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हिमाचल प्रदेश: एक चीज ने उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है

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हिमाचल प्रदेश. 9 नवंबर को चुनाव है यहां. चुनाव का माहौल तो जानते ही हैं. त्योहार जैसा होता है. राजनीति ही ‘ओढ़ना-बिछौना’ सब हो जाता है. ऐसे नाजुक वक्त में हिमाचल वाले आसमान पर टकटकी लगाए हैं. मौसम नखरे दिखा रहा है इन दिनों. ऊपर के इलाकों में कई जगह बर्फ गिरी है. वैसे आमतौर पर अक्टूबर में नहीं गिरती बर्फ. कभी-कभी की बात अलग है. नवंबर से शुरू होती है बर्फबारी. ज्यादातर तो आधा नवंबर बीत जाने के बाद. कई साल तो कुछ इलाके के लोग तरस जाते हैं. इंतजार करते हैं. बर्फ गिरने का. इस साल अलग ही हाल है.

हिमाचल के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी से पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है.
हिमाचल के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी से पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है (सांकेतिक तस्वीर)

ऊपर के इलाकों में एकाएक गिरा है तापमान
लाहौल-स्पीति और किन्नौर में ठंड बढ़ गई है. स्पीति में है केलोंग. मंगलवार को वहां 0.9 डिग्री सेल्सियस तापमान था. ये जो सेल्सियस होता है, वो मौसम का थर्मामीटर होता है. इस पर ही नापते हैं सर्दी-गर्मी. स्पीति से ही सटा हुआ है किन्नौर. वहां पर भी मौसम ‘कभी तोला, कभी माशा’ जैसा हो रहा है. किन्नौर का हेडक्वॉर्टर है रिकांग पिओ. उसके ठीक ऊपर है कल्पा. किन्नौर में जब तापमान मापते हैं, तो इस कल्पा की नाड़ी जरूर छूते हैं. मंगलवार को वहां 2 डिग्री सेल्सियस था न्यूनतम तापमान. न्यूनतम तापमान, यानी दिनभर में सबसे कम. ऐसा ही रहा, तो आगे और तापमान गिर जाएगा.

बर्फबारी के कारण कई दिक्कतें हो सकती हैं. रास्ते बंद हो सकते हैं. ठंड के कारण चुनाव प्रचार का काम प्रभावित हो सकता है.
बर्फबारी के कारण कई दिक्कतें हो जाएंगी. रास्ते बंद हो सकते हैं. ठंड के कारण चुनाव प्रचार का काम प्रभावित हो सकता है.

सबसे ज्यादा धुकधुकी उम्मीदवारों को हो रही है
मौसम को देखकर सबसे ज्यादा धुकधुकी उम्मीदवारों को हो रही है. अगर आगे के दिनों में भी बर्फ गिरे, तो गजब हो जाएगा. दूर-दराज के इलाकों में चुनाव प्रचार के लिए कैसे जाएंगे? और हिमाचल में दूर-दराज के इलाकों की कोई कमी तो है नहीं. सो उम्मीदवार बड़े बैचेन हैं. अगर ठंड बढ़ी, तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी. बर्फ के कारण रास्ते भी बिगड़ जाएंगे. एक तो चुनाव के लिए ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. ऊपर से अगर बर्फ गिरने लगी, तो प्रचार का समय और घट जाएगा. रैलियां, जनसभाएं, उम्मीदवारों के पूरे प्रोग्राम पर ‘बर्फ’ फिर जाएगी.

कई बार ऐसा होता था कि अगर सर्दियों में चुनाव होने होते थे, तो ऊपरी इलाकों में पहले ही वोटिंग करा ली जाती थी. इस बार पूरे राज्य में एक ही चरण में चुनाव होना है.
कई बार ऐसा होता था कि अगर सर्दियों में चुनाव होने होते थे, तो ऊपरी इलाकों में पहले ही वोटिंग करा ली जाती थी. इस बार पूरे राज्य में एक ही चरण में चुनाव होना है.

पहाड़ और जमीन के दिन-रात एक जैसे नहीं होते
ऊपर के इलाकों वाले उम्मीदवार जल्दी-जल्दी में इलाके निपटा रहे हैं. फिर भी डरे हुए हैं. पहाड़ और जमीन, दोनों के रात-दिन अलग होते हैं. भूगोल भी अलग होता है इनका. एक गांव यहां हैं. दूसरा कई किलोमीटर दूर वहां है. घर भी छितराये हुए होते हैं. गांवों तक पहुंचने के रास्ते भी मुश्किल होते हैं. ऐसे में उम्मीदवारों को वक्त चाहिए. जो कि ज्यादा है नहीं. ऊपर से ठंड और बढ़ गई है. सुबह प्रचार के लिए देर से निकलना पड़ता है. शाम तक सब निपटाना होता है. दिन में घंटे तो अब भी चौबीस ही हैं. इस्तेमाल मगर बहुत कम घंटे हो पा रहे हैं. अब अगर और ठंड बढ़ी, तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. वोटर अपने घरों में दुबके रहेंगे. बाहर निकलने को राजी नहीं होंगे. ऐसे में बेचारे प्रत्याशी अपने लिए वोट कैसे मांगेंगे?

पहाड़ और मैदान में जमीन-आसमान का अंतर है. ठंड के मौसम में पहाड़ों पर लॉजिस्टिक्स संबंधी परेशानियां ज्यादा बढ़ जाती हैं.
पहाड़ और मैदान में जमीन-आसमान का अंतर है. ठंड के मौसम में पहाड़ों पर लॉजिस्टिक्स संबंधी परेशानियां ज्यादा बढ़ जाती हैं.

और बर्फ गिरी, तो उम्मीदवारों को बहुत नुकसान हो सकता है
परेशानी की एक और वजह है. हिमाचल के इतने सारे लोग बाहर के शहरों में रहते हैं. इनमें से खूब सारे लोग चुनाव के समय हिमाचल आएंगे. वोट डालने. अगर बर्फ गिरी, तो दूर-दराज के इलाकों का रास्ता बंद हो जाएगा. वोटर का भी नुकसान होगा. पार्टियों का भी नुकसान होगा. रोहतांग, बाड़ा-लाचा ला, कुंजुम और सच दर्रों पर भी बर्फ गिरी है. और बर्फ गिरी, तो ये दर्रे बंद हो जाएंगे. लोगों का इधर से आना-जाना बंद हो जाएगा. जो हाल है, उसमें तो उम्मीदवार सबसे ज्यादा मौसम से ही डरे हुए हैं. देखना होगा, कहीं मौसम उनका डर सही न साबित कर दे.


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