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पापा-बिटिया समेत कांग्रेस के ये दिग्गज और मंत्री हुए ढेर

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 का नतीजा आ गया है. कुल 68 सीटों पर चुनाव हुए, जिनमें बीजेपी ने 44 और कांग्रेस ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की. बड़े उलटफेर ये हुआ कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती चुनाव हार गए. कांग्रेस के सीएम कैंडिडेट वीरभद्र नई सीट से लड़ने के बावजूद अपना चुनाव निकाल ले गए, लेकिन अब इसका कोई मतलब नहीं.

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बीजेपी नेता प्रेम कुमार धूमल (बाएं) और वीरभद्र सिंह

ऐसे में कांग्रेस के उन बड़े नेताओं के बारे में जानना रोचक है, जो इस बार के सत्ता-परिवर्तन में अपनी सीट नहीं बचा पाए. आइए जानते हैं:

#1.

नाम- ठाकुर सिंह भरमौरी
क्यों बड़े नेता- वीरभद्र सरकार में वनमंत्री थे
सीट: चंबा जिले की भरमौर विधानसभा सीट

वोट:
ठाकुर सिंह भरमौरी को मिले- 18,395
बीजेपी के जियालाल को मिले- 25,744
हार का अंतर- 7,349

हार की वजहें:
भ्रष्टाचार के इल्ज़ाम.
– एंटी-इन्कम्बेंसी.

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ठाकुर सिंह भरमौरी

#2.

नाम- अजय महाजन
क्यों बड़े नेता- 5 बार के विधायक और 1 बार के सांसद सत महाजन के बेटे. 2012 का चुनाव जीता.
सीट: कांगड़ा जिले की नूरपुर विधानसभा सीट

वोट:
अजय महाजन को मिले- 28,229
बीजेपी के राकेश पठनिया को मिले- 34,871
हार का अंतर- 6,642

हार की वजह:
– राकेश पठनिया का लोकल नेटवर्क और बीजेपी मिल गए, तो अजय महाजन के लिए मौका नहीं बचा.

राकेश पठनिया (बाएं) और अजय महाजन (दाएं)
राकेश पठनिया (बाएं) और अजय महाजन (दाएं)

#3.

नाम- सुधीर शर्मा
क्यों बड़े नेता- वीरभद्र सरकार में शहरी विकास मंत्री थे
सीट: कांगड़ा जिले की धर्मशाला विधानसभा सीट

वोट:
सुधीर शर्मा को मिले- 23,053
बीजेपी के किशन कपूर को मिले- 26,050
हार का अंतर- 2,997

हार की वजहें:
– कांग्रेस के तीन बागी कैंडिडेट्स की वजह से हारे.
– स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा.

कांग्रेसी नेता सुधीर शर्मा
कांग्रेसी नेता सुधीर शर्मा

#4.

नाम- कौल सिंह ठाकुर
क्यों बड़े नेता- दरंग में अब तक हुए कुल 9 चुनावों में से 8 चुनाव जीते. 2017 में दूसरी हार मिली है.
सीट: मंडी जिले की दरंग विधानसभा सीट

वोट:
कौल सिंह ठाकुर को मिले- 24,851
बीजेपी के जवाहर ठाकुर को मिले- 31,392
हार का अंतर- 6,541

हार की वजहें:
बेटी चंपा मंडी से लड़ रही थीं, तो ऊर्जा बंटी रही.
– वीरभद्र के एंटी-खेमे के माने जाते हैं, इसलिए उस खेमे के लोग इनका विरोध कर रहे थे.

कौल सिंह ठाकुर
कौल सिंह ठाकुर

#5.

नाम- चंपा ठाकुर
क्यों बड़े नेता- कौल सिंह ठाकुर की बेटी, जिन्हें पिता ने जिद करके टिकट दिलाया. इनके विपक्षी अनिल शर्मा पंडित सुखराम के बेटे हैं.
सीट: मंडी जिले की मंडी विधानसभा सीट

वोट:
चंपा ठाकुर को मिले- 21,025
बीजेपी के अनिल शर्मा को मिले- 31,282
हार का अंतर- 10,257

हार की वजहें:
– जाति समीकरण.
मंडी जिले के लिए पंडित सुखराम ने काफी काम किया था, जिसका फायदा अनिल को मिला.
– पहली बार चुनाव लड़ रही थीं.

चंपा ठाकुर
चंपा ठाकुर

#6.

नाम- कुलदीप सिंह पठनिया
क्यों बड़े नेता- हिमाचल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष. पिछले चुनाव में दो सौ से भी कम वोट से हारे.
सीट: हमीरपुर जिले की हमीरपुर विधानसभा सीट

वोट:
कुलदीप पठनिया को मिले- 18,623
बीजेपी के नरिंदर ठाकुर को मिले- 25,854
हार का अंतर- 7,231

हार की वजहें:
– नरिंदर ठाकुर को धूमल और बीजेपी का फायदा मिला.
– एंटी-इन्कम्बेंसी.

कुलदीप पठनिया
कुलदीप पठनिया

#7.

नाम- रोहित ठाकुर
क्यों बड़े नेता- इनके दादा रामलाल ठाकुर हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे हैं.
सीट: शिमला जिले की जुब्बल कोटखाई विधानसभा सीट

वोट:
रोहित ठाकुर को मिले- 26,404
बीजेपी के नरिंदर ब्रगटा को मिले- 27,466
हार का अंतर- 1,062

हार की वजहें:
– गुड़िया रेप केस ने छवि खराब की, जो इनके इलाके में हुआ.
– इस बार वीरभद्र ने अपर हिमाचल में अपना आधार खोया, जिसका नतीजा इन्होंने भुगता.

रोहित ठाकुर
रोहित ठाकुर

#8.

नाम- प्रकाश सिंह
क्यों बड़े नेता- यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी और सेवा दल के अध्यक्ष रहे. एक्साइज़ और टैक्सेशन मंत्री रहे.
सीट- मंडी जिले की बाल्ह विधानसभा सीट

वोट:
प्रकाश सिंह को मिले- 21,893
बीजेपी के इंदर सिंह को मिले- 34,704
हार का अंतर- 12,811

हार की वजहें:
बीजेपी लहर में चुनाव हारे.
एंटी इन्कम्बेंसी.

प्रकाश चौधरी
प्रकाश चौधरी

#9.

नाम- जीएस बाली
क्यों बड़े नेता- वीरभद्र सरकार के पिछले दोनों कार्यकाल में परिवहन मंत्री रहे. चार बार के विधायक.
सीट- कांगड़ा जिले की नगरोटा विधानसभा सीट

वोट:
जीएस बाली को मिले- 31,039
बीजेपी के अरुण कुमार को मिले- 32,039
हार का अंतर- 1,000

हार की वजहें:
– 
भ्रष्ट और दबंगई वाली छवि की वजह से हारे.
वीरभद्र के विरोधी गुट के थे, ये भी एक वजह रही.

जीएस बाली
जीएस बाली

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