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जब करिया कोट में दिखी हिरोइन

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एक दौर था जब बॉलीवुड में अदालतों के लंबे और रोचक सीन हुआ करते थे. एक ऐसी ऑडियंस ही पैदा हो गई थी जो अदालती जुबान, दांव-पेच, दलीलों और उसके मेलोड्रामा की भारी मुरीद हुआ करती थी. मामला बिगड़ता था, तभी हीरो पक्ष का वकील एक बड़ा सबूत न जाने कहां से लाकर पेश कर देता और पब्लिक ताली पीट-पीटकर हाथ सुजा लेती थी. बदबूदार सिंगल स्क्रीन थियेटर भी ‘आह’ और ‘वाह’ के स्वरों से गूंजने लगते थे.

समय के साथ बॉलीवुड में अदालत का चित्रण बदला और नाटकबाजी कुछ कम हुई. लेकिन चूंकि सिनेमा समाज का अक्स है, तो महिला वकीलों की जगह कम ही रही. आज भी हिंदी फिल्मों में महिला वकीलों के किरदार बहुत कम देखने को मिलते हैं. फिल्म ‘जज्बा’ में ऐश्वर्या राय बच्चन के रोल के बाद इस पर बात करने का यह सही वक्त है. जरा पीछे लौटते हैं और देखते हैं कि बॉलीवुड में महिला वकीलों के कौन से रोल यादगार रहे हैं:

1. रानी मुखर्जी

फिल्म: वीर जारा (2004)
किरदार: सामिया सिद्दीकी

वीर नाम का एक भारतीय है जो 22 साल से पाकिस्तान की एक जेल में बंद है और जिसने किसी को अपनी कहानी नहीं बताई है. उसका केस मिलता है नई नवेली वकील सामिया सिद्दीकी (रानी मुखर्जी) को. सामिया का काम इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि उसके खिलाफ केस लड़ रहा है उसका एक्स बॉस जाकिर अहमद (अनुपम खेर), जो आज तक एक केस भी नहीं हारा.

एक पाकिस्तानी वकील की मेहनत से हिंदुस्तान की एक प्रेम कहानी फिर से आबाद हो जाती है.

बस सामिया चैलेंज की तरह इस केस को लेती है और भारत जाकर वीर की प्रेमिका जारा (प्रीति जिंटा) को खोज निकालती है. जारा अब तक यही समझती थी कि वीर की मौत तो बहुत पहले एक बस हादसे में हो चुकी है. सामिया उसे पाकिस्तान लाकर कोर्ट में पेश कर देती है. बस फिर हैपी एंडिंग. जज साहब वीर को रिहा कर देते हैं और पूरे पाकिस्तान की तरफ से माफी मांगते हैं.

2. करीना कपूर

फिल्म: ऐतराज (2004)
किरदार: प्रिया सक्सेना

राज (अक्षय कुमार) का सेक्शुअल फायदा उठाने की कोशिश करती है, उसके बॉस की कमउम्र वाइफ सोनिया (प्रियंका चोपड़ा), जो किसी जमाने में उसकी गर्लफ्रेंड भी थी. राज इससे साफ इनकार कर देता है तो वह अंजाम भुगतने की धमकी देती है और अगले दिन अपने पति यानी बॉस को झूठी शिकायत कर देती है कि राज ने उससे संबंध बनाने की कोशिश की. राज से इस्तीफा देने को कहा जाता और केस जाता है कोर्ट में.

आखिरी समय में राज की पत्नी प्रिया (करीना कपूर) कोर्ट में अपने पति का केस लड़ती है और केस जीत भी जाती है.  फिर ये फिल्म बन जाती है एक पत्नीव्रता पती और सोशियली एम्पावर्ड बीवी की दास्तान.

राज बेकसूर साबित होता है, कंपनी का बॉस प्रिया को छोड़ देता है, जिसके बाद गिल्ट में बंदी छत से कूदकर सुसाइड कर लेती है. कहानी खतम-फिनिश.

