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RBI के नए सिस्टम ने चेक वाला 'सिस्टम ही बिगाड़' दिया, पर ऐसा हुआ क्यों?

RBI के नए चेक क्लियरिंग सिस्टम में गड़बड़ियों से ग्राहक परेशान हो रहे हैं. कहां तो एक दिन में चेक क्लियर होना था. कहां हफ्तों तक चेक क्लियर नहीं हो पा रहे. बैंक अधिकारियों ने बताया है कि इसमें क्या समस्याएं आ रही हैं.

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RBI Cheque clearing system
चेक क्लियरिंग में देरी को लेकर शिकायतें आ रही हैं (India Today)
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राघवेंद्र शुक्ला
13 अक्तूबर 2025 (अपडेटेड: 13 अक्तूबर 2025, 07:25 PM IST)
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'3 अक्टूबर को एक शख्स को चेक दिया. 8 अक्टूबर को पैसे अकाउंट से कट गए. इसके 4 दिन बाद मेल आया कि चेक रिजेक्ट हो गया है. बैंक मैनेजर से जाकर मिलें. मैनेजर ने जवाब दिया कि जबसे नया क्लियरिंग सिस्टम लागू हुआ है, सारे चेक रिजेक्ट हो जा रहे हैं. हमारे पास इसकी कोई रिपोर्ट नहीं है. फिलहाल एक ही चारा है कि आप खाते में पैसे आने का वेट करें.'  

कार्टूनिस्ट मंजुल ने अपने एक्स अकाउंट पर ये समस्या लिखी है. हालांकि, वो अकेले नहीं है, जिसके साथ ये प्रॉब्लम है. 3 अक्टूबर 2025 से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने चेक क्लियरिंग का नया सिस्टम लागू किया. इसको रियल टाइम चेक क्लियरिंग सिस्टम कहा गया, जिसके मुताबिक, जिस दिन चेक जमा करेंगे, उसी दिन खाते में पैसा आ जाएगा. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है.

पश्चिम बंगाल के जादवपुर के रहने वाले एक शख्स की कहानी ‘द टेलीग्राफ’ में छपी है. उनका कहना है कि मंगलवार, 7 अक्टूर 2025 को उन्होंने अपने इंडसइंड बैंक के चालू खाते में इंडियन बैंक का चेक जमा किया था. उन्हें बताया गया कि नई व्यवस्था के हिसाब से उसी दिन उनका चेक क्लियर हो जाएगा. शाम को उन्होंने अकाउंट चेक किया तो पैसे जमा नहीं हुए थे. बैंक से पूछा तो पता चला कि स्कैनिंग मशीन में कुछ समस्या है. ऐसे में पुराने तरीके से क्लियरेंस के लिए भेजना होगा. कहा गया कि अगली शाम तक पैसे खाते में आ जाएंगे लेकिन 48 घंटे बीतने के बाद भी कोई अपडेट नहीं आया.

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खाते से कटने के बाद भी पैसे नहीं मिले (X)

मुंबई की एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के अधिकारी ने TOI से कहा, 

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नाराज ग्राहक सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें कर रहे हैं. एक कंपनी Travelnetic System LLP ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, 

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कई दिनों बाद भी पैसा क्रेडिट नहीं हुआ (X)

RBI ने चेक क्लियर करने के लिए जबसे नए सिस्टम को लागू किया है, ऐसी गड़बड़ियों का तांता लग गया है. दो-दो दिन बीतने के बाद भी चेक क्लियर नहीं हो रहे लेकिन सबके फोन पर आरबीआई के मेसेज जरूर आ रहे हैं ये कहते हुए कि ‘तेजी से चेक क्लियरिंग अब आपके लिए! अब से बैंक उसी दिन चेक पास या वापस कर देंगे. ग्राहकों को उसी दिन क्रेडिट मिल जाएगा.’ मेसेज में बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था से क्या फायदे होंगे. जैसे-

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पहले क्या नियम था?

