोर दिया. इस कोशिश से सामने आई फ़ास्ट बॉलिंग की वो पौध, जिसने दुनियाभर के बल्लेबाजों में ख़ौफ़ भर दिया. माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर, कॉलिन क्रॉफ्ट, इनको ‘खतरनाक चौकड़ी’ का नाम मिला. वेस्टइंडीज क्रिकेट के सुनहरे दौर की नींव रखी जा रही थी. 1976 में ये टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई. टोनी ग्रेग ने दावा किया कि वेस्टइंडीज टीम को घुटनों पर ला देंगे.

लेकिन हुआ इसके उलट. वेस्टइंडीज ने अपने सुर बदल लिए थे. तेज़ और ऊंची लहराती गेंदों ने इंग्लैंड को धराशायी कर दिया था. इंग्लिश मीडिया ने कहा कि वेस्टइंडीज का खेल क्रिकेट के लिए खतरनाक है. बॉलर्स को ‘टेररिस्ट’ कहा गया गया. ये उस अजेय वेस्टइंडीज टीम के बनने की कहानी है, जो 1980 से 1995 तक एक भी टेस्ट सीरीज़ नहीं हारी.

इस डॉक्यूमेंट्री में रेयर फुटेज हैं, उस दौर के दिग्गजों के इंटरव्यूज़ हैं और वेस्टइंडीज का ख़ालिसपन भी है. मज़ा आएगा.

डायरेक्टर स्टीवन रिले

कहां देख सकते हैं – यूट्यूब.

3. द टेस्ट: अ न्यू एरा फॉर ऑस्ट्रेलियाज़ टीम – 2020

प्लॉट  मार्च, 2018 में ऑस्ट्रेलिया का साउथ अफ़्रीका दौरा शुरू होता है. तीसरे टेस्ट का तीसरा दिन. ऑस्ट्रेलिया के कैमरन बैंक्रॉफ्ट एक पीली पट्टी छिपाते हुए पकड़े जाते हैं. वो रेगमाल कागज़ था. नई गेंद पर रगड़ कर पुरानी बनाने के लिए वो मैदान के अंदर लाए थे. क्रिकेट में ये गैरकानूनी है. तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक तहलक़ा मच जाता है. अगले दिन का खेल शुरू होने से पहले कप्तान और उपकप्तान बदल दिया जाता है. स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर और कैमरन बैंक्रॉफ्ट अपने ही देश में विलेन बन जाते हैं. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इन तीनों खिलाड़ियों पर बैन लगा देता है.

इस दौर में जस्टिन लेंगर को कोच बनाया जाता है. कप्तानी टिम पेन को दी जाती है. इनके कंधों पर ऑस्ट्रेलिया को उबारने का भार दिया जाता है. क्रिकेट जितना मैदान के अंदर खेला जाता है, उससे ज़्यादा मैदान के बाहर रचा जाता है. बॉल-टेंपरिंग की शर्म से एशेज रीटेन करने का पूरा किस्सा कैमरे में कैद हुआ है. 2019 के वर्ल्ड कप में तीनों प्लेयर्स पर लगा बैन खत्म हो चुका होता है. डेविड वॉर्नर सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहे. वर्ल्ड कप के दो हफ्ते बाद ऐशेज़ सीरीज़ की बारी आती है.

ऐशेज़ की शुरुआत में, पूरा स्टेडियम रुला देने की हद तक स्लेजिंग करता है. जैसे-जैसे सीरीज़ आगे बढ़ती है, समूचा इंग्लैंड स्टीव स्मिथ को आउट करने का रास्ता खोजने में जुटा होता है. आठ एपिसोड की सीरीज़ आपको बताएगी कि क्रिकेटर भी आम इंसानों की तरह ही हंसते, तनाव लेते और रोते भी हैं. ये डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ क्रिकेट का इंसानी चेहरा दिखाती है.

डायरेक्टर एड्रियन ब्राउन

कहां देख सकते हैं एमेज़ॉन प्राइम.

