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इन 10 गानों के बोल सुनकर 2020 को सह पाने की हिम्मत मिली

साल 2020 के खत्म होने का इंतज़ार जितनी बेसब्री से दुनिया कर रही है, उतना शायद ही किसी साल के लिए किया होगा. जायज़ भी है. आधे से ज़्यादा साल ऐसा गुज़रा, जब दुनिया की एक बड़ी जनसंख्या घरों में बंद रही. ऐसे में एक बड़े हिस्से ने म्यूजिक और आर्ट में पनाह ढूंढी. ये वो गाने हैं, जिनके संगीत ने तो लोगों को अपना फैन बनाया ही, इनके लिरिक्स भी कविता जैसे दिल में उतर गए. वो कहते हैं न, जब आप खुश होते हैं तो आप संगीत सुनते हैं, लेकिन जब आप उदास होते हैं, तो शब्दों पर ध्यान देते हैं. इस साल के खत्म होते होते चलिए आपको लेकर चलते हैं कुछ ऐसे गानों के सफ़र पर, जिनके बोलों ने सब कुछ थोड़ा आसान, थोड़ा नर्म, थोड़ा मुतमईन कर दिया.


1.शायद

गायक: अरिजीत सिंह

लिरिक्स: इरशाद कामिल

संगीत: प्रीतम

फिल्म ‘लव आजकल 2’ को रिस्पांस चाहे जैसा मिला हो, उसके गानों की लोगों ने तारीफ की. ये गाना भी कुछ ऐसा ही है. फिल्म में ये गाना ऐसे समय पर आता है, जहां कार्तिक और सारा के बीच प्यार का पहला एहसास मुकम्मल होता दिखाई देता है. अरिजीत को वैसे भी आज के ज़माने का कुमार सानू कह देते हैं लोग. क्योंकि लव सांग्स के मामले में अरिजीत का काम लोगों को बहुत पसंद है. प्रीतम पर म्यूजिक कॉपी करने के आरोप लगते रहते हैं. लेकिन इसका संगीत थोड़ा नया सा लगता है. और इरशाद कामिल के शब्द तो हैं ही. एक नज़र देखिए:

आंखों को ख्वाब देना खुद ही सवाल करके

खुद ही जवाब देना मेरी तरफ से

बिना काम काम करना, जाना कहीं हो चाहे

हर बार ही गुज़रना तेरी तरफ से

ये कोशिशें तो होंगी कम नहीं

न चाहिए कुछ तुम से ज्यादा तुम से कम नहीं

2. फिर चला

गायक: जुबिन नौटियाल

लिरिक्स: कुणाल वर्मा

संगीत: पायल देव

फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सन्नी’ इस साल ख़बरों में रही क्योंकि इसमें रीमिक्स किया हुआ गाना ‘सावन में लग गई आग’ सुर्ख़ियों में था. लेकिन इस फिल्म में ही एक गाना और था, जो चुपचाप लोगों द्वारा पसंद किया गया. कहीं-कहीं इस गाने को सुनकर एकबारगी ‘मर्डर’ फिल्म के ‘ऐ खुदा’ गाने की याद सी आ जाती है. जुबिन नौटियाल दर्द भरे गानों के लिए लोगों के बीच जाने जा रहे हैं. वहीं इस गाने के लिरिक्स लिखने वाले कुणाल वर्मा ने कई और लोकप्रिय गानों के लिरिक्स भी लिखे हैं. गौर फरमाइए:

क्यों आंसुओं से लिखने लगी है, अब जिंदगानी ये दास्तां

पहले थे हंसे जितना उतना बुरा लगता है

सब तो खो गया मुझसे अब किसके लिए रुकना है.

3. दिल जुलाहा

गायक: दर्शन रावल

लिरिक्स: स्वानंद किरकिरे

संगीत: प्रीतम

इस साल पसंद की गई चंद फिल्मों में से एक है ‘लूडो’. इसी फिल्म का ये गाना काफी रिफ्रेशिंग बीट वाला है. खुले खुले मन से दर्शन रावल ने गाया है इसको. मूड हल्का कर देने वाला ये गाना सुनते सुनते ‘तमाशा’ फिल्म की याद आती है. गाने की आत्मा उससे मेल खाती सी लगती है. स्वानंद किरकिरे ने शब्द भी वैसे ही चुने हैं इस गाने के लिए. गौर फरमाइए:

