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क्या कांग्रेस के इस नेता के BJP में जाने से यूपी के चुनावी समीकरण बदलने वाले हैं?

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी जॉइन कर ली. दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उन्हें बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कराई. इस मौके पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुराग ठाकुर मौजूद रहे. बीजेपी जॉइन करने के बाद आरपीएन सिंह ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद कहा. इस दौरान उन्होंने कहा,

“पीएम मोदी ने काफी कम समय में राष्ट्रनिर्माण का कार्य किया है…यूपी में सीएम योगी ने कानून व्यवस्था में सुधार किया है…काफी लोग मुझे काफी पहले से कह रहे थे कि मुझे बीजेपी में जाना चाहिए. इसपर मैं यह कहना चाहूंगा कि देर आए दुरुस्त आए.”

आरपीएन सिंह ने कांग्रेस पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा,

“32 सालों तक मैं एक पार्टी में रहा, वहां मैंने ईमानदारी और लगन से मेहनत की. लेकिन जिस पार्टी में इतने साल रहा, अब वो पार्टी रह नहीं गई, ना उसकी वो सोच रह गई, जहां से मैंने शुरूआत की थी.”

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पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह बीजेपी में शामिल होते हुए (फोटो: आजतक)

इससे पहले मंगलवार को आरपीएन सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने यह फैसला ऐसे समय किया, जब एक दिन पहले ही कांग्रेस ने उन्हें अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल किया है. इंडिया टुडे को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी आरपीएन सिंह को सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ कुशीनगर की पडरौना विधानसभा सीट से उतारने की तैयारी में है.

कांग्रेस के नेताओं ने कसा तंज

आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने पर कांग्रेस नेता पी चिंदबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने लिखा,

“यह देखकर निराशा हुई कि आरपीएन सिंह भी जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया वाली अपमानजनक सूची में शामिल हो गए.”

बता दें कि जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर चुके हैं.

इंडिया टुडे के मुताबिक कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinate) ने आरपीएन सिंह के बीजेपी में जाने पर उन्हें इशारों-इशारों में ‘कायर’ कह दिया है. सुप्रिया ने कहा,

“जो लड़ाई कांग्रेस पार्टी लड़ रही है, उसके लिए बहादुरी की जरूरत है. ये विचारधारा का युद्ध है. कोई कायर ही ऐसा कर सकता है कि वो पूरी तरह विपरीत विचारधारा से जुड़ जाए.”

उधर, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़ने पर तंज कसा है. उन्होंने लिखा,

“हेवीवेट या फिर डेडवेट? जिन्होंने दशकों से कोई सीट नहीं जीती है, वे चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.”

कौन हैं आरपीएन सिंह?

रतनजीत प्रताप नारायण सिंह उर्फ़ आरपीएन सिंह पिछड़ी जाति सैंथवार-कुर्मी से आते हैं. पूर्वांचल में सैंथवार जाति के लोगों की तादाद अच्छी संख्या में है. कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया इसमें खास इलाके हैं. पूर्वांचल में आरपीएन सिंह का अपना भी मजबूत होल्ड है. उनके पिता सीपीएन सिंह एक बार विधायक और दो बार के सांसद रहे थे, वे 1980 में इंदिरा गांधी सरकार में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री भी रहे.

कुशीनगर से स्वामी प्रसाद मौर्या को दी थी शिकस्त

आरपीएन सिंह ने 1999 में पहली बार कुशीनगर से लोकसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें वे तीसरे नंबर पर रहे. 2004 में फिर मैदान में कूदे और इस बार दूसरे नंबर पर रहे. 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कुशीनगर से राज्य की तत्कालीन बसपा सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या को शिकस्त दी और संसद पहुंचे. वे यूपीए-2 की सरकार में भूतल परिवहन व सड़क राजमार्ग राज्यमंत्री, पेट्रोलियम राज्य मंत्री और गृह राज्य मंत्री जैसे पदों पर रहे. लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव में आरपीएन सिंह को कुशीनगर से भाजपा प्रत्याशी राजेश पाण्डेय ने 85,540 वोटों से हरा दिया. आरपीएन सिंह भले ही केवल एक बार संसद पहुंचे हों, लेकिन वे तीन बार यूपी विधानसभा का सफर तय कर चुके हैं. कुशीनगर जिले की पडरौना विधानसभा सीट से वे 1996, 2002 और 2007 में कांग्रेस पार्टी से विधायक रहे.

पडरौना सीट का इतिहास

2017 में मोदी लहर से पहले भाजपा को 1991 की राम मंदिर लहर में पडरौना विधानसभा पर जीत मिली थी. इसके बाद 1993 में इस सीट पर समाजवादी पार्टी के बालेश्वर यादव ने जीत हासिल की. इसके बाद इस पर आरपीएन सिंह का वर्चस्व कायम हो गया. 2009 तक वह इस सीट से विधायक रहे. लेकिन 2009 में उनके संसद चले जाने के बाद से कांग्रेस ने यह सीट नहीं जीती. 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्वामी प्रसाद मौर्या को यहां करीब 94 हजार वोट मिले थे. उन्होंने बसपा के जावेद इकबाल को करीब 41 हजार वोटों से हराया था. 2017 में कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर रही थी और उसके प्रत्याशी को 41 हजार वोट मिले थे.

RPN सिंह पडरौना के ही रहने वाले हैं, यहां उनका काफी वर्चस्व भी माना जाता है, ऐसे में अगर पडरौना सीट से वे चुनाव मैदान में उतरते हैं तो स्वामी प्रसाद मौर्या की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़ने पर स्वामी प्रसाद मौर्या ने प्रतिक्रिया भी दी है. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा,

“आरपीएन सिंह के (बीजेपी) जॉइन करने से कोई मतलब नहीं है, समाजवादी का पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता आरपीएन को पडरौना से हरा देगा. पडरौना सीट से मेरा चुनाव लड़ने का फैसला सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ऊपर निर्भर है, उन्हें ही यह तय करना है.”


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