फिल्म रिव्यू- परम सुंदरी
सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर की नई फिल्म 'परम सुंदरी' कैसी है, जानने के लिए पढ़ें ये रिव्यू.

फिल्म- परम सुंदरी
डायरेक्टर- तुषार जलोटा
एक्टर्स- सिद्धार्थ मल्होत्रा, जाह्नवी कपूर, इनायत वर्मा, संजय कपूर
रेटिंग- 1.5 स्टार्स
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"You become what you hate"
ये अंग्रेज़ी का एक कथन है. जिसका मतलब होता है कि आप जिस चीज़ से सबसे ज़्यादा नापसंद करते हैं, बदलना चाहते हैं. अंतत: खुद वही बन जाते हैं. दिनेश विजन की मैडॉक फिल्म्स पर ये कोट शत-प्रतिशत फिट बैठता है. इन्होंने इंडस्ट्री को चैलेंज किया. उस किस्म की फिल्में बनाईं, जिन्हें अमूमन सिनेमैटिक चश्मे से नहीं देखा जाता. या जो हिंदी सिनेमा में पहले नहीं हुआ. मसलन, 'गो गोवा गोन', 'हिंदी मीडियम', 'स्त्री', 'बाला'. इन फिल्मों के माध्यम से इन्होंने इंडस्ट्री के फॉरमूला कल्चर को चुनौती दी. लोगों को ये चीज़ पसंद आई. वो इन फिल्मों से जुड़ाव महसूस करने लगे. फिल्में टिकट खिड़की पर चलने लगीं. बात यहां तक पहुंच गई कि 2024 में मैडॉक की बनाई 'स्त्री 2' साल की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. इसे मैडॉक को और प्रयोगधर्मी सिनेमा बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए था. मगर हुआ ठीक उल्टा. मैडॉक उस किस्म की फिल्में बनाने लगी, जो लोग देखना चाहते हैं. या जो टिकट खिड़की पर चलेगी. उसी कड़ी में बनी फिल्म है 'परम सुंदरी'.
'परम सुंदरी' की पूरी कहानी फिल्म के टाइटल में ही है. फिल्म में सबकुछ परम सुंदर है. लोग, कपड़े, लोकेशन. सब चकाचक. मगर कोई चीज़ नई नहीं है. फिल्म का नाम 'राम लीला' जैसे नामों से प्रेरित है. जिसमें फिल्म के दोनों मुख्य किरदारों के नाम समाहित हैं. 'टु स्टेट्स' और 'चेन्नई एक्सप्रेस' को रिहैश करके जो बनता, उसे थोड़ा और डंब डाउन कर दीजिए. 'परम सुंदरी' की कहानी तैयार हो गई. 'रोज़ा' फिल्म की 'ये हसीं वादियां' गाने को थोड़ा ट्वीक कर दीजिए, तो 'परदेसिया' गाना बन गया. फिल्म में इतनी जगह शाहरुख खान की फिल्मों और डायलॉग्स का ज़िक्र आता है कि आपको लगता है कि आप कोई स्पूफ देख रहे हैं. ये सब करके भी फिल्म किसी भी लेवल पर आपके साथ जुड़ नहीं पाती.
फिल्म की कहानी एक अमीर बाप के बेटे परम की है. परम कई स्टार्ट अप्स में अपने पिता का पैसा लगा चुका है. सब डूब गए. अब उनसे एक हाई कॉन्सेप्ट डेटिंग ऐप पर पैसा लगाया है. 'सोलमेट' नाम का ये ऐप डेटा, फ्रीक्वेंसी और कई तकनीकी जार्गन की मदद से आपको अपना सोलमेट ढूंढने में मदद करता है. ये ऐप वाकई काम करता है, अपने पिता के सामने ये साबित करने के लिए परम खुद पहले इसका डेमो लेता है. ऐप बताता है कि केरल के एक छोटे से शहर में सुंदरी नाम की एक लड़की है, जो उसकी सोलमेट है. सुंदरी एक होमस्टे चलाती है. परम वहां पहुंच जाता है. इसके बाद शुरू होता है नॉर्थ और साउथ का संघर्ष. क्योंकि परम को पता ही नहीं है कि साउथ का मतलब सिर्फ तमिलनाडु नहीं है. उधर कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश भी आते हैं.
'परम सुंदरी' खुद को वो गाइड समझती है, जो नॉर्थ इंडियन लोगों को साउथ के बारे में जागरूक कर रही है. जबकि वो खुद केरल को वहां आए किसी टूरिस्ट से ज़्यादा नहीं जानती. कैमरा सिर्फ उन्हीं विज़ुअल्स को कवर करता है, जो दिखने में खूबसूरत हैं. इन लोकेशंस का उससे ज़्यादा कोई मतलब नहीं है. न कहानी में, न उन पात्रों की ज़िंदगी में जिनकी कहानी बताने का दावा ये फिल्म करती है.
शायद ये फिल्म और एंगेजिंग होती अगर सिद्धार्थ और जाह्नवी के बीच के इक्वेशन को और एक्सप्लोर किया जाता. सबकुछ इतना सतही है कि दोनों एक्टर्स के बीच कोई केमिस्ट्री बन ही नहीं पाती. जाह्नवी अपनी ओर से पूरी कोशिश करती हैं. मगर सिद्धार्थ के सामने उन्हें हार माननी पड़ती है. क्योंकि परफॉरमेंस के मामले में उनकी ओर से कोई रेसिप्रोकेशन नहीं मिलता. इनायत वर्मा जो कि जाह्नवी की छोटी बहन बनी हैं, वो फिल्म की इकलौती एक्टर हैं, जो आपको इम्प्रेस करती हैं. संजय कपूर लास्ट में फिल्म में जान फूंकने की कोशिश करते हैं. मगर वो किरदार उन्हें वो सब करने का स्कोप नहीं देता.
'परम सुंदरी' को देखकर समझ नहीं आता कि ये फिल्म क्या करने की कोशिश कर रही थी. ये एक क्रॉस-कल्चरल रोमैंटिक कॉमेडी फिल्म होना चाहती थी. मगर न तो ये प्रॉपर रोमैंटिक फिल्म है, न ही इसका कोई पंच लैंड करता है. मगर इस फिल्म की सबसे बड़ी खामी ये है कि इसमें कुछ भी फ्रेश या ओरिजिनल नहीं है.
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