Submit your post

Follow Us

और ये रहे लड़कियों के बारे में सबसे बड़े झूठ

2.73 K
शेयर्स

कहते हैं मनुष्य सामाजिक प्राणी है. अपन को तो लगता है कि पूर्वाग्रही प्राणी है. हर चीज के बारे में पहले ही राय बना लेता है और उस पर अटल रहता है. ऐसी राय को जब पूरा समूह सच मान ले तो वो स्टीरियोटाइप हो जाता है.  स्टीरियोटाइप तोड़ने जरुरी हैं क्योंकि हर पंजाबी सरदार नहीं होता. हर गुजराती जिग्नेश नहीं कहलाता. हर यूपी वाला गुटखा नहीं खाता और हर बिहारी की अंग्रेजी कमजोर नहीं होती. उसी तरह हर लड़की छिपकली और कॉकरोच से नहीं डरती. लड़कियो के बारे में और कई झूठ फैले हैं. हम बताते हैं.

1. पिंक लड़कियों का फेवरेट कलर होता है

पिंक लड़कियों का फेवरेट कलर होता है. कोई भी लड़की गिफ्ट में टेडीबियर पाकर खुश हो जाएगी. पिंक उसका फेवरेट रंग होगा. खाने में उसे सबसे अच्छी चॉकलेट ही लगती है.  नो सॉरी. ये लाइनें अपने दिमाग से भी काट दीजिए. आर्चीज की गैलरी और करीना कपूर की फिल्मों से बाहर निकलिए. ऐसा हरगिज नहीं है. 

2. लड़कियां हस्तमैथुन नहीं करतीं

लड़कियां पोर्न नहीं देखतीं. नॉनवेज जोक्स तो उन्होंने सुने भी न होंगे. पोर्न से तो उन्हें घिन आती होगी. और हस्तमैथुन? क्या बात करते हो मियां. बिल्कुल नहीं करती होंगी. लड़कियों के बारे में बोले जाने वाले ये सबसे बड़े झूठों में से एक है. लड़कियां पोर्न भी देखती हैं, हस्तमैथुन भी करती हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे आप करते हैं. इसीलिए पोर्न साइट्स ऐसे विशेष गैलरीज दे रखती हैं जो लड़कों नहीं लड़कियों के मुताबिक बनाई जाती हैं. इन पर अच्छा ख़ासा ट्रैफिक भी आता है.

3. लड़कियों को ड्राइविंग नहीं आती

इस बात का विरोध करने के लिए लड़कियां आ ही रही हैं. 1..2…3…. रुकिए!! उनने अपनी गाड़ी कहीं ठोंक दीं!

आप भी ऐसे जोक्स पर हंसते हैं. मानते हैं कि लड़कियां बुरी ड्राइवर होती हैं. तो याद कीजिए रोड पर आख़िरी बार कब आपने किसी लड़की को गाड़ी ठोंकते हुए देखा था. लड़कियां बुरी ड्राइवर नहीं होती हैं वो ज्यादा सावधानी के साथ गाड़ी चलाती है. मसें भी नहीं भीगीं होती और लड़के चाचा-मामा की गाड़ियां लेकर भागने लगते हैं और वही काम लड़कियां किस उम्र में शुरू करती हैं?  हजार में कोई एक लड़की गाड़ी चला रही होती है और गलती से कहीं किसी रोज कोई एक्सीडेंट हो जाए और आप सारी लड़कियों को लपेटे में ले लेते हैं.

4. लड़कियों को गोलगप्पे बहुत पसंद होते हैं

खट्टे में लड़कियों की जान बसती है. जी नहीं हर लड़की को गोलगप्पे पसंद नहीं होते. खट्टे के लिए मनुष्य मात्र का अनुराग बड़ा पुराना है. चटपटा देख किसकी जीभ नहीं बहने लगती? गोलगप्पे सहज, सुलभ, सर्वव्यापी हैं. इसलिए लड़कियां उनके गिर्द पाई जाती हैं. गोलगप्पे के स्टॉल पर एक दिन खड़े होकर देख लीजिए. पता लग जाएगा. जीभ के गुलाम लड़के भी उतने ही आते हैं.

5. दो लड़कियां आपस में कभी अच्छी दोस्त नहीं बन सकतीं

Source: luckfavourstheprepared

सवाल उठता है क्यों? आप हाई स्कूल में थे. आपके तब के क्रश के साथ एक लड़की हमेशा फिरा करती थी जिसके डर और जिससे झिझक के चलते आप उसे आज तक प्रपोज नहीं कर सके. पता करके देखिए वो आज भी उसके संपर्क में होगी. अपनी जैसी सोसायटी है, उसमें अकसर लड़कियों की बेस्ट फ्रेंड लड़कियां ही होती हैं.

6. लड़कियां कभी प्रपोज नहीं करती

Source-cultnuts

गल्त है जी भोत गल्त. लोग समझते हैं कि अपनी पसंद जाहिर करने के मामले में लड़कियां कभी पहल नहीं करतीं. ऐसा नहीं है कि अगर सच में उन्हें कोई पसंद है तो वो कहने में देर लगाएंगी. हमारे आस-पास ऐसी बहुत लड़कियां हैं, आंखें खोलकर देखिए. शाहरुख या रणबीर पर सरेआम प्यार लुटाना भी पसंद का सार्वजनिक इजहार ही तो है. ये अफवाह पक्का वही लोग फैलाते होंगे जो जिनमें कभी किसी लड़की ने इंटरेस्ट न दिखाया हो. 

