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अशोक कुमार की 32 मज़ेदार बातेंः इंडिया के पहले सुपरस्टार थे पर कहते थे 'भड़ुवे लोग हीरो बनते हैं'

आज ही के दिन दादामोनी ने हमें अलविदा कह दिया था. उनकी ये बातें जान लेंगे तो गुजरे ज़माने के एक्टर्स के बारे में अपनी बोरिंग राय बदल देंगे.

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//1.  कलकत्ता से वकालत पढ़े अशोक को फिल्में देखना बहुत पसंद था. क्लास के बाद वे अपने दोस्तों के साथ थियेटर चले जाते थे. तब आई हीरो के. एल. सहगल की दो फिल्मों से वे बहुत प्रभावित हुए – ‘पूरण भगत’ (1933) और ‘चंडीदास’ (1934). वे तत्कालीन बंगाल में आने वाले भागलपुर में जन्मे थे. उनके पिता कुंजलाल गांगुली वकील थे और मां गौरी देवी एक धनी बंगाली परिवार से थीं. मध्य प्रदेश में खंडवा के बेहद धनी गोखले परिवार ने उनके पिता को अपना निजी वकील बनाकर बुलाया तो उनका परिवार खंडवा में ही बस गया.

2.  शुरू में वे एक्टर नहीं डायरेक्टर बनना चाहते थे. क्योंकि उन दिनों एक्टिंग को गंदा पेशा माना जाता था. अशोक कुमार का कहना था, “उन दिनों कॉल गर्ल हीरोइनें बनती थीं और भड़ुवे (दलाल) हीरो बनते थे.”

बॉम्बे टॉकीज़ की फिल्म 'आज़ाद' (1940) में अशोक कुमार.
बॉम्बे टॉकीज़ की फिल्म ‘आज़ाद’ (1940) में अशोक कुमार.

3.  उनकी छोटी बहन के पति शशधर मुखर्जी हिमांशु राय की कंपनी बॉम्बे टॉकीज में साउंड इंजीनियर थे और प्रोडक्शन के अन्य विभागों से जुड़े थे. वे अशोक कुमार को राय के पास लेकर गए. राय ने उन्हें एक्टर बनने के लिए कहा लेकिन अशोक ने मना कर दिया. उन्हें टेक्नीकल डिपार्टमेंट में काम करना था. राय ने उन्हें कंपनी में रख लिया. अशोक बाद में डायरेक्शन में भी असिस्ट करने लगे. सब एक्टर्स को उनके सीन समझाते थे.

4.  बतौर एक्टर अपनी पहली ही फिल्म ‘जीवन नैया’ (1936) में अशोक कुमार ने ख़ुद एक गाना गाया था. इसके बोल थे – “कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा”. बाद में उनके भाई किशोर कुमार ने 1961 में फिल्म ‘झुमरू’ में यही गाना रिवाइव किया. वे फिल्म के हीरो थे, म्यूजिक भी कंपोज किया था और ये गाना भी उन्होंने अपनी आवाज में गाया था.

‘कोई हमदम न रहा’ – अशोक कुमार की आवाज़ मेंः

‘कोई हमदम न रहा’ – किशोर कुमार की आवाज़ मेंः

5.  ‘जीवन नैया’ की शूटिंग के दौरान हिमांशु राय की बीवी यानी फिल्म की हीरोइन देविका रानी हीरो नजमुल हसन के साथ भाग गईं. बाद में दोनों में झगड़ा हो गया तो लौट आईं. राय ने अशोक कुमार से हीरो बनने के लिए कहा. लेकिन वे नहीं माने. बहुत समझाया और राय ने कहा कि वे ही उन्हें इस मुसीबत से निकाल सकते हैं. उन्हें यकीन दिलाया कि उनके यहां अच्छे परिवारों वाले, शिक्षित लोग ही एक्टर होते हैं तब अशोक माने और ये उनकी डेब्यू फिल्म साबित हुई.

6.  जब अशोक हीरो बने तो उनके घर खंडवा में कोलाहल मच गया. उनकी तय शादी टूट गई. मां रोने लगीं. उनके पिता नागपुर गए. वहां अपने कॉलेज के दोस्त रवि शंकर शुक्ला से मिले जो तब मुख्य मंत्री थे. उन्होंने स्थिति बताई और अपने बेटे को कोई नौकरी देने की बात कही. शुक्ला ने दो नौकरियों के ऑफर लेटर दिए. एक था आय कर विभाग के अध्यक्ष का पद जिसकी महीने की तनख्वाह 250 रुपये थी.

