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क्या पीरजादे के वाम मोर्चे में शामिल होने से ममता की बढ़ेगी मुश्किल?

16 फ़रवरी की शाम बंगाल चुनाव को लेकर एक बड़ी अपडेट आई. अपडेट ये है कि नई बनी पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) अब आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा होगी. मीडिया से बात करते हुए इस बात की जानकारी पश्चिम बंगाल के कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने दी है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अधीर रंजन ने यह भी कहा है कि आईएसएफ के अलावा आरजेडी और कई अन्य छोटी पार्टियां भी गठबंधन में शामिल होंगी. वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वाम मोर्चा के चेयरपर्सन बिमान बोस ने कहा, ‘‘ आगामी विधानसभा चुनाव में हम वाम मोर्चा, कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेंगे.’’

हालांकि इसमें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम शामिल होगी या नहीं इस पर सस्पेंस बना हुआ है.

बता दें कि 20 जनवरी को फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ के पीरज़ादे अब्बास सिद्दीकी ने नई पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट बनाने की घोषणा की थी. अब्बास सिद्दीकी के भाई नौशाद सिद्दीकी पार्टी के चेयरमैन और सिमुल सोरेन पार्टी के अध्यक्ष बनाए गए थे. नए राजनीतिक दल का ऐलान करते हुए अब्बास सिद्दीकी ने बताया था कि उनकी पार्टी मुस्लिमों, दलितों और गरीबों की बेहतरी के लिए काम करेगी.

पार्टी बनाने से पहले अब्बास सिद्दीकी ने 3 जनवरी को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने से मुलाकात की थी. दोनों के बीच करीब 2 घंटे तक बातचीत हुई थी. इसके बाद से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि सिद्दीकी चुनाव लड़ सकते हैं. ओवैसी ने सिद्दीकी के साथ मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि अब्बास सिद्दीक़ी के साथ आगामी चुनावों को लेकर उनकी चर्चा हुई है. हम चाहते हैं कि दोनों एक साथ मिलकर काम करें.

मुस्लिम समाज क्या ममता से नाराज है?

द हिंदू की एक रिपोर्ट मुताबिक़, हाल ही में लेफ्ट से जुड़े छात्र और युवा संगठनों की बेरोजगारी के मसले पर रैली की थी. इस रैली में युवाओं ने मोर्चाबंदी करने की कोशिश की तो हिंसा भड़क गई, पुलिस ने बल का प्रयोग किया, आंसू गैस के गोले दागे, कई युवा घायल हुए. लेफ्ट समर्थकों का दावा है कि इसी बलप्रयोग में बांकुरा के रहने वाले एक मुस्लिम लड़के मैदुल इस्लाम मृद्धा की मौत हो गई. इसके बाद से ऐसी भी खबरें आईं कि मुस्लिम समाज का एक धड़ा ममता सरकार से नाराज़ चल रहा है.

पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी के बारे में जानिए?

सिद्दीकी फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ के पीरजादे हैं. पीरज़ादा माने धार्मिक नेता कह सकते हैं. फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ राजस्थान के अजमेर शरीफ़ मज़ार के बाद दूसरी सबसे प्रमुख मज़ार मानी जाती है.

हुगली ज़िले में फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ मज़ार बंगाल के मुसलमानों का अहम धार्मिक स्थल है. पश्चिम बंगाल सरकार के टूरिज़्म डिपार्टमेंट की वेबसाइट बताती है कि फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ दरगाह का निर्माण 1375 में मुखलिश खान ने किया था. फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ में सबसे अहम जगह मज़ार शरीफ़ को माना जाता है. मज़ार शरीफ़ में हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ी और उनके पांच बेटों की मज़ार हैं.

ममता के लिए सबसे बड़ी चुनौती?

इस बार के विधानसभा चुनाव को ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सिर्फ़ 3 सीटें और महज़ 10.3% वोट हासिल कर पाई थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 40% वोट हासिल कर लिए और 18 सीटें जीतीं. बंगाल में जिस तरह से बीजेपी की राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, ममता के लिए भी हर बीतते दिन के साथ चुनौती बढ़ती जा रही है. ममता के चहेते रहे नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की लिस्ट भी लगातार लंबी होती जा रही है. ऐसे में अगर मुस्लिम वोटों का विभाजन हुआ तो ममता दीदी के सियासी समीकरण उलट-पुलट सकते हैं. ऐसे में इंडियन सेक्युलर फ्रंट का कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन ममता सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है.


वीडियो- पश्चिम बंगाल के BJP अध्यक्ष दिलीप घोष के वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है?

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