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मोदी को कोसकर माहौल बनाने वाले राज ठाकरे की पार्टी का क्या हश्र हुआ?

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सीट का नाम- कल्याण ग्रामीण
कौन जीता- प्रमोद (राजू) रतन पाटिल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)
कौन हारा- रमेश सुक्रया म्हात्रे, शिवसेना
जीत का मार्जिन- 7,154 वोट

2014 के चुनाव का नतीजा- पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना के सुभाष गणु भोइर ने ये सीट निकाली थी.

MNS के मुखिया हैं राज ठाकरे. 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में MNS ने 110 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए. जीते बस एक सीट- कल्याण रुरल.

राज ठाकरे साल 2006 में शिवसेना से अलग हुए. इसी साल उन्होंने अपनी पार्टी MNS बनाई. 2009 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 13 सीटें निकालीं. ये उसकी अब तक की सबसे बेहतर परफॉर्मेंस थी. इसके बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में MNS 10 सीटों पर लड़ी. जीती एक भी नहीं. फिर 2014 के असेंबली इलेक्शन में MNS कुल 218 सीटों पर लड़ी. जीती सिर्फ एक. इस चुनाव में भी वो बस इतना ही हासिल कर सकी है.

एक समय राज ठाकरे को बाल ठाकरे का राजनैतिक वारिस बताया जाता था. इसका एक कारण ये कि उनकी शैली उसी अंदाज़ में आक्रामक है. जबकि उद्धव थोड़े रिज़र्व स्वभाव के बताए जाते हैं. मगर फिर उत्तराधिकार के सवाल पर उद्धव और राज ठाकरे में कड़वाहट आई. साल 2006 में काफी खटास के साथ राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी और अपनी अलग पार्टी बनाई (फोटो: इंडिया टुडे आर्काइव्ज़)
एक समय राज ठाकरे को बाल ठाकरे का राजनैतिक वारिस बताया जाता था. इसका एक कारण ये कि उनकी शैली उसी अंदाज़ में आक्रामक है. जबकि उद्धव थोड़े रिज़र्व स्वभाव के बताए जाते हैं. मगर फिर उत्तराधिकार के सवाल पर उद्धव और राज ठाकरे में कड़वाहट आई. साल 2006 में काफी खटास के साथ राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी और अपनी अलग पार्टी बनाई (फोटो: इंडिया टुडे आर्काइव्ज़)

EVM का बहिष्कार कर रहे थे
2014 के लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे की पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया था. हां, राज ठाकरे ज़रूर जगह-जगह घूमकर BJP के विरोध में प्रचार कर रहे थे. लोगों को याद दिला रहे थे कि 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी और BJP ने क्या-क्या वादे किए और कौन से वादे पूरे नहीं हुए. बाद में उन्होंने BJP को मिली जीत का दोष EVM को दिया था. राज ठाकरे पहले की तरह बैलेट पेपर से चुनाव करवाए जाने की मांग करने वाले धड़े का हिस्सा हैं. उनका एक विचार ये भी था कि विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाए. तब तक, जब तक कि चुनाव आयोग बैलेट पेपर से वोटिंग करवाने को तैयार नहीं होता. उन्होंने इसके लिए बाकी पार्टियों को भी राज़ी करने की कोशिश की. मगर कामयाब नहीं हो सके. बाद में MNS EVM व्यवस्था से ही चुनाव लड़ने आई.

बाल ठाकरे ने अपनी मौत से कुछ दिनों पहले शिवसेना के बंटवारे पर क्या कहा था?
एक समय था जब राज ठाकरे अपने अंकल बाल ठाकरे के राजनैतिक वारिस माने जाते थे. लोगों को इन दोनों के व्यक्तित्व में कई समानताएं दिखती थीं. जैसे- दोनों की आक्रामक शैली. ज़ोरदार भाषण. कार्टून बनाना. फिर शिवसेना के नेतृत्व को लेकर उनकी अपने भाई उद्धव से अनबन हुई. कड़वाहट आई. साफ कर दिया गया कि बाल ठाकरे की जगह नहीं ले सकेंगे राज. तब बड़ी कड़वाहट में वो पार्टी से अलग हुए. हालांकि जानकार बताते हैं कि बाल ठाकरे नहीं चाहते थे कि ये बंटवारा हो. इसके लिए अक्टूबर 2012 में दशहरा रैली के समय शिवसेना कैडर के लिए चलाया गया बाल ठाकरे के उस विडियो की बात होती है. जिसमें उन्होंने कहा था-

शिवसेना दो टुकड़ों में बंट गई. क्यों हुआ ऐसा? कैसे हुआ ये? हर किसी को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए.

13 सीटों से एक सीट पर
2009 के विधानसभा चुनाव में मिली 13 सीटों की कामयाबी के बाद ऐसा लगा कि MNS महाराष्ट्र की राजनीति में एक मज़बूत हिस्सा बनाएगी. उस चुनाव में शिवसेना को बड़ा नुकसान भी हुआ था. वो राज्य में चौथे नंबर की पार्टी बन गई थी. कांग्रेस, NCP और BJP के बाद. फिर जह 2012 में हुए नाशिक के मेयर चुनाव में BJP ने MNS के उम्मीदवार को समर्थन देकर जितवाया, तो लगा कि शायद महाराष्ट्र के अंदर BJP नया पार्टनर खोज रही है. मगर फिर MNS ऊपर जाने की जगह नीचे-नीचे सरकती गई. और अब अपने बनने के 13वें साल में ख़बर ये लिखी जा रही है कि MNS ने एक सीट जीती है.


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