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हिमाचल चुनाव 2017: ज्वालामुखी में बागियों ने कांग्रेस का ये हाल कर दिया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: ज्वालामुखी (सीट नंबर 12)
जिला: कांगड़ा
लोकसभा सीट: कांगड़ा

2017 विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के रमेश चंद धवाला ने कांग्रेस के संजय रतन को 6,464 वोटों से चुनाव हराया.

1. रमेश चंद धवाला (बीजेपी) – 27,914
2. संजय रतन (कांग्रेस) – 21,450
3. विजेंदर कुमार (निर्दलीय) – 3,529


सीट की डीटेल

ज्वालामुखी विधानसभा में हिंदुओं का पवित्र स्थल ज्वालामुखी मंदिर है, जो 52 शक्तिपीठों में से एक है. यहां पीने के पानी काफी समस्या है. दो दशक से इस समस्या के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं, लेकिन बदला कुछ भी नहीं है. इस सीट पर काम के अलावा इस बार प्रत्याशियों का व्यवहार भी चुनावी मुद्दा रहा. गुड़िया रेप कांड भी इसी इलाके से जुड़ा है, जिसे दोनों पार्टियों ने भुनाने की कोशिश की. ज्वालामुखी मंदिर के कर्मचारियों को नौकरी देने का मामला भी चुनावी मुद्दा रहा.

ज्वालामुखी में पहला चुनाव 1972 में हुआ था, जिसमें निर्दलीय मेलाराम जीते थे. 1977 में कश्मीर सिंह राणा ने जनता पार्टी और 1982 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीता. 1985 में निर्दलीय ईश्वर चंद जीते. 1990 में बीजेपी के धनीराम जीते. 1993 में कांग्रेस के केवल सिंह जीते. 1998 में रमेश चंद निर्दलीय लड़कर जीते और 2003 और 2007 में बीजेपी के टिकट पर जीते. 2012 में कांग्रेस के संजय रतन जीते.

ज्वालामुखी विधानसभा सीट से कोई बड़ा नेता

इस सीट पर कोई एक बड़ा नेता नहीं है, लेकिन जो भी लोग चुनाव लड़ रहे थे, उनकी वजह से ये काफी दिलचस्प था. यहां लड़ने वाले रमेश धवाला हिमाचल कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं, जबकि कांग्रेस से लड़ने वाले संजय रतन निर्दलीय लड़कर भी दो चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे. 2017 में इस सीट पर कांग्रेस के दो बागी भी चुनाव लड़ रहे थे. इस सीट पर बीजेपी पर्याप्त जीती है, लेकिन पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस ने बढ़त बनाई और फिर 2012 के चुनाव में जीत भी हासिल की थी.

2012 विधानसभा चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 65,474 वोटर्स थे और 71.52 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें कांग्रेस के संजय रतन ने बीजेपी के रमेश चंद को 4,025 वोटों से हराया था.

1. संजय रतन (कांग्रेस): 24929 वोट (53.23%)
2. रमेश चंद (बीजेपी): 20904 वोट (44.64%)
3. डॉ. मधु गुप्ता (एआईटीसी): 410 वोट (0.88%)

2017 विधानसभा चुनाव में ये उम्मीदवार थे

बीजेपी ने रमेश धवाला को उतारा था, जो पानी के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे थे. कैबिनेट मंत्री रह चुके धवाला चार बार चुनाव लड़ चुके हैं. इनमें वो दो बार बीजेपी के टिकट पर जीते, एक बार निर्दलीय जीते और एक बार हारे.

बीजेपी नेता रमेश धवाला
बीजेपी नेता रमेश धवाला

कांग्रेस ने पिछले विधायक संजय रतन को टिकट दिया था. ये 2012 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. चुनाव प्रचार में संजय ने कहा कि वो ज्वालामुखी के लिए पानी की करोड़ों की योजनाएं लेकर आए.

वीरभद्र सिंह के साथ संजय रतन
वीरभद्र सिंह के साथ संजय रतन

यहां कांग्रेस के दो बागी प्रत्याशी- विजेंद्र धीमान और प्रताप सिंह राणा भी मैदान में थे. धीमान जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं और राणा पूर्व पंचायत प्रधान हैं. इनकी वजह से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई थीं.

2017 में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. धवाला की जीत का सबसे बड़ा कारण तो ये है कि ये उनकी परंपरागत सीट है.
2. जवालामुखी के ग्रामीण इलाकों में धवाला का खासा दखल था, जिससे वोट बटोरे गए.
3. बीजेपी की लहर के फायदे के साथ-साथ धवाला को अपनी साफ और ईमानदार छवि का भी फायदा मिला.


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