Submit your post

Follow Us

जब धूमल के घर झूठा फोन कॉल आया और सब खुशियां मनाने लगे

1.07 K
शेयर्स

18 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश में जैसे-जैसे काउंटिंग बढ़ रही थी, शिमला के बीजेपी दफ्तर में नारों का शोर तेज़ हो रहा था. लेकिन हमीरपुर जिले के समीरपुर गांव में माहौल एकदम उलट था. ये प्रेम कुमार धूमल का गांव है, जिन्हें बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट घोषित किया था. धूमल चुनाव हार गए. कांग्रेस ने उनके खिलाफ कभी उनके ही शागिर्द रहे राजिंदर सिंह राणा को टिकट दिया था, जो 1,919 वोटों से चुनाव जीत गए.

राजिंदर राणा कौन हैं, ये जानना चाहते हैं, तो यहां क्लिक करें

राजिंदर राणा
सुजानपुर के विधायक राजिंदर राणा

लेकिन धूमल के मामले में सबसे ज्यादा चौंकाया रिज़ल्ट की देरी ने

धूमल काउंटिंग की शुरुआत से ही राणा से पीछे चल रहे थे. सुबह सवा नौ बजे जब पहले रुझान आए, तो राणा 600 वोटों से आगे थे. पूरे दिन ऐसे ही चलता रहा. फिर शाम को 4-5 बजे लगा कि काउंटिंग पूरी हो गई है. दोनों ही कैंडिडेट्स के खाते में 20-20 हज़ार से ज्यादा वोट थे. वोट बढ़ नहीं रहे थे, लग रहा था कि किसी भी समय रिज़ल्ट घोषित हो जाएगा, लेकिन चुनाव आयोग की वेबसाइट कई घंटों तक काउंटिंग जारी दिखाती रही.

लेकिन इस सबके बीच धूमल के घर एक फोन आया

दोपहर करीब 12 बजे के आसपास. लेकिन फोन क्या था, अफवाह थी. किसी ने बताया कि नौ राउंड्स की काउंटिंग के बाद धूमल चार हज़ार वोटों से आगे चल रहे हैं. ऐसा कुछ भी नहीं था. तब तक सात राउंड की काउंटिंग ही हुई थी और धूमल पीछे चल रहे थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दोपहर तीन बजे तक धूमल के घर में बना उनका ऑफिस खाली हो गया. सब जान गए कि सूबे में पार्टी जीत रही है, लेकिन धूमल हार रहे हैं.

काउंटिंग वाले दिन अपने घर में धूमल
काउंटिंग वाले दिन अपने घर में धूमल

फिर धूमल ने खुद हार मान ली

करीब चार बजे के आसपास धूमल सुबह से पहली बार अपने ऑफिस से बाहर निकले. समर्थकों से मिलने के लिए. उनकी पत्नी शीला और भाई रूम सिंह उनके साथ थे. दोनों बेटे अनुराग और अरुण 20 किमी दूर हमीरपुर में थे. धूमल को देखकर कुछ समर्थक रो पड़े, तो धूमल ने कहा, ‘दिल बड़ा रखिए. मैं ठीक हूं.’ फिर पत्रकारों से बोले, ‘हार के कई कारण हैं और मैं आत्मावलोकन करूंगा. पार्टी की जीत से मुझे खुशी है. मेरा व्यक्तिगत नुकसान मायने नहीं रखता.’ वापस घर के अंदर जाने से पहले धूमल करीब दो घंटे समर्थकों के साथ रहे.

राजिंदर राणा और प्रेम कुमार धूमल: पुराने दिन
राजिंदर राणा और प्रेम कुमार धूमल: पुराने दिन

लगा कि धूमल चुनाव सेट करने में लगे हैं

सुजानपुर सीट का रिज़ल्ट रात में करीब साढ़े ग्यारह बजे आया. ऐसे में शाम पांच से रात 11 बजे के बीच यही कयास लगाए गए कि धूमल प्रशासन पर दबाव बनाकर अपना चुनाव सेट करने में लगे हैं. ऐसा नहीं था. दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत में हिमाचल दस्तक के संपादक हेमंत कुमार ने बताया कि ऐसा कुछ भी नहीं था. धूमल ने शाम को ही अपनी हार स्वीकार कर ली थी और राणा भी जीत की बधाई स्वीकार कर ली थी. कुछ बूथों की काउंटिंग वाकई में बची रह गई थी, जिसकी वजह से रिज़ल्ट आने में देर लगी.

