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सैनिकों के लिए फिल्में भारत में सिर्फ ये एक आदमी बनाता है

जे.पी. / ज्योति प्रकाश दत्ता ने 33 वर्षों में सिर्फ दस फिल्में डायरेक्ट कीं. इनमें 'बॉर्डर' मेगा-हिट थी. हालांकि उनकी बेस्ट फिल्में वो हैं जिनमें जाति व्यवस्था, अन्यायपूर्ण सामाजिक रीतियों पर बात की गई है. जानिए 'बॉर्डर' और दत्ता की 24 ऐसी बातें जो कम ही पता हैं.

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1. उनकी पहली फिल्म भी बॉर्डर के बारे में थी. उस फिल्म का नाम था ‘सरहद’. कहानी भारतीय युद्धबंदियों के बारे में थी. इसमें विनोद खन्ना, बिंदिया गोस्वामी और मिथुन चक्रवर्ती लीड रोल कर रहे थे. फिल्म की शूटिंग 1976 में शुरू हुई जो 60 परसेंट पूरी हो चुकी थी लेकिन वित्तीय कारणों से इसे बंद करना पड़ा. उनका भाई दीपक इंडियन एयर फोर्स में स्क्वॉड्रन लीडर था और ड्यूटी के दौरान उसकी मृत्यु हो गई. उसी की याद में जे. पी. दत्ता ने ‘सरहद’ प्लान की. 

2. उनका दावा है कि इंडियन सिनेमा के इतिहास में उनकी फिल्म ‘बॉर्डर’ (1997) पहली फिल्म थी जिसने खुले तौर पर पाकिस्तान को शत्रु के तौर पर चिन्हित किया. ये फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित थी. इसे राष्ट्रीय एकीकरण के लिए बेस्ट फीचर फिल्म का नरगिस दत्त अवॉर्ड दिया गया था.

3. दत्ता को लोग सिर्फ उनकी वॉर-मूवीज़ से ही याद करते हैं लेकिन उन्होंने उससे भी ज्यादा ज़रूरी या सबसे जरूरी फिल्में करियर के शुरू में बनाई थीं. जैसे 1985 में रिलीज हुई ‘ग़ुलामी’. जिसे उनकी बेस्ट फिल्म भी कह सकते हैं. फिर 1988 में आई ‘यतीम’, 1989 में रिलीज हुई ‘बंटवारा’ और ‘हथियार’. इन फिल्मों में भारतीय समाज में गहराई में ठहरे वर्ग-भेद और जाति व्यवस्था पर कमेंट किए गए थे. इन फिल्मों में एक ओर ऊंची जाति के लोग या शोषक थे, दूसरी ओर बाग़ी और प्रतिकार करने वाले लोग थे या इनमें अपराध की दुनिया में आए आम आदमी की बात थी.

‘ग़ुलामी’ में धर्मेंद्र ने राजस्थान के एक गांव में रहने वाले किसान के बेटे रंजीते का रोल किया जो वहां के जमींदारों की उस व्यवस्था को नहीं मानता जहां स्कूल में ऊंची जात के बच्चे और नीची जात के बच्चे अलग-अलग बर्तन में पानी पीते हैं. जहां किसानों, औरतों, नीची जाति के लोगों पर सदियों से हो रहा ज़ुल्म जारी है. फिल्म में हलवदार गोपी (कुलभूषण खरबंदा) अपने बेटे की शादी करवाने के लिए घोड़ी पर बैठाकर ले जा रहा होता है और ऊंची जात के लोग हथियार लेकर रास्ते में खड़े होते हैं. वे कहते हैं उसकी जात के लोग अपने बेटों को घोड़ी पर नहीं बैठाकर ले जाते. गोपी विरोध करता है और उसके नाबालिग बच्चे को गोली मार दी जाती है. इसी फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने राजपूत पुलिसवाले का रोल किया है जो शिक्षित है, सरकार ने जनता की रक्षा के लिए तैनात किया गया है लेकिन आखिरकार उसमें feudal ख़ून ही है जो हावी रहता है. ‘बंटवारा’ में एक पुलिसवाला पात्र कहता है कि वो एक ठाकुर पहले है और पुलिसकर्मी बाद में.

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4. दत्ता के पिता ओ.पी. दत्ता 60 साल तक फिल्म उद्योग में सक्रिय थे. उन्होंने 8-9 फिल्मों का निर्देशन किया था और अपने बेटे की सभी फिल्मों के डायलॉग लिखे थे. जहां उनके बेटे ने भारत पाक युद्ध पर दो फिल्में बनाईं, ओ.पी. दत्ता ने पहली भारतीय-पाकिस्तानी फिल्म बनाई थी. फिल्म का नाम था ‘अनोखी’ जो 1956 में बनी. इसमें दोनों देशों के एक्टर्स ने काम किया था.

5. उन्होंने बिंदिया गोस्वामी से शादी की जो पहले विनोद मेहरा के साथ विवाहित थीं. लेकिन फिर तलाक हो गया. अपनी पहली फिल्म ‘सरहद’ (1976) के सेट पर जे.पी. दत्ता का परिचय बिंदिया से हुआ. लेकिन दोनों का प्यार 1985 में पक्का हुआ जब ‘ग़ुलामी’ बन रही थी. उसी साल दोनों ने शादी कर ली. बिंदिया उनसे 12 साल छोटी थीं.

