The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Delhi Car Blast TATP Meaning Shoe Bomb Doctor Umar un Nabi

क्या दिल्ली धमाके में 'शू बम' का इस्तेमाल हुआ?

Delhi Car Blast: सेना में TATP का इस्तेमाल बहुत ही कम हो गया है. इसकी बड़ी वजह इसका वोलेटाइल नेचर है यानी बिलकुल अस्थिर. माने भरोसा करना मुश्किल है कि कब फट जाए.

Advertisement
Delhi Car Blast, TATP, TATP Meaning, Shoe Bomb, mother of satan
दिल्ली कार ब्लास्ट में NIA को TATP मिला है.
pic
अरविंद ओझा
font-size
Small
Medium
Large
17 नवंबर 2025 (अपडेटेड: 18 नवंबर 2025, 04:03 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच में एक नया अपडेट सामने आया है. नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) के मुताबिक, जिस Hyundai i20 कार में धमाका हुआ था, उसमें TATP के अंश पाए गए हैं. कार में ड्राइवर की सीट के पास एक जूता मिला था. इस जूते और कार के दोनों टायरों पर TATP पाया गया है. TATP मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को ब्लास्ट में शू बम यानी जूता बम के इस्तेमाल का शक है.

क्या है ये TATP?

अमेरिका की जॉइंट काउंटरटेररिज्म असेसमेंट टीम के मुताबिक, TATP का पूरा नाम Triacetone Triperoxide है. इसे Acetone Peroxide भी कहते हैं. Acetone, Hydrogen Peroxide और Acid को मिलाकर ये कंपाउंड बनता है. Acetone और Hydrogen Peroxide दोनों ही हमारे रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली चीजों में मिल जाते हैं.

Acetone नेल पॉलिश रिमूवर में मिल जाएगा. जबकि Hydrogen Peroxide एक ब्लीचींग-क्लीनिंग एजेंट हैं. इन तीनों के कॉम्बिनेशन से TATP बनता है. TATP का निक नेम भी है- 'Mother of Satan' यानी 'शैतान की मां'. जानकार बताते हैं कि ये दिखने में वाइट क्रिस्टल, पाउडर, स्टिकी लिक्विड या एमॉरफस फॉर्म में भी हो सकता है. एमॉरफस यानी जिसका कोई तय शेप नहीं होता.

सेना ने TATP का इस्तेमाल बहुत ही कम कर दिया है. इसकी बड़ी वजह इसका वोलेटाइल नेचर है यानी बिलकुल अस्थिर. माने भरोसा करना मुश्किल है कि कब फट जाए. आपने TNT बम का नाम सुना होगा. TATP इससे कई गुना ज्यादा स्ट्रांग है. जानकार इसके बारे में क्या कहते हैं सुनिए?

इंडिया टुडे से जुड़े अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के HOD डॉ. मनोज पाठक कहते हैं,

Image embed

उन्होंने आगे बताया,

Image embed

इसे बनाने से लेकर एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने तक का काम बहुत रिस्की होता है. क्योंकि थोड़ी सी भी कोताही बरती तो ये फट सकता है. हल्की सी गर्मी, झटका या रगड़ाव विस्फोट के लिए काफी है.'मदर ऑफ सैटन' यानी TATP एक ऐसा विस्फोटक है जिसमें नाइट्रोजन नहीं होता है. इसलिए आउटडेटेड डिटेक्शन स्कैनर (यानी जो पुराने तकनीक वाले डिटेक्शन स्कैनर) इसे ट्रेस नहीं कर पाते हैं.

फॉरेंसिक एक्सपर्ट और कंसल्टेंट निशा मेनन बताती हैं,

Image embed

उन्होंने आगे बताया,

Image embed

10 नवंबर के CCTV फुटेज में ब्लास्ट से पहले कार धीरे-धीरे ट्रैफिक सिगनल की तरफ बढ़ती है. इसी कार में आरोपी उमर उन नबी बैठा था. कुछ रिपोर्ट्स में ये बात भी सामने आ रही है कि उमर धीरे-धीरे कार ड्राइव कर रहा था, ताकि TATP पहले ही ना ब्लास्ट हो जाए. क्योंकि ब्लास्ट के लिए एक माइनर झटका काफी था.

जो एक्सप्लोसिव इतना घातक है. उसे बनाया कैसे गया? इसका इतिहास क्या है? ये भी जान लेते हैं. इसे 1895 में जर्मन केमिस्ट रिचर्ड वोल्फेंस्टीन (Richard Wolffenstein) ने बनाया था. अस्थिर होने की वजह से बाद में इस पर रोक लग गई. लेकिन आतंकवादी इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे.

इसलिए सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली धमाके में भी शू बम का इस्तेमाल हुआ था? इस केस में सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं. NIA ये साफ कर चुका है कि डॉ. उमर नबी जो धमाके वाली कार में बैठा था सुसाइड बॉम्बर था.

वीडियो: जम्मू-कश्मीर में दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी डॉक्टर आदिल के पड़ोसी ने आत्मदाह की कोशिश की

Advertisement

Advertisement

()