Submit your post

Follow Us

आंबेडकर को अपनाने चली भाजपा उनकी ये 10 बातें नहीं पचा पाएगी

2.42 K
शेयर्स

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्य नाथ की सरकार ने राज्यपाल राम नाईक की सलाह मानते हुए विधानसभा में एक प्रस्ताव पास किया जिसके अनुसार अब बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के नाम में ‘रामजी’ जोड़ दिया है. मतलब अब उनका नाम बाबासाहेब भीमराव रामजी आम्बेडकर होगा.

अब उत्तरप्रदेश सरकार के तमाम रिकार्ड्स और पाठ्यपुस्तकों में उनका नाम भीमराव रामजी आम्बेडकर ही लिखा जाएगा. भाजपा ने उत्तर प्रदेश में आम्बेडकर जयंती के लिए एक नया नारा भी ईजाद किया है,

”बाबा जी का मिशन अधूरा, BJP कर रही है पूरा.”

आम्बेडकर जयन्ती माने 14 अप्रैल से ही BJP ने 22 दिन के ‘ग्राम स्वराज अभियान’ की शुरुआत कर दी है. इस अभियान के ज़रिए बाबासाहेब के सामाजिक-न्याय और ग्रामीण-विकास के संदेशों का प्रचार किया जाएगा. हाल ही में आम्बेडकर की एक तोड़ दी गई मूर्ति जब दोबारा बनाई गई, उसपर भगवा रंग चढ़ा दिया गया.

साफ है कि भाजपा आंबेडकर की विरासत हथियाने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. लेकिन क्या भाजपा आम्बेडकर के विचारों को जानती भी है? क्या वह जानती है कि आम्बेडकर या दूसरे दलित आइकॉन हिंदुत्व या विनायक दामोदर सावरकर के बारे में क्या राय रखते थे? आईए जानें आम्बेडकर के वो दस विचार जो भगवा पार्टी को उलझन में डाल सकते हैं-

#1. जब महात्मा गांधी ने आम्बेडकर से मंदिर प्रवेश बिल के मुद्दे पर उनका समर्थन मांगा तब आम्बेडकर ने उन्हें लिखा था,

”मैं महात्मा को बता देना चाहता हूं कि मेरी यह घृणा हिन्दुओं या हिंदुत्व से नहीं है. बल्कि उनके गलत आदर्शों से है. जिनके आदर्श ही गलत होंगे, वो एक बेहतर समाज का निर्माण कैसे कर पाएंगे. हिन्दुओं से मेरा विरोध उनकी खामियों से कहीं ज्यादा उनके आदर्शों को लेकर है.”

#2. महात्मा गांधी के दलित पुनरुद्धार और उनकी हिन्दू धर्म में वापसी के प्रयासों पर अम्बेडकर कहते हैं,

”कोई कड़वी चीज कभी मीठी नहीं हो सकती. चाहे कुछ भी कर लें जहर कभी अमृत तो नहीं हो सकता.”

#3. सन 1935 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी,

”मैं जन्म से हिन्दू हूं क्योंकि उसपर मेरा वश नहीं लेकिन मैं हिन्दू मरूंगा नहीं.”

#4. 14 अक्टूबर, 1956 में नागपुर में हुए एक विशाल समारोह में आम्बेडकर ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया. इस धर्मांतरण के दौरान आम्बेडकर ने कहा,

” जिस धर्म में मैं पैदा हुआ, उसमें गैरबराबरी और दमन का माहौल था. आज जब मैंने उस धर्म को त्याग दिया है, मैंने नया जन्म लिया है.”

आम्बेडकर और उनके साथ बौद्ध धर्म अपनाने वाले उनके अनुयायियों ने उस दिन 22 प्रतिज्ञाएं लीं. उन्होंने कहा,

”एक ऐसा धर्म जो इंसानियत की प्रगति में रुकावट है, जो भेदभाव को बढ़ावा देता है और जो किसी को कमतर समझता है, उस धर्म का मैं त्याग करता हूं.”

#5. आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं में से तीन मुख्य प्रतिज्ञाएं ये थीं –

(क) मैं त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई आस्था नहीं रखूंगा और ना ही मैं इनकी पूजा करूंगा.
(ख) ईश्वर का अवतार कहे जाने वाले राम और कृष्ण को भी नहीं मानूंगा.
(ग) गौरी, गणपति या किसी भी हिन्दू देवी-देवता की पूजा नहीं करूंगा.

#6. सांप्रदायिक मुसलमानों और सवर्ण हिन्दुओं की तुलना करते हुए उन्होंने कहा,

”इन हिन्दुओं को अपनी जाति का इतना घमंड है कि ये निचले तबके की जातियों को हर तरह की सत्ता, शिक्षा और ताकत से वंचित कर देना चाहते हैं. सारी सुविधाओं का लाभ ये सिर्फ खुद उठाना चाहते हैं. इसी तरह ये सवर्ण हिन्दू, मुस्लिमों को भी उनके अधिकारों से दूर रखना चाहते हैं. इनके इस दोहरे व्यवहार से हमें इनकी राजनीति का अंदाजा लग सकता है.”

#7. आम्बेडकर ने दोनों सम्प्रदायों के कट्टरपंथियों का विरोध किया. उनके लिए कट्टर हिन्दुत्ववादियों और मुस्लिम लीग में कोई फर्क नहीं था. उन्होंने दोनों को एक ही सिक्के के दो पहलू माना. और लिखा,

”यह आश्चर्यजनक है कि हिन्दुओं और मुस्लिमों की अलग धार्मिक राष्ट्रीय पहचान के मुद्दे पर सावरकर और जिन्ना दोनों ही पूरी तरह सहमत हैं. और सहमत ही नहीं बल्कि इनका मानना है कि भारत में ही दो अलग राष्ट्र हैं- हिन्दू राष्ट्र और मुस्लिम राष्ट्र.”

