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फिल्म रिव्यू: 2.0

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भारी भौकाल और भयानक बज़ के बीच रजनीकांत और अक्षय कुमार की ‘2.0’ थिएटर्स में लग चुकी है. ट्रेलर देखकर लोगों में इस फिल्म को लेकर अलग-अलग तरह के विचार हैं. इससे पहले कि कोई मुझे इसका स्पॉयलर दे दे, हमने ठग लाइफ कर दिया. हमने फिल्म ही देख डाली. और हमे ये फिल्म देखकर कैसा लगा, वो आपको बताएंगे.

कहानी

‘2.0’ की कहानी एक बूढ़े ऑर्निथोलॉजिस्ट और डॉ. वसीगरन की है. ऑर्निथोलॉजिस्ट का मतलब वो आदमी जिसने पक्षियों के बारे में पढ़ाई की हो. इस आदमी को लगता है कि शहर में बढ़ते फोन्स की वजह से पक्षियों की मौत हो रही है. इसलिए वो सेलफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपना दुश्मन समझने लगता है. इसके पीछे उसका लॉजिक ये है कि पक्षी ज़िंदा रहेंगे, तभी मनुष्य ज़िंदा रह पाएगा. वो पक्षियों को बचाने के लिए इंसानों को मारने लगता है. लेकिन वो पक्षिराजन बर्डमैन कैसे बनता है इसके पीछे एक राज़ है, जिसे राज़ रहने देना बेहतर है. उससे लड़ने के लिए वसीगरन का बनाया रोबोट चिट्टी आता है और फिर दोनों की लड़ाई होती है. कौन हारा? कौन जीता? थिएटर में जाके देखो जरा!

फिल्म में अक्षय कुमार ने पक्षिराज नाम के व्यक्ति का किरदार किया है.
फिल्म में अक्षय कुमार ने पक्षिराजन नाम के व्यक्ति का किरदार किया है.

एक्टर्स का काम

फिल्म में रजनीकांत ने साइंटिस्ट वसीगरन और रोबोट चिट्टी का रोल किया है. पक्षिराजन का रोल किया है अक्षय कुमार ने. साथ में हैं एमी जैक्सन जिन्होंने नीला नाम की एक दूसरी रोबोट का रोल किया है. आदिल हुसैन और सुधांशु पांडे जैसे एक्टर्स भी फिल्म में दिखाई देते हैं. चिट्टी के रोल में रजनीकांत इंट्रेस्टिंग लगते हैं, जबकि उनका वसीगरन वाला किरदार बहुत खुलकर नहीं आता. पक्षिराजन के रोल में अक्षय कुमार जितना तूफान मचा सकते थे, उन्होंने मचाया है. लेकिन समस्या ये है कि उनका किरदार फिल्म में पहले डेढ़ घंटे के बाद आता है. उसके आने के बाद पक्षिराजन के इविल कैरेक्टर बनने की कहानी दिखाई जाती है, जिससे आप संतुष्ट नहीं महसूस करते हैं. फिल्म का ये वाला हिस्सा थोड़ा बोरिंग भी है. क्योंकि आपको जिस शॉक फैक्टर की उम्मीद थी उस बैक स्टोरी से वो आपको नहीं मिलता है. बावजूद इसके अक्षय का किरदार रजनीकांत पर भारी पड़ता है. फिल्म के कई हिस्सों में ऐसा लगता है कि पक्षिराजन का कैरेक्टर मजबूत होते हुए भी उसे चिट्टी के आगे कमजोर दिखाया जा रहा है. ये चीज़ बहुत खलती है. तीसरी ओर हैं एमी जैक्सन, जिन्हें फिल्म का ग्लैमर कोशेंट मेंटेन करने के लिए रखा गया है. उनका अपना कुछ नहीं है, न शरीर, न सॉफ्टवेयर, न रोल. फिल्म की मुख्य महिला किरदार का ऐसा ट्रीटमेंट देखकर एक खीज सी होती है. आदिल हुसैन कुछ ही सीन्स में दिखते हैं. लोहे के शरीर वाले लोगों के इर्द-गिर्द होते हुए भी वो अपना लोहा मनवा जाते हैं. लेकिन पक्षिराजन के अलावा ऐसा कोई किरदार नहीं है, जो आपके जहन में अपनी जगह बना सके. उनका लुक, कैरेक्टर से लेकर लड़ने का कारण सब कुछ जायज़ है. इसलिए फिल्म अपने आप में थोड़ी विरोधाभासी भी लगती है.

'2.0' 2010 में आई फिल्म एंथिरन का सीक्वल है. पिछली फिल्म की तरह इसमें भी रजनीकांत ने डबल रोल किया है.
‘2.0’ 2010 में आई फिल्म ‘एंथिरन’ का सीक्वल है. पिछली फिल्म की तरह इसमें भी रजनीकांत ने डबल रोल किया है.

