Submit your post

Follow Us

जमीनी हकीकत: ममता बनर्जी की सरकार में बंगाल की कानून व्यवस्था का सच

बंगाल विधानसभा चुनावों पर हमारी ख़ास सीरीज़ ‘ज़मीनी हकीकत’ में अब तक हमने बात की बंगाल की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की. हमने राज्य में महिलाओं से जुड़े मुद्दों, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जातियों-जनजातियों को दी जा रही सुविधाओं और खाद्य सुरक्षा पर भी रिपोर्ट की. अब सीरीज के इस आख़िरी भाग में हम बात करेंगे पश्चिम बंगाल की क़ानून व्यवस्था पर.


Zamini Hakikat Logo

पश्चिम बंगाल की क़ानून व्यवस्था हमेशा से सुर्खियों में रही है. इसे लेकर यहां की सरकारों पर सवाल उठते रहे हैं. बात चाहे 34 वर्षों के वाम शासन की हो या बीते 10 सालों से बंगाल चला रहीं ममता बनर्जी की, दोनों ही के राज में बंगाल से राजनीतिक हिंसा की खबरें आईं. चुनाव के दौरान भी बंगाल में हिंसा, बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं आम हैं.

क्या कहते हैं आंकड़े?

बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति को थोड़ा और क़रीब से समझने के लिए आकड़ों का रुख करते हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB का कहना है कि पश्चिम बंगाल ने साल 2018 में आख़िरी बार अपराध के आकड़े भेजे थे. और 2018 के आख़िर तक मिले आकड़े क्या कहानी कहते हैं, वो भी जान लीजिए.

• साल 2017 की रिपोर्ट कहती है कि उस साल भारत में 1 लाख 19 हज़ार से ज्यादा बच्चे लापता हुए. इनमें से 19 हजार 671 यानी 16.5 प्रतिशत लापता बच्चे बंगाल से थे. यानी उस साल देशभर में ग़ायब हुए बच्चों में से हर छठवां बच्चा बंगाल से था.
• साल 2010 से 2015 तक देश में मानव तस्करी के कुल दर्ज मामलों में 25 फ़ीसद पश्चिम बंगाल के थे. 2016 में ये आंकड़ा बढ़कर 44 फ़ीसद हो गया.

ये तो बात हो गई NCRB के आकड़ों की. इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार को 15 जून 2019 को एक चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में गृह मंत्रालय ने दावा किया था कि 2016 से 2019 के बीच बंगाल में कुल 183 राजनीतिक हत्याएं हुई हैं.

Lallantop
2018 के दंगों के समय की एक तस्वीर. (फाइल)

गृह मंत्रालय ने राजनीतिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट भी मांगी थी. उसने राज्य सरकार को एक एडवाइजरी जारी की थी कि पिछले कुछ सालों में हुई ‘बेरोकटोक हिंसा’ गहरी चिंता का विषय है. रिपोर्ट में कहा गया था कि 2016 में बंगाल में राजनीतिक हिंसा की 509 घटनाएं हुई थीं, जो 2018 तक 1035 हो गई थीं.

आंकड़े बंगाल में हुए अपराधों की गवाही देते हैं. लेकिन क़ानून व्यवस्था ज़मीन पर कैसी है? क्या सच में बंगाल में इतनी राजनीतिक हिंसा और मानव तस्करी हो रही है? सरकार पर लगे आरोप कितने सही हैं? इन सारे सवालों के जवाब जानने हमारे साथी प्रशांत मुखर्जी पहुंचे पश्चिम बंगाल के क़ानून मंत्री मलय घटक के विधानसभा क्षेत्र आसनसोल उत्तरी में.

जमीनी हकीकत

आसनसोल बंगाल के पश्चिमी बर्धमान ज़िले में आता है. ये कोलकाता के बाद बंगाल का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला इलाका है. इसी आसनसोल के रेलपार इलाक़े में साल 2018 में सांप्रदायिक दंगे हुए थे. इनमें नूरानी मस्जिद के इमाम इमदादुल्लाह रशीदी के बेटे की मौत हो गई थी. तब उन्होंने अमन का पैग़ाम दिया था. बताते है कि इस दंगे से आसनसोल की हवा हमेशा के लिए बदल गई.

‘साल 2018 से पहले 1991-92 में भी आसनसोल में हालात कुछ बिगड़े थे. लेकिन 2018 में जो हालात बिगड़े, उसमें हमारे बच्चे के साथ जो हादसा हुआ, उसके बाद आसनसोल का माहौल अलग हो गया. हमने उस समय अमन और शांति का संदेश दिया था. हमारा पैगाम था कि जो तकलीफ हमें पहुंची थी, वो किसी और को ना पहुंचे. ये पैगाम (लोगों तक) पहुंचा. उसका फायदा हुआ.’

