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एक दो तीन गाना जावेद अख्तर ने लिखा है कि लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने?

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एक नया गाना आया है ‘एक दो तीन’.

नहीं नहीं! नया गाना नहीं. रिमिक्स, रीलोडेड, रिप्राईज्ड या टू पॉइंट ओ कुछ भी कह लीजिए मगर नया नहीं. आइए पहले दी लल्लनटॉप पर आपको सुनवाते हैं ‘बाग़ी 2’ का ये ट्रेंडिंग गीत फिर आगे की बात करेंगे –

दरअसल ये गीत – ‘एक दो तीन’ – हमारे जमाने में गीत नहीं एक ‘फ़िनोमिना’ था. तो इस फ़िनोमिना को लेकर जो चीज़ें ज़ेहन में आईं आपके साथ शेयर करते हैं.

कुछ इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स, जो आपको लगता हो कि इस लिस्ट में होने ज़रुरी थे मगर मिस हुए हैं, आप कॉमेंट बॉक्स में दे सकते हैं.

# 1) जावेद अख्तर –

बहुत कम लोग जानते हैं कि इसको जावेद अख्तर ने लिखा है. लेकिन उससे भी कम लोग जानते हैं कि इसका मुखड़ा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने लिखा है. ये बात कि – ‘इसका मुखड़ा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने लिखा है,’ से ज़्यादा रोचक ये बात है कि उन्होंने लिखा क्यूं या लिखा कैसे?

तो हुआ ये कि लक्ष्मी-प्यारे एक धुन लेकर जावेद अख्तर के पास पहुंचे. धुन सुनाई – बीट्स – एक, दो, तीन, चार, पांच…

जावेद ने कहा कि इसे ही मुखड़ा बना लेते हैं, इसको मैं अंतरों में जस्टिफाई कर दूंगा.

संगीतकारों ने कहा कि ‘तीन’ या ‘चार’ या बहुत से बहुत ‘पांच’ तक तो गिनती फिर भी एक्सेप्टेड है लेकिन ‘तेरह’ तक की गिनती कुछ ज़्यादा ही लंबी हो जाएगी. जावेद ने कहा तो करते हैं न – प्रयोग.

प्रयोग किया गया. प्रयोग न केवल सक्सेफुल रहा बल्कि सफलता के नए मानक गढ़ दिए. और ये जो काउंटिंग थी वो गाना बन गया, गाना काउंटिंग बन गया. गाने का पिक्चराईज़ेशन ऐसा कि उस वक्त के मां-बापों को कन्फ्यूज़न हो गया कि बच्चों के सामने प्रमोट करें या बैन करें?


# 2) बिरह का गीत –

ज़रा इसकी लिरिक्स सुनिए या पढ़िए, यदि यही एक कविता होती या इसकी बीट्स कुछ स्लो होतीं तो ये बारामासी का मिनी वर्ज़न होती. ये हम नहीं कह रहे हैं ये जावेद अख्तर कह रहे हैं.

बारामासी दरअसल एक बिरहन द्वारा गाया जाने वाला गीत होता है जिसमें वो अपने प्रिय की अनुपस्थिति में कैसा फील करती है इसे गाकर बताती है. लेकिन हर महीने उसकी पीड़ा बेशक उतनी ही रहती है, पर उसकी फीक बदल जाती है.

तो जावेद अख्तर कहते हैं कि बारामासी तो बारह महीने की फील बताता है, मेरे इस गीत ने एक महीने के हर दिन की फील बताई. बाकी आप नीचे वीडियो देख लें.


# 3) एन. चंद्रा का ‘एक दो तीन’ (हैट-ट्रिक)

ये गीत सबसे पहले एन. चंद्रा की मूवी तेज़ाब में आया था. एन. चंद्रा की ये लगातार तीसरी हिट फ़िल्म थी. इससे पहले की दो फिल्में थीं – अंकुश और प्रतिघात (1986,87 और 88).


# 4, 5, 6) एक दो तीन गर्ल

ये वाला पॉइंट इस गीत का सबसे इंट्रेस्टिंग ट्रिविया है. नोट करें कि इस मूवी ने नहीं, केवल इस गीत ने – एक, दो, तीन – स्त्रियों को नाम और फेम दिलवाया.

