Submit your post

Follow Us

अजय देवगन के 38 मनोरंजक किस्सेः कैसे वो पैदा होने से पहले ही हीरो बन चुके थे!

5
शेयर्स

#1: अजय जब 8-9 साल के थे तब फिल्में एडिट करने लगे थे. उनके पिता वीरू देवगन बॉलीवुड में बड़े एक्शन डायरेक्टर थे. जब वीरू अपने एक्शन सीन बाद में एडिट कर रहे होते थे तो अजय भी उनको असिस्ट करते थे. ये भी तब जब एक्शन दृश्यों को एडिट करना सबसे टेढ़ा काम होता था. जब 12-13 साल के हुए तो पिता ने उनको एक कैमरा लाकर दिया था. उसके बाद अजय उस उम्र से अपनी ख़ुद की फिल्में बनाने लगे थे.

#2: बॉलीवुड में 1991 से अजय एक्शन फिल्मों का नया चेहरा हो गए थे. टफ हीरो की छवि उनकी हमेशा रही. लेकिन असल जिंदगी में उनके हाथ बहुत सॉफ्ट हैं.

#3: ये 1996-97 की बात है. ‘इश्क’ फिल्म की शूटिंग चल रही थी. डायरेक्टर इंद्र कुमार अपने असिस्टेंट्स को बता रहे थे आगे क्या करना है. और तब फिल्म के दो सितारे – अजय देवगन और आमिर खान एक ख़ुराफात प्लान कर रहे थे. वे अपने सह-अभिनेता दिलीप ताहिल के साथ प्रैंक करने वाले थे. तो उन्होंने किया ये कि बिना किसी को ख़बर दिए किसी असिस्टेंट से खुजली वाला पाउडर मंगवाया. फिर अजय ने चालाकी से पाउडर का पैकेट आमिर के हाथ में दे दिया जो दिलीप को बातों में उलझाए हुए थे. मौका मिलते ही आमिर ने ध्यान बंटाया और दिलीप के पीछे जाकर पाउडर छिड़क दिया. कुछ पल में दिलीप अपनी गर्दन खुजलाने लगे और बोले, “लग रहा है मुझे कुछ काट गया.” इस पर गंभीर होते हुए आमिर ने कहा, “ज़रूर कोई मच्छर होगा.” और उसके बाद अजय और सब लोग ठहाके मारकर हंसने लगे. तब जाकर दिलीप को भी सारी बात समझ में आ चुकी थी.

फिल्म "इश्क" का ये सीन नहीं भूले होंगे. अजय और आमिर के साथ इसमें नजर आ रहा है बॉन्ड 007 बंदर भी जो दो पहियों पर गाड़ी चला लेता है.
फिल्म “इश्क” का ये सीन नहीं भूले होंगे. अजय और आमिर के साथ इसमें नजर आ रहा है बॉन्ड 007 बंदर भी जो दो पहियों पर गाड़ी चला लेता है.

#4: फिल्मों में अजय की एंट्री ‘फूल और कांटे’ के उस सीन से हुई थी जिसमें उनका कैरेक्टर अजय दो चलती हुई बाइक के पीछे खड़ा होकर कॉलेज में घुसता है. बाद में वो पैरों को पूरा खोल लेता है और बाइक्स चल रही होती हैं. अजय की ये leg split बाद में रोहित शेट्टी की ‘गोलमाल’ सीरीज़ और अश्विनी धीर की ‘सन और सरदार’ (2012) में भी रखी गई थी जिनमें वो चलती कारों और दौड़ते घोड़ों पर खड़े होकर आते हैं. हालांकि ये सीन टेक्नीकल मदद से और ग्राफिक्स से किए गए थे. लेकिन ‘फूल और कांटे’ वाला सीन ऐसे ही फिल्माया गया जैसे वो दिखता है. कैसे फिल्माया गया?