पुरानी व्यवस्था के हिसाब से चेक अगर आप आज जमा करते तो उसके ठीक अगले वर्किंग डे पर वह क्लियर होता था. इसे T+1 सिस्टम कहा जाता था. T का यहां मतलब ट्रांजेक्शन से है. यानी जिस दिन चेक जमा किया गया, खाते में ट्रांजेक्शन उसके अगले कार्यदिवस यानी वर्किंग डे पर होगा. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि पहले सारे चेकों को दिन के आखिर में एक बैच में निपटाया जाता था. किसी दिन के बैच के लिए उसी दिन एक निर्धारित समय होता था. अगर उसके पहले आप चेक जमा करते थे तो वह उसी दिन के बैच में निपटा दिया जाता था. लेकिन अगर उसके बाद चेक जमा करने पर वह अगले दिन के बैच में चला जाता था, जिसका निपटान एक दिन बाद होता था. इस तरह से पुरानी व्यवस्था के तहत चेक क्लियरेंस में एक या दो दिन लग जाते थे. 

नया नियम क्या है?

लेकिन अब आरबीआई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) में एक नया 'कंटीन्यूअस क्लियरिंग' सिस्टम शुरू किया है, जिससे चेक अब कुछ ही घंटों में क्लियर हो जाते हैं. यानी T+0 सिस्टम से चेक का निस्तारण किया जाता है. RBI के मुताबिक, नए सिस्टम को दो चरणों में लागू किया जाना है. इसमें पहला फेज 4 अक्टूबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक के लिए लागू होगा. वहीं दूसरा फेज 3 जनवरी के बाद लागू किया जाएगा. पहले चरण का सिस्टम लागू भी हो चुका है, जिसके मुताबिक,

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नया सिस्टम लागू किया है (India Today)
समस्या क्यों आ रही हैं?

लेकिन नई व्यवस्था में ढेरों समस्याएं सामने आ रही हैं. एक पब्लिक बैंक के अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि चूंकि सिस्टम नया है, इसलिए कुछ शुरुआती समस्याएं हैं. लेकिन समय के साथ इन चीजों को सुलझा लिया जाएगा. उनका कहना है कि कई बैंकों को चेक की जो इमेज मिल रही है, उसकी क्वालिटी इतनी खराब होती है कि उसे क्लियर कर पाना मुश्किल होता है. ऐसा गलत तरीके से स्कैनिंग की वजह से हो सकता है. इसके अलावा नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी ठीक तरीके से ट्रेन्ड नहीं हैं. इसका नतीजा ये है कि चेक या तो बाउंस कर दिए जाते हैं या पुरानी व्यवस्था से उनका निपटारा किया जाता है.

Economic Times को बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि सिस्टम इंटीग्रेशन, चेक को पढ़ने में दिक्कत और डेटा एंट्री में भी समस्या आ रही है, जिसकी वजह से कुछ कोटेशन या नंबर स्कैन नहीं हो पा रहे हैं या सिस्टम उन्हें पढ़ नहीं पा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि जब क्लियरिंग नहीं होती है तो किसी को manually यानी खुद से उन चेक्स को जांचना और दोबारा प्रोसेस करना पड़ता है. इसी वजह से चेक क्लियरिंग में देरी हो रही है.

‘द टेलीग्राफ’ में छपी एक रिपोर्ट में बैंक अधिकारियों ने माना है कि पहले वाले Batch Processing सिस्टम से अब Continuous Processing सिस्टम पर जाने में दिक्कतें आ रही हैं. मेन प्रॉब्लम ये है कि चेक की स्कैनिंग जल्दबाजी में की जा रही है. इससे कई बार चेक की इमेज धुंधली या अधूरी रह जाती है. नतीजा, सेटलमेंट यानी भुगतान की प्रक्रिया में देरी हो रही है.

इसे ठीक करने के लिए बैंक शाखाओं के कर्मचारियों को नियमों और प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग दी जा रही है.

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चेक क्लियरिंग में हो रही है देरी (India Today)

एक सरकारी बैंक अधिकारी के मुताबिक, छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाके की शाखाओं में समस्या ज्यादा है क्योंकि वहां के कर्मचारी अभी नए सिस्टम से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. जब पहली बार CTS सिस्टम शुरू हुआ था तब भी ऐसी शुरुआती दिक्कतें आई थीं. 

RBI ने बढ़ाई समय सीमा

बैंकों को नए सिस्टम के साथ एडजस्ट करने में मदद करने के लिए RBI ने 8 अक्टूबर 2025 को चेक क्लियरिंग का समय शाम 7 बजे तक से बढ़ाकर रात 11 बजे तक कर दिया. वहीं, बैंकों का कहना है कि ऐसे शुरुआती तकनीकी दिक्कतें किसी भी नए सिस्टम में आम होती हैं. उम्मीद है कि एक या दो हफ्तों में सब कुछ सामान्य हो जाएगा.

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