बाकी टेक्निकल इशूज़

फिल्म में वीएफएक्स का काम ठीक लगता है क्योंकि फिल्म के आधे से ज़्यादा हिस्से में आपको वही देखना पड़ता है. इसमें कुछ सीन्स तो बहुत सही हैं. जैसे 2016 में आई मार्वल्स की फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज’ में बिल्डिंग फोल्ड होने लगती हैं, ‘2.0’ में वैसे ही सड़कों के साथ होता है. इसके अलावा जंगल में मोबाइल फोन्स की मदद से उसे रौशन कर देने वाला सीन भी आंखों को अच्छा लगता है. लेकिन समस्या ये है कि उन सीन्स में भी विजुअल इफेक्ट्स का यूज़ किया जाता है, जहां उसकी जरूरत नहीं है. ऐसा है कि बहुत अद्भुत न होते हुए भी इस फिल्म के वीएफएक्स अप टू द मार्क हैं. रजनीकांत का सांंइंटिस्ट वाला किरदार सीरियस है इसलिए उनके जिम्मे बातचीत के अलावा कोई खास डायलॉग नहीं है. लेकिन चिट्टी खिलंदड़ और मुंहफट है, उसके हिस्से पंच मारने के मौके खूब आए हैं. जैसे मोबाइल फोन से बना पक्षिराजन का किरदार जब चिट्टी से मिलता है, तो चिट्टी उसे ‘नाइस डीपी’ कहके कॉम्लीमेंट करता है. एक दूसरे सीन में जब चिट्टी को लगता है कि पक्षिराजन का खेल खत्म हो गया, तो वो जनता को ‘बैलेंस ज़ीरो’ कहकर इत्तिला करता है. सबसे बुरी बात ये है कि एमी के मुंह से हमें न तो किसी तरह का कोई सीरियस डायलॉग और न ही कोई प्रॉपर पंच सुनने को मिलता है. उन्हें फिल्म का टेंपरेचर बढ़ाने के लिए रखा गया है, जो वो अपने इंट्रो सीन से बनाकर रखती हैं और इस पर डायरेक्टर का खासा ज़ोर भी रहता है. क्योंकि पूरा एक सीक्वेंस इसी के बारे में है.

नाइस डीपी.
नाइस डीपी.

ओवरऑल एक्सपीरियंस

फिल्म के पहले पार्ट में इस उड़ते मोबाइल फोन्स वाली समस्या को एस्टैबलिश करने के लिए बहुत टाइम लिया जाता है. इसमें आप बोर तो नहीं होते लेकिन आपको पता होता है ये समय बेकार में खर्च हो रहा है. इंटरवल के बाद फिल्म से बहुत उम्मीद होती है, लेकिन पक्षिराजन की बैक स्टोरी उसे झिलाऊ बना देती है. क्लाइमैक्स में चिट्टी और पक्षिराजन के बीच में एक एक्शन सीक्वेंस है, पूरी फिल्म का कुल जमा वही है. वो अच्छा लगता है. उसे देखकर एक बार को 2017 में आई फिल्म ‘थॉर रैगनारॉक’ में हल्क और थॉर की लड़ाई याद आ जाती है. मौज से भरपूर लेकिन भयानक मारपीट. इस सीन में रोबोट चिट्टी अपना मैग्नेटिक पावर यूज़ करके आसपास की सारी लोहे की चीज़ें अपने ऊपर चिपका लेता है. इसमें बसें और कारें भी शामिल हैं. फिर यहां-वहां चिपकी कारों को वो अपने पेट पर चिपकाकर ऐब्स बना लेता है. उससे भी इंट्रेस्टिंग ये कि पक्षिराजन उन्हीं ऐब्स को मुक्का मारकर चिट्टी में आग लगा देता है. देखने में ये सीन्स मजेदार लगते हैं. ‘2.0’ फिल्म को देखने का ओवरऑल एक्सपीरियंस बताएं, तो कहानी में ज़्यादा दम न होने के बावजूद अपने खूबसूरत विजुअल्स से आपको अपनी ओर खींच लेती है.

'2.0' में एमी ने डॉ. वगीगर निर्मित रोबोट नीला का रोल किया है.
‘2.0’ में एमी ने डॉ. वसीगरन निर्मित रोबोट नीला का रोल किया है.

देखें कि न देखें

फिल्म के डायरेक्टर शंकर ने इस फिल्म के विजुअल्स पर अपनी अधिकतर ऊर्जा खपाई इसलिए वो जानदार लगते हैं, फिल्म के बाकी डिपार्टमेंट्स में आपको वैसा कुछ महसूस नहीं होता. इसे देखने वाले पहले ही लाइन लगाकर खड़े हैं लेकिन अगर आप कुछ दमदार कंटेंट देखना चाहते हैं, तो मैंने शुरुआती क्रेडिट सीन में पढ़ लिया है कि ‘2.0’ का ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पार्टनर ऐमेजॉन प्राइम वीडियो है. इसलिए अपने विवेक से फैसला लें और दिल की बजाय जेब और दिमाग की सुनें.


वीडियो देखें: फिल्म रिव्यू: पीहू

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