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2020 के 13 रीजनल एक्टर्स, जिन्हें देख बॉलीवुड सुपरस्टार्स भूल जाओगे

साल 2020 खत्म होने को है. इस साल कई फिल्में आनी थी. हिंदी भी और अन्य भाषाओं में भी. पर सबके सपने पूरे नहीं होते लक्ष्मण.  इसलिए कम ही आ पाईं. उनमें से भी कुछ ही थिएटर्स पर और ज़्यादातर OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ हुई. इन्ही फिल्मों में से कुछ क्रिटिकली अक्लेम्ड रीजनल फिल्में हमने छांटी. ताकि बात कर सकें, उनकी ब्रेकआउट परफॉरमेंसेज़ की. तो एक-एक कर शुरू करते हैं.

Bharat Talkies


1. एक्ट्रेस – अंकिता माझी
भाषा – बांग्ला सिनेमा
फिल्म – निरोंतोर

ankita majhi in nirontor
अंकिता ने अपने किरदार के डिप्रेशन को शो-शा में तब्दील नहीं होने दिया. फोटो – ट्रेलर

कुछ किरदार पूरी फिल्म में नहीं होते. थोड़ी देर के लिए आंखों के सामने आते हैं. लेकिन उतने में ही याद रह जाते हैं. ऐसा ही है ‘निरोंतोर’ में अंकिता का किरदार. ‘निरोंतोर’ एक मिडल एज्ड इंजीनियर की कहानी है. जो अपने असिस्टेंट के साथ पहाड़ों में गया है. रेज़ॉर्ट के लिए लोकेशन ढूंढने. फिल्म की इस वन लाइनर समरी में अंकिता के किरदार की कोई जगह नहीं. फिल्म में भी लेट ही दिखती हैं. सेकेंड हाफ में. इंजीनियर की वाइफ जो क्लिनिकली डिप्रेस्ड है. पर अपने किरदार के डिप्रेशन को शो-शा में तब्दील नहीं किया. उसे ऐसे ओढ़ा कि मानो उनका हिस्सा हो गया हो. जितनी देर स्क्रीन पर रहीं, अपनी परफॉरमेंस से उसके निशान बिखेरती रही. अपनी आवाज से, चेहरे के हाव-भाव से.


2.  एक्टर – सुहास
भाषा – तेलुगु सिनेमा
फिल्म – कलर फोटो

suhas in colour photo
सुहास का किरदार दुनिया से पहले खुद से लड़ रहा है. फोटो – ट्रेलर

इसी साल एक फेयरनेस क्रीम का नाम बदला गया. नाम से ‘फेयर’ शब्द हटा. पर क्या इसके पीछे चली आ रही सोच पर कुछ फर्क पड़ा. कुछ ऐसे ही बैकड्रॉप पर सेट है ये लव स्टोरी. एक डार्क कॉम्पलेक्शन वाले लड़के की कहानी. जिसे एक ‘फेयर’ सी लड़की से प्यार हो जाता है. इससे पहले कि दुनिया कोई बंदिशे लगाए, ये काम वो खुद अपने लिए कर लेता है. शायद तजुर्बा ही ऐसा रहा होगा. उधर, वो लड़की दुनिया की परवाह किए बिना उससे प्यार करने लगती है. दुनिया से लड़ने से पहले सुहास के किरदार की लड़ाई खुद से है. सोसाइटी ने रंगभेद की परिभाषा जो उसके दिमाग में गोदी है, उस परिभाषा से है. सुहास ने अपने किरदार की इंसिक्योरिटी और बेचैनी को खुलकर सामने आने दिया. एक सीन का ज़िक्र करते हैं. बेहद हार्ड हिटिंग. सुहास का किरदार अपने रंग और उससे जुड़ी बातों से तंग आ जाता है. इमोशंस के जिस बांध पर रोक लगा रखी थी, उसे खोल देता है. फूट-फूटकर रोने लगता है. गुस्से में अपने चेहरे पर फेयरनेस क्रीम रगड़ने लगता है. इस एक सीन से आपको सुहास की एक्टिंग का कैलिबर पता चल जाएगा.


