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मोदी कैबिनेट: जानिए, किन नेताओं को मिला है इनाम

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नई सरकार के लिए नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट ने 30 मई को शपथ ले लिया. इसमें कई पुराने चेहरे हैं. कई नए लोग हैं. कई ऐसे हैं, जिन्हें पिछली बार के मुकाबले प्रमोशन मिला है. कई हैं, जो पिछली बार कैबिनेट में थे मगर इस बार नहीं हैं. कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें पार्टी की बात मानने और पार्टी को बड़ी जीत दिलाने का इनाम मिला है.

मुख्तार अब्बास नकवी बीजेपी का इकलौता मुस्लिम चेहरा है कैबिनेट में
मुख्तार अब्बास नकवी बीजेपी का इकलौता मुस्लिम चेहरा है कैबिनेट में

1. मुख्तार अब्बास नकवी- चुनाव जीतने के बाद संसद के सेंट्रल हॉल में नरेंद्र मोदी ने जो भाषण दिया, उसमें अल्पसंख्यकों का भी जिक्र था. मोदी बोले थे- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास. ये सबका विश्वास कमाने वाली बात में मूल भाव माइनॉरिटीज को साथ लाने का भी था. इस लिहाज से नकवी मोदी कैबिनेट में अकेला मुस्लिम चेहरा हैं. इन्हें कैबिनेट मंत्री का ओहदा मिला है. पिछली मोदी कैबिनेट में वो अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बनाए गए थे. पिछली बार अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुस्लिमों से जुड़े कुछ बड़े फैसले लिए थे सरकार ने. इनमें हज़ की सब्सिडी खत्म करना, तीन तलाक़ पर बिल जैसे बड़े फैसले शामिल हैं.

बीजेपी कहती है कि हम अल्पसंख्यकों का विकास चाहते हैं, उन्हें साथ लाना चाहते हैं, मगर तुष्टीकरण के बिना. बीजेपी चाहे लाख कहे कि वो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं, मगर उसकी छवि मुस्लिम-विरोधी पार्टी की है. अगर सच में बीजेपी अपनी ये छवि खत्म करना चाहती है, तो देखना होगा नकवी कितने मददगार साबित हो सकते हैं. वैसे जमीन पर उनकी ज्यादा पकड़ दिखती तो नहीं.

नकवी 1991 और 1993 में विधानसभा चुनाव जीते. फिर 1998 में उत्तर प्रदेश के रामपुर से लोकसभा चुनाव जीता. वो बीजेपी के पहले मुस्लिम लोकसभा सांसद थे. 1998 में वाजपेयी कैबिनेट का हिस्सा भी बने वो. सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री. फिर 2002, 2010 और 2016 में बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद भेजा.

जोधपुर की सीट अशोक गहलोत का गढ़ हुआ करती थी. वहां उन्हीं के बेटे वैभव गहलोत को हराया गजेंद्र सिंह शेखावत ने.
जोधपुर की सीट अशोक गहलोत का गढ़ हुआ करती थी. वहां उन्हीं के बेटे वैभव गहलोत को हराया गजेंद्र सिंह शेखावत ने.

2. गजेंद्र सिंह शेखावत- जोधपुर सीट से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव को करीब पौने तीन लाख वोटों से हराकर कैबिनेट पहुंचे हैं गजेंद्र सिंह शेखावत. 2014 में इसी जोधपुर सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव जीते थे. जबकि जोधपुर की सीट अशोक गहलोत का गढ़ रही है. 2017 में शेखावत को कृषि एवं किसान कल्याण में राज्य मंत्री का ओहदा दिया गया. इस बार उन्हें प्रमोशन मिला है. वो कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं. शेखावत लंबे समय से संघ के साथ रहे हैं. बोलते बहुत अच्छा हैं. राजस्थान के लोकप्रिय नेता हैं. मगर लोग बताते हैं कि वसुंधरा राजे से नहीं पटती है इनकी.

गिरिराज सिंह को नवादा से हटाकर बेगूसराय भेजा गया. वो शुरू में नाराज़ थे इससे. लेकिन फिर उन्होंने पार्टी का फैसला माना और चार लाख से ज्यादा वोटों से जीते भी.
गिरिराज सिंह को नवादा से हटाकर बेगूसराय भेजा गया. वो शुरू में नाराज़ थे इससे. लेकिन फिर उन्होंने पार्टी का फैसला माना और चार लाख से ज्यादा वोटों से जीते भी.