Imdadullah Rashidi
इमदादुल्लाह रशीदी. (तस्वीर- लल्लनटॉप)

रेलपार इलाक़े के ओके रोड ऑटो स्टैंड के पास रहने वाले वसी अहमद दंगों के पीछे बीजेपी का हाथ बताते हैं. यहां दंगों को लेकर हुई बातचीत में आरोप लगे सीधे सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पर. वहीं, राज्य सरकार इस मामले में कितनी सफल है, इस बाबत भी बातें सुनाई देती हैं. वसी अहमद कहते हैं,

‘हमारे रेलपार में ऐसा नहीं होता है. ऐसा किया गया है. बीजेपी ने ये किया है. बाबुल सुप्रिया ने ये सब कराया है. पश्चिम बंगाल ही नहीं पूरे हिंदुस्तान में बीजेपी वाले ऐसा चाह रहे हैं. दंगा कराएं और वोट सिक्योर करें. बंगाल सरकार और आसनसोल के विधायक, जो बंगाल के कानून मंत्री हैं, दंगा रोकने में पूरी तरह सफल रहे.’

Wasi Ahmad
वसी अहमद (तस्वीर- लल्लनटॉप)

वसी अहमद ने अपनी तरफ से दंगों के मामलों में ममता सरकार को ‘क्लीन चिट’ दे दी. लेकिन इसी आसनसोल में राज्य सरकार अन्य आरोपों से बरी नहीं हो पाती. उस पर ड्रग्स और नशे के अवैध कारोबार को ना रोक पाने के भी बहुत आरोप लगते हैं. आसनसोल के एसएन राही सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हैं. उन्होंने कहा,

‘कानून व्यवस्था की हालत ये है कि ड्रग्स की वजह से नई नौजवान पीढ़ी तबाह होती जा रही है. पुलिस और प्रशासन के जरिये हमने इस पर पाबंदी लगवानी चाही थी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. बल्कि वे लोग (ड्रग माफिया) जैसे पहले आसानी से काम कर रहे थे, उतनी आसानी से बाद में भी काम करते रहे हैं.’

एसएन राही की तरह विक्टर अचारजी भी आसनसोल की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं. वे बताते हैं की रेप, मर्डर की घटनाएं आम हैं. वो पुलिस व्यवस्था में करप्शन का भी ज़िक्र करते हैं.

‘कुछ दिन पहले यहां एक लड़की का मर्डर हो गया. रेप-हत्या की वारदातें होती रहती हैं. और ये जो जगह है आसनसोल टाउन, यहां कुछ ही दूरी पर पुलिस कमिश्नर है. ऐसी हालत आसनसोल की नहीं थी. अभी रात में हर चौराहे पर पुलिस को 10-20 रुपये देकर कोई भी ट्रक निकल जाता है.’

Untitled Design
एसएन राही (बाएं) और विक्टर अचारजी. (तस्वीरें- लल्लनटॉप)

अब बात करते हैं राजनीतिक हत्याओं की. 10 मई 2012 को आसनसोल में वामपंथी पार्टी CPIM के कार्यकर्ता अर्पण मुखर्जी की हत्या हुई थी. तब भी बंगाल में तृणमूल सरकार थी. अर्पण की बहन मंजरी राय बताती हैं कि इस मामले को लेकर राज्यपाल तक की मुलाक़ात और राज्य की CID और CBI जांच से क्या हासिल हुआ? मंजरी राय ने हमें बताया,

‘इस घटना को 9 साल हो जाएंगे, लेकिन अब तक कोई भी पकड़ा नहीं गया है. पहले राज्य की CID ने हत्या की जांच की. फिर CBI ने भी तफ्तीश की. कई बार पूछताछ हुई. हमने विरोध प्रदर्शन भी किया. CPIM ने भी कमिश्नर के यहां विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन अब तक इस मामले का हल निकलकर नहीं आया. क्योंकि इस मामले के पीछे तृणमूल कांग्रेस के लोगों का हाथ है.’

Manjari
मंजरी राय. (तस्वीर- लल्लनटॉप)

हम आगे बढ़े तो बात हुई बर्नपूर रोड इलाक़े की प्रेमलता शर्मा से. बताती हैं कि इलाके की क़ानून व्यवस्था की स्थिति लचर है. छेड़छाड़ की घटनाएं आम हैं. प्रेमलता ये आरोप तक लगाती हैं की पुलिस तृणमूल नेताओं के इशारे पर काम करती है. कहती हैं,

‘बिल्कुल बेकार हालत है. यहां ऐसे असामाजिक तत्व फैले हुए हैं कि जिनके सामने से आप रास्ता पार नहीं कर सकते. कोई लड़का कॉमेंट करता है तो आप पलटकर उसका कुछ भी नहीं कर सकते. आपको रास्ता ही बदलना पड़ेगा. जो यंग लड़कियां हैं 15-16 साल की, वो उन रास्तों से गुजरने से डरती हैं. आप थाने जाओ और वहां रूलिंग पार्टी का फोन आ जाए तो आपकी समस्या नहीं सुनी जाएगी.’