3. एक्टर – इंद्रजीत सुकुमारन
भाषा – मलयालम सिनेमा
फिल्म – हलाल लव स्टोरी

indrajith sukumaran in halal love story
अपने मज़हब और मान्यता के हिसाब से एक फिल्म बनाने की कोशिश. फोटो – ट्रेलर

दो सिनेमा प्रेमी. रहीम और शरीफ़. फिल्म बनाना चाहते हैं. आप पूछेंगे मुश्किल क्या है? जवाब है उनकी सोच. जो मानती है कि आजकल बन रही ज़्यादातर फिल्में ‘हराम’ हैं. इसलिए वो एक हलाल फिल्म बनाना चाहते हैं. ऐसी फिल्म जो मज़हब के मुताबिक बिल्कुल साफ-सुथरी हो. तैयारी में जुट जाते हैं. बजट बनाते हैं. डायरेक्टर ढूंढते हैं. शरीफ़ ही फिल्म में हीरो भी बनता है. शरीफ़ का रोल किया है इंद्रजीत सुकुमारन ने. एक मौका आता है, जब हीरोइन की जरूरत पड़ती है. शरीफ़ किसी और के साथ रोमांस कर नहीं सकता. क्यूंकि वो ‘हराम’ हो जाएगा. इसलिए अपनी पत्नी को ही हीरोइन के लिए फाइनल करता है. मियां-बीवी में मन मुटाव होने लगते हैं. पर फिल्म भी पूरी करनी है. शरीफ़ के मन की इसी कशमकश को इंद्रजीत ने बड़ी सादगी से पेश किया और इस लिस्ट में जगह पा गए.


4.  एक्ट्रेस – ग्रेस एंटनी
भाषा – मलयालम सिनेमा
फिल्म – हलाल लव स्टोरी

grace antony in halal love story
अपने किरदार के खालीपन को पकड़ के रखा और ज़रूरत पड़ने पर बाहर निकाला. फोटो – ट्रेलर

अगला नाम भी ‘हलाल लव स्टोरी’ से ही है. ग्रेस एंटनी. फिल्म में शरीफ़ की वाइफ सुहरा बनी हैं. फिल्म में बन रही फिल्म में भी इन्हे शरीफ़ की वाइफ का रोल ही करना है. मान भी जाती हैं. पर एक समस्या है. सुहरा ने अपनी ज़्यादातर लाइफ घर के अंदर बिताई है. कभी एक्टिंग के ए से भी वास्ता नहीं पड़ा. ग्रेस ने यहां एक बैलेंस बनाया. नॉन-एक्टर किरदार से फिल्मी किस्म की एक्टिंग नहीं करवाई. उनका किरदार ऐसा है, जो अपने पति के साथ होते हुए भी अकेला है. मानो कुछ कसक है मन में. सुहरा के ऐसे ही ट्रेटस को ओढ़ लिया. बोलकर कुछ ज़ाहिर नहीं किया. बल्कि अपनी बड़ी-बड़ी खाली आंखों को कहने दिया. डायलॉग डिलीवरी भी एकदम टिपिकल हाउसवाइफ जैसी. वही बेबाकी. जैसे शरीफ़ को एक जगह कहती हैं, “अगर तुम्हारा नाम शरीफ़ है, तो इसका ये मतलब नहीं कि तुम हमेशा सही हो.”

पिछले साल एक प्यारी सी मलयालम फिल्म आई थी. ‘कुंबलंगी नाइट्स’. खूब तारीफ़ें बटोरी. ग्रेस भी उस फिल्म का हिस्सा थी.