7.  पिता अशोक से मिले और एक्टिंग छोड़ने को कहा. अशोक हिमांशु राय के पास गए और उन्हें नौकरी के कागज़ दिखाए और कहा कि उनके पिता बाहर खड़े हैं और उनसे बात करना चाहते हैं. राय ने अकेले में उनके पिता से बात की. थोड़ी देर बाद उनके पिता उनके पास आए और नौकरी के कागज़ फाड़ दिए. उन्होंने अशोक से कहा, “वो (हिमांशु राय) कहते हैं कि अगर तुम यही काम करोगे तो बहुत ऊंचे मुकाम तक पहुंचोगे. तो मुझे लगता है तुम्हें यहीं रुकना चाहिए.”

अशोक कुमार.
अशोक कुमार.

8.  उन्होंने न तो थियेटर किया था, न एक्टिंग का कोई अनुभव था. ऐसे में अशोक कुमार के अभिनय में पारसी थियेटर का लाउड प्रभाव नहीं था. यही उनकी खासियत बनी. वे हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार थे और उनकी एक्टिंग एकदम नेचुरल थी. जो आज तक एक्टर्स हासिल करने की कोशिश करते हैं. इसके अलावा हिमांशु राय और देविका रानी ने भी उन्हें सबकुछ सिखाया. वे उन्हें अंग्रेजी फिल्में देखने के लिए भेजते थे. हम्प्री बोगार्ट जैसे विदेशी एक्टर्स को देखकर और उनकी स्टाइल व अपने विश्लेषण से अशोक ने अभिनय सीखा.

9.  सुबह का नाश्ता वे ठाठ से करते थे. उनका कहना था कि एक्टर लोग पूरे दिन कड़ी मेहनत करते हैं और ब्रेकफास्ट दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है. इसी से पूरे दिन दृश्यों को करते हुए उनमें ऊर्जा बनी रहती थी.

10.  उनका ज्यादा लोकप्रिय नाम दादामोनी पड़ा. हालांकि ये सही संबोधन नहीं था. मूल रूप से उन्हें दादामणि कहते थे लेकिन इसे मोनी/मुनि समझ लिया गया.

देविका रानी के साथ फिल्म 'अछूत कन्या' (1936) के म्यूजिक कवर पर अशोक कुमार.
देविका रानी के साथ फिल्म ‘अछूत कन्या’ (1936) के म्यूजिक कवर पर अशोक कुमार.

11.  अपने समय में (1940 के बाद के वर्षों में) अशोक कुमार का क्रेज़ ऐसा था कि वे कभी-कभार ही घर से निकलते थे और जब भी निकलते तो भारी भीड़ जमा हो जाती और ट्रैफिक रुक जाता था. भीड़ दूर करने के लिए कभी-कभी पुलिस को लाठियां चलानी पड़ती थीं. रॉयल फैमिलीज़ और बड़े घरानों की महिलाएं उन पर फिदा थीं और लाइन मारती थीं.

12.  उनकी शादी शोभा देवी से हुई. दोनों ताउम्र खुशी-खुशी साथ रहे. पहली बार रिश्ते के लिए जब अशोक उन्हें देखने गए तो 18 साल के थे और शोभा सिर्फ 8 बरस की थीं. जब वे पहुंचे तो वे रोटियां बना रही थीं. बहुत तेज़ी से उन्होंने करीब 50 रोटियां बना दीं. अशोक इससे बहुत प्रभावित हुए. हालांकि उनकी शादी तब नहीं हुई. जब उन्होंने फिल्मों में काम शुरू कर दिया तब उनकी मां बहुत चिंतित हो गईं. एक दिन 1936 में उनके पिता ने उन्हें खंडवा बुलाया. वे रेलवे स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे. बोले पूरे परिवार के साथ कलकत्ता जा रहे हैं. अशोक उनसे बहुत डरते थे. चुपचाप रवाना हो गए. रास्ते में किसी से पूछा तो मालूम चला कि शादी के लिए. शादी से एक दिन पहले उन्होंने अपनी पत्नी को देखा. तब वे 15 साल की थीं और अशोक 25 के. अगले दिन 20 अप्रैल को शादी हुई.