हो इश्क तराना छेड़ा है

सांसों की हर मनिया ने

रंग बिरंगा लागे सब

बेरंगी सी दुनिया में

4. ना रवा कहिये

गायिका: कविता सेठ

लिरिक्स: दाग़ देहलवी

संगीत: एलेक्स हेफेज /अनुष्का शंकर

चूंकि ये साल फिल्मों के लिहाज से इतना बढ़िया रहा नहीं, इसका फायदा OTT को काफी मिला. पैन्डेमिक के दौरान फिल्म थियेटर और मल्टीप्लेक्स बंद हो गए थे. एक समय बाद फिल्में भी OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होना शुरू हो गईं, लेकिन संगीत के हिसाब से इस साल वेब सीरीज में भी बढ़िया काम हुआ. उदाहरण के लिए ‘अ सूटेबल बॉय’ ही ले लें. विक्रम सेठ के 100 तोला वजनी उपन्यास पर छह एपिसोड की बनी छोटी सी सीरीज. सबसे ज्यादा जिस चीज़ की तारीफ हुई, वो था इसका संगीत. कविता सेठ ने इसके गाने गाये हैं और क्या हद दर्जे तक डूबकर गाये हैं. ‘ना रवा कहिये’ दाग़ देहलवी की नज़्म है. इसे पहले फरीदा खानम जी भी गा चुकी हैं. अब दाग़ साहब की बात हो, तो लफ्ज़ और हर्फ़ की बहस बेमानी हो जाती है. एक नज़र देखिए:

सब्र फ़ुरकत में आ ही जाता है

पर उसे देर आश्ना कहिये

ना रवा कहिये ना सज़ा कहिये

कहिये, कहिये मुझे बुरा कहिये

5.  लब पर आए

गायक: जावेद अली

लिरिक्स: समीर सामंत

संगीत: शंकर एहसान लॉय

जैसा अभी हमने कहा, OTT पर आने वाली सीरीज के संगीत और उनके गानों की लोकप्रियता अच्छी रही इस साल. भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फोकस रखती हुई एक पूरी सीरीज ही रिलीज हुई. नाम है ‘बंदिश बैंडिट्स’. मेरी सहेली, जिसे क्लासिकल संगीत में रत्ती भर भी रुची नहीं थी, उसने एक बैठकी में बिंज वॉच किया इसे. ऐसे कई लोग और थे जिन्होंने सोशल मीडिया पर भी इसके गाने रिकमेंड किए. इसका ये गाना काफी चर्चित हुआ. लिरिक्स देखिए:

लड़ पछताऊं

समझ न पाऊं

रूठे पिया को कैसे मनाऊं

भेद जिया के किस को दिखाऊं

किस को बताऊं कलेश हो

6.घूम चरख्या

गायक: सुखविंदर सिंह

लिरिक्स: स्वानंद किरकिरे

संगीत: स्नेहा खानविलकर

‘रात अकेली है’ फिल्म से ये गाना ऐसा है जिसे सुनते हुए आप शब्दों में गुम हो जाते हैं. सुखविंदर सिंह को आम तौर पर लोग धड़ाम-भड़ाम टाइप गानों के लिए याद करते हैं. लेकिन उनकी गंभीर, खुरदुरी आवाज़ जब ऐसे शांत गाने गाती है, तो आप ठहर कर एक-एक शब्द चुभलाते हैं. संगीत के डिपार्टमेंट में स्नेहा खानविलकर ने गाने के मूड को ध्यान में रखते हुए ऐसा काम किया है, जो इस गाने के शब्दों  को ओवरशैडो न करे. क्योंकि अपने आप में ही इस गाने के शब्दों में अलग लय और ताल है. देखिए कुछ शब्द:

ऊंघता-ऊंघता ढूंढता-ढूंढता

उलझनों में गिरह बांधता तोड़ता

दर्द के धागों को कातता गांथता

चरमराहट तेरी चीखता चीखता

7.  खुलने दो

गायक: अरिजीत सिंह

लिरिक्स: गुलज़ार

संगीत: शंकर एहसान लॉय

लिरिक्स की बात हो और गुलज़ार साहब का नाम नहीं लिया जाए, ऐसा मुश्किल ही लगता है. फिल्म ‘छपाक’ का ये गाना उम्मीद वाला तो लगता ही है, साथ में अरिजीत सिंह की आवाज़ इसे और खूबसूरत बना देती है. एक एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी पर आधारित फिल्म में दीपिका पादुकोण ने मुख्य किरदार निभाया था. इसकी वजह से वो लगातार सुर्ख़ियों में भी रहीं. ये फिल्म COVID -19 महामारी के भारत में फैलने से पहले रिलीज हुई थी थियेटर्स में, और इसे तारीफ भी मिली थी. ख़ास तौर पर गुलज़ार के ट्रेडमार्क तरीके में ये गाना अच्छा बन पड़ा है. बाकी उनका छायावाद तो है ही. एक नज़र देखिए.

