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10 विशुद्ध बेवकूफियां, जो सिर्फ हिंदुस्तानी टीवी पर होती हैं

‘ये सरहद पार के ड्रामे मत देखा करो’

ये पाकिस्तान में 2013 में आए एक बढ़िया सीरियल ‘औन ज़ारा’ के शुरुआती डायलॉग्स में से एक है. औन की मां फुफ्फो को झिड़कते हुए कहती हैं. उनका मानना है कि फुफ्फो को हिंदुस्तानी टीवी सीरियल देखने का शौक है और इसीलिए उनका दिमाग खराब है. मेरे हिसाब से उनकी बात एकदम सही है. हिंदुस्तान में टीवी सीरियल के नाम पर जो कुछ दिखाया जाता है, वो है ही ऐसा कि पाकिस्तान में बैठे लोग तक नाम रखें. देखने वाले बनाने वालों को गरियाते हैं और बनाने वाले देखने वालों को. गोल-गोल बातें होती हैं. लेकिन बेवकूफी कायम रहती है. चाहे जो चैनल हो, जो सीरियल हो.

पेश है ऐसी 10 विशुद्ध बेवकूफियों की एक लिस्टः

#1. लाश के साथ शादीः ‘देवांशी’ (कलर्स टीवी)

इस सीरियल का नाम देवांशी (हेली शाह) के नाम पर है. देवांशी को प्यार है वरदान (मुदित नायर) से. बात शादी तक पहुंच गई है. लेकिन मामला एकदम स्मूथ चल जाए तो मामला टीवी का कहां रह जाएगा. तो यहां ये होने वाला है कि घोड़े पर वरदान नहीं, वरदान की डेड बॉडी आएगी. लेकिन देवांशी तो प्यार में है और उसका प्यार शबाब पर है, माने शादी हो रही है, तो वो शादी का प्लान टालेगी नहीं. वो अपनी चुनरी डेड बॉडी से बांध कर शादी की रस्में पूरी करेगी. अब बाकी सब तो किसी तरह हो जाएगा, बात अटकेगी सिंदूर दान पर.

फोटोः Voot
फोटोः Voot

लाख टके का सवाल होगा कि डेड बॉडी सिंदूर कैसे भरेगी? ये फिलहाल पता चलना बाकी है. तब तक आप यहां क्लिक करके ये जान लें कि मरने के बाद डेड बॉडी में क्या-क्या बदलाव आते हैं. इससे आपको गेस करने में मदद मिलेगी कि इस मामले में सिंदूर दान किस-किस तरह हो सकता है.

#2. नौ साल के बच्चे पर शादी का पहराः ‘पहरेदार पिया की’ (सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न)

ये सीरियल टीवी पर आने वाला है. कब से, मालूम नहीं. पर आएगा. और जब आएगा, इसकी कहानी कुछ यूं होगी कि एक लड़की (तेजस्वी प्रकाश) के पापा एक राजघराने के मुलाज़िम हैं. भाग का खेल ऐसा होगा कि लड़की को 9 साल के राजकुमार (अफान खान) की रक्षा करने के लिए उस से ब्याह करना पड़ेगा. ऐसे वो पहरेदार पिया की हो जाएगी. लव ट्राएंगल यहां भी होगा. तीसरा कोना बनेंगे जितेन लालवानी. इनका नाम फिलहाल सोचा जा रहा है. सीरियल की शूटिंग उदयपुर में हो रही है.

पहरेदार पिया की
पहरेदार पिया की

#3. गोरिल्ला के साथ लव ट्राएंगलः ‘थपकी प्यार की’ – कलर्स टीवी

‘थपकी प्यार की’ जब लॉन्च हुआ, तो उसने इसलिए ध्यान खींचा क्योंकि उसकी लीड एक ऐसी लड़की थी, जो तुतलाती थी. कहा गया कि इस शो में कुछ अलग  है. लेकिन इतने से प्रोडक्शन टीम का काम नहीं चला. उन्हें स्टोरी में असली ट्विस्ट  चाहिए था. तो उन्होंने सीरियल में गोरिल्ला की एंट्री करा दी! स्टोरी की डीटेल देंगे तो आपको चक्कर आ जाएगा. इतना समझें कि थपकी (जिग्यासा सिंह) वसुंधरा को घर में वापस लाने के लिए एक गोरिल्ला को ले आती है! लेकिन गोरिल्ला का उसे दिए काम में मन नहीं लगता और वो थपकी के प्यार में पड़ जाता है. ऐसे बन गया लव-ट्राएंगल – एक कोने पर थपकी, एक कोने पर गोरिल्ला और एक कोने पर ध्रुव (अंकित बाथला).

