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अगर आप श्रीदेवी के फैन नहीं हैं तो ये 10 फिल्में देखिए, बन जाएंगे

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आदमी चला जाता है, रह जाती हैं उसकी फ़िल्में. फिल्म स्टारों के लिए यही कहा जा सकता है. नेता चला जाए तो उसके महान काम या उसकी बकैती याद कर लो. शहीदों को उनकी शौर्यगाथाओं के लिए याद कर लो. खिलाड़ियों को उनके खेल के कारनामों या ट्विटर पर ट्वीट्स के लिए याद कर लो. मगर फिलम वालों को याद करने का रास्ता उनकी फिल्में, गानें, किरदार ही होते हैं. विश्वास करना तो मुश्किल है, मगर श्रीदेवी चली गई हैं. पीछे कुछ हैं तो उनका काम. ‘मिस्टर इंडिया’ की हवा हवाई, ‘नगीना’ की रजनी से लेकर ‘इंग्लिश विंग्लिश’, ‘मॉम’ के उनके किरदारों को लोग याद करते हैं. तो ऐसी ही 10 फिल्में, जिनको देखकर लोग श्रीदेवी को कभी भुला नहीं पाएंगे, उनकी बात करते हैं-

1. सदमा – 1983.
डायरेक्टर- बालू महेंद्र

तब तक श्रीदेवी कई तमिल फिल्में कर चुकी थीं. साउथ में लोग उन्हें अच्छी तरह से जानते थे. मगर हिंदी पट्टी या कह लें बॉलीवुड में उनको पहचान मिलनी अभी बाकी थी. मगर फिर फिल्म आई सदमा. श्रीदेवी के करियर के लिए ये चमत्कारी साबित हुई. इसमें उन्होंने एक मानसिक बीमार लड़की नेहालता का रोल किया था, जिसे सोमू (कमल हसन) नाम का लड़का कैद से बचाता है. प्यार करने लगता है. इलाज कराता है. मगर जब वो ठीक हो जाती है तो सोमू को पहचानने से इनकार कर देती है. ये फिल्म तमिल फिल्म मूंडरम पिरई का रीमेक थी. उसमें भी ये किरदार कमल हसन और श्रीदेवी ने निभाए थे. हालांकि हिंदी फिल्म में पहले लड़की का रोल डिंपल कपाड़िया को ऑफर हुआ था.

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2. नगीना – 1986
डायरेक्टर- हरमेश मल्होत्रा

इस फिल्म से पहले न तो ऐसी नागिन किसी ने देखी थी, ना सोची थी. श्रीदेवी का ये रोल एकदम छा गया था. विलेन माने सपेरा भी घातक था. माने अमरीश पुरी. हीरो थे ऋषि कपूर. मगर सबको खा गया था श्रीदेवी का रोल. कहानी कुछ ऐसी थी कि एक नागिन एक आम लड़के(ऋषि कपूर) से शादी कर लेती है. ताकि वो अपने प्रेमी नाग की हत्या का बदला ले सके सपेरे से. nagina

3. मिस्टर इंडिया – 1987
डायरेक्टर- शेखर कपूर

कहते हैं मुझको हवा हवाई. इस फिल्म में एक पत्रकार का रोल निभाने वाली श्रीदेवी जब इस गाने पर झूमीं तो पूरा हिंदुस्तान नाचा था. आज भी नाचता है. बच्चों के लिए तो ये फिल्म अनमोल तोहफा थी. उन्हें अपना पहला सुपरहीरो मिल गया था. मिस्टर इंडिया माने अनिल कपूर. और दुनिया को उसका सबसे खतरनाक विलेन मिल गया था. मोगैम्बो खुश हुआ. अमरीश पुरी. उस साल इस फिल्म ने सबसे ज्यादा कमाई की थी. बच्चों की ऑल टाइम फेवरेट फिल्म हो गई थी.

