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सपा की हार तो हुई, लेकिन इन इलाकों में बड़ा फायदा हुआ है

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Election 2022) में बीजेपी (BJP) ने 403 विधानसभा सीटों में से 255 पर जीत दर्ज की है. बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी 18 सीटें जीती हैं. कुल मिलाकर बीजेपी गठबंधन ने 273 सीटों पर कब्जा कर लिया है. वहीं सपा (SP) ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की है. जबकि सहयोगी दलों की 14 सीटें मिलाकर कुल 125 सीटें सपा गठबंधन के हिस्से आई हैं. हालांकि ये संख्या बहुमत से काफ़ी कम है, लेकिन 2017 के चुनावों के मुकाबले सपा ने सीटों और वोट प्रतिशत के मामले में बढ़ोतरी दर्ज की है. इस बढ़त पर अखिलेश यादव ने आज 11 मार्च 2022 को ट्वीट कर जनता को धन्यवाद भी दिया है. उन्होंने कहा,

‘यूपी की जनता को हमारी सीटें ढाई गुना व मत प्रतिशत डेढ़ गुना बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद. हमने दिखा दिया है कि बीजेपी की सीटों को घटाया जा सकता है. बीजेपी का ये घटाव लगातार जारी रहेगा.’

बता दें कि सपा को 2017 चुनाव में 47 सीटें मिली थीं. और वोट प्रतिशत 21.82 फ़ीसद रहा था. जबकि इस बार सपा को 32 फ़ीसद वोट मिले हैं. ये सपा का अब तक का सर्वाधिक वोट शेयर है. साल 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा को करीब 18 फ़ीसद वोट मिले थे. बसपा के साथ मिलाकर सरकार भी बनी थी. इसके बाद 1996 में करीब 22 फ़ीसद, 2002 में 25.37 फ़ीसद और 2012 में जब पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तब करीब 29 फ़ीसद वोट मिले थे.

वोट शेयर के मामले में इस बार सपा को उन सीटों पर भी फायदा मिला है जो मुस्लिम बहुल हैं. एक और आकलन ये भी है कि बसपा (BSP) से सपा को पहुंचा नुकसान बीजेपी के लिए फायदा साबित हुआ है. इसकी भी बात करेंगे. लेकिन पहले इस बात का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं कि साल 2017 के मुकाबले इस बार सपा को किन इलाकों में फायदा हुआ है.

कहां हुआ फायदा?

2017 में पश्चिमी यूपी के इलाके में सपा को 21 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार 43 सीटें मिली हैं. इस इलाके में बीजेपी गठबंधन को पिछले चुनाव के मुकाबले नुकसान हुआ है. सीटें 109 से घटकर 93 रह गई हैं. वहीं इस इलाके में पिछली बार बसपा को 3 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार दोनों का खाता नहीं खुला है.

जिलेवार बात करें तो मेरठ की 7 विधानसभा सीटों में पिछली बार 6 पर बीजेपी का कब्जा था, जबकि इस बार 4 सीटें सपा के खाते में गई हैं. बीजेपी के फायरब्रांड नेता कहे जाने वाले संगीत सिंह सोम भी इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके. उन्हें सपा के अतुल प्रधान ने बड़े अंतर से हराया. इसी तरह मुजफ्फरनगर जिले की 6 सीटों पर बीजेपी का कब्जा था, लेकिन इस बार इनमें से 4 सपा गठबंधन के खाते में गई हैं.

वहीं शामली जिले की तीनों सीटों पर सपा का कब्जा हुआ है. संभल जिले की चंदौसी विधानसभा को छोड़कर बाकी तीनों सीटों पर भी सपा की जीत हुई है. और आज़म खान के रामपुर जिले की चार में से 3 सीटें भी सपा ने जीती हैं. खुद आज़म खान रामपुर से और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म स्वार विधानसभा सीट से जीते हैं.

इसी तरह पूर्वांचल में पिछली बार सपा को सिर्फ 14 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार सपा के खाते में 49 सीटें आई हैं. वहीं बीजेपी 100 सीटों से घटकर 76 पर आ गई है. बसपा भी अपनी 10 में से सिर्फ एक सीट बचा पाने में कामयाब हुई है. बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा पूरे प्रदेश में बसपा की इकलौती सीट है. जहां से बसपा प्रत्याशी रहे उमा शंकर सिंह जीते हैं. वहीं कांग्रेस को पूर्वांचल में इस बार भी दो ही सीटें मिली हैं.

यहां जिलेवार बात करें तो, आजमगढ़ जिले की सभी 10 सीटें और गाजीपुर की सभी 7 सीटें जीतकर सपा ने क्लीन स्वीप किया है. इसी तरह अम्बेडकर नगर की सभी पांच सीटें सपा के कब्जे में आई हैं. 2012 विधानसभा चुनाव में भी सपा ने यहां सभी सीटें जीती थीं. जौनपुर में 9 में से 6 सीटों पर सपा और 1 पर सुभासपा ने जीत दर्ज की है. बीजेपी और अपना दल को 1-1 सीट मिली है. इसी तरह बलिया की 7 में से 4 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की है. वहीं मऊ जिले की मधुवन विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी 3 सीटें सपा के खाते में गई हैं.

हालांकि गठबंधन की राजनीति कितनी सफल रही, इसे पश्चिमी यूपी के तीन जिलों पर बीजेपी की जीत से समझा जा सकता है. अलीगढ़ और बुलंदशहर दोनों जिलों में 7-7 सीटें हैं जिन पर पिछली बार भी बीजेपी का कब्जा था और इस बार भी बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया है. इसी तरह मथुरा की सभी पांच सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया है, जबकि इन तीनों जिलों में RLD का प्रभाव माना जाता है. चुनाव के पहले तक माना जा रहा था कि सपा गठबंधन के प्रत्याशी इन सीटों पर बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ.

हालांकि तमाम आंकड़ों के मुताबिक़ उन सीटों पर जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है, वहां सपा को बढ़त मिली है. इन सीटों पर समाजवादी पार्टी को पिछली बार से करीब 15 फ़ीसद ज्यादा वोट मिले हैं. टोटल वोट शेयर 42.5 फ़ीसद रहा है. और इन सीटों पर BSP और कांग्रेस का वोट शेयर काफ़ी घटा है.

वहीं कुछ सीटें ऐसी हैं जो दलित बाहुल्य हैं, यहां सपा का वोट शेयर बढ़ा और बसपा का वोट शेयर कम हुआ. लेकिन इसका फायदा बीजेपी को हुआ. वजह ये बताई जा रही है कि ऐसी करीब 100 से ज्यादा सीटों पर बसपा और सपा के प्रत्याशी समान जाति के थे.

2012 में जीत के बाद ये चौथा चुनाव है जब सपा के लिए नतीजे निराशाजनक रहे हैं, लेकिन इतना जरूर माना जा रहा है कि इस बार के नतीजों ने सपा को मजबूत विपक्ष के तौर पर स्थापित किया है.


पिछला वीडियो देखें: यूपी में सपा की हार में अखिलेश ने क्या ‘पॉज़िटिव पॉइंट’ खोज लिया?

 

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