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धरती कहे पुकार: सलिल के ये 20 गीत सोने से पहले और उठने के बाद बजाएं, आत्मा तृप्त महसूस होगी

वे सिर्फ म्यूजिक कंपोजर नहीं थे. कवि भी थे. 'दो बीघा ज़मीन' जैसी महान फिल्म की कहानी लिखी. भारतीय जन नाट्य संघ से जुड़े थे. आजीवन लोगों के सरोकारों से जुड़े रहे. फिल्मी संगीत की जैसी आलोचना वे करते थे, कोई कंपोजर कभी नहीं कर सकता. म्यूजिक को लेकर उनका ज्ञान बहुत था. उन्होंने वर्ल्ड म्यूजिक को पढ़ा था लेकिन उनके बनाए गाने एकदम निश्चल, सरल थे. वे उन चंद संगीतकारों में से रहे जिनके गानों में सच्चा समाज, लोकजीवन, दर्शन और धुनें पाई जाती हैं. 19 नवंबर 1923 को पैदा हुए सलिल चौधरी ने 5 सितंबर 1995 को दुनिया को अलविदा कहा था. सलिल चौधरी को उनके 20 सोलफुल गानों से याद कर रहे हैं.

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“अपने जीवन में मैंने 100 से ज्यादा म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम किया है. इनमें से शायद दस को ही संगीत और सिनेमा की समझ थी. इनमें से सलिल सबसे आगे थे. सलिल चौधरी की मैलोडी बाकी सबसे अलग थीं. उनकी बंगाली लोक संगीत की शानदार समझ और ऊंची विकसित चेतना थी. कलकत्ता से बंबई आते हुए रास्ते में वे कुछ महीनों के लिए गायब हो गए. उन्होंने ये समय कहीं दूर, अनजाने गांव में बिताया ताकि गांव के संगीत को समझें और वहां की ट्यून और टैंपो से परिचित हो सकें. वे देश के दूसरे हिस्सों के लोग संगीत से भी अच्छी तरह वाकिफ थे. ये लोक संगीत भारत के शास्त्रीय संगीत के साथ अनूठे तरीके से मिला है. कई बार वे किसी ट्यून को कैसे विकसित किया जाए ये तय करने से पहले अपनी कंपोजीशन की आलोचनात्मक जांच करते हुए बिना खाना खाए और नींद लिए कई दिन गुजार देते थे. मैंने दो पीढ़ियों तक उनके बनाए गाने गाए हैं. मैंने सलिल चौधरी की बराबरी का कंपोजर नहीं देखा है.”

लता के साथ एक गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान सलिल.
लता के साथ एक गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान सलिल.

– लता मंगेशकर, नवंबर 1997

#1.

सावन की रातों में ऐसा भी होता है
राही कोई भूला हुआ तूफानों में खोया हुआ
राह पे आ जाता है, ऐसा भी होता है

– प्रेम पत्र (1962)

#2.

परबत काटे सागर पाटे
महल बनाए हमने
पत्थर पे बगिया लहराई
फूल खिलाए हमने
हो के हमारी, हुई न हमारी
अलग तोरी दुनिया हो मोरे रामा
अजब तोरी दुनिया हो मोरे रामा

– दो बीघा ज़मीन (1953)

#3.

जा रे, जा रे उड़ जा रे पंछी
बहारों के देश जा रे
यहां क्या है मेरे प्यारे
कि उजड़ गई बगिया मेरे मन की

– माया (1961)

#4.

धरती कहे पुकार के
बीज बिछा ले प्यार के
मौसम बीता जाय
अपनी कहानी छोड़ जा
कुछ तो निशानी छोड़ जा
कौन कहे इस ओर
तू फिर आए न आए

– दो बीघा ज़मीन (1953)

#5.

आ आ रे मितवा
जनम जनम से हम तो प्यासे
आ संग मेरे गा

– आनंद महल (1977)

वर्जन 1.

वर्जन 2.

#6.

ऐ मेरे प्यारे वतन
ऐ मेरे बिछड़े चमन
तुझपे दिल कुर्बान

– काबुलीवाला (1961)

#7.

आजा री आ निंदिया तू आ
झिलमिल सितारों से उतर
आंखों में आ, सपने सजा

– दो बीघा ज़मीन (1953) 

#8.

मिला है किसी का झुमका
ठंडे ठंडे हरे हरे नीम तले

– परख (1960)

#9.

जिंदगी कैसी है पहेली हाए
कभी तो हंसाए, कभी ये रुलाए
कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
एक दिन सपनों का राही
चला जाये सपनों से आगे कहां

– आनंद (1971)

#10.

रंगी को नारंगी कहे, बने दूध को खोया
चलती को गाड़ी कहे, देख कबीरा रोया
जिंदगी ख़्वाब है,
ख़्वाब में झूठ क्या और भला सच है क्या
सब सच है

– जागते रहो (1956)

#11.

गंगा आए कहां से
गंगा जाए कहां रे
लहराए पानी में जैसे
धूप छांव रे

– काबुलीवाला (1961)

#12.

हाल चाल ठीक ठाक है
सब कुछ ठीक ठाक है
बीए किया है, एमए किया है
लगता है वो भी ऐवें किया
काम नहीं है वरना यहां
आपकी दुआ से सब ठीक ठाक है

आबोहवा देश की बहुत साफ है
कायदा है कानून है इंसाफ है
अल्लाह मियां जाने कोई जिए या मरे
आदमी का ख़ून वून सब माफ है

– मेरे अपने (1971)

#13.

मेरे मन के दीये
यूं ही घुट घुट के जल
तू मेरे लाडले
ओ मेरे लाडले

– परख (1960)

#14.

ना जिया लागे ना
तेरे बिना मेरा कहीं जिया लागे ना

– आनंद (1971)

#15.

हम हाल ए दिल सुनाएंगे
सुनिए के न सुनिए

– मुधमति (1958)

#16.

हलके हलके चलो सांवरे
प्यार की मस्त हवाओं में
दिल का ये डर है पहला सफर है
इन अलबेली राहों में

– तांगेवाली (1955)

#17.

ओ सजना बरखा बहार आई
रस की फुहार लाई
अखियों में प्यार लाई

– परख (1960)

#18.

वो इक निगाह क्या मिली
तबीयतें मचल गईं
ज़रा वो मुस्करा दिए
शमाएं जैसे जल गईं

– हाफ टिकट (1962)

#19.

टेढ़ी टेढ़ी हमसे फिरे सारी दुनिया
हर कोई नजर बचाके चला जाए देखो

– मुसाफिर (1957)

#20.

जब उजियारा छाए
मन का अंधेरा जाए
किरणों की रानी गाए
जागो हे मेरे मन मोहन प्यारे
नव युग चूमे नैन तिहारे

– जागते रहो (1956)

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