अजय के पिता वीरू और डायरेक्टर कोहली ने इस इंट्रोडक्शन सीन को प्लान किया था. उस सीन को शूट करते हुए न तो केबल यूज़ की गईं और न ही कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया गया. अजय बताते हैं कि वो बहुत ही खतरनाक औऱ मुश्किल सीन था. और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे करेंगे. लेकिन उनकी शुरू से एक्शन में दिलचस्पी थी और वो अपने पिता की एक्शन टीम के साथ उठते-बैठते और एडवेंचर करते थे तो उनमें स्टंट्स करने की क्षमता थी. तो अजय ने वो सीन करना शुरू किया और हो गया. इसमें उन्हें कोई भी दिक्कत नहीं आई.

#5: जब अभिषेक बच्चन को ऐश्वर्या राय से प्यार हुआ था तो उन्होंने अपने रिश्ते के बारे में सबसे पहले अजय देवगन को बताया था. उसके बाद बाकी सब को.

#6: कॉलेज टाइम में अजय गुंडागर्दी भी करते थे. इसी वजह से वो दो बार जेल में बंद रहे. एक बार तो वो अपने पिता की गन भी बिना पूछे लेकर चले गए थे.

#7: गोविंदा के साथ 1997 में अजय ‘दिल दीवाना ना माने’ नाम की फिल्म कर रहे थे, जो आखिर बन नहीं पाई.

#8: अपनी फिल्मों का एक्शन करते हुए अजय के शरीर की बहुत सी हड्डियां टूट चुकी हैं. टखना, कूल्हे की हड्डी, पसलियां. एक्शन फिल्मों के दौर में जब वो टॉप पर थे तब उन्होंने कहा था कि करीब-करीब उनके “शरीर की हर हड्डी टूट चुकी है.” उनके पिता वीरू देवगन ने भी अपने बारे में कहा था – “आज मेरे जिस्म की एक एक हड्डी टूट चुकी है.”

#9: वर्ष 1994 में रिलीज हुई रेखा स्टारर फिल्म ‘मैडम एक्स’ के कुछ एक्शन दृश्यों का डायरेक्शन अजय ने किया था. वे जब 15 साल के थे तब से पिता वीरू उनको अपनी फिल्मों के एक्शन दृश्यों के हिस्से शूट करने के लिए भेज देते थे. ऐसा उन्होंने कई फिल्मों में किया.

#10: डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘कंपनी’ (2002) अजय की फिल्मोग्राफी में एक प्रमुख नाम है. ये फिल्म उन्होंने कैसे की इसके पीछे भी एक किस्सा है. हुआ ये कि रामू उनके ऑफिस आए थे एक फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने. अजय ने उसे सुना और उन्हें अच्छी लगी. लेकिन उस साल अजय के पास डेट्स नहीं थीं औऱ रामू भी फिल्म को अगले साल ही शुरू करना चाहते थे क्योंकि तब वे ‘कंपनी’ नाम की दूसरी फिल्म में बिज़ी थे. तो बात वहीं ख़त्म हो गई. लेकिन रामू ने अगली सुबह अजय को फोन किया और कहा कि उन्हें ज़रूरी बात करनी है. वे उनके ऑफिस पहुंचे और बोले कि – “जब मैं कल आपको स्क्रिप्ट सुना रहा था तब मेरा ध्यान कहीं और था. जैसे आप बैठे थे, सुन रहे थे, उसमें मैं सिर्फ मलिक (‘कंपनी’ में अजय का कैरेक्टर) को ही देख पा रहा था. क्या आप ‘कंपनी’ की स्क्रिप्ट सुनेंगे?” उसके बाद अजय ने वो स्क्रिप्ट सुनी और फिल्म के लिए हां कर दी.

'कंपनी' में मलिक के रोल में अजय और चंंद्रू बने विवेक ओबेरॉय. माना जाता है कि मलिक का रोल दाऊद इब्राहीम पर आधारित था.
‘कंपनी’ में मलिक के रोल में अजय और चंंद्रू बने विवेक ओबेरॉय. माना जाता है कि मलिक का रोल दाऊद इब्राहीम पर आधारित था.

#11: बॉबी देओल और ट्विंकल खन्ना की डेब्यू फिल्म ‘बरसात’ 1995 में रिलीज हुई थी लेकिन ये फिल्म 1991 में बननी शुरू हो गई थी. जानकर हैरान होंगे कि इस फिल्म के लिए बॉबी और टि्वंकल का वीडियो टेस्ट अजय देवगन ने लिया था.