7. लड़कियों को सारे रंग पता होते हैं

Source- clusivetouch

लड़कियों के मुंह से टार्क्वाइज,सेलमन, बरगंडी, मैजेंटापीच, बेबी पिंक और फ्यूशिया जैसे रंगों के नाम सुनकर लड़कों को लगता है इन्हें सकल ब्रह्मांड के रंग पता है. बात दरअसल ये है कि अपना समाज ऐसा है जहां लड़कों से ज्यादा लड़कियों का सजना-संवरना जरूरी माना जाता है. लड़के नीली-काली जींस में ही संतोष कर लें, पर लड़कियों से कपड़ों, नेलपॉलिश और लिप्स्टिक्स के साथ प्रयोग करना अपेक्षित होता है. इसी क्रम में कई बार उन्हें कुछ रंगों के नाम ज्यादा पता हो जाते हैं तो क्या बवाल हो गया भई? वैसे बहुत सारी लड़कियां होती हैं जो रंगों के मामले में एकदम ठस्स होती हैं.

8. लड़कियों को पॉलिटिक्स,स्पोर्ट्स और टेक्नोलॉजी में इंटरेस्ट नहीं होता

Source- pinterest

लड़कियां टेक्नोसेवी नहीं होतीं. टेक्नोलॉजी में लड़कियों के हाथ तंग होते हैं वो गैजेटफ्रीक नहीं होती. पॉलिटिक्स उन्हें समझ नहीं आती आलिया भट्ट को देखो भारत के राष्ट्रपति का नाम नहीं मालूम. स्पोर्ट्स में तो उनका और इंटरेस्ट नहीं होता. क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल हो और वो ‘ससुराल सिमर’ का देखने बैठ जाएंगी. ऐसा सोचने के पहले भी आपको याद करना चाहिए कि कल्पना चावला, इंदिरा गांधी और सायना नेहवाल कौन हैं.

9. लड़कियां गहनों के लिए पागल होती हैं

Source- pinterest

कानों के लिए ईयर रिंग या उंगली के लिए अंगूठी देकर आप किसी लड़की का दिल नहीं जीत सकते. उन टीवी ऐड्स को सच मत मानना जिनमें वो गहने देखकर शादी न करने का मन बदल लेती हैं. एक बड़ा झूठ ये भी बोला जाता है कि हीरा हर लड़की को बहुत पसंद आता है.

10. लड़कियां पीकर बहकती जल्दी हैं

ऐसा माना जाता है कि लड़कियों को थोड़ी सी पीकर ज्यादा चढ़ जाती है. थोड़ी शराब भी उन पर बहुत ज्यादा असर करती है. ये झूठ फैलाया है गुरु फिल्मों ने. हम बता रहे हैं. आपने देखा है उन लड़कियों को जो आठ-आठ पेग पीकर भी सीधी खड़ी रहती हैं. और हां, अगर आपको लगता है कि नशा करने वाली लड़कियां ‘ ईजी टू गेट एंड ईजी टू लीव’ होती हैं, तो ये ख्याल मन से निकाल दीजिए. महंगा पड़ जाएगा.

 


और भी कई झूठ होंगे, लड़कियों के बारे में. कमेंट बॉक्स में बताइए.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
10 Stereotypes about Girls

पोस्टमॉर्टम हाउस

मेड इन हैवन: रईसों की शादियों के कौन से घिनौने सच दिखा रही है ये सीरीज़?

क्यों ये वेब सीरीज़ सबसे बेस्ट मानी जाने वाली सीरीज़ 'सेक्रेड गेम्स' से भी बेस्ट है.

गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 4 - रिव्यू

सब कुछ तो पिछले एपिसोड में हो चुका, अब बचा क्या?

मूवी रिव्यू: सेटर्स

नकल माफिया कितना हाईटेक हो सकता है, ये बताने वाली थ्रिलर फिल्म.

फिल्म रिव्यू: ब्लैंक

आइडिया के लेवल पर ये फिल्म बहुत इंट्रेस्टिंग लगती है. कागज़ से परदे तक के सफर में कितनी दिलचस्प बन बाती है 'ब्लैंक'.

'जुरासिक पार्क' जैसी मूवी के डायरेक्टर ने सत्यजीत राय की कहानी कॉपी करके झूठ बोला!

जानिए क्यों राय अपनी वो हॉलीवुड फिल्म न बना पाए, जिसकी कॉपी सुपरहिट रही थी, और जिसे फिर बॉलीवुड ने कॉपी किया.

ढिंचाक पूजा का नया गाना, वो मोदी विरोधी हो गईं हैं

फैंस के मन में सवाल है, क्या ढिंचाक पूजा समाजवादी हो गई हैं?

गेम ऑफ़ थ्रोन्स सीज़न 8 एपिसोड 3 - रिव्यू

एक लंबी रात, जो अंत में आपको संतुष्ट कर जाती है.

कन्हैया के समर्थन में गईं शेहला राशिद के साथ बहुत ग़लीज़ हरकत की गई है

पॉलिटिक्स अपनी जगह है लेकिन ऐसा घटिया काम नहीं होना था.

एवेंजर्स एंडगेम रिव्यू: 11 साल, 22 फिल्मों का ग्रैंड फिनाले, सुपरहीरोज़ का महाकुंभ और एक थैनोस

याचना नहीं, अब रण होगा!

क्या शीला दीक्षित ने कहा कि सरकारी स्कूल में बूथ न बनें, वरना लोग स्कूल देख AAP को वोट दे देंगे?

ज़ी रिबप्लिक के बाकी ट्वीट पढ़ेंगे तो पूरा मामला क्लियर हो जाएगा.