#8. आम्बेडकर ने भगवा राजनीति के नायक विनायक दामोदर सावरकर को भी नहीं बख्शा,

”एक तरफ तो सावरकर यह मानते हैं कि मुसलमान हिन्दुओं से अलग हैं. यहां तक कि ये उनके लिए अलग झंडे की बात से भी सहमत हैं लेकिन दूसरी तरफ वे मुसलामानों के लिए अलग राष्ट्र की मांग का विरोध भी करते हैं. ये कैसा विरोधाभास है. अगर वे हिन्दुओं के लिए एक अलग हिन्दू राष्ट्र की मांग से सहमत हैं तो अलग मुस्लिम राष्ट्र का विरोध कैसे कर सकते हैं.”

#9. Dr Babasaheb Ambedkar Writings & Speeches के 7वें भाग में उन्होंने सवाल उठाए,

”आखिर हिन्दुओं में गोमांस खाने को पाप क्यों माना जाता है? हिन्दुओं ने क्या शुरू से ही गोमांस का विरोध किया? अगर नहीं, तो यह विरोध उपजा कहां से? क्या अछूत जातियां शुरू से ही गोमांस खाती थीं? अगर हिन्दुओं के लिए यह पाप था, तो अछूतों के लिए क्यों नहीं? क्या अछूत हमेशा से ही अछूत थे? गोमांस खाने, न खाने से छुआ-छूत का क्या सम्बन्ध है और अगर हिन्दू गोमांस खाते थे तो उन्होंने ये खाना कब छोड़ा?”

इसी किताब में आगे उन्होंने विस्तार से इन सवालो के जवाब भी दिए हैं.

#10. दक्षिणपंथी ताकतों पर वार करते हुए उन्होंने अपनी किताब Pakistan or The Partition of India में लिखा,

”हिंदू राज अगर सचमुच अस्तित्व में आ जाता है तो वो इस देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी. हिंदू चाहे जो भी कहें, हिंदू धर्म स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व के लिए खतरा है. इसलिए हिन्दू राष्ट्र इस देश के लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ा संकट है. हिन्दू राज का हर हाल में विरोध होना चाहिए.”


आंबेडकर पर ये लेख इंडिया टुडे टीवी में एडिटर अशोक उपाध्याय ने अंग्रेज़ी वेबसाइट डेली ओ के लिए लिखा था. वेबसाइट की इजाज़त से वो हम आपको यहां पढ़ा रहे हैं. ये अनुवाद ‘दी लल्लनटॉप’ के लिए शिप्रा किरण ने किया है.


ये भी पढ़ेंः

अंबेडकर: उस ज़माने की लड़कियों के रियल पोस्टरबॉय

आंबेडकर के नाम में ‘रामजी’ लगा देने से क्या हासिल होता है?

अगर आज अम्बेडकर होते तो संविधान में अपने हाथ से संशोधन कर ये चीजें बैन कर देते

आंबेडकर की भगवा मूर्ति लगवाने के पीछे कौन था, जानकर चौंकिएगा मत

चौधरी चरण सिंह को किसानों का अंबेडकर कहा जा सकता है

वीडियोः कहानी यूपी के सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह की, जो मठ के भरोसे रहकर हार गए

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
10 Things Ambedkar said which BJP will never be able to reconcile with no matter how hard it tries to appropriate him

पोस्टमॉर्टम हाउस

मेड इन हैवन: रईसों की शादियों के कौन से घिनौने सच दिखा रही है ये सीरीज़?

क्यों ये वेब सीरीज़ सबसे बेस्ट मानी जाने वाली सीरीज़ 'सेक्रेड गेम्स' से भी बेस्ट है.

गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 4 - रिव्यू

सब कुछ तो पिछले एपिसोड में हो चुका, अब बचा क्या?

मूवी रिव्यू: सेटर्स

नकल माफिया कितना हाईटेक हो सकता है, ये बताने वाली थ्रिलर फिल्म.

फिल्म रिव्यू: ब्लैंक

आइडिया के लेवल पर ये फिल्म बहुत इंट्रेस्टिंग लगती है. कागज़ से परदे तक के सफर में कितनी दिलचस्प बन बाती है 'ब्लैंक'.

'जुरासिक पार्क' जैसी मूवी के डायरेक्टर ने सत्यजीत राय की कहानी कॉपी करके झूठ बोला!

जानिए क्यों राय अपनी वो हॉलीवुड फिल्म न बना पाए, जिसकी कॉपी सुपरहिट रही थी, और जिसे फिर बॉलीवुड ने कॉपी किया.

ढिंचाक पूजा का नया गाना, वो मोदी विरोधी हो गईं हैं

फैंस के मन में सवाल है, क्या ढिंचाक पूजा समाजवादी हो गई हैं?

गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 3 - रिव्यू

एक लंबी रात, जो अंत में आपको संतुष्ट कर जाती है.

कन्हैया के समर्थन में गईं शेहला राशिद के साथ बहुत ग़लीज़ हरकत की गई है

पॉलिटिक्स अपनी जगह है लेकिन ऐसा घटिया काम नहीं होना था.

एवेंजर्स एंडगेम रिव्यू: 11 साल, 22 फिल्मों का ग्रैंड फिनाले, सुपरहीरोज़ का महाकुंभ और एक थैनोस

याचना नहीं, अब रण होगा!

क्या शीला दीक्षित ने कहा कि सरकारी स्कूल में बूथ न बनें, वरना लोग स्कूल देख AAP को वोट दे देंगे?

ज़ी रिबप्लिक के बाकी ट्वीट पढ़ेंगे तो पूरा मामला क्लियर हो जाएगा.