#12: अजय ने विक्रम भट्ट के साथ मिलकर एक वीडियो डायरेक्ट किया था जिसमें बॉबी देओल ने काम किया था. ये तब की बात है जब वो कॉलेज में थे. इस वीडियो में गाने थे, एक्शन था और इसकी शूटिंग खंडाला में की गई थी. कॉलेज में ही पढ़ रहीं लुब्ना सिद्दीक ने इसमें बॉबी के साथ काम किया था. इसी तरह एक और वीडियो बनाया गया था जिसमें अतुल अग्निहोत्री ने अभिनय किया था.

#13: एक कहानी बताई जाती है कि 1993 में अजय देवगन ने प्रोड्यसूर राजीव कुमार की एक फिल्म ‘गुरु चेला’ साइन की थी जिसे डेविड धवन डायरेक्ट करने वाले थे. लेकिन बाद में राजीव और डेविड के बीच न जाने क्या हुआ कि फिल्म कैंसल हो गई. उसी दौरान अजय भी न जाने डेविड की किस बात से नाराज़ हुए कि उनके पीछे डंडा लेकर भागे और उनको स्टूडियो से बाहर खदेड़ दिया.

#14: आज अजय एक टाइम में एक ही फिल्म करते हैं लेकिन करियर के एक दौर में वो एक साथ 15 से 16 फिल्में भी कर रहे थे. एक साथ कई फिल्में करने वाले दौर में वो हर फिल्म की रोज़ तीन घंटे शूटिंग करते थे. कई बार दिन में तीन-चार फिल्मों के शूट पर वो एक ही जींस में चले जाते थे और हर फिल्म में उनकी वही जींस नजर आती थी.

#15: अपने समय के सुपरस्टार्स में अजय अकेले हैं जो बहुत कम उम्र से फिल्म वितरण का काम भी करने लगे थे. तब उन्हें इस बिजनेस का ज्ञान अपने समकक्ष शाहरुख, सलमान, अक्षय वगैरह से बहुत ज्यादा था. जो पहली फिल्म उन्होंने डिस्ट्रीब्यूट की थी वो थी 1994 में रिलीज हुई डायरेक्टर गोविंद निहलानी की ‘द्रोहकाल’ जिसमें ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह और आशीष विद्यार्थी लीड रोल में थे. इसे उन्होंने बॉम्बे में नहीं, सेंट्रल इंडिया में डिस्ट्रीब्यूट किया था. आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर बनी ये फिल्म 1996 में होने जा रहे ऑस्कर अवॉर्ड में इंडिया की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर भेजी गई थी. फिल्म ने अजय के लिए कोई मुनाफा नहीं कमाया. इसीलिए बतौर डिस्ट्रीब्यूटर वो ‘दिलजले’ (1996) को अपनी पहली फिल्म मानना पसंद करते हैं जो हिट रही थी.

#16: उनका नाम अजय, फिल्मों में आने के बाद रखा गया था. उनका घर का नाम विशाल देवगन है. नाम बदलने के पीछे की कहानी ये है कि जब 1991 में अजय डेब्यू करने वाले थे, तब विशाल नाम के दूसरे एक्टर भी लॉन्च हो रहे थे. जैसे मनोज कुमार के बेटे विशाल भी फिल्मों में आ रहे थे. इसी वजह से अजय का नाम बदला गया ताकि वे अलग लग सकें.

अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में अपनी लीडिंग लेडीज़ - करिश्मा कपूर, शिल्पा शिरोडकर और काजोल के साथ अजय देवगन.
अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में अपनी लीडिंग लेडीज़ – करिश्मा कपूर, शिल्पा शिरोडकर और काजोल के साथ अजय देवगन.