3. सुष्मिता सेन

फिल्म: मैं ऐसा ही हूं (2005)
किरदार: नीति खन्ना

मानसिक रूप से बीमार एक शख्स इंद्रनील ठाकुर (अजय देवगन) अपनी बेटी गुनगुन से बहुत प्यार करता है. गुनगुन की मां माया त्रिवेदी घर छोड़कर जा चुकी है. इंद्रनील का ससुर दयानाथ त्रिवेदी (अनुपम खेर) गुनगुन को अपने साथ लंदन ले जाना चाहता है और इंद्रनील के खिलाफ कोर्ट केस कर देता है.

इसी दौरान सीन में एंट्री होती है सिंगल मदर वकील नीति खन्ना (सुष्मिता सेन) की. उसके बेटे की हो जाती है इंद्रनील से दोस्ती और फिर नीति लड़ती है उसका केस. केस हाथ से जाने ही वाला होता है कि वह इंद्रनील से शादी करने का फैसला करती है.

अदालती कार्यवाही में 20 मिनट के ब्रेक के बाद वह शादी के कागजात पेश कर देती है और गुनगुन इंद्रनील और उसकी पत्नी नीति खन्ना को सौंप दी जाती है.

ससुरजी भी बाद में कायदे में माफी मांगकर लंदन लौट जाते हैं. फैमिली वाली फिल्म.

4. नरगिस

फिल्म: आवारा
किरदार: रीता

एक किडनैपर और अमीर जज की घर से निकाली गई पत्नी से पैदा हुआ बेटा है राज (राज कपूर). उसे स्कूली दिनों में एक लड़की अच्छी लगती है, जिसका नाम है रीता. किसी वजह से राज स्कूल से निकाल दिया जाता है और रीता दूसरे शहर चली जाती है.

वक्त बीतता है, हालात का मारा राज फंस जाता है क्राइम की दुनिया में. एक दिन उसका सामना होता है रीता से जो अब वकील बनने वाली है.

दोनों एक दूसरे को पहचान लेते हैं और प्यार रिज्यूम हो जाता है. फिर एक दिन राज को उस अपराधी के बारे में पता चलता है जिसने बदला लेने के लिए उसकी मां को किडनैप किया और उसे गर्भवती कर दिया. गुस्से में राज उसकी हत्या कर देता है और फंस जाता है कोर्ट केस में. इस केस में जज होता है उसका बाप, जिसने कई साल पहले उसकी गर्भवती मां को घर से निकाल दिया था.

राज उस पर भी हमला कर देता है और एक और केस में फंस जाता है. वहां उसका केस रीता लड़ती है. राज को तीन साल की सजा मिलती है और रीता उसका इंतजार करने का वायदा करती है.

5. लीजा रे

फिल्म: कसूर (2001)
किरदार: सिमरन भार्गव

बीवी की हत्या के केस में फंसा शेखर (आफताब शिवदासानी) पहुंचता है वकील सिमरन (लीजा रे) के पास. लीजा कहती है कि वह केस तभी लड़ेगी जब शेखर वाकई बेकसूर हो.

शेखर अपने निर्दोष होने की दुहाई देता है और वह केस लड़ने को तैयार हो जाती है. इसी दौरान दोनों को हो जाता है प्यार और दोनों हो जाते हैं हमबिस्तर.

केस में शेखर बेकसूर साबित होता है. इसी रात  सिमरन को शेखर के यहां एक टाइपराइटर के रूप में सबूत मिलता है और उसके पांव तले जमीन खिसक जाती है. सिमरन को पता लगता है कि शेखर ही असली कातिल है. वह टाइपराइटर लेकर पुलिस स्टेशन के लिए निकल पड़ती है. शेखर को यह पता लग जाता है और वह उसे मारने निकल पड़ता है. लेकिन सेल्फ-डिफेंस में सिमरन ही उसे मार डालती है.

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