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हिमाचल: चंबा की रानी समेत इन अहम कांग्रेसी नेताओं ने बचाईं अपनी सीटें

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 का नतीजा आ गया है. 68 सीटों पर आखिरी फैसला आने पर बीजेपी ने 44 और कांग्रेस ने 21 सीटों पर कब्ज़ा जमाया. बड़े उलटफेर ये हुआ कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती और सीएम कैंडिडेट प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए. कांग्रेस के सीएम कैंडिडेट वीरभद्र नई सीट से लड़ने के बावजूद अपना चुनाव निकाल ले गए, लेकिन अब इसका कोई मतलब नहीं.

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बीजेपी नेता प्रेम कुमार धूमल (बाएं) और वीरभद्र सिंह

ऐसे में कांग्रेस के उन बड़े नेताओं के बारे में जानना रोचक है, जो भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बावजूद अपनी सीट बचाने में कामयाब हो गए. आइए जानते हैं:

#1.

नाम- आशा कुमारी
क्यों बड़ी नेता- पांच बार विधायक रह चुकी हैं. ये छठी जीत है.
सीट- चंबा जिले की डलहौजी विधानसभा सीट

वोट:
आशा कुमारी को मिले- 24,224
बीजेपी के डीएस ठाकुर को मिले- 23,668
जीत का अंतर- 556

जीत की वजहें:
वीरभद्र सिंह की करीबी हैं.
पंजाब का प्रभारी बनाया गया था. पार्टी में बड़ा कद है.

आशा कुमारी (बाएं) और डीएस ठाकुर
आशा कुमारी (बाएं) और डीएस ठाकुर

#2.

नाम- आशीष बुटैल
क्यों बड़े नेता- बृजबिहारी लाल बुटैल के बेटे. विपक्षी नरेंद्र मोदी की करीबी इंदू गोस्वामी थीं.
सीट- कांगड़ा जिले की पालमपुर विधानसभा सीट

वोट:
आशीष बुटैल को मिले- 24,252
बीजेपी की इंदू गोस्वामी को मिले- 19,928
जीत का अंतर- 4,324

जीत की वजहें:
– इंदू गोस्वामी के खिलाफ बाहरी बनाम भीतरी वाला फैक्टर काम कर गया.
आशीष को पिता के नाम का भी फायदा मिला.

आशीष बुटैल (पगड़ी में)
आशीष बुटैल (पगड़ी में)

#3.

नाम- सुंदर सिंह ठाकुर
क्यों बड़े नेता- कांग्रेस के महासचिव हैं.
सीट- कुल्लू जिले की कुल्लू विधानसभा सीट

वोट:
सुंदर सिंह ठाकुर को मिले- 31,423
बीजेपी के महेश्वर सिंह को मिले- 29,885
जीत का अंतर- 1,538

जीत की वजहें:
– विपक्षी महेश्वर सिंह के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी थी. इन्होंने पिछले साल ही बीजेपी जॉइन की थी.
– भ्रष्टाचार और धर्म की राजनीति महेश्वर के खिलाफ गई. ये चुनाव हल्के में ले रहे थे.

सुंदर सिंह ठाकुर
सुंदर सिंह ठाकुर

#4.

नाम- राजिंदर सिंह राणा
क्यों बड़े नेता- प्रेम कुमार धूमल के शागिर्द. 2012 में धूमल के इलाके में निर्दलीय लड़कर जीते.
सीट- हमीरपुर जिले की सुजानपुर विधानसभा सीट

वोट:
राजिंदर सिंह राणा को मिले- 25288 वोट
बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल को मिले- 23369 वोट
जीत का अंतर- 1,919 वोट

जीत की वजहें:
– राजिंदर राणा को अपनी सीट पर जनाधार बढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं था. इस बार उनके पास कांग्रेस का टिकट भी था. वो जीत गए.
– धूमल को सिर्फ अपनी ही सीट नहीं देखनी थी. वो दूसरी जगहों पर भी प्रचार करने गए, लेकिन अपनी सीट पर ज़रूरत के मुताबिक मेहनत नहीं कर पाए.

