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हिमाचल चुनाव 2017: हिमाचल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की लुटिया क्यों डूबी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: ऊना (सीट नंबर 44)
जिला: ऊना
लोकसभा सीट: हमीरपुर

2017 विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के सतपाल सिंह रायजादा ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती को 3,196 वोटों से हरा दिया.

1. सतपाल सिंह रायजादा (कांग्रेस) – 31,360 वोट
2. सतपाल सिंह सत्ती (भाजपा) – 28,164 वोट
3. राजीव गौतम (निर्दलीय) – 1,723 वोट


ऊना की एक सड़क, जिस पर एक तरफ सतपाल सिंह सत्ती की होर्डिंग है और दूसरी तरफ सतपाल सिंह रायजादा की होर्डिंग
ऊना की एक सड़क, जिस पर एक तरफ सतपाल सिंह सत्ती की होर्डिंग है और दूसरी तरफ सतपाल सिंह रायजादा की होर्डिंग

सीट की डीटेल

ऊना हिमाचल का मैदानी इलाका है, जो एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब है. हालांकि, काफी आबादी खेती पर भी निर्भर है. इंडस्ट्रियल हब होने की वजह से यहां व्यापारियों की तादाद बाकी हिमाचल से ज्यादा है. यही वजह रही कि यहां नोटबंदी का असर ज्यादा माना गया. 2017 चुनाव से पहले यहां कांग्रेस चार बार और बीजेपी पांच बार जीत चुकी थी. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के लड़ने की वजह से इस सीट को महत्वपूर्ण माना जा रहा था.

ऊना में पहला चुनाव 1967 में हुआ था, जिसमें निर्दलीय पी.चंद जीते थे. 1972 में प्रकाश चंद कांग्रेस के टिकट पर जीते. 1977 में जनता पार्टी के देशराज चुनाव जीते. 1982 में चुनाव में देशराज बीजेपी के टिकट पर जीते. 1985 में कांग्रेस के वीरेंद्र गौतम जीते थे. 1990 में बीजेपी के देशराज जीते. 1993 में कांग्रेस के ओपी रतन चुनाव जीते. 1998 में कांग्रेस के टिकट पर वीरेंद्र गौतम चुनाव जीते. 2003, 2007 और 2012 के तीनों चुनावों में बीजेपी के सतपाल सिंह सत्ती चुनाव जीते, जो अभी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

ऊना विधानसभा सीट से कोई बड़ा नेता

ऊना में अभी सबसे बड़े नेता सतपाल सिंह सत्ती ही हैं. वो हिमाचल बीजेपी के अध्यक्ष हैं और 2003 से लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं. इनके चुनाव के लिए पार्टी ने चंडीगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष संजय टंडन को ऊना का प्रभारी बनाया था. जनवरी 2016 में सत्ती तीसरी बार हिमाचल बीजेपी के अध्यक्ष चुने गए थे और इसी के साथ वो बीजेपी के इतिहास में सबसे ज्यादा वक्त तक राज्य अध्यक्ष बनने वाले नेता बने. एबीवीपी से सफर शुरू करने वाले सतपाल ऊना से बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी, भाजयुमो के राज्य अध्यक्ष और बीजेपी की एग्जिक्यूटिव कमिटी की स्टेट यूनिट के सदस्य रह चुके हैं. ये कॉलेज में जेपी नड्डा के साथ पढ़ते थे.

2012 विधानसभा चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 75.04 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी के सतपाल सिंह सत्ती ने कांग्रेस के सतपाल सिंह रायजादा को 4,746 वोटों से हराया था.

1. सतपाल सिंह सत्ती (बीजेपी): 26,835 वोट (49.65%)
2. सतपाल सिंह रायजादा (कांग्रेस): 22,089 वोट (40.87%)
3. ओपी रत्तन (एआईटीसी): 2,177 वोट (4.03%)

2017 चुनाव में ये उम्मीदवार थे

बीजेपी की तरफ से राज्य अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती चुनाव लड़ रहे थे. इनका दावा है कि इन्होंने हिमाचल में बीजेपी सदस्यों की संख्या 4.5 लाख से बढ़ाकर 14.5 लाख की. 2014 में चारों लोकसभा सीटें जीतने का क्रेडिट लेते हैं.

ऊना में सतपाल सिंह सत्ती की होर्डिंग
ऊना में सतपाल सिंह सत्ती की होर्डिंग

कांग्रेस से सतपाल रायजादा को टिकट मिला था. ये सत्ती को बतौर विधायक विफल बताते हैं कि वो 15 साल विधायक रहने के बावजूद कुछ नहीं कर पाए. ये 12वीं पास हैं और इनके पास सबसे बड़ा मुद्दा ऊना के औद्योगिक क्षेत्र के विकास का था.

ऊना में सतपाल सिंह रायजादा की होर्डिंग
ऊना में सतपाल सिंह रायजादा की होर्डिंग

बीएसपी से रवि कुमार और निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर राजीव गौतम और गुलजार सिंह मैदान में थे.

ऊना में राजीव गौतम का पोस्टर
ऊना में राजीव गौतम का पोस्टर

2017 चुनाव में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. सत्ती को स्थानीय स्तर पर एंटी-इन्कम्बेंसी का सामना करना पड़ा.
2. कांग्रेस ने अपना कैंडिडेट रिपीट किया, जिसने ग्रामीण इलाकों में लगातार पांच सालों तक काम किया.
3. रायजादा ग्रामीण इलाकों के युवाओं से जुड़े रहे. उन्हें जिम और खेल संबंधी सुविधाएं मुहैया कराईं, जिसने इनके पक्ष में माहौल बनाया.


 

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