4. क्रिकेट फ़ीवर: मुंबई इंडियंस – 2019

प्लॉट इंडियन प्रीमियर लीग की चमक-धमक को मिस कर रहे हैं, तो ये सीरीज़ आपको परफ़ेक्ट सुकून देगी. 2018 के सीजन में मुंबई इंडियंस के सफ़र की कहानी है. अलग-अलग कल्चर से आए क्रिकेटर एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करते हैं. तमाम कोशिशों के बाद भी एक टीम की तरह खेलने का सुख फ्रेंचाइज लीग में नहीं मिलता. सबकुछ मैच के नतीजे पर डिपेंड करता है.

फ्रेंचाइज लीग में एक्सपेरिमेंट का समय नहीं होता. चोट के बावजूद खिलाड़ी बाहर बैठना अफोर्ड नहीं कर पाते. क्योंकि उनमें अपनी जगह को लेकर असुरक्षा होती है. ऐसे ही क्रिकेट के अंदरूनी किस्सों से भरी ये सीरीज़ बहुत पर्दे के पीछे की दुनिया लेकर हमारे सामने आती है. 

2018 में मुंबई इंडियंस लीग फेज में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी. अगले साल उसने वापसी की और ख़िताब अपने नाम किया. आईपीएल के इतिहास की सबसे कामयाब टीम की असफलता का सफ़र कैसा था, ये खिलाड़ियों, मैनेजमेंट और फ़ैंस के नज़रिए से एक साथ देखा जा सकता है.

प्रोड्यूसर – कोंडे नास्ट एंटरटेनमेंट कंपनी

कहां देख सकते हैं नेटफ्लिक्स.

5. आउट ऑफ़ द ऐशेज़ – 2010

प्लॉट हिंदी में कहें तो गुमनामी से बाहर निकलने की दास्तां. एक देश जो दशकों से लड़ाई से घिरा है. बम-विस्फोट, ड्रोन हमला, सुसाइड बॉम्बिंग अफ़ग़ानिस्तान की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा हो चुके हैं. ऐसे में इस मुल्क़ ने क्रिकेट में खुशी तलाशी. एक कैमरा क्रू लगभग दो सालों तक अफ़ग़ानिस्तान की क्रिकेट यात्रा का हिस्सा रहा.

ये डॉक्यूमेंट्री अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के 2010 के ICC वर्ल्ड टी-20 में क्वालीफाई करने की कहानी है. कैसे एक खेल ने पूरे देश को मुस्कुराने का मौका दिया. अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट की बुनियाद की कहानी है. ये सफ़र 2008 में शुरू हआ था. जब कोच और टीम ने सपना देखा था तब उनके पास खेलने के मैदान नहीं थे, अच्छी क्वालिटी के स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स नहीं थे, लेकिन जुनून था. कमियों के बावजूद कभी शिकायत नहीं.

वर्ल्ड टी-20 खेलने के जब टीम वापस अपने देश लौटती है, काबुल की सड़कों पर लोगों की भीड़ झूमती है. ये अफ़ग़ानिस्तान के लिए अलहदा नज़ारा था. अफ़ग़ानों को इस खेल पर इतना भरोसा है कि वो कहते हैं – “अगर इस दुनिया को कोई चीज़ युद्ध की गर्मी से बचा सकती है, तो वो क्रिकेट है.”

डायरेक्टर टिमोथी अल्बोन, लूसी मार्टिन्स, लेजली नॉट.

कहां देख सकते हैं – यूट्यूब.

6. बॉडीलाइन: इट्स जस्ट नॉट क्रिकेट -2002

प्लॉट 1932-33 में इंग्लैंड की टीम ऐशेज़ खेलने ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पहुंची. इंग्लैंड की कमान डगलस जार्डिन के हाथों में थी, वहीं ऑस्ट्रेलिया के कप्तान थे बिल वुडफॉल. इस सीरीज़ में एक नए-नवेले खिलाड़ी पर सबकी नज़र बनी हुई थी. वो था 24 साल का नौजवान डॉन ब्रैडमैन. 1930 की ऐशेज़ सीरीज़ में ब्रेडमैन ने अकेले 974 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को उसके घर में 2-1 से मात दी थी.