राजिंदर राणा
राजिंदर राणा

#5.

नाम- सुखविंदर सिंह सुक्खू
क्यों बड़े नेता- हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष.
सीट: हमीरपुर जिले की नादौन विधानसभा सीट

वोट:
सुखविंदर सिंह सुक्खू को मिले- 30,980
बीजेपी के विजय अग्निहोत्री को मिले- 28,631
जीत का अंतर- 2,349

जीत की वजहें:
संगठन पर पकड़ थी, तो अपना चुनाव निकाल ले गए. हालांकि, अंतर काफी कम रहा.
बीजेपी के बागी लेखराज का फायदा सुक्खू को हुआ.

दी लल्लनटॉप से बातचीत के दौरान हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू
दी लल्लनटॉप से बातचीत के दौरान हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू

#6.

नाम- मुकेश अग्निहोत्री
क्यों बड़े नेता- तीन बार विधायक बने. वीरभद्र के करीबी और उनकी सरकार में उद्योग, सूचना और जनसंपर्क और संसदीय कार्यमंत्री.
सीट: ऊना जिले की हरौली विधानसभा सीट

वोट:
मुकेश अग्निहोत्री को मिले- 35,095
बीजेपी के प्रो. राम कुमार को मिले- 27,718
जीत का अंतर- 7,377

जीत की वजहें:
– वीरभद्र के काफी करीबी होने की वजह से इलाके में प्रॉजेक्ट्स लाए.
– 2003 से विधायक हैं, इसलिए इलाके में अच्छी पकड़ थी.

वीरभद्र सिंह के साथ कांग्रेसी नेता मुकेश अग्निहोत्री
वीरभद्र सिंह के साथ कांग्रेसी नेता मुकेश अग्निहोत्री

#7.

नाम- ठाकुर रामलाल
क्यों बड़े नेता- प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव.
सीट: बिलासपुर जिले की श्रीनैना देवी विधानसभा सीट

वोट:
ठाकुर रामलाल को मिले- 28,119
बीजेपी के रणधीर शर्मा को मिले- 27,077
जीत का अंतर- 1,042

जीत की वजहें:
रणधीर पिछले 10 साल से विधायक थे, तो इनके खिलाफ भारी एंटी-इन्कम्बेंसी थी. रामलाल को फायदा मिला.

रामलाल ठाकुर
रामलाल ठाकुर

#8.

नाम- वीरभद्र सिंह
क्यों बड़े नेता- कांग्रेस से सात बार मुख्यमंत्री और 2017 के चुनाव के सीएम कैंडिडेट थे.
सीट: सोलन जिले की अरकी सीट

वोट:
वीरभद्र सिंह को मिले- 34,499
बीजेपी के रतन सिंह पाल को मिले- 28,448
जीत का अंतर- 6,051

जीत की वजहें:
नई सीट थी, लेकिन खुद सीएम कैंडिडेट थे. 6 बार के मुख्यमंत्री थे, तो चुनाव निकाल ले गए.

वीरभद्र सिंह
वीरभद्र सिंह

#9.

नाम- विक्रमादित्य सिंह
क्यों बड़े नेता- कांग्रेस के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे. पहला चुनाव था.
सीट- शिमला ग्रामीण विधानसभा सीट

वोट:
विक्रमादित्य सिंह को मिले- 28,275
बीजेपी के प्रमोद शर्मा को मिले- 23,395
जीत का अंतर- 4,880

जीत की वजहें:
वीरभद्र सिंह के बेटे हैं, जो 6 बार सीएम रह चुके हैं, तो पिता के नाम पर फायदा मिला और जीत गए.

विक्रमादित्य सिंह
विक्रमादित्य सिंह

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