थपकी प्यार की (फोटोःट्विटर)
थपकी प्यार की (फोटोःट्विटर)

 

#4. लड़की का मक्खी अवतारः ‘ससुराल सिमर का’ (कलर्स टीवी)

इस सीरियल को ओरिजनल  कंटेट के मामले में सबका नाना माना जाता है. इनसे इंस्पिरेशन  लेकर ही ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ ने ‘हॉल ऑफ फेसेस’ बनाया था. भाईसाहब, बहुत मीमबाज़ी हुई थी. लेकिन प्रोड्यूसर नहीं माने. एक कदम बढ़ कर ‘मक्खी’ (साउथ वाली पिच्चर ‘ईगा’) को बैकडेट में इंस्पायर  किया. सीरियल में सिमर (दीपिका कक्कर) को एक योगी जी शाप दे देते हैं तो वो मक्खी बन जाती है.

#5. प्रेमी रोबोटः ‘यारो का टशन’ (सब टीवी)

सीरियल के नाम में टाइपो नहीं है. क्योंकि इसमें टशन यारों का नहीं, यारो का है. यारो एक रोबोट है. और उसे पड़ोस की लड़की संजना से प्यार हो जाता है. हां, यहां भी टाइपो नहीं है. सीरियल वालों को लड़की का यही नाम सूझा था. यारो संजना को पाने के लिए सारे जतन करता है लेकिन उसे भाव नहीं मिलता. फिर कोई उसे ज्ञान देता है कि लड़की को पटाना है तो उसके कुत्ते को पटा ले. तो संजना के कुत्ते बख्तावर (अगेन, नो टाइपो हियर) की सीन में एंट्री होती है. तो कहानी ये बनी कि यारो का दिल संजू पर है लेकिन संजू का सारा प्यार रिज़र्व है बख्तावर के लिए, जो यारो को पसंद नहीं करता क्योंकि उसे यारो से इंसान वाली फीलिंग नहीं आती!

यारो का टशन
यारो का टशन

#6. आदमी में मुर्गे की आत्माः ‘मे आई कम इन मैडम’ (सब टीवी)

इस सीरियल में साजन नाम की एक विभूति हैं. एक बार इनके अंदर मुर्गे की आत्मा आ जाती है. सिमर की तरह सच्ची में मुर्गा नहीं बने थे, शरीर इंसान का ही था. बस घूम-घूम कर लोगों को चोंच मारने लगे. मैडम को भी चोंच मार दी. बाद में मालूम चला कि घर वालों ने एक मन्नत मांगी थी. वो पूरी हो गई थी तो साजन के मुंडन की बारी आ गई थी. साजन को बाल प्यारे थे, सो मुर्गे का ढोंग करने लगे.

मे आई कम इन मैडम
फोटोः हॉट स्टार

 

#7. आदमी का भैंसा अवतारः ‘नागिन-2’ (कलर्स टीवी)

इस सीरियल में इच्छाधारी मोर, नेवले और मधुमक्खियां सब दिख चुके हैं. इन सब के बाद सीरियल में एंट्री हुई महिषासुर (विनीत कुमार चौधरी) की. ये महिषासुर पुराणों वाला नहीं, सीरियल वाला था. सीरियल में शेशा का बॉयफ्रेंड बन के आया था. आधा बदन इंसान का था, आधा भैंसे का.