#17: अजय देवगन ने एक्टर बनने से पहले ‘बैंडिट क्वीन’ और ‘मासूम’ जैसी फिल्मों के डायरेक्टर शेखर कपूर को असिस्ट किया था. ये 1990-91 की बात रही होगी. हुआ ये कि एक बार अजय अपने घर किसी एक्शन सीन को फिल्मा रहे थे. शेखर किसी काम से उनके घर आए. उन्होंने देखा कि अजय ने नए तरीके से एक क्रेन शॉट फिल्माया है. वो देखकर शेखर ने अपनी नई फिल्म ‘दुश्मनी’ में उन्हें असिस्टेंट बना लिया. अजय सुबह कॉलेज जाते थे और उसके बाद शेखर के साथ फिल्म सेट पर काम करते थे. ये फिल्म बाद में अटकती चली गई और शेखर ने फिल्म छोड़ दी. उनके बाद तीन-चार डायरेक्टर्स आते-जाते गए और 1996 में जाकर ये सनी देओल, जैकी श्रॉफ और मनीषा कोइराला स्टारर फिल्म रिलीज हुई. और तब तक अजय बहुत बड़े स्टार बन चुके थे.

#18: ऐसा कहा जाता है कि अजय ने अपनी पत्नी काजोल की ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ कभी नहीं देखी.

#19: करियर के शुरू में अजय देवगन फीस नहीं लेते थे, बल्कि प्रोड्यूसर से कुछ टैरेटरीज़ ले लेते थे. यानी अलग-अलग इलाके जहां फिल्म रिलीज होनी है. उन जगहों पर होने वाली फिल्म की कमाई अजय की होती थी. बाद में उन्होंने इसे बदल दिया. फिर वो एक्टिंग करने के लिए फीस लेते थे और फिल्म वितरण का काम अलग से करते थे.

अजय देवगन और काजोल 1995 में आई फिल्म "गुंडाराज" के गाने में - "न जाने इक निगाह में क्या ले गया कोई."
अजय देवगन और काजोल 1995 में आई फिल्म “गुंडाराज” के गाने में – “न जाने इक निगाह में क्या ले गया कोई.”

#20: वे मनोज बाजपेयी और सुष्मिता सेन को लेकर ‘बर्फ’ नाम से एक फिल्म प्रोड्यूस करने वाले थे. लेकिन बाद में फिल्म बंद करनी पड़ी.

#21: एक्टिंग, डायरेक्शन, प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन के अलावा अजय देवगन कई और बिजनेस भी करते हैं. उन्होंने सोलर एनर्जी में भी निवेश कर रखा है. उन्होंने अपनी थियेटर चेन भी शुरू कर रखी है. अभी उनके पास 27 के करीब सिनेमा स्क्रीन हैं औऱ वे पूरे भारत में 150 के करीब अपनी स्क्रीन्स बनाने पर काम कर रहे हैं. उन्होंने देश के कुछ हिस्सों के सिंगल स्क्रीन भी टेकओवर किए हैं जो नहीं चल रहे थे और उनकी जगह मल्टीप्लेक्स बना रहे हैं.

#22: अजय कहते हैं कि उनके घर का माहौल मिडिल क्लास है. वे अपने माता-पिता के साथ ही रहते हैं. उनकी मां ही घर चलाती हैं.

अजय अपने पिता वीरू देवगन और मां वीना के साथ.
अजय अपने पिता वीरू देवगन और मां वीना के साथ.

#23: पैदा होने से पहले ही अजय देवगन हीरो बन चुके थे. कैसे? ऐसे. ये 1957 की बात है जब 14 साल के वीरू देवगन बॉलीवुड में घुसने की हसरत लिए अमृतसर में अपने घर से भाग गए थे. बिना टिकट लिए फ्रंटीयर मेल पकड़ ली. बंबई जाने के लिए. लेकिन टिकट ली नहीं थी तो दोस्तों के साथ हफ्ता भर जेल में रहना पड़ा. बाहर निकले तो बंबई शहर और भूख ने उनको तोड़ दिया. जहां उनके साथ आए कुछ दोस्त टूटकर अमृतसर लौट गए. वीरू नहीं गए. वे टैक्सियां साफ करने लगे. कारपेंटर का काम करने लगे. कुछ हौसला लौटा तो फिल्म स्टूडियोज़ के चक्कर निकालने लगे. उन्हें एक्टर बनना था. लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि हिंदी फिल्मों में जो चॉकलेटी चेहरे एक्टर और स्टार बने हुए हैं उनके सामने उनका कोई चांस नहीं है. वीरू ख़ुद बताते हैं – “जब मैंने आइने में अपना चेहरा देखा तो दूसरे स्ट्रगलर्स के मुकाबले खुद को बहुत कमतर महसूस किया. इसलिए मैंने हार मान ली. लेकिन मैंने प्रण लिया कि मेरा पहला बेटा एक हीरो बनेगा.” और वीरू के पहले बेटे विशाल (अजय) बड़े होकर हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार बने.