अब धूमल के पक्ष में हो रही गोलबंदी

धूमल के हारने के बाद भोरंज से अपना पहला चुनाव लड़ रहीं कमलेश कुमारी ने कहा कि अब उनकी जीत के कोई मायने नहीं रह गए. कमलेश धूमल की करीबी हैं. हिमाचल से ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि कुछ विधायक हारने के बावजूद धूमल को सीएम बनाने के लिए गोलबंदी कर रहे हैं. कुटलेहड़ से जीतने वाले वीरेंद्र कंवर और सरकाघाट से जीतने वाले कर्नल इंदर सिंह ने अपनी-अपनी सीट छोड़ने की भी पेशकश की है ताकि धूमल वहां से जीतकर विधायक बन सकें और फिर सीएम की कुर्सी का रास्ता साफ हो जाए.

कुटलेहड़ विधायक वीरेंद्र कंवर
कुटलेहड़ विधायक वीरेंद्र कंवर

धूमल के समर्थकों ने उनकी हार के अलग-अलग कारण गिनाए हैं. कुछ ने पार्टी हाईकमान को सीट बदलने के लिए दोषी ठहराया. कुछ ने कहा कि सुजानपुर के पिछले बीजेपी विधायर नरिंदर ठाकुर ने इस सीट पर कोई सपोर्ट नहीं किया. कुछ समर्थकों ने ये भी कहा कि वोटर्स बेइमान निकले. उन्होंने कहा था कि वोट देंगे, लेकिन बाद में नहीं दिए.


पढ़िए हिमाचल चुनाव के बारे में और भी बहुत कुछ:

हिमाचल: चंबा की रानी समेत इन अहम कांग्रेसी नेताओं ने बचाईं अपनी सीटें

हिमाचल चुनाव 2017: बीजेपी के CM कैंडिडेट प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर में क्यों हारे

जोगिंदरनगर: यहां सऊदी से आए आदमी ने सात बार के बीजेपी विधायक के धुर्रे उड़ा दिए

हिमाचल 2017: नादौन में बीजेपी और वीरभद्र मिलकर भी इस कांग्रेसी को नहीं हरा पाए

पापा-बिटिया समेत कांग्रेस के ये दिग्गज और मंत्री हुए ढेर

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गुजरात चुनाव 2017

गुजरात और हिमाचल में सबसे बड़ी और जान अटका देने वाली जीतों के बारे में सुना?

एक-एक वोट कितना कीमती होता है, कोई इन प्रत्याशियों से पूछे.

गुजरात विधानसभा चुनाव के चार निष्कर्ष

बहुमत हासिल करने के बावजूद चुनाव के नतीजों से बीजेपी अंदर ही अंदर सकते में है.

गुजरात में AAP का क्या हुआ, जो 33 सीटों पर लड़ी थी!

अरविंद केजरीवाल का गुजरात में जादू चला या नहीं?

गुजरात चुनाव के बाद सुशील मोदी को खुला खत

चुनाव के नतीजे आने के बाद भी लिचड़ई नहीं छोड़ रहे.

इस चुनाव में राहुल और हार्दिक से ज्यादा अफसोस इन सात लोगों को हुआ है

इन लोगों ने थोड़ी मेहनत और की होती, तो ये गुजरात की विधानसभा में बैठने की तैयारी कर रहे होते.

राहुल गांधी ने चुनाव में हार के बाद ये 8 बातें बोली हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्रेडिबिलिटी पर ही सवाल खड़े कर दिए.

गुजरात में हारे कांग्रेस के वो बड़े नेता जिन पर राहुल गांधी को बहुत भरोसा था

इनके बारे में कांग्रेस पार्टी ने बड़े-बड़े प्लान बनाए होंगे.

बीजेपी के वो 8 बड़े नेता जो गुजरात चुनाव में हार गए

इनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं और तमाम टोटके नहीं जिता सके.

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद ये 5 बातें कहीं

दोनों प्रदेशों में भगवा लहराया मगर गुजरात की जीत पर भावुक दिखे पीएम.

ये सीट जीतकर कांग्रेस ने शंकरसिंह वाघेला से बदला ले लिया है

वाघेला ने इस सीट पर एक निर्दलीय प्रतायशी को वॉकओवर दिया था.