अशोक कुमार.
अशोक कुमार.

13.  आज नौकरीपेशा युवा अच्छे से सेटल होने या नौकरी में दो-तीन प्रमोशन लेने से पहले शादी नहीं करना चाहते हैं. लेकिन तब 1936 में भी अशोक कुमार भी ऐसा ही सोच रहे थे. वे शादी के लिए राजी नहीं थे. वे हर महीने 200 रुपये (जो तब बहुत बड़ी रकम थी) कमा रहे थे लेकिन चाहते थे कि 500 की तनख्वाह पर पहुंच जाएं उसके बाद ही शादी करें. लेकिन फिर मां की इच्छा थी तो माने.

14.  एंटी-हीरो के रोल बहुत से एक्टर्स ने किए. ‘मदर इंडिया’ (1957) में सुनील दत्त बिरजू बने, ‘अग्निपथ’ (1990) में अमिताभ बच्चन विजय दीनानाथ चौहान बने, दिलीप कुमार ने ‘अंदाज’ (1949) में दिलीप का रोल किया, शाहरुख ‘बाज़ीगर’ (1993) में अजय के रोल में थे. सूची लंबी है लेकिन हिंदी फिल्मों में सबसे पहले ये रोल करने का श्रेय अशोक कुमार को है. उन्होंने 1943 में आई ज्ञान मुखर्जी की फिल्म ‘किस्मत’ में अपराधी का रोल किया था.

15.  उनकी फिल्म ‘किस्मत’ पहली हिंदी फिल्म थी जिसने 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई की थी. ये एक साल सिनेमाघरों में चली.

अशोक कुमार और मुमताज़ शांति फिल्म 'किस्मत' (1943) के पोस्टर में.
अशोक कुमार और मुमताज़ शांति फिल्म ‘किस्मत’ (1943) के पोस्टर में.

16.  अशोक कुमार ने बहुत सी सार्थक और अच्छे मनोरंजन वाली फिल्मों में काम किया. शुरुआत उनके डेब्यू ईयर में रिलीज हुई फिल्म ‘अछूत कन्या’ (1936) से ही हो गई थी जिसमें अशोक कुमार ने ब्राह्मण लड़के और देविका रानी ने अछूत लड़की कस्तूरी का रोल किया था. यश चोपड़ा की ‘धूल का फूल’ (1959), बिमल रॉय की ‘बंदिनी’ (1963), ‘सत्यकाम’ (1969) ऐसी अन्य फिल्में थीं. लेकिन उनकी सबसे सार्थक और अमर भूमिका वाली फिल्म थी ‘आशीर्वाद’. ऋषिकेश मुखर्जी के डायरेक्शन वाली इस फिल्म में अशोक कुमार ने जोगी ठाकुर जैसे बेहतरीन मानव मूल्यों वाले इंसान का रोल किया जैसा आज तक किसी फिल्म में नहीं देखा गया. इसी फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था.

17.  ‘आशीर्वाद’ में एक गाना था जो बड़ा लोकप्रिय हुआ था – “रेलगाड़ी रेलगाड़ी छुक छुक छुक छुक छुक छुक”. इसे गुलज़ार और हरिंद्रनाथ चट्‌टोपाध्याय ने मिलकर लिखा था. इसे अशोक कुमार का पात्र बच्चों के बीच गाता है. ये गाना आज भी बहुत चाव से याद किया जाता है. इसे अशोक कुमार ने ही गाया था.

18.  अशोक कुमार ने अपनी पत्नी से बेवफाई की थी लेकिन शोभा ने कभी शक नहीं किया. ख़ुद अशोक कुमार ने कहा, “शुरू के 13 साल में बहुत ‌बहुत वफादार था. उसके बाद भटक गया. मैं एक फिल्म कर रहा था – नाज़. तभी मैंने शराब पीनी शुरू की. लड़कियों से मिलना शुरू किया. अफेयर किए. मेरा हीरोइन नलिनी जयवंत के साथ भी अफेयर था. ढाई साल तक हम साथ थे. चारों तरफ इसकी बातें हो रही थी लेकिन मेरी पत्नी ने कभी यकीन नहीं किया कि उसका पति ऐसा करेगा.” 1986 में अशोक-शोभा ने शादी के 50 बरस पूरे किए. शोभा बहुत एक्साइटेड थीं और बड़ी होटल में पार्टी देना चाहती थीं. इसके चार दिन पहले वे बीमार पड़ीं और उनकी मृत्यु हो गई.

