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हिमाचल चुनाव 2017: धर्मशाला पर किसका कब्ज़ा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: धर्मशाला (सीट नंबर 18)
जिला: कांगड़ा
लोकसभा सीट: कांगड़ा

इस विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के किशन कपूर ने कांग्रेस के सुधीर शर्मा को 2,997 वोटों से हराया.

1. किशन कपूर (बीजेपी) – 26,050 वोट
2. सुधीर शर्मा (कांग्रेस) – 23,053 वोट
3. रवींद्र राणा (निर्दलीय) – 2,127 वोट


सीट की डीटेल

धर्मशाला हिमाचल की दूसरी राजधानी है. ये कांगड़ा से 18 किमी दूर है, जहां सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (निर्वासित तिब्बती सरकार) का हेडक्वॉर्टर और दलाई लामा का घर है. केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के 100 शहरों में धर्मशाला भी था. इसका नाम यहां रुकने वाले खानाबदोश लोगों की वजह से रखा गया. यहां ढेर सारे निर्वासित तिब्बती रहते हैं. शहर दो हिस्सों में बंटा है. एक कोतवाली बाज़ार है और दूसरा मार्केट वाला इलाका, जिसे लोअर धर्मशाला या सिर्फ धर्मशाला कहा जाता है. यहां हिमाचल सेंट्रल यूनिवर्सिटी और हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी है. धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम भी चर्चित है.

धर्मशाला में पहला चुनाव 1967 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के आरके चंद जीते थे. 1972 में कांग्रेस के चंदेर वेरकर जीते थे. 1977 में जनता पार्टी के बृजलाल जीते. 1982 में बृजलाल बीजेपी के टिकट पर जीते. 1985 में कांग्रेस के मूलराज पढ़ा जीते. 1990, 1993 और 1998 में बीजेपी से किशन चंद कपूर जीते. 2003 में कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी जीतीं. 2007 में बीजेपी के किशन कपूर जीते और 2012 में कांग्रेस के सुधीर शर्मा जीते.

धर्मशाला सीट से कोई बड़ा नेता

इस सीट पर कोई एक नेता कास नहीं है, लेकिन प्रदेश की दूसरी राजधानी होने की वजह से धर्मशाला सीट महत्वपूर्ण है. जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र के बाद दो राजधानियों वाला ये तीसरा प्रदेश है और वीरभद्र के इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई थी. गोरखा वोटर्स इस बार चर्चा का विषय रहे, क्योंकि धर्मशाला के 50 हजार वोटर्स में से आठ हजार गोरखा हैं और इस चुनाव में ये पहली बार वोट डाल रहे थे. 2017 विधानसभा चुनाव में धर्मशाला से सबसे ज्यादा 13 कैंडिडेट्स चुनाव लड़ रहे थे, जबकि 2012 में इनकी तादाद 14 थी.

2012 चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 64,598 वोटर्स थे और 73.65 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें कांग्रेस के सुधीर शर्मा ने बीजेपी के किशन कपूर को पांच हज़ार वोटों से हराया था.

1. सुधीर शर्मा (कांग्रेस): 21241 वोट (44.64%)
2. किशन कपूर (बीजेपी): 16241 वोट (34.13%)
3. कमला पटियाल (निर्दलीय): 3570 वोट (7.52%)

2017 विधानसभा चुनाव में ये उम्मीदवार थे

कांग्रेस ने सिटिंग विधायक सुधीर शर्मा को टिकट दिया था. ये 45 साल के हैं, ग्रेजुएट हैं और अपनी संपत्ति 18 लाख दिखाई थी. 2012 में कांग्रेस ने चंद्रेश कुमारी की जगह इन्हें उतारा था और ये कुल चार बार के विधायक किशन कपूर से जीत भी गए थे. इनके पिता पंडित संतराम कांग्रेस सरकारों में मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. सुधीर मूलत: बैजनाथ से हैं. 2012 में सीट हल्की होने पर कांग्रेस ने इन्हें उतारा था, तो ये बाहरी होकर भी जीत गए थे. 2003 और 2007 में ये बैजनाथ से जीते थे. 2012 का चुनाव जीतने के बाद हिमाचल में शहरी विकास मंत्री बने.

कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा
कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा

बीजेपी ने किशन कपूर पर भरोसा जताया था. ये 66 साल के हैं और अंडर ग्रेजुएट हैं. किशन 1985 में अपना पहला चुनाव हार गए थे. 1990, 1993 और 1998 में जीते थे. 2003 में हारे, 2007 में जीते और 2012 में फिर हारे. 2017 के चुनाव से पहले ये कुल चार बार जीत चुके हैं और तीन बार हार चुके हैं.

चुनाव से पहले टिकट कटने की अफवाह उड़ने पर रोते किशन कपूर

कांग्रेस के बागी दिग्विजय पुरी तीसरे बड़े कैंडिडेट थे, जो निर्दलीय लड़ रहे थे. पहले ये प्रदेश कांग्रेस के सचिव थे.

गोरखा समुदाय के रवींद्र सिंह राणा भी इस चुनाव में उतरे थे. 2012 के चुनाव में गोरखाओं ने कांग्रेस के सुधीर को सपोर्ट किया था.

2017 में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. किशन गद्दी समुदाय से आते हैं, जिसके इलाके में वोटर्स ज्यादा हैं. संघ से जुड़े हैं और शांता कुमार के करीबी हैं.
2. सुधीर शर्मा 2012 में विधायक बने थे और इस बार उनके खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी थी.
3. तीन निर्दलीय कैंडिडेट ऐसे थे, जो कांग्रेस के बागी थे. सुधीर को सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं से हुआ.


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