Submit your post

Follow Us

न गाड़ियों का काफिला न नारों का शोर, हाथ में तख्ती लेकर प्रचार कर रहा है ये उम्मीदवार

1.29 K
शेयर्स

सत्यमेव जयते. मैं प्रितेश पांडेय, आपका निर्दलीय प्रत्याशी. रायपुर लोकसभा में आपकी आवाज हूं. कृपया अपना बहुमूल्य वोट मुझे देकर युवा आवाज को बुलंद करें.”

हाथों में इस इबारत के साथ एक बड़ी सी तख्ती पकड़े रायपुर के चौक चौराहों पर एक लड़का दिखता है. यकीन करना मुश्किल है लेकिन ये लड़का चुनाव लड़ रहा है. लोकसभा का. ये सब इसकी तख्ती पर पढ़कर पता लग जाता है. यकीन करना इसलिए मुश्किल है क्योंकि इस उम्मीदवार के पीछे न नारे लगाते लोगों का हुजूम है. न पेट्रोल के खर्चे पर बाइक लिए हजारों लोगों की भीड़. न फूलों की बरसात. न ही ये किसी दूसरे नेता को गाली दे रहा है. न मंदिर मस्जिद, अली-बरजंग बली कर रहा है. वोट मांगने का तरीका गंदगी और गालियों से भरी पॉलिटिक्स में थोड़ा अलग सा है.

प्रितेश पांडेय के प्रचार का तरीका
प्रितेश पांडेय के प्रचार का तरीका

वो बातें जो तख्ती पर नहीं हैं

प्रितेश पांडेय रंगकर्मी हैं. डफली लेकर गाने गाते हैं. गाने गाकर ही प्रचार करते हैं. जशपुर के रहने वाले हैं. महात्मा गांधी इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी वर्धा से थिएटर से एमफिल किया है. उम्र महज 25 साल है. रायपुर लोकसभा सीट से 26 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है. जिनमें प्रितेश सबसे कम उम्र के हैं.

प्रितेश पांडेय, फोटो- फेसबुक
प्रितेश पांडेय, फोटो- फेसबुक

रेस्पॉन्स

प्रितेश का कहना है कि पॉलिटिक्स में पैसे का बोलबाला है. नॉमिनेशन फाइल करने में ही लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं. उनको अपने नाम का प्रस्तावक और वकील जुगाड़ने में ही काफी मेहनत करनी पड़ी. अभी यूथ तो उनके साथ जुड़ रहा है लेकिन बुजुर्गों के रेस्पॉन्स में ठंडक है. उन्हें लगता है कि निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देना बेकार है, जो कि अभी राजनीति में आया है. प्रितेश का कहना है कि हार जीत से मतलब नहीं है, मैसेज जाना चाहिए.

मुद्दे

प्रितेश पांडेय दो मुद्दों की बात करते हैं. एक तो बेरोजगारी. उसके बारे में तो बताने की जरूरत नहीं है. नेताओं की रैलियों में इतनी भीड़ देखकर ही पता चल जाता है कि कितनी बेरोजगारी है. प्रितेश का कहना है कि लोग लाखों रुपए खर्च करके डिग्रियां लेते हैं लेकिन नौकरी का कहीं जुगाड़ नहीं है. दूसरा मुद्दा पर्यावरण का है. जो कि बाकी राजनीतिक पार्टियों के मेनिफेस्टों में कोई जगह नहीं रखता.

ऐसे तमाम सारे उम्मीदवार पूरे देश में अलग अलग तरीके से लड़ रहे हैं. आप उनके किस्से हमें भेजिए.


लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Lok Sabha election 2019: Raipur candidate Pritesh Pandey has different way of campaign

गुजरात चुनाव 2017

गुजरात और हिमाचल में सबसे बड़ी और जान अटका देने वाली जीतों के बारे में सुना?

एक-एक वोट कितना कीमती होता है, कोई इन प्रत्याशियों से पूछे.

गुजरात विधानसभा चुनाव के चार निष्कर्ष

बहुमत हासिल करने के बावजूद चुनाव के नतीजों से बीजेपी अंदर ही अंदर सकते में है.

गुजरात में AAP का क्या हुआ, जो 33 सीटों पर लड़ी थी!

अरविंद केजरीवाल का गुजरात में जादू चला या नहीं?

गुजरात चुनाव के बाद सुशील मोदी को खुला खत

चुनाव के नतीजे आने के बाद भी लिचड़ई नहीं छोड़ रहे.

इस चुनाव में राहुल और हार्दिक से ज्यादा अफसोस इन सात लोगों को हुआ है

इन लोगों ने थोड़ी मेहनत और की होती, तो ये गुजरात की विधानसभा में बैठने की तैयारी कर रहे होते.

राहुल गांधी ने चुनाव में हार के बाद ये 8 बातें बोली हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्रेडिबिलिटी पर ही सवाल खड़े कर दिए.

गुजरात में हारे कांग्रेस के वो बड़े नेता जिन पर राहुल गांधी को बहुत भरोसा था

इनके बारे में कांग्रेस पार्टी ने बड़े-बड़े प्लान बनाए होंगे.

बीजेपी के वो 8 बड़े नेता जो गुजरात चुनाव में हार गए

इनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं और तमाम टोटके नहीं जिता सके.

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद ये 5 बातें कहीं

दोनों प्रदेशों में भगवा लहराया मगर गुजरात की जीत पर भावुक दिखे पीएम.

ये सीट जीतकर कांग्रेस ने शंकरसिंह वाघेला से बदला ले लिया है

वाघेला ने इस सीट पर एक निर्दलीय प्रतायशी को वॉकओवर दिया था.