#24: वीरू ने अपने बेटे को हीरो बनाने के लिए बहुत मेहनत की. उन्हें कम उम्र से ही फिल्ममेकिंग, एक्शन वगैरह से जोड़ा. तब से ही ये सब अजय के हाथों से करवाते थे. कॉलेज गए तो उनके लिए डांस क्लासेज शुरू करवाईं. घर में जिम बनावाया. उर्दू की क्लास लगवाई. हॉर्स राइडिंग वगैरह सब करवाया. बाद में अजय सफल भी हुए. और इतने बरस बाद वो आज भी इस पर नजर रखते हैं कि अजय बतौर स्टार अपने ऊपर कितना काम कर रहे हैं. जब अजय कुछ दिन जिमिंग या वर्कआउट नहीं करते तो वीरू उनको टोकते हैं कि – “देख, तेरा पेट बाहर आ रहा है.”

#25: काजोल से अजय पहली बार डायरेक्टर अनीस बज़्मी की फिल्म ‘हलचल’ (1995) के सेट पर मिले थे. उस फिल्मों में दोनों ने प्रेमियों की भूमिका की थी. लेकिन तब इन दोनों की जमी नहीं. काजोल को अजय बिलकुल पसंद नहीं आए. उन्हें लगा कि वे घमंडी और नकचढ़े आदमी हैं. लेकिन दोनों की अगली फिल्म ‘गुंडाराज’ के साथ सब कुछ बदल गया. दोनों में दोस्ती हुई. हालांकि तब भी प्यार नहीं हुआ था. उस समय काजोल किसी और को डेट कर रही थीं. औऱ अपनी उस लव लाइफ की सारी बातें वो अजय को बताती थीं और उनसे सलाह लेती थीं. तकरीबन उसी समय काजोल को अहसास हुआ कि अजय उनकी जिंदगी में बहुत खास रोल निभाने वाले हैं. उसके बाद दोनों में प्यार हुआ. 1999 में दोनों ने शादी कर ली.

अजय देवगन के घर पर पारंपरिक अंदाज में 24 नवंबर 1999 को दोनों की शादी हुई.
अजय देवगन के घर पर पारंपरिक अंदाज में 24 फरवरी 1999 को दोनों की शादी हुई.

#26: अजय की डेब्यू फिल्म थी 1991 में आई ‘फूल और कांटे’. जानकर हैरानी होगी कि ये फिल्म पहले अक्षय कुमार कर रहे थे. अक्षय फिल्म में फाइनल थे. उन्होंने स्क्रिप्ट सुनी. फिल्म के गानों को बनाने का सेशन हुआ तब भी अक्षय रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बैठकर हिस्सा ले रहे थे. लेकिन शूटिंग से पहले उन्हें फिल्म से निकाल दिया गया और अजय को लिया गया. अक्षय ने एक बातचीत में बताया था, “रात को मैं अपना आइस बॉक्स तैयार कर रहा था. शूटिंग के पहले दिन के लिए रेडी हो रहा था. तभी मुझे फोन आया कि भैया आप कल मत आना. कोई और आ रहा है.”

#27: वहीं अजय को ये फिल्म कैसे मिली इसका वर्ज़न भी जानने लायक है. अजय तब कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे और पार्टटाइम शेखर कपूर को उनकी फिल्म ‘दुश्मनी’ में असिस्ट कर रहे थे. तब तक अजय ने फिल्मों में आने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया था. एक शाम वे घर लौटे तो डायरेक्टर संदेश/कूकू कोहली उनके पिता वीरू देवगन के साथ बैठे थे. वीरू ने कहा कि संदेश ‘फूल और कांटे’ नाम से एक फिल्म बना रहे हैं और तुम्हे इसमें लेना चाहते हैं. इस पर अजय की पहली प्रतिक्रिया थी, “आप पागल हो क्या? अभी मैं सिर्फ 18 साल का हूं और अपनी लाइफ एंजॉय कर रहा हूं.” अजय ने बिलकुल मना कर दिया और चले गए. ये अक्टूबर 1990 की बात थी. और अगले महीने नवंबर में वो उस फिल्म की शूटिंग कर रहे थे.

