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जोगिंदरनगर: यहां सऊदी से आए आदमी ने सात बार के बीजेपी विधायक के धुर्रे उड़ा दिए

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: जोगिंदरनगर (सीट नंबर 31)
जिला: मंडी
लोकसभा सीट: मंडी

2017 विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर निर्दलीय लड़ रहे प्रकाश राणा ने बीजेपी के दिग्गज नेता गुलाब सिंह ठाकुर को 7,775 वोटों से चुनाव हरा दिया.

1. प्रकाश राणा (निर्दलीय) – 30,174
2. गुलाब सिंह ठाकुर (भाजपा) – 23,334


सीट की डीटेल

राजा जोगिंदर सिंह से अपना नाम पाने वाले जोगिंदरनगर को तीन हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन की वजह से ‘दि सिटी ऑफ पावरहाउस’ भी कहा जाता है. ये पैराग्लाइडिंग और माउंटेन बाइकिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए फेमस है. इसे हिमाचल की पहली वाई-फाई सिटी घोषित किया जा चुका है. वोटर्स के मामले में ये हिमाचल की दूसरी सबसे बड़ी सीट है. यहां करीब 47% ठाकुर वोटर्स हैं, इसलिए पार्टियां ज्यादातर ठाकुर कैंडिडेट उतारती हैं. 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से सीएम वीरभद्र यहां कभी नहीं आए, क्योंकि मंडी से उनकी पत्नी प्रतिभा लोकसभा चुनाव हार गई थीं.

गूगल पर जोगिंदरनगर की एक तस्वीर
गूगल पर जोगिंदरनगर की एक तस्वीर

जोगिंदरनगर में पहला चुनाव 1951 में हुआ था और कांग्रेस के बेसर राम जीते. 1967 में कांग्रेस के जी.राम जीते. 1972 में कांग्रेस के प्रकाश चंद्रा जीते. 1977 में जनता पार्टी के गुलाब सिंह जीते. 1982 में गुलाब सिंह निर्दलीय जीते. 1985 में निर्दलीय रतन लाल जीते. 1990, 1993 और 1998 में गुलाब सिंह कांग्रेस के टिकट पर जीते. 2003 में कांग्रेस के सुरेंद्र पाल जीते. 2007 और 2012 में गुलाब सिंह बीजेपी के टिकट पर जीते.

जोगिंदरनगर सीट से कोई बड़ा नेता

इस सीट पर कांग्रेस या बीजेपी के बजाय सबसे बड़ा नाम गुलाब सिंह ही हैं. ये दोनों पार्टियों में रह चुके हैं और सात बार विधायकी जीत चुके हैं. साथ ही, पिछले दो बार से गुलाब विधायक हैं. ये 70 साल के हैं. 2017 से पहले ये 10 चुनाव लड़ चुके थे, जिसमें सात में जीते और दो बार हारे थे. 2017 के चुनाव को इन्होंने अपना आखिरी चुनाव घोषित किया था. ये विधानसभा स्पीकर, रेवेन्यू मंत्री और PWD मंत्री रह चुके हैं. 1998 में ये कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. कांग्रेस ने इन्हें हराने के मकसद से कई बार इनके भतीजे सुरेंद्र पाल को टिकट दिया, लेकिन सुरेंद्र एक बार ही सफल हो पाए. इनकी बेटी की शादी प्रेम कुमार धूमल के बेटे और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर से हुई है.

नरेंद्र मोदी के साथ गुलाब सिंह (आईकार्ड डाले हुए)
नरेंद्र मोदी के साथ गुलाब सिंह (आईकार्ड डाले हुए)

2012 विधानसभा चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 71.73 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी के गुलाब सिंह ठाकुर ने कांग्रेस के ठाकुर सुरेंद्र पाल को 5,916 वोटों से हराया था.

1. गुलाब सिंह ठाकुर (बीजेपी): 30,092 वोट (49.51%)
2. ठाकुर सुरेंद्र पाल (कांग्रेस): 24,176 वोट (39.78%)
3. अजय धारवाल (निर्दलीय): 2343 वोट (3.85%)

2017 विधानसभा चुनाव में ये उम्मीदवार थे

बीजेपी ने इस चुनाव में गुलाब सिंह को ही टिकट दिया था. ये जोगिंदरनगर की सियासत में पार्टी के लिए बड़ा चेहरा थे और 2017 के चुनाव को इन्होंने अपना आखिरी चुनाव घोषित किया था. इस बार ये सिर्फ विधायक बनने के लिए नहीं, बल्कि मंत्री बनने के लिए वोट मांग रहे थे. PWD मंत्री रहते हुए सड़क बनवाने की वजह से लोग इन्हें ‘सड़क वाला मंत्री’ कहते हैं.

मंडी में अपने समर्थकों के साथ गुलाब सिंह
मंडी में अपने समर्थकों के साथ गुलाब सिंह

कांग्रेस ने जीवनलाल ठाकुर को टिकट दिया था, जिनका ये पहला चुनाव था. ये जिला परिषद सदस्य हैं, पेशे से वकील हैं और ब्लाक कांग्रेस कमेटी जोगिंदरनगर के अध्यक्ष भी हैं. जिला परिषद के चुनाव में जीवन ने गुलाब ठाकुर के बेटे को हराया था.

कांग्रेसी नेता जीवनलाल ठाकुर
कांग्रेसी नेता जीवनलाल ठाकुर

निर्दलीय कैंडिडेट परकाश सिंह राणा भी खूब चर्चित थे, जिनका सऊदी अरब में हीरे का बिजनेस है. पहले इन्हें हिमाचल का सबसे अमीर कैंडिडेट बताया गया, लेकिन बाद में पता चला कि ऐसा नहीं है. राणा पहले बीजेपी के टिकट की जुगाड़ कर रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिला, तो निर्दलीय लड़े. जोगिंदरनगर में इनके घर के बाहर हेलीपैड बना है, जहां इनके माता-पिता रहते हैं. इनका दावा है कि सऊदी में इन्होंने 700 भारतीयों को नौकरी दी, जिनमें से कुछ इनके गांव के हैं.

दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत के दौरान परकाश सिंह राणा
दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत के दौरान परकाश सिंह राणा

2017 में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. सात बार के विधायक गुलाब सिंह ठाकुर के खिलाफ तगड़ी एंटी-इन्कम्बेंसी थी. वो 2007 से दो बार जीत चुके थे. इस बार जनता ने नकार दिया.
2. परकाश सिंह राणा का अप्रोच लोगों को फ्रेश लगा. वो फ्रेश कैंडिडेट थे. उनका सिक्का जम गया.


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