6. साल 2000 में उन्होंने दो स्टार किड्स को अपनी फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से लॉन्च किया – करीना कपूर और अभिषेक बच्चन. उनकी पिछली फिल्म ‘बॉर्डर’ बड़ी हिट थी इसलिए बबीता ने अपनी बेटी करीना की लॉन्च के लिए उन्हें चुना, अमिताभ ने बेटे अभिषेक के लिए. हालांकि दत्ता इन्हें ‘रिफ्यूजी’ से नहीं किसी और फिल्म से लॉन्च करने वाले थे. इस प्रोजेक्ट का नाम था ‘आखिरी मुग़ल’. इसमें करीना और अभिषेक के अलावा दिलीप कुमार और श्रीदेवी को भी लिया जा रहा था. लेकिन फिर वो फिल्म बंद हो गई और ‘रिफ्यूजी’ शुरू हुई.

7. डायरेक्टर बन जाने के बाद भी जे.पी. मुंबई के माहिम इलाके में एक बेडरूम वाले फ्लैट में रहते थे.

8. जब दत्ता ‘बॉर्डर’ बनाने जा रहे थे जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधान मंत्री थे. दत्ता ने उन्हें अर्जी भेजी. उसमें शूटिंग के लिए मंजूरी और सेना के सहयोग की बात थी. वॉर मूवीज में और भी बहुत तरह की चुनौतियां होती हैं और हजार तक के अप्रूवल लेने पड़ते हैं. नरसिम्हा राव ने वो अर्जी पढ़ी और उसके नीचे एक छोटा सा नोट लिखा, “पूरा सहयोग दिया जाए. मामले तो तत्काल निपटाएं.” कहा जाता है नरसिम्हा राव ने कहा था, “ये फिल्म तो बननी ही चाहिए.”

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9. निजी तौर पर जे.पी. बहुत चुप रहने वाले आदमी हैं. उनकी पत्नी बिंदिया के मुताबिक, “हम दोनों बिलकुल विपरीत हैं. वो मुश्किल से बात करते हैं और मैं हर टाइम बोलती रहती हूं. वो बिल्कुल भी रोमैंटिक नहीं हैं. मैं ‘आई लव यू’ वाले टाइप की हूं. मैं बाहर जाना, घूमना पसंद करती हूं. वो घर पर ही बैठना चाहते हैं. उनका मानना है कि आपको फन करना है तो उसके लिए न्यू ईयर पार्टी में जाने की जरूरत नहीं है.”

10. उन्हें सिर्फ तभी गुस्सा आता है जब कोई उनके और उनके काम के बीच आए या उसमें व्यवधान डाले.

11. ‘ग़ुलामी’ फिल्म में एक गाना है..

मेरे पी को पवन किस गली ले चली
कोई रोको मेरी जिंदगी ले चली
मुझसे रूठी कहीं और ये जुड़ गई
जिंदगी अजनबी रास्ता मुड़ गई
एक उम्मीद थी आखिरी ले चली
मेरे पी को पवन किस गई ले चली

गुलज़ार के लिखे, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल द्वारा संगीतबद्ध और लता मंगेशकर के गाए इस गाने के बोल अमृता सिंह और सनी देओल के ब्रेक अप से प्रेरित थे. अमृता जे.पी. दत्ता की अच्छी दोस्त थीं.

12. जे. पी. दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’, ‘रिफ्यूजी’ और ‘एलओसी’ कारगिल में कॉस्ट्यूम्स निर्धारण बिंदिया ने किया है.

13. उन्होंने अजमेर के ख़्वाजा ग़रीब नवाज के यहां मन्नत मांगी तो उनके यहां बेटी निधि का जन्म हुआ और सिद्धिविनायक के यहां प्रार्थना की तो बेटी सिद्धि का जन्म हुआ.

14. जे.पी. को फिल्म ‘खट्‌टा मीठा’ (1978) के एक गाने की लाइन “हम उन दिनों अमीर थे जब तुम करीब थे..” पसंद है. तब से जब बिंदिया एक हिट हीरोइन थीं और वो बतौर निर्देशक स्थापित नहीं हुए थे.

15. उनकी फिल्म ‘एलओसी’ में परमवीर चक्र से सम्मानित मनोज पांडे का रोल अजय देवगन ने किया था. लेकिन ये नहीं ज्ञात है कि जे.पी. ने उन्हें इससे पहले ‘बॉर्डर’ में भी एक लीड रोल ऑफर किया था लेकिन तब अजय ने मना कर दिया क्योंकि वे मल्टीस्टारर नहीं करना चाहते थे.

16. ‘बॉर्डर’ फिल्म रिलीज होने के बाद दत्ता को पुलिस कमिश्नर ने फोन किया और कहा कि उनके जीवन को खतरा है. इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए दो हथियारबंद लोग भेजे गए जो तीन-चार महीने, हर वक्त उनकी सुरक्षा में रहे. इस दौरान भी उन्हें धमकियां मिलती रहीं. धमकी देने वाले कहते थे कि उन्हें सबक सिखाएंगे.