तीन साल बाद 1994 में अजय और अक्षय ने उन्हीं डायरेक्टर संदेश कोहली की ब्लॉकबस्टर 'सुहाग' में साथ काम किया.
तीन साल बाद 1994 में अजय और अक्षय ने उन्हीं डायरेक्टर संदेश कोहली की ब्लॉकबस्टर ‘सुहाग’ में साथ काम किया.

#28: अजय के करियर की एक बहुत बड़ी फिल्म थी ‘पृथ्वीराज संयुक्ता’. ये वीर यौद्धा पृथ्वीराज चौहान की वीरता और प्रेम कहानी पर आधारित थी. इसमें अजय पृथ्वीराज का और ऐश्वर्या राय संयुक्ता का रोल कर रहे थे. लेकिन सनी देओल भी उस समय कथित तौर पर इसी विषय पर फिल्म बनाने वाले थे. ऐसे ही कारणों से ये फिल्म बंद हो गई.

#29: करियर के एकदम शुरू में ही उन्होंने ‘सिंगर’ नाम की फिल्म भी की थी. काफी शूटिंग भी हो चुकी थी. लेकिन तभी फिल्म के प्रोड्यूसर समीर और हनीफ, लीगल मामले में फंस गए. 1993 में हुए बंबई बम धमाकों में उनका नाम आया. उनकी सारी फिल्में या तो बंद हो गईं या फिर लंबे समय तक स्थगित हो गईं, जैसे ‘सनम’. ‘सिंगर’ भी ऐसी फिल्म थी जो कभी रिलीज नहीं हो पाई. इस फिल्म में अजय का डबल रोल था. शिल्पा शिरोडकर और नग़मा इसकी हीरोइन थीं. नदीम-श्रवण का म्यूज़िक था. इसे डिज़्नी के टीवी शो ‘डबल स्विच’ की रीमेक बताया जा रहा था.

#30: अजय देवगन की दो बहनें हैं जिनके बारे में कुछ भी जानने में नहीं आता. नीलम और कविता उनके नाम है. उनकी बहनों की शादियां हुई थीं तो पूरा बॉलीवुड बधाई देने पहुंचा था. सलमान, अक्षय, राज कुमार, जीतेंद्र, अमरीश पुरी, सुनील दत्त, राजेश खन्ना, बॉबी देओल, सुनील शेट्टी, ऋषि कपूर, अनुपम खेर, शेखर कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, राहुल रवैल, सुभाष घई और कई अन्य. इस वीडियो में इन्हें देख सकते हैं.

#31: अजय ने अब तक दो फिल्में डायरेक्ट की हैं – ‘यू मी और हम’ (2008) और ‘शिवाय’ (2016). कोई भी हिट नहीं हुई. इनमें अजय का काफी पैसा लगा.

#32: अजय मानते हैं कि 90 के दशक में वो अकेले कमर्शियल स्टार थे जिसने समानांतर सिनेमा में काम करना शुरू किया था. इस कड़ी में उन्होंने महेश भट्ट के साथ ‘ज़ख़्म’ (1999), गोविंद निहलानी की ‘तक्षक’ (1999) और रितुपर्णो घोष की ‘रेनकोट’ (2004) की.

#33: संजय लीला भंसाली की 2015 में आई ‘बाजीराव मस्तानी’ रणवीर सिंह के करियर के लिए बहुत बड़ी फिल्म साबित हुई है. भंसाली ने सबसे पहले जब ये फिल्म अनाउंस की थी (करीब 12 साल पहले) तब उन्होंने बाजीराव के रोल में अजय देवगन को लिया था. भंसाली के लिए बाजीराव का मतलब अजय देवगन ही थे. लेकिन बात नहीं बनी और ये प्रोजेक्ट लटकता गया.

