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हिमाचल चुनाव 2017 हरौली: पत्रकार से नेता बना ये आदमी 2003 से विधायक है और इस बार भी जीत गया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: हरौली (सीट नंबर 43, अनारक्षित)
जिला: ऊना
लोकसभा सीट: हमीरपुर

2017 विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के मुकेश अग्निहोत्री ने बीजेपी के प्रो. राम कुमार को 7,377 वोटों से हराया.

1. मुकेश अग्निहोत्री (कांग्रेस) – 35,095
2. प्रो. राम कुमार (बीजेपी) – 27,718
3. रविंदर मन (निर्दलीय) – 833


सीट की डीटेल

हरोली सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इससे पहले ये इलाका संतोषगढ़ नाम की विधानसभा सीट में आता था, लेकिन परिसीमन में संतोषगढ़ ऊना में शामिल हो गया. ये ब्राह्मण बाहुल्य इलाका है, जहां कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही पार्टियां लंबे समय से ब्राह्मण कैंडिडेट उतारकर चुनाव जीतती आई हैं. इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में भी जनता पार्टी ने ब्राह्मण कैंडिडेट उतारकर चुनाव जीता था.

संतोषगढ़ में पहला चुनाव 1967 में हुआ, जिसमें निर्दलीय विद्यासागर जीते थे. 1972 में कांग्रेस के रामराखा जीते. 1977 में जनता पार्टी से विजय कुमार जोशी जीते. 1982 और 1985 में विजय कुमार जोशी कांग्रेस के टिकट पर जीते. 1990 में बीजेपी के कश्मीरी लाल जोशी जीते. 1993 में कांग्रेस के विजय कुमार जोशी जीते. 1998 में बीजेपी के जयकृष्ण शर्मा जीते. 2003 और 2007 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर मुकेश अग्निहोत्री जीते. 2012 में जब ये सीट नहीं रही और इसकी जगह हरोली में चुनाव हुए, तो वहां भी कांग्रेस के मुकेश अग्निहोत्री जीते.

हरोली सीट से कोई बड़ा नेता

1998 में बीजेपी से चुनाव जीतने वाले जयकृष्ण शर्मा बीजेपी के प्रदेश-अध्यक्ष रहे थे. 2003 और 2007 में कांग्रेस के मुकेश अग्निहोत्री के खिलाफ बीजेपी ने जाट नेता जगरूप सिंह को उतारा था, जिनसे कोई खास चुनौती नहीं मिली. संतोषगढ़ से चार बार विधायक बने विजय जोशी प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं.

तीन बार से जीत रहे मुकेश अग्निहोत्री पंजाब के संगरूर से हैं और पहले पेशे से पत्रकार थे. हिमाचल और दिल्ली में पत्रकारिता की. इसी दौरान संपर्क बनाए और फिर कांग्रेस का टिकट हासिल किया. तीन बार जीते, तो वीरभद्र सरकार में उद्योग, सूचना और जनसंपर्क और संसदीय कार्यमंत्री बने. मुकेश प्रदेश के नेता के तौर पर उभर नहीं पाए, लेकिन बताया जाता है कि इनका ज्यादातर वक्त अपनी विधानसभा में ही बीता.

2012 विधानसभा चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 72,225 वोटर्स थे और 75.78 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें कांग्रेस के मुकेश अग्निहोत्री ने बीजेपी के प्रो. राम कुमार को 5,172 वोटों से हराया था.

1. मुकेश अग्निहोत्री (कांग्रेस): 28,875 वोट (52.76%)
2. प्रो. राम कुमार (बीजेपी): 23,703 वोट (43.31%)
3. मुकेश चौधरी (बीएसपी): 1,052 वोट (1.92%)

2017 विधानसभा चुनाव में ये उम्मीदवार थे

कांग्रेस ने मुकेश अग्निहोत्री को उतारा था, जो 2003 से विधायक हैं. इनके पास उद्योग, श्रम और रोजगार विभाग के साथ संसदीय मामलों का अतिरिक्त प्रभार था. मुकेश अक्टूबर 1962 में संगरूर में जन्मे. वीरभद्र की देखरेख में 2003 में राजनीति में आए और तब से लगातार विधायक हैं.

मुकेश अग्निहोत्री
कांग्रेस कैंडिडेट मुकेश अग्निहोत्री

बीजेपी ने प्रोफेसर राम कुमार को उतारा था. इनका प्रदर्शन 2003 और 2007 में उतारे गए जगरूप सिंह से कोई खास अलग नहीं रहा था, लेकिन बीजेपी ने एक बार फिर इन पर भरोसा जताया.

बीजेपी कैंडिडेट प्रो. राम कुमार
बीजेपी कैंडिडेट प्रो. राम कुमार

बीएसपी ने वीरेंद्र कुमार को उतारा था. 2012 के चुनाव में बीएसपी ने विजय कुमार जोशी को उतारा था, जो 2% वोट भी नहीं हासिल कर पाए थे. इस बार भी किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं थी.

2017 में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. अपनी सरकार रहते मुकेश ने क्षेत्र में कई विकास कार्य करवाए.
2. सरकार होने की वजह से मुकेश अपनी सीट पर कई बड़े प्रॉजेक्ट्स लाने में भी कामयाब रहे.
3. अपने इलाके में सक्रिय रहना मुकेश के हक में गया.


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