5.  एक्टर – कुंचको बोबन
भाषा – मलयालम सिनेमा
फिल्म – अंजाम पथिरा

kunchacko boban in anjaam pathiraa
फिल्म सिंपल पुलिस चेज़ की कहानी से परे है. फोटो – ट्रेलर

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में जाना माना नाम. करीब 100 फिल्में कर चुके हैं. इसी साल आई उनकी ‘अंजाम पथिरा’. आते ही ब्लॉकबस्टर हुई. आलम ऐसा हुआ कि साल की सबसे ज़्यादा कमाने वाली मलयालम फिल्म बन गई. कहानी एक सस्पेंस थ्रिलर है. एक के बाद एक पुलिसवालों की लाशें मिलना शुरू होती है. पुलिस को  समझ नहीं आता कि चल क्या रहा है. एक क्रिमिनोलॉजिस्ट की हेल्प ली जाती है. कि किलर का कोई तो सुराग ढूंढो. कुंचको ही यहां क्रिमिनोलॉजिस्ट बने हैं. 2011 में इनकी फिल्म आई थी. ‘ट्रैफिक’. लीड एक्टर्स में से थे. इसी का आगे जाकर हिंदी रीमेक भी बना. सेम इसी नाम से. मनोज बाजपेयी ने यहां मुख्य किरदार निभाया. कुंचको की कुछ क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्में आपको ज़रूर देखनी चाहिए. उनमें से दो नाम हैं, ‘टेक ऑफ’ और पिछले साल आई ‘वायरस’.


6. एक्ट्रेस – सई ताम्हणकर
भाषा – मराठी सिनेमा
फिल्म – धुरला

sai tamhankar in dhurla
इनके किरदार ने ‘पॉलिटिक्स इज़ अ मैन्ज़ वर्ल्ड’ जैसी सोच को गलत साबित किया. फोटो – ट्रेलर

सही कहते हैं कि राजनीति बड़ी टेढ़ी चीज़ है. फिल्म ‘धुरला’ में भी कुछ ऐसा ही मामला है. गांव के सरपंच की अचानक डेथ हो जाती है. अपने घर के मुखिया भी थे. सरपंच की कुर्सी ज्यादा टाइम तक खाली भी नहीं रह सकती. इसलिए फिर से चुनाव की बात उठती है. सामने दो दावेदार तैयार हैं. पर पर्दे के पीछे कई खिलाड़ी. सबके अपने-अपने मोटिव. इन्हीं में से एक है हर्षदा. जिसे प्ले किया सई ताम्हणकर ने. पूरी फिल्म में अपने किरदार को कंट्रोल में रखा. ‘पॉलिटिक्स इज़ अ मैन्ज़ वर्ल्ड’ जैसी सोच को उल्टा पटका. मराठी सिनेमा में सई एक पॉपुलर नाम हैं. 2008 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ से फिल्मी सफर शुरू किया. उसके बाद करीब दर्ज़न भर मराठी फिल्में कर चुकीं. हिंदी ऑडियंस इन्हे 2015 में आई ‘हंटर’ से पहचानती है.


7.  एक्टर – सूर्या
भाषा – तमिल सिनेमा
फिल्म – सूराराई पोट्रू

suriya in soorarai pottru
फिल्म देखने के बाद सूर्या की परफॉरमेंस आपके साथ रहेगी. फोटो – ट्रेलर

नवंबर में आई ‘सूराराई पोट्रू’. देखकर लोग बोले, ऐसे बनती है बायोपिक. ‘डेक्कन एयरलाइंस’ के फाउन्डर कैप्टन गोपीनाथ पर बेस्ड. कहानी है मारा नाम के आदमी की. ज़मीन से उठा, पर सपने आसमान में उड़ने के. चाहता है कि एक दिन खुद की एयरलाइंस कंपनी हो. बस अपने इसी सपने को हकीकत करने में लग जाता है. मारा का रोल किया सूर्या ने. और ऐसा किया कि मानो किरदार की स्किन में ढल गए. बायोपिक्स में ओवर दी टॉप परफॉरमेंस की एक प्रथा सी चली आ रही है. मतलब परफॉरमेंस लाउड है, तभी नोटिस होगी. सूर्या ने यहां ये बात गलत साबित की. जहां जितने इमोशन की जरूरत थी, उतने ही डाले. जैसे एक सीन है. मारा एयरपोर्ट पर है. और अपने घर जाना चाहता है. जेब में पैसे नहीं. पैसेंजर्स से रिक्वेस्ट करता है. उन्हे अपनी बेबसी का यकीन दिलाने की कोशिश करता है. समझाना चाहता है कि झूठ नहीं बोल रहा. सूर्या को आप 2005 में आई ‘गजनी’ से भी पहचानते होंगे. आमिर खान वाली फिल्म इसी का रीमेक थी.