19.  हिंदी फिल्मों के लैजेंड दिलीप कुमार एक्टिंग बैकग्रांउड से नहीं थे. फिल्मों में अभिनय, दृश्य करने की समझ को लेकर उन्हें बिलकुल शुरुआती ज्ञान अशोक कुमार से ही मिला. अशोक कुमार हिंदी फिल्मों के पहले सुपरस्टार्स में से थे जो नेचुरल एक्टिंग करते थे. दिलीप कुमार ने इसी नेचुरल एक्टिंग की प्रेरणा ली. 1944 में बॉम्बे टॉकीज़ की पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ दिलवाने में भी अशोक कुमार की सिफारिश बताई जाती है. वे उन्हें अशोक भैय्या कहकर बुलाते थे.

20.  अशोक कुमार ने अपनी पत्नी की न्यूड पेंटिंग बनाई थी. इसके अलावा भी कई न्यूड्स और अन्य प्रकार की पेंटिंग वे बनाया करते थे. इनकी संख्या 300 के करीब मानी जाती है. उनकी बेटी भारती जाफरी इन पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगा चुकी हैं.

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अशोक की बनाई पेंटिंग जो उन्होंने कथित तौर पर तब बनाई जब उनकी पत्नी देख नहीं रही थीं.

21.  उनका समृद्ध करियर 60 साल लंबा चला. उन्होंने 270 से 300 के बीच फिल्में कीं. 10 दिसंबर 2001 को उनका हार्ट फेल होने से निधन हुआ. उनकी आखिरी फिल्में थीं ‘रिटर्न ऑफ द ज्वेलथीफ’ (1996) और ‘आंखों में तुम हो’ (1997).

22.  उन्होंने फिल्म क्रिटिक बी. आर. चोपड़ा को 1951 में अपने प्रोडक्शन वाली फिल्म ‘अफसाना’ में निर्देशक के तौर पर ब्रेक दिया था. अशोक कुमार की इसी फिल्म की बदौलत चोपड़ा स्थापित हुए. बाद में उनके भाई यश चोपड़ा भी फिल्मों में आ पाए और आज यशराज फिल्म्स जैसा बड़ा एंपायर खड़ा है.

23.  अशोक कुमार ने ही देव आनंद को अपनी फिल्म ‘जिद्दी’ (1948) में काम दिया था. इसी फिल्म से देव आनंद और प्राण को फिल्मों में पहचान मिली.

'मिली' (1975) की शूटिंग के दौरान जया बच्चन और अशोक कुमार को सीन समझाते डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी. (फोटोः राजन प्रभु)
‘मिली’ (1975) की शूटिंग के दौरान जया बच्चन और अशोक कुमार को सीन समझाते डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी. (फोटोः राजन प्रभु)

24.  मधुबाला, लता मंगेशकर, शक्ति सामंत, ऋषिकेश मुखर्जी और अनेक दूसरे फिल्मी लोगों के करियर में अशोक कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

25.  वे अपने करियर में ज्यादातर वक्त सक्रिय रहे और उनकी लोकप्रियता बनी रही लेकिन आर्थिक तंगी से भी उन्हें गुजरना पड़ा. उन्हें अपनी गाड़ियां और संपत्ति बेचनी पड़ी. लेकिन उन्होंने संघर्ष किया और फिल्मों में लगातार काम जारी रखा ताकि इसका असर परिवार पर न पड़े.

26.  1996 में वे बीमार पड़े. डॉक्टर ने कहा कि वे जिंदा नहीं बचेंगे. अशोक ने कहा, “वो कौन होते हैं कहने वाले कि मैं जिंदा नहीं बचूंगा.” वे इस बात से इतना गुस्सा हुए कि उस डॉक्टर के पीछे दौड़े और उसे घूंसा जड़ दिया. बाद में उन्हें इंजेक्शन देकर शांत करना पड़ा. दो दिन के बाद से तंदुरुस्त हो गए और अस्पताल से छुट्‌टी दे दी गई.