# एक – सरोज खान, जिन्होंने तब तक कितने ही हिट गीत दे दिए थे, लेकिन फिल्मफेयर एक भी नहीं पाया था. सरोज खान को पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला था क्यूंकि कोरियोग्राफी में पहली बार ही फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया.

कहा ये भी जाता है कि श्रीदेवी, जिनके साथ सरोज ने इस गीत से पहले सबसे ज़्यादा काम किया था, उनसे नाराज़ हो गईं थी. क्यूं? क्यूंकि उनका कहना था कि सरोज ने माधुरी को ज़्यादा अच्छे स्टेप्स दिए. कुछ दिनों पहले हमने श्रीदेवी के गीत – ‘हवा हवाई’ के ऊपर भी एक लेख लिखा था (लेख यहां पढ़ें), जिसकी कोरियोग्राफर भी सरोज खान थीं. और उस गीत को देखकर कहीं नहीं लगता कि सरोज ने श्रीदेवी को कोई कमतर स्टेप्स दिए हों.

बहरहाल…

# दो – अलका याज्ञिक, जिनको फिल्मफेयर और फेम दोनों ही मिले और उसके बाद ढेर सारे गीत भी. ये उनके लिए भी पहला फिल्मफेयर अवार्ड था.

# तीन – माधुरी दीक्षित, बावज़ूद इसके कि इन्हें फिल्मफेयर अवार्ड नहीं मिला, ये ग़ैर-विवादस्पद है कि इस एक गीत के हिट होने से जिस एक लड़की का ग्राफ सबसे तेज़ी से ऊपर चढ़ा वो माधुरी दीक्षित ही थीं. मतलब इतना ऊपर कि जो फिल्मफेयर इन्हें तब नहीं मिला आज उसी फिल्मफेयर के इनके खाते में 14 नॉमिनेशन्स हैं, और ये किसी भी अदाकारा के लिए सबसे ज़्यादा हैं.

माधुरी को इसके बाद एक दो तीन गर्ल कहा जाने लगा.


# 7,8,9 ) बाग़ी-टू के तीन टू पॉइंट ओ –

जिस मूवी में ये गीत दोबारा लिया गया है उस मूवी का नाम है ‘बाग़ी -2’. और इस मूवी के साथ ‘द्वितीय संस्करण’ के तीन केस हैं –

# एक – ‘बाग़ी – 2’, दरअसल 2016 में आई ‘बाग़ी’ का सीक्वल है. अब 2016 में जो ‘बाग़ी’ आई थी, वो खुद इस नाम की पहली मूवी नहीं है. इससे पहले ‘बाग़ी’ नाम से सलमान खान और संजय दत्त की दो अलग अलग मूवीज़ पहले ही आ चुकी हैं, क्रमशः 1990 और 2000 में.

# दो – ये गीत यानी ‘एक दो तीन…’ इस मूवी में दूसरी बार यूज़ किया गया है. पहली बार तेज़ाब में किया गया था. (और ये हम सबको पता है.)

# तीन – ‘मुंडया तों बच के’ से ज़्यादा यूरोप में कोई और ‘हिंदुस्तानी गीत’ फेमस नहीं है –

एक दो तीन के साथ इस गीत का भी नवीन वर्ज़न बाग़ी-2 में आ रहा है –

ये रहा एक पुराना वर्ज़न –


# 10) तेज़ाब से –

जिस वक्त ये फ़िल्म रिलीज़ हुई माधुरी दीक्षित यूएस में थीं. वापस आईं तो एयरपोर्ट में भीड़ एक सरप्राईज़ थी. भीड़ चिल्ला रही थी – मोहिनी, मोहिनी, मोहिनी!

वैसे ये कहा जाता है कि अनिल कपूर पहले माधुरी दीक्षित को नहीं लेना चाहते थे. क्यूंकि माधुरी को उन्होंने अबोध में देखा था और उनका कहना था कि ये लड़की कैबरे डांस नहीं कर पाएगी. लेकिन लड़की ली गई. एंड रेस्ट इज़ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन.

अबोध की माधुरी
अबोध की माधुरी

लड़की ली क्यूं गई? क्यूंकि पहले जो लड़की ली गई थी – मीनाक्षी शेषाद्री, उनको पैसों को और डेट्स को लेकर दिक्कत थी.


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