8.  एक्टर – कालिदास जयराम
भाषा – तमिल सिनेमा
फिल्म – पाव कदैगल

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ये किरदार कालिदास जयराम के करियर का टर्निंग पॉइंट हो सकता है. फोटो – ट्रेलर

लिस्ट में अगले हैं कालिदास जयराम. कभी बतौर चाइल्ड एक्टर डेब्यू किया था. एक नैशनल अवॉर्ड भी जीता. आगे जाकर तमिल और मलयालम फिल्मों में काम शुरू किया. पर ज़्यादातर समय रडार के नीचे रहे. यानि काम को उतनी सराहना नहीं मिली. फिर हाल ही में आई ‘पाव कदैगल’. और सब बदल गया. कालिदास ने यहां ‘सत्तार’ नाम के एक ट्रांसजेंडर का रोल किया. फिल्म सेट पे कुछ ट्रांसजेंडर लोग भी मौजूद थे. कालिदास की एक्टिंग देख उनके लिए भी अपने आंसू रोकना मुश्किल हो गया. रोल ही कुछ ऐसा निभाया था. इसी का एक एग्ज़ामप्ल एक सीन से जानिए. एक जगह है, जहां सत्तार का दोस्त उसे गले लगा लेता है. सत्तार झिझकता है. आंखें नम हैं. सिसकियां भरते हुए कहता है कि आज तक जिसने भी छुआ, गंदे इरादे से छुआ. सिर्फ एक लाइन में सोसाइटी की हकीकत बयां कर दी. इस पॉइंट पर अगर आपकी आंखें भी नम होने लगें, तो उन्हे रोकिएगा मत.


9.  एक्टर – फहाद फ़ासिल
भाषा – मलयालम सिनेमा
फिल्म – ट्रांस, सी यू सून

fahadh faasil in trance
फहाद का किरदार आपको सम्मोहित करके रख देगा. फोटो – ट्रेलर

फहाद फ़ासिल ने इस साल 2 फिल्में की. पहली, ‘ट्रांस’. एक एस्पायरिंग मोटिवेशनल स्पीकर की कहानी, जो आगे जाकर बड़ा स्पिरिचुअल लीडर बन बैठता है. बेसिकली, ये फिल्म स्पिरिचुअल लीडर्स के पूरे गोरखधंधे पर बनी है. कि कैसे ये लीडर्स लोगों को जैसी ज़िंदगी जीने से रोकते हैं, खुद ठीक वैसी ही जीते हैं. फहाद ही ये लीडर बने हैं. फिल्म में इनका किरादर गज़ब है. ऐसा कि इनकी बातों के अलावा सुननेवालों को कुछ और ना सुने. मतलब तड़पाकर रख देता है. कुछ ऐसा ही हाल फिल्म देखने वाली ऑडियंस का भी होता है.