दोस्त दिलीप कुमार और राज कपूर के साथ पहले और बाद के एक मोड़ पर अशोक कुमार.
दोस्त दिलीप कुमार और राज कपूर के साथ पहले और बाद के एक मोड़ पर अशोक कुमार.

27.  उनके छोटे भाई किशोर कुमार को बेहद मजाकिया और दीवाना होने के लिए जाना जाता है लेकिन अशोक कुमार उनसे भी बड़े चुहलबाज़ और हसोड़ थे. लेकिन वे अपना ये पक्ष दुनिया के सामने नहीं लाते थे. लेकिन उनके दोस्तों के पास ऐसे हजारों किस्से हैं. जैसे जब वे राज कपूर की शादी के समारोह में गए थे. वहां स्टेज पर राज और उनकी नवविवाहित पत्नी कृष्णा बैठी थीं. अशोक कुमार मंच पर गए तो कृष्णा का घूंघट उठाया और बोले, “ओह.. ये तो अशोक कुमार है. मैं बहुत खुश हूं!” राज कपूर लाजवाब हो गए.

28.  करियर के आखिरी 30 बरसों में अशोक कुमार अस्थमा से पीड़ित रहे. इससे पहले वे कभी बीमार नहीं हुए. ये बीमारी भी उन्हें 1962 में रिलीज हुई फिल्म ‘राखी’ की शूटिंग के दौरान मिली. ये फिल्म भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित थी और वहीदा रहमान ने उनकी बहन का रोल किया था. आखिरी सीन में वे मर जाते हैं. तमिल फिल्मों के भीम सिंह इसे डायरेक्ट कर रहे थे. उन्होंने ब्रीफ किया कि क्लाइमैक्स में मरने के सीन में उन्हें कर्कश और खुरदरी आवाज में डायलॉग बोलने हैं. इसके लिए ये आइडिया निकाला गया कि अशोक कुमार बर्फ का पानी पिएं और उसके तुरंत बाद संवाद बोलें. लेकिन 25 गिलास बर्फ का पानी पीने के बाद भी उनकी आवाज वैसी ही बनी रही. उन्होंने दो दिन तक ऐसा किया. तीसरे दिन बुखार हो गया. चेन्नई में शूट जल्दी पूरा किया गया. इसके बाद वे बेहोश हो गए. अस्पताल ले जाया गया. उसके बाद से अशोक कुमार को सांस की दिक्कत होने लगी. अस्थमा हो गया.

फिल्म 'चलती का नाम' गाड़ी के एक दृश्य में अनूप, अशोक और किशोर कुमार.
फिल्म ‘चलती का नाम’ गाड़ी के एक दृश्य में अनूप, अशोक और किशोर कुमार.

29.  अपने भाई किशोर और अनूप कुमार की पढ़ाई लिखाई से लेकर मुंबई लाने और फिल्मों के लिए ग्रूम करने का काम अशोक कुमार ने ही किया. तीनों भाइयों ने 1958 में फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ में साथ काम किया. बाद में 1974 में अशोक और किशोर ने इसी से मिलती-जुलती कॉमेडी ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ बनाई और उसमें अभिनय किया.

30.  एक्ट्रेस काजोल (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, करण अर्जुन) और डायरेक्टर अयान मुखर्जी (वेकअप सिड, ये जवानी ये दीवानी) की दादी अशोक कुमार की बहन थीं.

31.  अशोक कुमार ने टीवी सीरियल्स में भी अभिनय किया और उतने ही लोकप्रिय हुए. दूरदर्शन पर 1984 से प्रसारित हुए ‘हम लोग’ के तो अशोक पर्याय हैं. वे उस सीरियल के सूत्रधार थे. उनका नरेट करने का तरीका बहुत लोकप्रिय हुआ.

पॉपुलर कल्चर में इसका बड़ा असर रहा. जैसे 1987 में आई फिल्म ‘जलवा’ के एक कॉमेडी सीन में जॉनी लीवर अशोक कुमार के नरेशन को भी शामिल करते हैं.

32.  जिन बी. आर. चोपड़ा को उन्होंने फिल्मों में ब्रेक दिया था, उन्हीं के प्रोडक्शन में बने सीरियल ‘बहादुर शाह ज़फ़र’ में अशोक कुमार ने लीड रोल किया था. ये 1986 से प्रसारित हुआ.

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