नागिन-2 में महिषाशुर
नागिन-2 में महिषासुर (यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

#8. वक्त से पंगाः ‘कसम तेरे प्यार की’ (कलर्स टीवी)

कहते हैं कि समय से बलवान कोई नहीं है. लेकिन ये सीरियल ऐसा नहीं मानता है. इसकी कहानी यूं है कि ऋषि और तनु एक दूसरे से प्यार करते हैं. पर इससे पहले कि वो एक हों, तनु की मौत हो जाती. लेकिन फिर ऋषि का प्यार ज़ोर मारता है. और तनु ने भी प्यार की कसम खाई है. तो वो दोबारा जन्म लेती है. डे वन से उसकी ज़िंदगी शुरू होती है. वो केजी से शुरू होकर कॉलेज तक पहुंचती है. लेकिन प्यार उसे दोबारा ऋषि से होता है. ठीक वैसे ही जैसे पहले था. अब दोनों साथ हैं और जोड़ा लगभग वैसा ही दिखता है, जैसा तब दिखता था.

कसम तेरे प्यार की
फोटोः कलर्स टीवी

#9. ‘सबको याद रखूंगा बीवी को छोड़ कर’: ‘कुमकुम भाग्य’ (ज़ी टीवी)

इस शो ने मेडिकल साइंस से पंगा ले लिया था. अभिषेक (शब्बीर अहलुवालिया) की याद्दाश्त चली जाती है, लेकिन बड़ी अजीब तरह से. उसे अपनी मां, बाप, भाई, बहन, दोस्त सब याद रहते हैं. ये भी याद रहता है कि उसकी एक्स गर्लफ्रेंड उसके बच्चे की मां बनने वाली है. लेकिन अपनी पत्नी प्रज्ञा (सृति झा) को भूल जाता है. काहे? बस यूं ही. वैसे मेडिकल साइंस के मुताबिक ये संभव है कि आपका दिमाग किसी एक खास बात को भूल जाए, लेकिन इतना स्पेसेफिक होकर सिर्फ एक इंसान को भूल जाना विशुद्ध ‘टीवी साइंस’ है.

कुमकुम भाग्य
फोटोः ज़ी टीवी

#10. आत्मा का चेहरा चेंज: ‘कसौटी ज़िंदगी की’ (स्टार प्लस)

‘कसौटी ज़िंदगी की’ को टीवी पर आए एक ज़माना हो गया है. लेकिन मजाल है कि कोई भूल जाए कि कोमोलिका के स्क्रीन पर आते ही बैकग्राउंड में बजने वाला ‘निका…’ कोई भूल जाए. ‘कसौटी ज़िंदगी को’ कहानी जहां जी चाहे घुमा देने के मामले में ट्रेंड सेटर माना जाता है. अनुराग और प्रेरणा कितनी बार एक दूसरे से अलग हुए, कितने बार पास आए, कितने बार उनका बेटा प्रेम मरा, कितने बार मिस्टर बजाज अच्छे से बुरे और बुरे से अच्छे हुए, लोगों ने डायरी में लिख कर हिसाब लगाने की कोशिश की. लेकिन कोई पक्का नहीं बता पाया.

कसौटी ज़िंदगी की
फोटोःस्टार प्लस

लेकिन प्रोड्यूसर्स ने शो स्टॉपर बचाकर रखा. सीरियल खत्म हुआ अनुराग और प्रेरणा की मौत के साथ. फिर उनकी आत्माओं का मिलन हुआ. अब आत्माओं का चेहरा किसी ने देखा नहीं है. लेकिन पॉप्युलर कल्चर में आत्मा का चेहरा हमेशा वही माना गया, जो ज़िंदा इंसान का होता है. यहीं ‘कसौटी ज़िंदगी की’ ने एक नया ट्रेंड सेट कर दिया. हुआ ये कि जब तक सीरियल खत्म हुआ, पुराने अनुराग (सिज़ेन खान) की जगह नया अनुराग (हितेन तेजवानी) आ गया था. तो मरने वाला अनुराग था हितेन तेजवानी. लेकिन आत्मा-मिलन के टाइम आ गया सिज़ेन खान. लेकिन कोई कुछ नहीं बोला. ये भी पचा लिया गया.

anurag

 


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