C U Soon
सी यू सून: पूरी तरह से लॉकडाउन में बनी फिल्म. फोटो – ट्रेलर

दूसरी फिल्म थी, ‘सी यू सून’. लिटरली एक एक्सपेरिमेंट. पूरी तरह से लॉकडॉउन में बनी फिल्म. वो दिन, जब हम अपना टाइम अपनी स्क्रीन्स पर बिता रहे थे. बाहर नहीं. फिल्म ने भी अपना सारा टाइम स्क्रीन्स पे ही निकाला. माने पूरी फिल्म कंप्यूटर और लैपटॉप स्क्रीन्स पर चली. उसी प्वाइंट ऑफ व्यू से जनता ने देखा. जिमी और अनु की शादी होने वाली है. अचानक अनु बिन बताए गायब हो जाती है. जिमी अपने कज़िन केविन की हेल्प लेता है. जो एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर है. फिल्म में ज़्यादातर समय आपको एक्टर्स का क्लोज़ अप दिखेगा. यानि कैमरा उनके चेहरे के एकदम पास. एक्टर चाहे कैमरा से दूर रहकर झूठ बोल ले. पर पास आते ही, वो पेश करना होगा जो उसके मन में चल रहा है. और यहां केविन बने फहाद ने यही किया. अनु को ढूंढने की जद्दोजहद में जितने इमोशंस का तूफान आया. उसे ईमानदारी से सामने रखा. कहीं कोई बेईमानी नहीं की.


10. एक्ट्रेस  – एना बेन
भाषा – मलयालम सिनेमा
फिल्म – कपेला

अगला नाम है एना बेन. अपनी फिल्म ‘कपेला’ के लिए. यहां वो जेसी बनी. छोटे से गांव में रहने वाली लड़की. मां टेलरिंग का काम करती हैं. एक दिन जेसी को फोन मिलाने को कहती हैं. एक डिजिट के फेर से रोंग नंबर लग जाता है. फोन उठाता है विष्णु. शहर में रहने वाला ऑटो ड्राइवर. दोनों में बातें शुरू हो जाती हैं. धीरे-धीरे प्यार बढ़ने लगता है. इसी चक्कर में जेसी शहर आ जाती है. विष्णु से मिलने. यहां आता है ट्विस्ट. और एंट्री होती है रॉय की. उसके इरादे किसी को नहीं पता. पर वो इन दोनों की ज़िंदगी ऊपर नीचे करके रख देता है.

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छोटी-छोटी चीज़ों में खुशियां ढूंढने वाली जेसी. फोटो – ट्रेलर

जेसी एक सिंपल सी लड़की है. बंदिशों में रहती है. पढ़ाई में कमजोर पर छोटी छोटी चीज़ों में खुशियां ढूंढने वाली. खुद की छोटी आंखें और टेढ़े-मेढ़े दांतो का मज़ाक उड़ाने वाली. इतनी ही सिंप्लिसिटी से एना ने इसे प्ले किया. किरदार की नादानी को बरकरार रखा. फहाद फ़ासिल की तरह ये भी ‘कुंबलंगी नाइट्स’ का हिस्सा थी.


11. एक्ट्रेस  – ज्योतिका
भाषा – तमिल सिनेमा
फिल्म – पोनमगल वंधल

नेक्स्ट हैं ज्योतिका. अपनी कोर्टरूम ड्रामा पोनमगल वंधल के लिए. शुरुआत होती है 15 साल पुराने केस से. जहां 5 बच्चों को किडनैप कर बुरी तरह मार डाला गया था. आरोपी थी एक लड़की. वेंबा नाम की एक लॉयर इसे रिओपन करवाती है. इन्वेस्टिगेशन शुरू होती है. पाती है कि एकाएक पूरा सिस्टम उसके सामने आ रहा है. चीज़ें वैसी नहीं, जैसी दिख रही हैं.

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ज्योतिका ने लॉयर का रोल किया जो सीरीयल किलर को डिफ़ेंड कर रही है. फोटो – ट्रेलर

ज्योतिका ने ही वेंबा का रोल किया. फिल्म के सब्जेक्ट की सेंसिटिविटी को अच्छे से समझा. उसी के हिसाब से अपने किरदार को ढाला. पुरुष प्रधान समाज में एक औरत, दूसरी औरत के लिए खड़ी हुई. लाज़मी था आसान नहीं होगा. खुद को मज़बूत करते-करते वेंबा का किरदार भी टूटता है. जैसे कोर्ट सीन में. जहां अपना फाइनल स्टेटमेंट देते समय फूट पड़ती है. मानो इतना देख लिया कि अब और अंदर नहीं रख सकती.

