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करंट वाली बंदूक यहां मिल जाए, तो प्लेन में इन 5 लोगों से राहत मिले

जब हम हवाई जहाज में पहली बार चढ़ते हैं, हालत देखने लायक होती है. मैं जब पहली बार जहाज पर बैठने वाली थी, पिछली रात नींद ही नहीं आई थी. कुछ समय पहले मैं लखनऊ से दिल्ली उड़ रही थी (3 महीने पहले टिकस कराया था, सस्ता मिल गया था). एक भाई साहब बगल में बैठे थे. टेक ऑफ के समय प्रार्थना में हाथ जोड़ लिए थे. लैंडिंग के समय चेहरा लाल हो गया था. हम सभी उस जनरेशन के हैं, जिसने बचपन में जहाज में बैठने के सपने देखे हैं. मगर कुछ ऐसे लोग कभी-कभी जहाज में बैठ जाते हैं कि आप सोचते हैं ट्रेन की तरह जनाब को जहाज से बाहर निकालने का ऑप्शन क्यों नहीं है. हवा में स्टेशन क्यों नहीं होते.

ऐसे ही एक जनाब थे कोरिया में. ये कोरिया के बड़े बिजनेसमैन लिम ब्युंग सन के सुपुत्र हैं. पापा लिम बड़ी-बड़ी मेकप कंपनियों को ब्रश सप्लाई करते हैं मेकप वाले. इन कंपनियों में शनेल और अरमानी जैसी कंपनियां शामिल हैं.

तो सुपुत्र जी ने खाने के साथ मारे शराब के शॉट्स. उसके बाद शोरगुल करने लगे. फ्लाइट में अमेरिकी सिंगर रिचर्ड मार्क्स मौजूद थे. उन्होंने लिम को शांत कराया. फिर क्रू की मदद से लिम को रस्सियों से बांधा गया.

उसके बाद कोरिया की सरकार ने फैसला लिया कि कोरियाई हवाई जहाजों के क्रू को अब स्टनगन दी जाएगी. स्टनगन का मल्लब समत्ते हो? मतलब वो वाली बंदूक जो किसी की जान नहीं लेती. न ही गोली छोड़ती है. बल्कि छोड़ती है करंट. और सामने वाला करंट लगने से चित हो जाता है. जैसे मानो 10 मिनट के लिए किसी को लकवा मार गया हो.

अब सोचो यही स्टनगन अगर हमारे यहां के क्रू को मिल जाए, तो ऐसे कौन-कौन से लोग होंगे जिन को जहाज वाले करंट मारकर चित करना चाहेंगे.

1. बार-बार एयर होस्टेस को बुलाते हैं

और एयरहोस्टेस मुस्कुरा भर देती है. इन लोगों को लगता है एयर होस्टेस का काम इनके लिए खाना बनाना, इनको पानी पिलाना, सूसू कराने ले जाना और घड़ी-घड़ी उनके सवालों का जवाब देना है. मैडम सीट कैसे नीची करते हैं, खिड़की खुलती है या नहीं. बच्चे को टट्टी कराने कहां ले जाना है. और मुफ्त में खाने को क्या-क्या मिलेगा. और इनमें से अगर कुछ ठरकी लोग निकल आएं, तो देश-दुनिया की बातें भी करने लगते हैं. और एयर होस्टेस मन ही मन ऐसी हो जाती है:


 

2. जो कुर्सी आगे-पीछे करते रहते हैं

ये जहाज में घुसते ही अपनी कुर्सी पीछे कर लेते हैं. माने रिक्लाइन. फिर एयर होस्टेस उसे आगे करवाती है. ये फिर पीछे कर लेते हैं. और पूरे सफ़र में आगे-पीछे करते रहते हैं. अगर आप लंबी टांगों वाले व्यक्ति हैं और ये वाले सैंपल आपके आगे बैठे हों, तब घर पहुंचकर घुटनों की सिंकाई करनी पड़ती है.


 

3. जो बार-बार आपके सामने से निकलेंगे, अपना पिछवाड़ा आपके मुंह पर रगड़ते हुए

इनको पेशाब बहुत आती है. और जब नहीं आती है, तो ये – हर व्यक्ति के पास टिकट है और हर व्यक्ति सही सीट पर बैठा है – चेक करने की जिम्मेदारी पर्सनली उठा लेते हैं. पड़ोसियों की मां, बेटियां और बहनें ठीक से बैठी हैं या नहीं, किसी को किसी चीज की जरूरत है या नहीं, हर बात का ख़याल रखते हैं ये. और ये मिडिल या विंडो सीट पर होते हैं. कोने वाले को हर बार उठाकर निकलते हैं. और पूरी रो में बैठे हुए लोगों के मुंह पर अपना पिछवाड़ा रगड़ते हुए निकलते हैं.


 

4. बच्चे ट्रांसफर करने वाले

आप इन्हें देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं कि ये परिवार हैं या छोटा-मोटा अनाथालय. हर उम्र, शेप और साइज के बच्चे होते हैं इनके पास. पहले मां इन्हें दूध पिलाती है, फिर पिता टहलाने ले जाते हैं, फिर दादी इन्हें गोद में झूला झुलाती हैं और दादा लोरी सुनाते हैं. बाकी फैमिली उम्र में थोड़े बड़े हो चुके बच्चों को दूसरों की सीटों पर खड़ा होने और एयर होस्टेस के बाल खींचने से रोक रहे होते हैं. कई बार ये सबसे शैतान बच्चे को बार-बार एयर होस्टेस को बुलाने वाला बटन दबाने के लिए छोड़ देते हैं.


 

5. जो इकॉनमी क्लास में बैठकर बताते हैं कि वो बिजनेस क्लास में क्यों नहीं जा पाए

अपनी टिकट इन्होंने खुद नहीं कराई होती है. किसी के मेहमान होते हैं ये. और पूरे सफ़र में बगल वाले को ये कहकर चाटते हुए जाते हैं कि कितनी मजबूरी में उन्हें इकॉनमी में ट्रेवल करना पड़ रहा है. कैसे उन्हें उठने, बैठने और सांस लेने में तकलीफ हो रही है क्योंकि स्पेस बड़ा कम है. असल में दिल से ये इतने मिडिल क्लास होते हैं कि छोटी वाली बोतल में बचे हुए पानी से लेकर काजू के खाली डब्बे घर लेकर जाते हैं. और मुफ्त वाले बिस्कुट तो इतने लिए होते हैं कि ढाई-ढाई सौ ग्राम के पैकेट बनाकर खुद की बिस्कुट कंपनी खोल सकते हैं.


आपको भी कोई ऐसा मिला है जिसको थपड़िया का मन किया? कमेंट बॉक्स में बताएं.

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