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4. चालबाज – 1989
डायरेक्टर- पंकज पराशर

अंजू और मंजू. दोनों का ही रोल श्रीदेवी ने निभाया था. डबल रोल का चस्का तो लोगों को सीता-गीता से लग गया था. मगर इस फिल्म ने ये चस्का और बढ़ा दिया था. एक चंचल और बदमाश लड़की का रोल. तो दूसरा सीधी-साधी शर्मीली लड़की का रोल. दोनों ही किरदारों में श्रीदेवी छा गई थीं. कहानी कुछ ऐसी थी कि दो बिछड़ी बहनों में से एक अंजू को उसके चाचा बहुत परेशान करते थे. एक दिन अंजू की जगह मंजू उस घर पहुंच जाती है और सबको मजा चखाती है. फिल्म में हीरो भी धांसू थे. एक रजनीकांत अंजू के लिए तो दूसरे ढाई किलो के हाथ वाले सनी देओल. पर सब पर भारी पड़ गई थीं श्रीदेवी.

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5. चांदनी – 1989
डायरेक्टर- यश चोपड़ा

ये उस साल की सबसे बड़ी हिट और सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्मों में से एक थी. यश चोपड़ा की बनाई सबसे खास फिल्मों में से एक. कहानी कुछ ऐसी थी कि हीरो माने ऋषि कपूर को हीरोइन श्रीदेवी से प्यार हो जाता है. फिर एक एक्सीडेंट में ऋषि कपूर बुरी तरह घायल हो जाते हैं. मगर हीरोइन को लगता है वो मर गया. फिर होती है दूसरे हीरो विनोद खन्ना की एंट्री. हीरोइन को उससे प्यार हो जाता है. मगर फिर पता चलता है कि ऋषि कपूर जिंदा है. हीरोइन धर्मसंकट में फंस जाती है. हालांकि एंड में क्या होता है, यही सस्पेंस है. फिल्म को 1989 में बेस्ट पॉपुलर फिल्म का अवॉर्ड भी मिला था.

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6. खुदा गवाह – 1992
डायरेक्टर- मुकुल एस आनंद

ये फिल्म भी ऐतिहासिक थी. उस साल पैसा भी कमाई थी और लोगों के बीच छा गई थी. शूटिंग भी अफगानिस्तान, नेपाल और भूटान में हुई थी. इंटरनैशनल वाला मामला था. हीरो थे अमिताभ बच्चन. किरदार था बादशाह खान का. कहानी कुछ ऐसी थी कि अफगानिस्तान में रहने वाले बादशाह खान को बेनजीर माने श्रीदेवी से प्यार हो जाता है. वो उसे शादी का प्रस्ताव देता है तो बेनजीर एक शर्त रखती है. कहती है कि वो तब ही शादी करेगी जब वो उसे उसके पिता के कातिल हबीबुल्लाह का सिर लाकर दे. वो ऐसा कर देता है. फिर हबीबुल्लाह का लड़का बदला लेता है. सस्पेंस, थ्रिलर, रोमांस, ट्रैजडी, एक्शन था फिल्म में. श्रीदेवी ने इस फिल्म में भी डबल रोल किया था. फिल्म के लिए अमिताभ और श्रीदेवी दोनों को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.

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7. लम्हे – 1991
डायरेक्टर- यश चोपड़ा

यश चोपड़ा ने लव स्टोरी तो कई लिखी हैं, मगर ये फिल्म हमेशा के लिए छा जाने वाली थी. फिल्म में हीरो थे अनिल कपूर. हीरोइन थीं श्रीदेवी. कहानी भी एकदम इंग्लिश थी. एक लड़का(अनिल कपूर) एक लड़की(श्रीदेवी) से प्यार करने लगता है. मगर कुछ ऐसा सीन बनता है कि उस लड़की से उसकी शादी नहीं हो पाती. वो लंदन चला जाता है. फिर लड़की मर जाती है. उसकी बेटी होती है वो भी एकदम श्रीदेवी जैसी. माने बेटी का रोल भी श्रीदेवी ने निभाया था. लड़का माने अनिल कपूर कई साल बाद लंदन से लौटता है तो उसे फिर उससे प्यार हो जाता है. फिर आता है सस्पेंस, ट्रेजडी का दौर. अंत में दोनों मिल जाते हैं. इस फिल्म में श्रीदेवी को उनके रोल के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