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ज्योतिका के किरदार की लड़ाई पूरे सिस्टम से है. फोटो – ट्रेलर

अगर आप ज्योतिका को नाम से नहीं पहचान पा रहे हैं, तो कोई बात नहीं. यूट्यूब पर अक्षय खन्ना के साथ इनका एक गाना है. ‘किस्सा हम लिखेंगे’. देख लीजिए, पहचान जाएंगे.


12.  एक्टर – राज बी शेट्टी
भाषा – कन्नड़ सिनेमा
फिल्म – मायाबाज़ार 2016

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राज की कॉमेडिक टाइमिंग गज़ब है. फोटो – ट्रेलर

लिस्ट में अगले हैं राज बी शेट्टी. 2016. नोटबंदी का साल. उसी “यादगार साल” पर बेस्ड है इनकी ये कॉमेडी थ्रिलर. ‘मायाबाज़ार 2016’. एक ईमानदार पुलिसवाला, एक प्रोफेशनल चोर और एक प्यार में पागल आशिक. नोटबंदी का वक्त तीनों को साथ ले आता है. बड़ा घपला करने का प्लान बनता है. ऐसा, जिससे जल्दी पैसा बन जाए. इसी के चक्कर में आगे अड़ंगे होते हैं. पर ऐसा नहीं है कि फिल्म में सिर्फ नोटबंदी के आफ्टर इफेक्टस को कॉमेडी के रूप में ही पेश किया. लोगों की जेब में इसने कितना गहरा छेद किया, उसकी भी बात हुई है. राज ने फिल्म में चोर का किरदार निभाया. तीनों की जुगलबंदी में आपका अटेंशन राज पे ही जाएगा. पिछले साल एक फिल्म आई थी. ‘उजड़ा चमन’. जिसका आयुष्मान की ‘बाला’ के साथ लीगल पंगा भी चला. वो राज की ही फिल्म का ऑफिशियल रीमेक थी. नाम था ‘ओनदु मोटेया कथे’.


13.  एक्टर – आर राजू
भाषा – तमिल सिनेमा
फिल्म – बारम

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फिल्म में 85 नए चेहरों को जगह मिली. फोटो – टीज़र

‘बारम’ यानि बोझ. कहानी शुरू होती है 65 साल के करुप्पासामी से. पेशे से नाइट वॉचमैन हैं. अपनी बहन और दो भांजों के साथ रहते हैं. एक दिन काम से लौटते वक्त एक्सीडेंट हो जाता है. जिसकी बदौलत बेड रेस्ट पे आना पड़ता है. तब इनके बेटे की एंट्री होती है. इलाज़ के लिए अपने साथ ले जाता है. कुछ दिन बाद खबर आती है कि करुप्पासामी नहीं रहे. अचानक हुई मौत पे सवाल उठते हैं. और इन्ही के जवाब फिल्म ढूंढती है. फिल्म में 85 नए चेहरे थे. आर राजू भी अपवाद नहीं थे. पहली बार कैमरा फेस कर रहे थे. पर ये ज़ाहिर नहीं होने दिया. अपनी एक्टिंग का बार कंट्रोल में रखा. ओवर दी टॉप नहीं दौड़ने दिया.

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फिल्म ‘मर्सी किलिंग’ जैसे कॉनसेप्ट पर बात करती है. फोटो – टीज़र

‘बारम’ को नैशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है. आप सोचेंगे कि इस साल तो हुए नहीं. फिर कैसे मिल गया. दरअसल, 2018 में कई फिल्म फेस्टिवल्स में इसे दिखाया गया था. जिसकी बदौलत पिछले साल नैशनल अवॉर्ड मिला. हालांकि, दर्शकों के लिए इसे इस साल 21 फ़रवरी को रिलीज़ किया गया.


वीडियो: कैसी है नेटफ्लिक्स की तमिल एंथोलॉजी ‘पाव कदैगल’, जानिए –

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