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रेशमा के 12 गाने जो जीते जी सुन लेने चाहिए!

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शुरू करने से पहले वो वीडियो देखिए जो मन में ऐसी कहानी दौड़ा देता है कि ये रश ड्रग्स जैसा लगता है. एक बंजारन लड़की रेशमा. पढ़ाई लिखाई नहीं की. मुंह में चांदी का चमचा, सिरहाने मलमल का तकिया नहीं मिला. गलियों, फुटपाथों पर सौदागरी करते हुए वो सम्मान नहीं मिला जो एक इंसान को मिलना चाहिए. एक औरत होने के नाते जो जकड़ने होती हैं, वो थीं. एक गायिका के नाते दो वक्त की रोटी कमाने के संघर्ष भी रहे. रेशमा ने गाना रियाज़ करके नहीं सीखा. आवारा भटकते हुए सीखा, भूखे पेेट सीखा. ठोकरों ने उनके गाने ‘बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों..’ में दर्द भरा. और इसीलिए बिना किन्हीं मुर्कियों के गीत मूल्यवान हो जाता है. न जाने कितने दर्द रेशमा के जीवन में रहे होंगे कि ऐसी हूक वे दे पाती थीं.

जवानी में ये गाना गाया. हिट हो गईं. फिर परिवार, बच्चे, घरेलू दुश्वारियां, सामाजिक दिक्कतें – इन सब में घिसती चली गईं.

फिर संगीत की दुनिया बदली. वे आसमान से जमीन पर आ गईं. उनका गायन पुराना पड़ गया. चमक-धमक जीत गई. न जाने कितनी रातें रेशमा रोई होंगी.

ये सब विचार उस समय मन में कौंध जाते हैं जब हम 2008 में पाकिस्तान में हुए एक स्टाइल अवॉर्ड्स में आवाज सुनते हैं ‘बिछड़े अभी तो हम..’ और फिर रेशमा मंच पर आती हैं. बूढ़ी. गले के भीतर कैंसर से कर दिए गए घाव और वहां से स्पर्श करके निकलती वो आवाज. सोचते हुए रोना आता है. आतिफ असलम आते हैं और जब ये पंक्ति गाते हैं, “टूटे जमाने तेरे हाथ निगोड़े..” और आंखें भीग जाने को तैयार हो जाती हैं. क्योंकि मन में वो उधेड़बुन चल रही होती है कि जमाने और रेशमा का आमना सामना है. नियति और रेशमा का आमना-सामना है. रेशमा के जीवन में कोई प्रेम भी रहा होगा जिसने विरह दी होगी ये भी मन में आता है क्योंकि गीत ऐसा सोचने पर मजबूर कर देता है.

आतिफ आगे गाते हैं,  “दिल से दिलों के तूने शीशे तोड़े, हिज्र की ऊंची दीवार बनाई, हाय लंबी जुदाई.”

ये जुदाई प्रेमी से भी है, जीवन के सुखों से भी, पर्याप्त सम्मान से भी, शरीर की तंदुरुस्ती से भी, संगीत की दुनिया में ऊपर बने रहने से भी.

इमोशंस और भी भारी हो जाते हैं जब रेशमा को देखते हैं. वे चुप चाप नीचे देखते हुए सुन रही होती हैं. जीवन ने उन्हें जो भी दिया है, चुप चाप उन्होंने सहा है, भोगा है. कल्पनाएं करोड़ों की संख्या में दिमाग में दौड़ने लगती हैं. ज्यादा कुछ समझ नहीं आता. बस इसे देखते हुए रोना आता है.

ये आंसू उन कलाकारों के लिए भी हैं जो ठोकरों से बनाए जाते हैं. इतनी पीड़ा के बाद उनका गला वो लहरें निकालता है जो बहा ले जाती हैं. खाली पेट, पीड़ा में गा रहे होते हैं तो वो गीत अमर हो जाते हैं. हमें सुनने का ये सुख देने के लिए उन्हें इन सबसे से गुजरना पड़ता है और एक दिन जब वे बूढ़े हो जाते हैं तो हम उन्हें छोड़ देते हैं. इस ट्रैजिडी से हमारे ज्यादातर आइकॉनिक गायक नवाजे गए हैं. रेशमा उनमें से एक हैं, प्रमुख हैं. अगर हम उन्हें पूरी डिग्निटी देते हुए और उनके गीतों की ऐतिहासिकता को समझते हुए सुनेंगे तो बहुत आनंदित हो जाएंगे. जीते जी एक बार ये आनंद लेना चाहिए.

#1. बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों

#2. हायो रब्बा नइयो लगदा दिल मेरा

#3. औंदियां नसीबां नाले ए घड़ियां

#4. इक तैनू मंगेया इ रब्ब कोलों, कोई होर दुआ मंगेया नइ

#5. किते नैन ना जोड़ीं

#6. वे मैं चोरी चोरी तेरे नाल ला लेय्यां अक्खां वे

#7. साड्‌डे वल मुखड़ा मोड़, वे प्यारेया साड्‌डे वल मुखड़ा मोड़

#8. अखियां नूं रेण दे अखियां दे कौल कौल

#9. केसरिया बालम आवो नी

#10. तू मिल जावें दुख मुक जांदे ने

#11. लो दिल की बात आप भी हम से छुपा गए

#12. फूल बनड़ो, रे नादान बनड़ो

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