दो साल बाद इंग्लैंड की टीम ऐशेज़ खेलने ऑस्ट्रेलिया आई. उन्हें अपना बदला पूरा करना था. जार्डिन ब्रैडमैन को रोकने का प्लान लेकर आए थे. साथ में लाए थे दो हथियार, बिल वोक और हेरोल्ड लारवुड. उन्हें साफ़ निर्देश था कि वो पूरी ताकत से बैट्समैन को निशाना बनाकर लेग साइड में बाउंसर्स फेंकें. ताकि बैट्समेन गेंद से बचने की कोशिश में किनारा देकर कैच थमा बैठे. इसी को लेग थ्योरी या बॉडीलाइन कहा गया.

कंगारू इसके लिए तैयार नहीं थे. ऑस्ट्रेलिया के कई खिलाड़ी इस सीरीज़ में बुरी तरह घायल हुए. इंग्लिश टीम पर क्रिकेट को कलंकित करने का आरोप लगा. कहानी इतनी बिगड़ गई कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक संबंधों में खटास आने लगी थी.

ऑस्ट्रेलिया के कप्तान बिल वुडफ़ॉल ने एक प्राइवेट मीटिंग में कहा – ‘यहां पर सिर्फ़ एक टीम क्रिकेट खेल रही है और वो इंग्लैंड नहीं है.”

ये बयान लीक होने के बाद बखेड़ा अलग ही लेवल पर पहुंच गया था.

ये डॉक्यूमेंट्री क्रिकेट और राजनीति की गुत्थमगुत्थी का दिलचस्प ब्यौरा है. क्रिकेट इतिहास की सबसे विवादित और रोमांचक टेस्ट सीरीज़ की कहानी में क्रिकेट के दीवानों के लिए बहुत कुछ है.

डायरेक्टर लिंकन टेनर.

कहां देख सकते हैं – यूट्यूब.


तो ये 06 सीरीज़ देखिए. और देखने के बाद कुछ कहने-सुनने को रह जाए, तो यहां पहुंचिए – abhishek.theallantop@gmail.com


Video : नेट्फ्लिक्स पर ये चार सीरीज़ आपको इसी जन्म में देख लेनी चाहिए

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

शी- नेटफ्लिक्स वेब सीरीज़ रिव्यू

किसी महिला को संबोधित करने के लिए जिस सर्वनाम का इस्तेमाल किया जाता है, उसी के ऊपर इस सीरीज़ का नाम रखा गया है 'शी'.

असुर: वेब सीरीज़ रिव्यू

वो गुमनाम-सी वेब सीरीज़, जो अब इंडिया की सबसे बेहतरीन वेब सीरीज़ कही जा रही है.

फिल्म रिव्यू- अंग्रेज़ी मीडियम

ये फिल्म आपको ठठाकर हंसने का भी मौका देती है मुस्कुराते रहने का भी.

गिल्टी: मूवी रिव्यू (नेटफ्लिक्स)

#MeToo पर करण जौहर की इस डेयरिंग की तारीफ़ करनी पड़ेगी.

कामयाब: मूवी रिव्यू

एक्टिंग करने की एक्टिंग करना, बड़ा ही टफ जॉब है बॉस!

फिल्म रिव्यू- बागी 3

इस फिल्म को देख चुकने के बाद आने वाले भाव को निराशा जैसा शब्द भी खुद में नहीं समेट सकता.

देवी: शॉर्ट मूवी रिव्यू (यू ट्यूब)

एक ऐसा सस्पेंस जो जब खुलता है तो न सिर्फ आपके रोंगटे खड़े कर देता है, बल्कि आपको परेशान भी छोड़ जाता है.

ये बैले: मूवी रिव्यू (नेटफ्लिक्स)

'ये धार्मिक दंगे भाड़ में जाएं. सब जगह ऐसा ही है. इज़राइल में भी. एक मात्र एस्केप है- डांस.'

फिल्म रिव्यू- थप्पड़

'थप्पड़' का मकसद आपको थप्पड़ मारना नहीं, इस कॉन्सेप्ट में भरोसा दिलाना, याद करवाना है कि 'इट्स जस्ट अ स्लैप. पर नहीं मार सकता है'.

फिल्म रिव्यू: शुभ मंगल ज़्यादा सावधान

ये एक गे लव स्टोरी है, जो बनाई इस मक़सद से गई है कि इसे सिर्फ लव स्टोरी कहा जाए.