17. दत्ता की ‘बॉर्डर’ से प्रभावित एक सेना के ब्रिगेडियर उनसे मिलने बॉम्बे गए. वहां एक हफ्ता रहे. वे चाहते थे कि कारगिल युद्ध पर दत्ता फिल्म बनाएं. लेकिन तब दत्ता को कथित तौर पर पाकिस्तान से युद्ध पर फिल्म बनाने के लिए धमकियां मिल रही थीं. उनके परिवार ने कहा कि अब कभी पाकिस्तान से जुड़े विषय को छूना भी मत. लेकिन कुछ दिन बाद दत्ता ने कहा कि वे ये फिल्म बनाएंगे. फिर 2003 में ‘एलओसी कारगिल’ रिलीज हुई. इसमें अभिषेक बच्चन ने कैप्टन विक्रम बत्रा, अजय देवगन ने कैप्टन मनोज पांडे के रोल किए जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र मिले थे. फिल्म में संजय दत्त, अक्षय खन्ना, सुनील शेट्‌टी, सैफ अली खान, मनोज बाजपेयी, नागार्जुन, आशुतोष राणा भी थे.

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18. जे.पी. दत्ता ने अपनी ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग राजस्थान में की है. ये जगह बचपन से उनका पैशन रही है. उन्हें यहां के धोरे (रेत के टीले) दीवाना कर देते हैं. वे जब छह साल के थे तब पहली बार राजस्थान गए थे. वहां उनके पिता के बड़े भाई रहते थे. वहां उनके घर जाते हुए रास्ते में जे.पी. रेत में लोटने और खेलने लगे थे.

19. ‘ग़ुलामी’ की शूटिंग शुरू हुई तो निर्माता हबीब नाडियाडवाला के पिता की मृत्यु हो गई. उनके पास पैसा भी नहीं था. सिर्फ 3 लाख रुपये जे.पी. को राजस्थान में 25 दिन के शेड्यूल के लिए मिले थे. उन्होंने धर्मेंद्र से इस बारे में बात की. बोला कि वे इस शेड्यूल में उन्हें फीस नहीं दे पाएंगे. लेकिन धर्मेंद्र बिना फीस करने पर मान गए. बाद में बाकी कलाकारों ने भी ऐसा ही किया और पहले शेड्यूल के लिए फीस नहीं ली.

20. उनकी फिल्म ‘एलओसी कारगिल’ में लीड एक्टर्स को छोड़कर सारे रोल असली सैनिकों ने अदा किए थे. उन्हें रक्षा मंत्रालय ने बंदूकें, हथियार, उपकरण और सैनिक मुहैया करवाए. फिल्म में कोई जूनियर आर्टिस्ट या एक्ट्रा, फौजी के रोल में नहीं था. गोरखा रेजीमेंट और जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स के सैनिक फिल्म में नजर आते हैं.

21. ‘पल्टन’ (2018) के पूर्व 12 साल तक जे.पी. दत्ता ने कोई फिल्म डायरेक्ट नहीं की. उससे पहले उन्होंने ‘उमराव जान’ बनाई थी जिसमें ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन ने प्रेमियों का रोल किया था. ये 2006 में आई और फ्लॉप रही थी.

22. उन्होंने रक्षा मंत्रालय से तीन युद्धों पर आधारित तीन फिल्मों की स्क्रिप्ट (‘पल्टन’ समेत) मंजूर करवाई थी. इसमें उन्हें रक्षा विभाग का पूरा सहयोग मिलेगा.

23. अब जब उनकी 1962 के भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म ‘पल्टन’ आ चुकी है, तो अब वे ‘बॉर्डर-2’ बनाएंगे. आखिरी बार जब फिल्म की चर्चा सुनी थी तो इसमें सनी देओल और सुनील शेट्‌टी को कास्ट कर लिए जाने की खबरें थीं.

24. उनकी एक वॉर फिल्म सारागढ़ी के युद्ध पर आधारित बताई जा रही थी, जहां 12 सितंबर 1897 को हुआ था. इसमें ब्रिटिश सरकार की इनफैंट्री रेजीमेंट ’36 सिख’ के 21 सिखों ने नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस (जो अब पाकिस्तान में है) में एक पोस्ट को बचाने के लिए 10,000 अफरीदी और ओराकज़ाय लड़ाकों से युद्ध किया था. वे इसमें मारे गए थे. इस फिल्म के लिए दत्ता ने स्टीवन स्पीलबर्ग की सीरीज ‘बैंड ऑफ ब्रदर्स’ के सिनेमैटोग्राफर और टीवी सीरीज ‘हैनिबल’ के लीड एक्टर ह्यू डैन्सी से भी बात की थी. इसी विषय पर अजय देवगन भी फिल्म बना रहे थे. हालांकि इन दोनों से पहले इसी विषय पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी’ बन चुकी है और रिलीज भी होने वाली है.

‘बॉर्डर’ का सारः

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(Story updated since October 2016.)
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