मैली मैली सी सुबह धुलने लगी है

गिरह लगी थी सांस में

खुलने लगी है, खुलने लगी है

8. आबाद बरबाद

गायक: अरिजीत सिंह

लिरिक्स: संदीप श्रीवास्तव

संगीत: प्रीतम

‘लूडो’ फिल्म का एक गाना हम पहले भी इस लिस्ट में शामिल कर चुके हैं. लेकिन इसका ये गाना भी बेहतरीन बन पड़ा है. प्रीतम का संगीत है, और संदीप श्रीवास्तव ने बेहद नाज़ुक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है ये गाना. ये गाना सोशल मीडिया पर भी काफी चला था. प्रेम में दो किनारों के बीच जूझते इंसान की तड़प इस गाने में दिखाई देती है. जैसे कोई मांझी से कह रहा हो, या तो इस पार लगा दे या उस पार. सांस डूब रही है. देखिए लिरिक्स एक नज़र:

इतना अहसान कर दो, पूरे अरमान कर दो

लब पर आकर जो रुके हैं, ढाई वो हर्फ़ कह दो

मेरी सांसों से जुड़ी है तेरी हर सांस कह दो

9. मेरे लिए तुम काफी हो

गायक: आयुष्मान खुराना

लिरिक्स: वायु

संगीत: तनिष्क-वायु

फिल्म ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ इसलिए भी ख़बरों में थी क्योंकि इस फिल्म में होमोसेक्शुअल संबंधों पर फोकस किया गया था. इस फिल्म का ये गाना आयुष्मान ने डूबकर गाया है. इस गाने में प्यार की बातें तो हैं, लेकिन एक हल्का-फुल्कापन है जो बिना गंभीर हुए भी बेहद सुंदर बातें कह जाता है. आप खुद देखिए लिरिक्स:

ये दुनिया मिले ना मिले हमको

खुशियां भगा देंगी हर गम को

तुम साथ हो फिर क्या बाकी है

मेरे लिए तुम काफी हो

10 . महफ़िल बर्खास्त हुई

गायिका: कविता सेठ

लिरिक्स: अमीर मिनाई

संगीत: एलेक्स हेफेज, अनुष्का शंकर

‘अ सूटेबल बॉय’ सीरीज से एक गाना हम इस लिस्ट में पहले भी ले चुके हैं. लेकिन इस गाने को चुनने का लोभ संवरण न किया जा सका. सीरीज के अंत में भी आता है ये गाना, और खत्म होते होते दिल में एक टीस दे जाता है. खालीपन सा रह जाता है देखने वाले के भीतर. इसलिए नहीं कि सीरीज ख़त्म हो गई है. बल्कि इसलिए कि सब कुछ बीत चुकने के बाद सन्नाटे से कैसे समझौता किया जाए, ये समझ नहीं आता. अमीर मिनाई साहब की लिखी हुई नज़्म एक अलग समय में ले जाती है. लिरिक्स देखिए:

महफ़िल बर्खास्त हुई

पतंगे रुख़्सत शम्मो से हो रहे हैं,

दुनिया का ये रंग और हम

कुछ होश नहीं है सो रहे हैं

11. उस्तत

गायक: मनप्रीत सिंह

गीत: हरमनजीत सिंह

संगीत: मनप्रीत सिंह

इंडिपेंडेंट सॉंग है. हरमनजीत सिंह ने इसके लिरिक्स लिखे हैं. छोटी सी कहानी है. हरमिंदर बोपराय की. ये शिल्पकार हैं. पैरालिसिस से जूझते हुए उन्होंने अपना करियर बनाया और हार नहीं मानी. उन्हीं की बचपन से लेकर अब तक की कहानी है. लिखने वाले हरमनजीत ने बॉलीवुड के लिए भी लिखा है. ‘लौंग लाची’, ‘आर नानक पार नानक’ के लिरिक्स भी इन्होंने लिखे हैं. कवि हैं मूल रूप से. इन्हें साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार भी मिल चुका है. इस गाने में उस्तत का मतलब है तारीफ, किसी के लिए बहुत मान. लिरिक्स देखिए:

हवावां दे ढोलक ज़मीन दे बिछौने

के रुत्तां दे लहंगे त्योहारां दी उस्तत

रंगां दी उस्ततआकारां दी उस्तत

12.एक टुकड़ा धूप

गायक: राघव चैतन्य

गीत: शकील आज़मी

संगीत: अनुराग सैकिया

घरेलू हिंसा पर बनी फिल्म ‘थप्पड़’ में तापसी पन्नू की काफी तारीफ हुई थी. इस फिल्म ने एक ज़रूरी बहस को भी हाईलाईट किया, जो चल काफी समय से रही थी लेकिन उसे फिल्म का एक प्लेटफॉर्म मिल गया. उसी फिल्म से ये गाना राघव चैतन्य ने बड़ी सफाई से निभाया है. शकील आज़मी भी आत्मा से कवि हैं. ‘हैक्ड’, ‘आर्टिकल 15’ जैसी फिल्मों के लिए भी गाने लिख चुके हैं. लिरिक्स पर एक नज़र डालिए :

टूट के हम दोनों में

जो बचा वो कम सा है

एक टुकड़ा धूप का

अंदर अंदर नम सा है

ये तो थी हमारी लिस्ट. इन गानों के अलावा आपका भी कोई पसंदीदा गाना है जिसके संगीत या बोल आपको बेहद पसंद आए हों, तो हमें कमेन्ट सेक्शन में बताएं.


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