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खूंटी: नीलकंठ सिंह मुंडा पांचवीं बार विधायक बनने जा रहे हैं

सीट: खूंटी
प्रत्याशी: नीलकंठ सिंह मुंडा, BJP
सुशील पहान, JMM


खूंटी सीट से BJP के नीलकंठ सिंह मुंडा ने JMM के सुशील पहान को 26327 वोटों से हरा दिया है.


खूंटी विधानसभा. पत्थलगड़ी आंदोलन की वजह से चर्चा में रहा. बीजेपी के सीनियर नेता और ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा लगातार पांचवीं बार मैदान में हैं. गठबंधन के तहत खूंटी सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में गई थी. जेएमएम ने सुशील पहान को अपना उम्मीदवार बनाया था. पहान नया चेहरा हैं. बीजेपी और कांग्रेस-JMM-RJD गठबंधन के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी की अगुआई वाली JVM (झारखंड विकास मोर्चा) ने भी यहां अपना उम्मीदवार उतारा है. खूंटी में सालों से वामपंथी उग्रवाद एक अहम पहलू रहा है. ऐसे में JVM उम्मीदवार दमयंती बारला यहां जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को उठाकर वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही थीं. बिहार में बीजेपी की सहयोगी JDU ने भी यहां अपना उम्मीदवार उतारा है था.

2014 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नीलकंठ सिंह मुंडा ने जीत हासिल की थी. झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे. वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर. हालांकि इस बार जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. 2009 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर बीजेपी के नीलकंठ सिंह मुंडा ने ही जीत हासिल की थी. जबकि जेएमएम दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी.

खूंटी पत्थलगड़ी आंदोलन की वजह से सुर्खियों में रहा. हालांकि इस चुनाव में पीएम मोदी ने रैली की थी. पत्थलगड़ी आंदोलन का यहां असर दिख सकता है. खूंटी में पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत 2017 में हुई थी. इसके तहत गांवों में जमीन में एक पत्थर गाड़कर उस पर भारतीय संविधान के प्रावधान लिखे जाने लगे. इनमें संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी इलाकों को मिली विशेष स्वायत्तता का जिक्र होता है.

पत्थलगड़ी आदिवासियों की एक परंपरा है. इसके तहत अगर आदिवासी इलाके में कोई भी उल्लेखनीय काम होता है, तो आदिवासी उस इलाके में एक बड़ा सा पत्थर लगा देते हैं और उसपर उस काम को दर्ज कर देते हैं. अगर कुछ आदिवासी मिलकर अपने लिए कोई नया गांव बसाना चाहते हैं, तो वो उस गांव की सीमाएं निर्धारित करते हैं और फिर एक पत्थर लगाकर उस गांव का नाम, उसकी सीमा और उसकी जनसंख्या जैसी चीजें पत्थर पर अंकित कर देते हैं. इस तरह के कुल आठ चीजों में पत्थलगड़ी की प्रथा रही है और ये प्रथा पिछले कई सौ सालों से चली आ रही है.

लेकिन 2017 में इससे जुड़ा विवाद सामने आया. पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत हुई. इस आंदोलन के तहत आदिवासियों ने बड़े-बड़े पत्थरों पर संविधान की पांचवीं अनुसूची में आदिवासियों के लिए प्रदान किए गए अधिकारों को लिखकर ज़मीन में लगा दिया. आंदोलन काफ़ी हिंसक भी हुआ. इस दौरान पुलिस और आदिवासियों के बीच जमकर संघर्ष हुआ और आंदोलन की आग फैलती चली गई. खूंटी पुलिस के मुताबिक पत्थलगड़ी आंदोलन से जुड़े कुल 19 मामले दर्ज किए गए. 172 लोगों को आरोपी बनाया गया. खूंटी पुलिस ने अपने बयान में कहा कि ‘पत्थलगड़ी आंदोलन’ दरअसल आदिवासियों को भड़काने के लिए किया गया था. आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा कुछ और है. उनका कहना है कि हजारों की संख्या में लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.


झारखंड सीएम ने कहा कि बीजेपी ने आदिवासी जनजाति के लिए जो किया, वो किसी ने नहीं किया

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