संजय की फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' (1999) में अजय और ऐश्वर्या.
संजय की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ (1999) में अजय और ऐश्वर्या.

#34: अजय अपनी फिल्मों के सेट पर सह-कलाकारों के साथ डरा देने वाले प्रैंक करते हैं लेकिन कई बार नतीजे कितने एक्स्ट्रीम होते हैं ये कल्पना से परे है. जैसे, बहुत बरस पहले का किस्सा है. अजय अपनी एक फिल्म की शूटिंग के लिए आउटडोर लोकेशन पर थे. उस फिल्म में उनके साथ एक एक्टर था जिसकी नई-नई शादी हुई थी और वो अपनी दुल्हन को भी साथ लाया था. वो एक छोटे शहर की साधारण लड़की थी. उस फिल्म की शूटिंग पूरी रात चला करती थी. मज़ाक करने के लिए अजय और बाकी लोग दुल्हन के कान भरते थे कि उसके पति का किसी के साथ अफेयर चल रहा है. वो कहते थे कि उसका पति रात को कहीं और जाता है क्योंकि रात में तो कोई शूटिंग ही नहीं होती. अजय उसे कहते कि मैं तो शूटिंग खत्म करके रात 10.30 बजे अपने कमरे में जाकर सो जाता हूं. दुल्हन जवाब में उनको कहती कि वो जानती है कि आप हमेशा प्रैंक करते हो इसलिए उसे अपने पति पर पूरा भरोसा है. लेकिन अजय मज़ाक में लगे रहे. आठ दिन बीत गए. नौवें दिन वो उठे तो पता चला कि उस दुल्हन ने नींद की गोलियां खा ली हैं. उसे अस्पताल ले जाया गया. वो अपने पति से लड़ रही थी कि वो रात को कहां जाता है और बात इतनी बढ़ गई कि उसने जान देने की कोशिश की.

#35: राकेश रोशन की फिल्म ‘करण अर्जुन’ में सलमान खान और शाहरुख खान ने पिछले जन्म में कत़्ल किए भाइयों का रोल किया था जिनका पुनर्जन्म होता है और वो बदला लेने लौटते हैं. ये फिल्म सुपरहिट रही थी और सलमान के करियर की प्रमुख फिल्मों में से एक साबित हुई. मज़े की बात ये है कि इसमें करण का रोल पहले अजय देवगन कर रहे थे. यहां तक कि शाहरुख और अजय देवगन के पोस्टर भी रिलीज किए जा चुके थे. लेकिन किन्हीं कारणों से अजय ने ये फिल्म छोड़ दी और सलमान खान को इस रोल में लिया गया.

हाल ही में अजय के पिता वीरू देवगन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया था. मंच पर रोहित शेट्टी थे. उन्होंने अपना सिर उनके कदमों में रखकर कहा था - "आज मैं जो भी हूं इसकी वजह से ही हूं."
हाल ही में अजय के पिता वीरू देवगन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया था. मंच पर रोहित शेट्टी थे. उन्होंने अपना सिर उनके कदमों में रखकर कहा था – “आज मैं जो भी हूं इनकी वजह से ही हूं.”

#36: रोहित शेट्टी 2003 में फिल्म ‘ज़मीन’ से डायरेक्टर बने. उनकी और अजय की जोड़ी (गोलमाल, सिंघम फ्रैंचाइज़ के साथ) बाद में बहुत हिट हुई. रोहित के डायरेक्शन वाली 12 में से 10 फिल्मों में अजय लीड हैं. लेकिन इन दोनों की दोस्ती इनकी पहली फिल्म से भी बहुत पुरानी है. अजय के बॉलीवुड में आने के पहले से दोनों दोस्त हैं. दोनों के पिता एक्शन कोरियोग्राफर हुआ करते थे. अजय के पिता वीरू देवगन औऱ रोहित के पिता एम. बी. शेट्टी. रोहित के पिता 1982 में चल बसे. ऐसे में रोहित ने हमेशा अजय को बड़ा भाई माना. अजय की डेब्यू फिल्म ‘फूल और कांटे’ में रोहित असिस्टेंट थे. उसके बाद भी अजय की फिल्म ‘सुहाग’, ‘हकीकत’, ‘प्यार तो होना ही था’, ‘हिंदुस्तान की कसम’ और ‘राजू चाचा’ से भी रोहित जुड़े रहे.

