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सोमनाथ मंदिर: बीजेपी और कांग्रेस, दोनों को कोई 'चुल्लू भर पानी' दे दो

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सब धन, बाइसे पसेरी.

ये एक मैथिली कहावत है. मतलब सारे के सारे एक जैसे. हमारे नेताओं की तरह. एक ही थैली के चट्टे-बट्टे. हर बार चुनाव के टाइम में इनकी कलई खुल जाती है. किस्म-किस्म की टुच्चागिरी करते हैं. एक गर्त में गिरता है. दूसरा उससे भी नीचे गिर जाता है. गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है. बीजेपी और कांग्रेस, दोनों नंगई पर उतर आए हैं. सोमनाथ मंदिर वाला जो मामला शुरू हुआ, उसमें दोनों पक्ष इतने छिछले हो गए कि अखर गया. हुआ कुछ यूं कि राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर पहुंचे. पूजा की. टीका वगैरह लगाया. फिर जब वहां से आ गए तो पीछे से एक खबर आई.

मालूम चला कि मंदिर में जो गैर-हिंदुओं के लिए रजिस्टर रखा था, उसमें राहुल ने अपना नाम लिखा. बीजेपी ने इसे तुरंत लपक लिया. कहने लगे, राहुल तो खुद को हिंदू भी नहीं मानते. फिर मंदिर जाने का नाटक क्यों करते हैं? फिर कांग्रेस बचाव में उतरी. कहा, राहुल ने तो हिंदू वाले रजिस्टर में ही अपना नाम-पता लिखा था. ये वाली जो दूसरी एंट्री है, वो साजिश है. वो किसी ने शरारत की है. बीजेपी फिर भी राहुल के धर्म को मथती रही. सर्टिफिकेट मांगती रही. इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा:

राहुल बस हिंदू नहीं हैं. जनेऊधारी ब्राह्मण हैं.


जब कांग्रेस ने बचाव में राहुल का ‘जनेऊ’ गिनवा दिया तो जी जल गया. क्या हद दर्जे की मूर्खता है? एक पार्टी ‘सच्चा हिंदू’ होने का सर्टिफिकेट मांग रही है. दूसरी पार्टी आगे बढ़कर दे भी रही है. हिंदू. सच्चा हिंदू. ब्राह्मण. जनेऊधारी ब्राह्मण. इससे आगे क्या कहेगी कांग्रेस?

राहुल गांधी तो सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठते हैं. गंगा नहाते हैं. तिलक लगाते हैं. रोजाना आठ घंटे पूजा करते हैं. सिर पर चोटी भी धारण करते हैं. बिना नहाए मुंह में अन्न का दाना नहीं डालते. प्याज-लहसुन तो छूते भी नहीं. इतने ऊंचे कुल के ब्राह्मण हैं कि ब्राह्मणों के अलावा किसी और के हाथ का बना खाना नहीं खाते. ‘शूद्रों’ का स्पर्श भी नहीं करते. माघ में प्रयागवास करते हैं. एकादशी को चावल नहीं खाते. वगैरह वगैरह.

ब्राह्मणों के अलावा सारे हिंदू फालतू और फर्जी हैं क्या?

ये बात दरअसल जिस अंदाज में कही गई है, वो यहीं पहुंचती है. राहुल के जनेऊ पहनने वाली बात में बड़ा ही गंदा-लिजलिजा सा घटियापना है. किसी खास जाति की शुद्धता वाली बात करने वाले कूढ़मगज ऐसा करते हैं. ऐसे ही लोग अपनी जाति पर गर्व करते हैं. औरों को नीची नजर से देखते हैं. कल को अगर बीजेपी कहे कि राहुल ‘मर्द’ नहीं हैं, तो कांग्रेस क्या करेगी? उसका भी कोई सबूत दिखाएगी क्या? और ये जो ‘मर्द’ वाली बात कही है, ये नामुमकिन नहीं है. हमारे यहां की राजनीति ऐसी ही घटिया हो गई है. बात जनेऊ देखने और दिखाने तक आ गई है. ऐसे में ‘मर्दानगी’ का मुद्दा क्या चीज है इनके लिए!

वैसे कांग्रेस को ये भी बताना चाहिए कि ‘सच्चा हिंदू’ होता क्या है? अगर देश में 100 हिंदू होंगे तो उनमें बस गिनती के चार-पांच ब्राह्मण होंगे. जनेऊधारी ब्राह्मण. गिनती के चंद. तो बाकी हिंदू जो ब्राह्मण नहीं हैं, वो क्या पागल हैं? हिंदू नहीं हैं? इतना पढ़-लिखकर कोई अपनी पहचान में ‘जनेऊ’ गिनाए तो उसकी पिछड़ी बुद्धि पर अफसोस ही जताया जा सकता है. और जहां तक बीजेपी की बात है तो उसको जाने किसने ‘सच्चे हिंदू’ की जांच का ठेका दिया हुआ है? इस शब्द पर इतना कॉपीराइट टाइप हो गया है बीजेपी का कि शब्द सुनो और बीजेपी का ध्यान आता है.

धर्म और जाति के अलावा गुजरात चुनाव में और कुछ होता तो नहीं दिख रहा है!

अब जैसी तस्वीर है, उससे लग रहा है कि गैर-हिंदू रजिस्टर में राहुल के नाम की एंट्री सोची-समझी चाल थी. पता नहीं, किसके दिमाग में आया होगा ये? किसने सोचा होगा कि ऐसा किया तो नंबर बढ़ेंगे? आप सोचकर देखिए. ये हम जनता लोगों के लिए लानत की बात है न. कि कोई सोचता है कि फलां नेता का नाम कौन से रजिस्टर में दर्ज है, ये जनता के लिए बड़ा मुद्दा है? फिर दूसरी पार्टी हमारी नजरों में नंबर बढ़ाने के लिए उस फलां नेता को ब्राह्मण साबित करने में जुट जाती है! मतलब हम पब्लिक लोग कितनी फालतू बातों में दिमाग लगाते हैं! क्या ये बीजेपी के दिमाग की उपज है? हमें नहीं पता. मगर ये तय है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों कीचड़ में लहालोट हो गए हैं.

पता नहीं ये कैसा चुनाव है? बस धर्म और जाति की बात हो रही है. कितनी बार पूछें ये सवाल हम कि धर्म और जाति के अलावा कोई ढंग का मुद्दा बचा नहीं है क्या देश में? क्या धर्म और जाति गिनाने-साबित करने से ही सब सध जाएगा? सड़क बन जाएगी? बिजली आ जाएगी? महंगाई खत्म हो जाएगी? बलात्कार बंद हो जाएंगे? बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा? सबको शिक्षा मिलने लगेगी? भुखमरी खत्म हो जाएगी? प्रदूषण खत्म हो जाएगा? इलाज का खर्च सस्ता हो जाएगा? देश की दोनों बड़ी पार्टियों के लक्षण देखकर तो यही लगता है. नेता आगे जाने की जगह और पीछे जा रहे हैं. हद ये कि शर्म जरा भी नहीं. यार, कोई बीजेपी और कांग्रेस को चुल्लू भर पानी दे दो.


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