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8. लाडला – 1994
डायरेक्टर- राज कंवर

ये फिल्म ही एक तरह से ट्रेजडी है. क्योंकि इसमें पहले लीड हीरोइन के रोल में दिव्या भारती थीं. आधी से ज्यादा फिल्म शूट भी हो गई थी. मगर फिर 1993 में अचानक उनकी मौत हो गई. फिर इस फिल्म में एंट्री हुई श्रीदेवी की. दोबारा शूटिंग हुई और फिल्म में श्रीदेवी अपने रोल के लिए छा गईं. फिल्म की कहानी कुछ यूं थी कि हीरोइन(श्रीदेवी) एक बड़ी कंपनी की मालकिन हैं. नकचिढ़ी, गुस्सैल टाइप. उसी कंपनी में नौकरी करने आता है हीरो माने अनिल कपूर. फिर एक दिन हीरोइन को हीरो चांटा मार देता है. बदला लेने के लिए वो उससे शादी करने का प्लान बनाती है. हीरो की मां को मनाकर शादी कर ही लेती है, जबकि हीरो किसी और लड़की(रवीना टंडन) से प्यार करता होता है. फिर होता है कांड. सस्पेंस. एंड भी चौंकाने वाला होता है. फिल्म में श्रीदेवी के रोल की खूब तारीफ हुई थी.

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9. जुदाई – 1997
डायरेक्टर- राज कंवर

तेलुगू फिल्म शुभलंगनम की रीमेक ये फिल्म 1997 की सबसे तगड़ी सुपरहिट फिल्म बन गई थी. भयानक ड्रामे और कॉमेडी से भरी ये फिल्म हौंक के चली थी. कहानी कुछ ऐसी थी कि हीरो अनिल कपूर और हीरोइन श्रीदेवी की शादी होती है. जहां हीरो काम करता होता है, उस कंपनी की मालकिन दूसरी हीरोइन(उर्मिला) को हीरो से प्यार हो जाता है. वो हीरो से शादी करने को कहती है. हीरो तैयार नहीं होता मगर श्रीदेवी पैसे के लालच में तैयार हो जाती है. अनिल कपूर की शादी उर्मिला से हो जाती है. फिर वही सौतन-बीवी वाला झगड़ा. मजेदार फिल्म थी.

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10. इंग्लिश विंग्लिश – 2012
डायरेक्टर- गौरी शिंदे

15 साल का इंतजार खत्म हुआ था इस फिल्म के साथ. जुदाई के बाद इस फिल्म से श्रीदेवी वापसी कर रही थीं. और ये वापसी एकदम दमदार, जानदार रही. फिल्म हिट भी साबित हुई. लोगों ने उनके इंग्लिश सीखने के लिए जूझती मां के रोल की खूब तारीफ की. कहानी हर उस मां से जुड़ती है जो इंग्लिश नहीं जानती, मगर उसके बच्चे एकदम पढ़-लिखकर इंग्लिश हो गए हैं. वो अकसर खुद को पार्टी, रिश्तेदारों के बीच हैलो, हाय का जवाब ना दे पाने के कारण कमजोर मानने लगती है. मगर फिर वो न्यूयॉर्क पहुंचती है. इंग्लिश सीखने लगती है. सब बदल जाता है. वो साबित कर देती है कि भारतीय महिलाएं क्या नहीं कर सकतीं. फिल्म की खूब तारीफ हुई थी. गौरी शिंदे को इसके लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला था.

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