#37: महेश भट्ट के निर्देशन वाली ‘ज़ख़्म’ अजय देवगन के करियर की सबसे सम्मानित फिल्म कही जा सकती है. उन्हें इसके लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिला और फिल्म ने उनकी छवि को बहुत प्रशंसनीय बनाया. अजय इन्हीं डायरेक्टर महेश भट्ट की एक और फिल्म करने वाले थे. फिल्म का नाम था – ‘गिरवी’. इसमें उनके साथ फीमेल लीड थीं पूजा भट्ट. शूटिंग 20 परसेंट पूरी हो चुकी थी लेकिन फिर किन्हीं कारणों से इसे बंद कर दिया गया.

'ज़ख़्म' के एक दृश्य में अजय.
‘ज़ख़्म’ के एक दृश्य में अजय.

#38: अजय साल 2000 को अपने करियर का सबसे बुरा वक्त मानते हैं. उस साल उन्होंने अपने भाई अनिल देवगन को डायरेक्टर के तौर पर ‘राजू चाचा’ से लॉन्च किया. फिल्म में उन्होंने बहुत पैसा लगाया और सारा डूब गया क्योंकि बजट बहुत ज्यादा हो गया था. तब फिल्म पर उन्होंने 28 करोड़ रुपए लगा दिए थे जो आज के 150-200 करोड़ के बराबर है. अजय ने सारा पैसा लोगों से लिया था और डूबने के बाद उन्हें लौटाना था. वो साल उनके लिए बहुत टफ रहा.

– – } ~ { – –

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
38 Points bout Ajay Devgn, his family and films that you will be amazed and entertained reading!

पोस्टमॉर्टम हाउस

मेड इन हैवन: रईसों की शादियों के कौन से घिनौने सच दिखा रही है ये सीरीज़?

क्यों ये वेब सीरीज़ सबसे बेस्ट मानी जाने वाली सीरीज़ 'सेक्रेड गेम्स' से भी बेस्ट है.

गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 4 - रिव्यू

सब कुछ तो पिछले एपिसोड में हो चुका, अब बचा क्या?

मूवी रिव्यू: सेटर्स

नकल माफिया कितना हाईटेक हो सकता है, ये बताने वाली थ्रिलर फिल्म.

फिल्म रिव्यू: ब्लैंक

आइडिया के लेवल पर ये फिल्म बहुत इंट्रेस्टिंग लगती है. कागज़ से परदे तक के सफर में कितनी दिलचस्प बन बाती है 'ब्लैंक'.

'जुरासिक पार्क' जैसी मूवी के डायरेक्टर ने सत्यजीत राय की कहानी कॉपी करके झूठ बोला!

जानिए क्यों राय अपनी वो हॉलीवुड फिल्म न बना पाए, जिसकी कॉपी सुपरहिट रही थी, और जिसे फिर बॉलीवुड ने कॉपी किया.

ढिंचाक पूजा का नया गाना, वो मोदी विरोधी हो गईं हैं

फैंस के मन में सवाल है, क्या ढिंचाक पूजा समाजवादी हो गई हैं?

गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 3 - रिव्यू

एक लंबी रात, जो अंत में आपको संतुष्ट कर जाती है.

कन्हैया के समर्थन में गईं शेहला राशिद के साथ बहुत ग़लीज़ हरकत की गई है

पॉलिटिक्स अपनी जगह है लेकिन ऐसा घटिया काम नहीं होना था.

एवेंजर्स एंडगेम रिव्यू: 11 साल, 22 फिल्मों का ग्रैंड फिनाले, सुपरहीरोज़ का महाकुंभ और एक थैनोस

याचना नहीं, अब रण होगा!

क्या शीला दीक्षित ने कहा कि सरकारी स्कूल में बूथ न बनें, वरना लोग स्कूल देख AAP को वोट दे देंगे?

ज़ी रिबप्लिक के बाकी ट्वीट पढ़ेंगे तो पूरा मामला क्लियर हो जाएगा.