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6 विवादित फिल्में जिनमें धाकड़ औरतें देख घबरा गया सेंसर बोर्ड

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव की प्रशंसित फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था और फिल्म बैन हो गई. इसकी जो वजह बोर्ड ने बताई वो बचकानी थी. तो प्रोड्यूसर प्रकाश झा अपील ट्राइब्यूनल के पास गए और वहां फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज करने के आदेश दे दिए गए. और सेंसर बोर्ड ने उसे पास कर दिया. अब अगले हफ्ते तक रिलीज डेट की घोषणा होगी.

झा ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब फिल्म को पास न करने का सेंसर बोर्ड का फैसला और उसके शब्द उन्होंने पढ़े तो उन्हें हंसी आई. क्योंकि भला किसी कहानी को भला ऐसे कौन देखता है. जैसा कि हर समाज में होता है सेंसर बोर्ड भी चाहता है कि भारतीय समाज में औरतें उसी तरीके से उठे, बैठे, सोचे और जिए जैसे मर्द चाहते हैं. औरतों की उन्मुक्तता से उन्हें डर लगने लगता है.

ऐसी कई फिल्में पहले भी रही हैं जिनमें महिलाओं के आज़ाद और स्वच्छंद कैरेक्टर, उनका ठोस चित्रण देख सेंसर बोर्ड को असुरक्षा होने लगी और सेंसर ने इन कहानियों को छेड़ने या रोकने की कोशिश की. जैसे कि कुछ ये फिल्में.

#1. लिपस्टिक अंडर माई बुर्का
ये चार औरतों की कहानी है जो अपनी-अपनी आज़ादी की तलाश में हैं. एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की है जो अपनी cultural identity में फंसी है. उसे बुर्का पहनकर कॉलेज जाना पड़ता है लेकिन उसकी हसरत एक पॉप सिंगर बनने की है. एक लड़की है जो ब्यूटीशियन है. वो अपने छोटे शहर की दम घोंटू जिंदगी से दूर जाना चाहती है. तीसरी कैरेक्टर एक पीड़ित हाउसवाइफ है जिसके तीन बच्चे हैं. वो सेल्सवुमन होने की एक दूसरी ही दुनिया में भी जीती है. चौथी है एक 55 साल की विधवा जो टेलीफोन के रोमांस के जरिए अपनी यौनिकता को फिर से जिंदा पाती है. सेंसर ने इसे रोकते हुए अपने फैसले में लिखा, “ये फिल्म ‘महिला केंद्रित’ है. उनकी फैंटेसीज़ के बारे में है. इसमें सेक्सुअल सीन हैं, गालियां हैं, पॉर्नोग्राफिक ऑडियो है. इसके अलावा ये फिल्म समाज के किसी एक ख़ास तबके के लिए सेंसेटिव टच लिए हुए है. इसलिए इस फिल्म को सर्टिफिकेशन के लिए अस्वीकृत किया जाता है.” हालांकि ट्राइब्यूनल के फैसले के बाद अब फिल्म रिलीज होगी.

#2. अनफ्रीडम
डायरेक्टर राज अमित कुमार की ये फिल्म 2015 में भारत में रिलीज होने की हसरत पाले ही रह गई. सीबीएफसी ने इसे पूरी तरह बैन कर दिया. कहानी में लीला और सखी टेलर नाम की दो युवतियों के बीच संबंध होते हैं. लीला का पिता पुलिसवाला है और रुढ़िवादी विचारधारा का है. इसमें दो तरह के न्यूड सीन थे. एक जहां दोनों युवतियां प्रणय करती हैं. दूसरा जब पुलिसवाले दोनों को उठा लेते हैं और निर्वस्त्र करके थाने में रेप करते हैं और लीला का पिता सामने बैठकर ये देखता है. सेंसर में पहले चरण पर तो फिल्म को पास ही नहीं किया गया. फिर रिवाइजिंग कमिटी के पास मेकर्स गए तो उन्हें कहा गया कि संबंधित दृश्यों को काटा जाए. डायरेक्टर ने मना किया और अपीलिएट ट्राइब्यूनल के पास गए. इसके बाद फिल्म को बैन ही कर दिया गया.

#3. फायर
1998 में भारत पहुंची फायर को डायरेक्ट किया था दीपा मेहता ने. ये फिल्म सीता और उसकी जेठानी राधा की कहानी है. दोनों करीब आती हैं और शारीरिक संबंध स्थापित करती हैं. इन दोनों किरदारों को निभाने वाली नंदिता दास और शबाना आज़मी के बीच ये न्यूड सीन फिल्माया गया था जिसे लेकर बहुत विवाद हुआ. सेंसर बोर्ड ने हालांकि इसे एडल्ट सर्टिफिकेट देकर बाकी कंटेंट तो पास कर दिया लेकिन उन्होंने सीता के नाम पर आपत्ति कर दी. उनको लगता होगा कि सीता नाम की किसी युवती के मन में समलैंगिक इच्छाएं नहीं हो सकतीं. अंत में डायरेक्टर दीपा को ये नाम बदलना पड़ा. फिल्म रिलीज हुई तो शिव सैनिकों ने बंबई के मल्टीप्लेक्स में तोड़फोड़ शुरू कर दी. बाद में फिल्म को फिर से सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया और उतार ली गई. फिर कई सृजनात्मक लोग मिलकर मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गए और अगले साल 1999 में फिल्म को रिलीज करवाया गया.