सरकार या TMC से नहीं मिले जवाब

क़ानून मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में शिकायतों की फ़ेहरिस्त लम्बी है. पुलिस और प्रशासन से सीधे सवाल हैं. जवाब जानने के लिए हमने आसनसोल उत्तरी के विधायक और प्रदेश के क़ानून मंत्री मलय घटक से बात करने की कोशिश की. उन्होंने कैमरे पर सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया. और वही नहीं, राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, सत्ताधारी पार्टी तृणमूल के प्रवक्ता, इनमें से कोई भी क़ानून व्यवस्था के सवाल पर बात करने पर तैयार नहीं हुआ. केंद्रीय गृह मंत्रालय की चिट्ठी और स्थानीय लोगों के आरोपों के संबंध में हमने बहुतेरे मेल, फ़ोन और मैसेज किए. लेकिन जवाब कुछ नहीं आया.

ऐसे में बंगाल की क़ानून व्यवस्था और इसकी फ़ंक्शनिंग को समझने के लिए हमने कई वर्षों तक बंगाल में काम कर चुके सेवानिवृत्त IAS अफ़सर जवाहर सरकार से बात की.

Officer
जवाहर सरकार. (तस्वीर- लल्लनटॉप)

जवाहर सरकार ने बंगाल की राजनीतिक हिंसा, मानव तस्करी और क़ानून व्यवस्था पर हमसे ये कहा,

‘राजनीतिक हिंसा की संस्कृति बहुत पुरानी है. ये करने वालों को इतिहास में आतंकवादी ही कहते हैं. थोड़ी बहुत हिंसा तो सब जगह होती है… सिलीगुड़ी चार देशों के करीब का इलाका है. बांग्लादेश, नेपाल और भूटान और हिंदुस्तान खुद. ये इलाका चारों के ही करीब है. आप देखिए कि 3-4 देशों में होने वाली ट्रैफिकिंग बंगाल के नाम पर चलती रही.’

बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू हुई हमारी खास पेशकश जमीनी हकीकत के सभी भाग आपके सामने पेश किए जा चुके हैं. लल्लनटॉप पर इसकी प्लेलिस्ट पर जाकर आप बंगाल चुनाव और बीते जिन भी चुनावों में लल्लनटॉप की टीम मैदान पर उतरी है, उनकी ज़मीनी हक़ीक़त देख सकते हैं. हमारा कमेंट बॉक्स आपके सुझावों, बातों और शिकायतों के लिए खुला है.


बंगाल चुनाव: खड़गपुर में धोनी इस घर में रहते थे, जो फ़िल्म में नहीं दिखाया गया 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गुजरात चुनाव 2017

गुजरात और हिमाचल में सबसे बड़ी और जान अटका देने वाली जीतों के बारे में सुना?

गुजरात और हिमाचल में सबसे बड़ी और जान अटका देने वाली जीतों के बारे में सुना?

एक-एक वोट कितना कीमती होता है, कोई इन प्रत्याशियों से पूछे.

गुजरात विधानसभा चुनाव के चार निष्कर्ष

गुजरात विधानसभा चुनाव के चार निष्कर्ष

बहुमत हासिल करने के बावजूद चुनाव के नतीजों से बीजेपी अंदर ही अंदर सकते में है.

गुजरात में AAP का क्या हुआ, जो 33 सीटों पर लड़ी थी!

गुजरात में AAP का क्या हुआ, जो 33 सीटों पर लड़ी थी!

अरविंद केजरीवाल का गुजरात में जादू चला या नहीं?

गुजरात चुनाव के बाद सुशील मोदी को खुला खत

गुजरात चुनाव के बाद सुशील मोदी को खुला खत

चुनाव के नतीजे आने के बाद भी लिचड़ई नहीं छोड़ रहे.

इस चुनाव में राहुल और हार्दिक से ज्यादा अफसोस इन सात लोगों को हुआ है

इस चुनाव में राहुल और हार्दिक से ज्यादा अफसोस इन सात लोगों को हुआ है

इन लोगों ने थोड़ी मेहनत और की होती, तो ये गुजरात की विधानसभा में बैठने की तैयारी कर रहे होते.

राहुल गांधी ने चुनाव में हार के बाद ये 8 बातें बोली हैं

राहुल गांधी ने चुनाव में हार के बाद ये 8 बातें बोली हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्रेडिबिलिटी पर ही सवाल खड़े कर दिए.

गुजरात में हारे कांग्रेस के वो बड़े नेता जिन पर राहुल गांधी को बहुत भरोसा था

गुजरात में हारे कांग्रेस के वो बड़े नेता जिन पर राहुल गांधी को बहुत भरोसा था

इनके बारे में कांग्रेस पार्टी ने बड़े-बड़े प्लान बनाए होंगे.

बीजेपी के वो 8 बड़े नेता जो गुजरात चुनाव में हार गए

बीजेपी के वो 8 बड़े नेता जो गुजरात चुनाव में हार गए

इनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं और तमाम टोटके नहीं जिता सके.

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद ये 5 बातें कहीं

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद ये 5 बातें कहीं

दोनों प्रदेशों में भगवा लहराया मगर गुजरात की जीत पर भावुक दिखे पीएम.

ये सीट जीतकर कांग्रेस ने शंकरसिंह वाघेला से बदला ले लिया है

ये सीट जीतकर कांग्रेस ने शंकरसिंह वाघेला से बदला ले लिया है

वाघेला ने इस सीट पर एक निर्दलीय प्रतायशी को वॉकओवर दिया था.