3. गिरिराज सिंह- बिहार में नीतीश कुमार की कैबिनेट का हिस्सा थे गिरिराज. फिर जब नीतीश ने नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी का विरोध करते हुए बीजेपी से रिश्ता तोड़ा, तो गिरिराज भी कैबिनेट में नहीं रहे. 2014 में बीजेपी ने उन्हें बिहार की नवादा सीट से टिकट दिया. वो चुनाव भी जीते. कैबिनेट भी पहुंचे. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री का ओहदा मिला. अक्सर अपने कट्टर बयानों से सुर्खियां बनाते रहे.

फिर 2019 में उन्हें नवादा सीट नहीं मिली. JDU को लल्लन सिंह के लिए मुंगेर सीट चाहिए थी. यहां से पिछली बार LJP के टिकट पर सूरजभान की पत्नी वीणा देवी जीती थीं. वो मुंगेर नहीं छोड़ना चाहती थीं. मगर JDU मुंगेर पर अड़ी रही. मुंगेर और नवादा, दोनों जगह भूमिहार वोटर्स काफी हैं. लल्लन सिंह की ही तरह वीणा देवी का भी कोर वोटर ग्रुप भूमिहार ही हैं. सो उनकी जगह उनके देवर चंदन को नवादा सीट दे दी गई. मुंगेर JDU को मिल गई. इस खेल में गिरिराज के हाथ से नवादा निकल गया. 2014 में बेगूसराय से जीते बीजेपी के उम्मीदवार भोला सिंह की मौत हो गई. यहां भी भूमिहार वोट सबसे ज्यादा है. तो पार्टी ने गिरिराज को बेगूसराय से टिकट दे दिया. शुरुआत में तो गिरिराज नाराज़ रहे. बयान भी दिया. मगर फिर चुनाव की तैयारियों में लग गए. यहां CPI से कन्हैया थे उनके मुकाबले, जिन्हें चार लाख से ज्यादा वोटों से हराया गिरिराज ने.

बेगूसराय के इस मुकाबले की बातें इंटरनैशनल मीडिया में भी खूब हुईं. एक तो अपनी जीती हुई सीट छोड़कर कहीं और से चुनाव लड़ने को राजी हो जाना. फिर इतने हाई-प्रोफाइल और चर्चित मुकाबले को इतने बड़े अंतर से जीतने. इसी का इनाम मिला है गिरिराज को कि उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. बाकी मोदी के वफ़ादार माने जाते हैं. कट्टर हिंदुत्व वाली छवि है इनकी. लोगों को पाकिस्तान भेज दिए जाने जैसे उल्टे-सीधे बयान देते रहते हैं. बिहार में एक रैली होने वाली थी. गिरिराज ने कहा, जो इसमें नहीं आएगा वो पाकिस्तान का समर्थक होगा. बाद में ये हुआ कि खुद खराब तबीयत की वजह से गिरिराज उस रैली में नहीं पहुंच सके. इस बात को लेकर बड़ा मजाक उड़ा उनका.

महेंद्र नाथ पाण्डेय को पिछली बार कैबिनेट से हटाकर यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. वो राज्य मंत्री थे तब. अखिलेश और मायावती के साथ आ जाने के बावजूद बीजेपी ने UP में 62 सीटें निकालीं.
महेंद्र नाथ पाण्डेय को पिछली बार कैबिनेट से हटाकर यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. वो राज्य मंत्री थे तब. अखिलेश और मायावती के साथ आ जाने के बावजूद बीजेपी ने UP में 62 सीटें निकालीं.

4. महेंद्र नाथ पाण्डेय- उत्तर प्रदेश से आते हैं. वहां पार्टी का ब्राह्मण चेहरा हैं. 2019 लोकसभा चुनाव में चंदौली सीट पर महागठबंधन के प्रत्याशी संजय सिंह चौहान (समाजवादी पार्टी) को हराया उन्होंने. 2014 में भी चंदौली से ही चुनाव जीते थे. पिछली मोदी कैबिनेट में करीब एक साल तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे. फिर 2017 में यूपी विधानसभा के अंदर मिली बड़ी जीत के बाद इन्हें राज्य में पार्टी की जिम्मेदारी संभालने को कहा. ताकि लोकसभा चुनाव की तैयारी देखी जा सके.

2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी के अंदर बीजेपी को 80 में से 62 सीटें मिली हैं. जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने आपस में गठबंधन भी किया. तमाम जातिगत समीकरणों को अंगूठा दिखाकर इतनी बड़ी जीत हासिल करना यकीनन सफलता है. शायद इसी का इनाम मिला है कि इस बार महेंद्र नाथ पाण्डेय को कैबिनेट मिनिस्टर बनाया गया है.


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