#4. मार्गरीटा, विद अ स्ट्रॉ
2015 में आई ये फिल्म लैला नाम की एक युवती की कहानी है जिसे सेरेब्रल पाल्सी है जिसके कारण वो व्हीलचेयर पर रहती है. उसे बोलने में दिक्कत होती है. चल नहीं सकती. लेकिन स्टीरियोटाइप्स के उलट वो बहुत ही सामान्य रूप से अपनी हसरतों, लव लाइफ और यौन आकांक्षाओं को पूरा करना चाहती है. डायरेक्टर शोलानी बोस ने ये कहानी अपनी ही एक रिश्तेदार को देखकर कहानी लिखी. लैला का रोल करने वाली कल्कि कोचलिन को बहुत सराहा गया.

सेंसर की परीक्षण समिति को फिल्म के कंटेंट से उलझन हुई. उन्होंने डायरेक्टर से कहा कि बोर्ड के नैतिक दिशा-निर्देश हैं जिनके हिसाब से फिल्म को देखना पड़ेगा. उन्होंने लैला और उसकी दोस्त (सयानी गुप्ता) के बीच एक किसिंग सीन को कम करने के लिए कहा. शोनाली ने इस पर कहा कि ये सीन वैसे भी सिर्फ 12 सेकेंड का है और दोनों युवतियों के बीच ये प्यार का पहला पल है इसलिए उसे छोटा नहीं किया जा सकता. सेंसर ने उस सीन पर आपत्ति की जिसमें लैला के किरदार को शौच करवाने के लिए कोई ले जाता है. शोनाली ने कहा था कि उनकी चचेरी बहन को भी सेरेब्रल पाल्सी है और जब कोई और नहीं होता तो उसके पिता को उसे शौच करवाने के लिए ले जाना पड़ता है. ये सीन दर्शक को ललचाने के लिए नहीं है बल्कि वास्तविकता महसूस करवाने के लिए है. बाद में शोनाली फिल्म को रिवाइजिंग कमिटी के पास ले गई और फिल्म को पास किया गया.

#5. बैंडिट क्वीन
डायरेक्टर शेखर कपूर की इस फिल्म के केंद्र में एक ऐसी दलित महिला थी जिसके साथ सामंतवादी और मर्दवादी समाज ने बर्बरता की सारी हदें पार की और वो डाकू बनी. इसी कहानी को उसके असल स्वरूप में फिल्माया गया तो सेंसर के हाथ-पैर फूल गए. भारत में फिल्म को बैन कर दिया गया. कई आपत्तियां थीं. फिल्म में एक सीन था जिसमें फूलन देवी के किरदार को ऊंची जाति के कुछ लोग नंगा करके गांव के बीच बने कुएं पर पानी लेने भेजते हैं. ये पहली ऐसी भारतीय फिल्म थी जिसमें आप किसी स्त्री के साथ होने वाली इस बर्बरता को उसके एकदम raw रूप में देख सकते थे. सीमा बिश्वास ने ये फुल फ्रंटल न्यूड सीन किया. फिल्म में रेप के दो सीन थे जिन्हें उनकी पूरी पशुता दर्शक को महसूस करवाने के तरीके से शूट किया गया था. इन दृश्यों को लेकर बहुत विवाद हुआ. फिल्म को बैन करने की राजनीतिक वजहें भी थीं. शेखर कपूर को ये फिल्म भारत में रिलीज करवाने के लिए सेंसर से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी.

#6. एंग्री इंडियन गॉडेसेज़
डायरेक्टर पैन नलिन की इस फिल्म की कहानी कुछ युवतियों के बारे में है जो अपनी दोस्ती की शादी की खुशखबरी सेलिब्रेट करने के लिए इकट्ठा होती हैं और एडवेंचर जैसा माहौल हो जाता है. इस दौरान ये उन्मुक्त होकर एंजॉय करती हैं. पारंपरिक सेंसर को ये ओपन महिलाएं पसंद नहीं आईं और फिल्म को ज्यादा ही महीन नजर से देखा गया. ये सोचकर कि कहीं कोई पोलिटिकल स्टेटमेंट या महिला क्रांति जैसा न हो सेंसर ने फिल्म में 16 कट लगाने का ऑर्डर दिया. कट ऐसी-ऐसी बातों पर थे कि हैरत होती है. बोर्ड ने ‘सरकार’, ‘इंडियन फिगर’ और ‘आदिवासी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति की. यहां तक कि इस महिला प्रधान फिल्म में काली मां की फोटो तक बोर्ड को खटक गई. जबकि इसी फिल्म को दुनिया भर के फेस्टिवल्स से पसंद किया गया.

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